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Cancerous and pre-cancerous stages detection by ETG AyurvedaScan studies

Posted by: prakruti on: फ़रवरी 22, 2012

This is a case of a 76 years old lady suffering from Liver and Gall Bladder cancer stage detected after Ultrasound and MRI examination.

We recorded her ETG AyurvedaScan on 18th February 2012 and the study of the traces shows the anomalies present in her whole body.

We detected that the metastasis of the CANCER is going towards her throat and Lungs areas.

Trace records m,n,o shows the comulative anomalies present in Liver, Gall Bladder and Pancreas and typical traces waves pattern shows in p,q,r and x waves typical record pattern that metastasis of the CANCER is spreading and affecting the internal throat and lungs and this is in an early pre-cancerous stage before full developemnt of the disease appearence.

The second case is of a lady aged 52 yrs from Uttarakhand , specially visited for ETG AyurvedaScan based Ayurvedic treatment. Her recorded ETG AyurvedaScan patterns are  given below;

[to be concluded soon]

रोजाना आये दिन बहुत बड़ी सन्ख्या मे लोग बाग फोन अथवा व्यक्तिगत तौर पर या पत्र लिखकर यह सवाल पिछले कई साल से पूछ रहे हैं कि ………….? श्लील अथवा अश्लील और absurd सवाल मानकर और समझ्कर मैने ऐसे प्रश्नों का उत्तर देना लगभग बन्द कर दिया है, लेकिन कुछ लोगों के आग्रह पर मैने मर्यादा के भीतर रहकर इस प्रश्न का उत्तर देने का प्रयास कर रहा हूं /

मानव पुरुष का लिन्ग पूर्ण यौवन अवस्था में कितना लम्बा होना चाहिये , यह सवाल कुछ पेचीदा किस्म का है / यदि नियम या सिध्धान्त की बात करें तो मेरा ऐसा मानना है कि इस बारे में कोई नियम या सिध्धन्त लागू नही होते, यह मै इसलिये कह रहा हू कि व्यवहारिक अनुभव practical experience कुछ ऐसा ही बताता है /

कोई कहता है कि लिन्ग की लम्बाई और मोटाई व्यक्ति के डील डौल या constitution or Body Built पर आधारित होती है / कोई कहता है कि लिन्ग की लम्बाई व्यक्ति के जेनेटिक लेवल पर आधारित होती है, इसी प्रकार से तरह तरह के कयास लिन्ग की लम्बाई को लेकर लगाये जाते हैं /

मैने ५० साल से अधिक के चिकित्सा अभ्यास कार्य medical practice के दर्मियान जितना भी अनुभव प्राप्त किया है, उससे मुझे यह समझ में आया कि बहुत से ऐसे लोग मिले जिनकी लम्बाई साढे ५ फुट से अधिक रही उनके लिन्ग की लम्बाई उत्थित अवस्था में डेढ इन्च से अधिक नही थी / कुछ ऐसे पुरुष मिले जिनकी लम्बाई ५ फुट से कम थी, लेकिन उनके लिन्ग की लम्बाई ६ इन्च से अधिक उत्थित अवस्था में नापा गया / इसलिये यह कहना कि वयक्ति की लम्बाई से उसके लिन्ग का कोई रेशियो बनता है , भले ही academic level पर सही माना गया हो, लेकिन प्रक्टिकल धरातल पर कुछ दूसरा ही है /

अब सवाल यह है कि मानव लिन्ग की लम्बाई स्त्री सम्भोग करने के लिये किस सीमा तक आवश्यक है ताकि यौन व्यापार में बाधा न पैदा हो ? दूसरे शब्दों में लिन्ग की कितनी लम्बाई होनी चाहिये ?

इस सम्बन्ध में मेरी राय यही है कि सम्भोग कार्य के सम्पादन के लिये पुरूष लिन्ग की लम्बाई कम से कम 4.5 inch [four and half inch] और अधिक से अधिक 6 inch के आस पास होनी चाहिये /

ऐसे जटिल प्रश्न का उत्तर प्राप्त करने के लिये मैने बहुत सी महिलाओं से यह सवाल करके जानने की कोशिश की कि पुरूष का लिन्ग कितना बड़ा होना चाहिये जिससे उनको सम्भोग का चरम आनन्द प्राप्त हो / सभी महिलाओं ने वही नाप करीब करीब बतायी है जो मैने ऊपर लिखा है /

अधिकान्श महिलाओं का कहना था कि लिन्ग की ज्यादा लम्बाई से सम्भोग क्रिया के दर्मियान गर्भाशय के cervix पर आघात लगता है जिससे बच्चे दानी पर असर पड़ता है अथवा गर्भाशय से रक्त का श्राव तथा पेट मे दर्द और सूजन के साथ साथ मासिक सम्बन्धी विकार हो जाते है / ऐसे में जिन स्त्रियों के पतियों के लिन्ग दीर्घ होते हैं , वे हमेशा उनके साथ सम्भोग करने से डरती हैं और तकलीफ के कारण सम्भोग से अनिच्छुक होती हैं /

बहुत से लोगों नें जिनमे पुरूष भी है और स्त्रियां भी शामिल हैं, इस बात की शिकायत करती है कि उन्हे अति कामुकता की शिकायत है / अति-कामुकता से मतलब है excessive sexual desire अथवा extra sexual desire / जिन्हे एक्स्ट्रा सेक्सुअल डिजायर यानी सम्भोग करने की बहुत ज्यादा इच्छा होना जैसी शिकायत होती है, वे स्वयम तो परेशान होते ही है , उनके साथ साथ उनके परिजन, पत्नी और पति दोनों ही इस तरह के acts से परेशान हो जाते हैं /

इसे आम लोग साधारण तौर पर बीमारी नही समझते हैं, वे यह समझते हैं कि यह एक तरह का मानव व्यवहार है जो किसी मे अधिक होता है और किसी में अत्यधिक / ठीक उसी तरह से जैसे किसी व्यक्ति में सम्भोग करने की इच्छा साधारण होती है और किसी मे साधारण इच्छा से भी कम और किसी किसी में तो बिल्कुल नही /

लेकिन सम्भोग करने की इच्छा अधिक बलवती होने या अत्यधिक होने का कारण किसी शारीरिक रोग या मानसिक रोग अथवा किसी एलोपैथी की दवा के दुष्परिणाम अथवा कोई विषेश खाद्य पदार्थ खाने से उतपन्न या आयुर्वेद की बाजीकरण से सम्बन्धित औषधियों के सेवन से पैदा जोश आदि आदि हो सकते हैं /

शारीरिक रोगों के कारण अगर अति-कामुकता होती है तो यह Hormonal या Prostate या anal या autonomic nervous system या male reproductive system या पेट में कीड़े होने के कारंण से हो सकती है /

मानसिक रोगों में sizhophrenia या sexual mania या सनक जाना इत्यादि इत्यादि इसी जैसी स्तिथियां बनती हैं , जिनके कारण अति-कामुकता पैदा होती है /

इसी तरह से कुछ दवाओं के बुरे परिणामों के कारण भी इस तरह की शिकायतें पैदा हो जाती हैं /

ऐसे रोगियों के इलाज के लिये मूल कारण का निदान करके चिकित्सा करने से रोग से मुक्ति मिल जाती है / जीवन शैली को बदलने, खान-पान में परहेज करने और आयुर्वेद के पन्चकर्म चिकित्सा आदि के उपयोग से शत प्रतिशत रोगी ठीक हो जाते हैं /

अक्सर यह सवाल मुझसे मेरे मरीज करते हैं, जिसे मै पहले नजर अन्दाज कर जाता था / क्योंकि ऐसे सवाल मुझे absurd लगते थे / जो सवाल पू्छते थे, वे मुझे किसी बेवकूफ से कम नही लगते थे / ऐसे सवालों का जवाब देने की मै आवश्यकता नही समझता था, पहले भी और अब भी / लेकिन एक सवाल यह जरूर उत्तर देने के योग्य बनता है कि “पुरुष की सम्भोग शक्ति” का ह्रास किस उमर मे होने लगता है / ४० की उमर के बाद या ५० की उमर के बाद या ६० की उमर के बाद या अधिक /

मेरे विचार से एक स्वस्थय व्यक्ति की स्त्री के साथ रमण करने या सम्भोग शक्ति करने की छमता का आन्कलन करना कोई मुश्किल भरा काम नही है / मुझे बहुत से लोग मिले है , जिनकी उमर ५५ से लेकर ७० साल तक के दर्मियान है और वे उसी तरह से स्त्री सम्भोग का आनन्द ले रहे हैं जैसे कि एक नौजवान और युवा व्यक्ति लेता है /

वहीं दूसरी तरफ ऐसे नवयुवकों की बहुत बड़ी सन्ख्या देखने में आयी जो २५ साल से लेकर ४० साल मे ही सम्भोग करने की क्षमता खो बैठे है और नपुन्सकों की लाइन में आ गये हैं /

दोनों ग्रुप के लोगों में बहुत कुछ ऐसा देखने को मिला है जिससे स्त्री रमण की क्षमता प्रभावित होती है / कुछ ऐसे कार्य कलाप भी सामने आये जिनके पालन करने से सम्भोग की शक्ति को बढावा मिलता है और सम्भोग करने की क्षमता को विस्तार मिलता है /

ऐसे सभी लोगों ने जिन्होने बताया कि उनकी रमण करने की क्षमता क्यों अधिक उम्र तक बनी हुयी है, इसके पीछे उनका “ब्रम्ह्चर्य व्रत” की लम्बे समय तक पालन करने की वजह से उतपन्न शारीरिक क्षमता के विकास का रियक्सन मात्र है / ऐसे लोग जब तक उनकी शादी नही हुयी थी तब तक अपने वीर्य की रक्षा करते रहे यानी १८ से लेकर २५ साल तक या अधिक उम्र तक ऐसे लोगों नें स्त्री रमण या सम्भोग से अपने को दूर रखा और वीर्य रक्षा करने के सभी उपाय किये थे / दूसरी तरफ वर्तमान नौजवानों की हालत यह है कि किशोरावस्था में जैसे ही पदार्पण हुआ और ऐसे कच्ची उमर के और किशोरावस्था मे आते ही जैसे लिन्गोत्थान से उतपन्न सेक्स से सम्बन्धित विचार मष्तिष्क में आने शुरू हुये कि कोई हस्त्मैथुन का सहारा लेकर वीर्य पात कराने लगता है और कोई दूसरा रास्ता अपनाने लगता है /

अब जब कच्ची उमर में वीर्य्पात कराओगे तो शरीर की विकास करने की स्तिथि कमजोर होती है / मन, मष्तिष्क, शरीर के सभी अन्ग बेकार हो जाते है और शरीर के अधिकान्स सिस्टम बाधित होते है /

आयुर्वेद इसीलिये निर्देश करता है कि सेक्स से सम्बन्धित सारे कार्य कलापों के लिये क्या करना चाहिये ताकि सम्भोग करने की क्षमता बहुत लम्बी उम्र तक वैसी ही बनी रहे जैसी कि उनके जवानी के दिनों में होती रहती थी /

आयुर्वेद बताता है कि जीवन शैली, खान पान, आयुर्वेदोक्त आचरंण को adopt करने से सम्भोग करने की शक्ति बढाने के अलावा वीर्य रक्षा आदि आदि कैसे की जा सकती है ?

Primery Version of ETG AyurvedaScan system

Primery Version of ETG AyurvedaScan system

Mapping and scanning of human body with the help of ETG AyrvedaScan machine , can deliver the inensity of LOVE and Emotional parameters in e.v. [etg value] respectively.

After automatic measurement feeding of data in computer software from ETG Ayurvedacan machine, a Computer generated report is recieved ,which facilitates the evaluation of love and emotion of a human being of every age condition.

The data from “brain” , from “nervous system”, from “Hormonal glands”, from “general health condition” and others, simultaneously provides the MENTAL and PHYSICAL intensity of Love and Emotions and ofcourse the SEXUAL INSTINCT also.

ETG AyurvedaScan system is an Ayurvedic Scanning system, which mapping the whole body electrically by ETG AyurvedaScan machine, basing on the philosophy of Ayurveda Fundamentals entirely.

आयुर्वेद के ग्रन्थों मे ऐसे बहुत से खाद्य पदार्थों के साथ मिलाकर खाद्य औषधियों के फार्मूले दिये हुये है जिनका मै अपने मरीजों में बहुतायत से प्रयोग करता हूं / इसका सबसे बडा फायदा मरीजों के हित में होता है/ ऐसे बहुत से रोगी हैं , जो दवायें खाते खाते ऊब चुके हैं और जब अति हो जाती है तो मरीज दवा खाना छोड़ देता है / यह बहुत मुश्किल समय होता है चिकित्सक के लिये भी और मरीज के तीमार दारों के लिये भी /

मेरा मानना है कि ऐसी स्तिथियों के लिये हमारे आयुर्वेद के विद्वानों नें अपने समय मे ही ऐसे मरीजों को देखा होगा और इसी कारण से मरीज की जान बचाने के लिये आयुर्वेद के महान चिकित्सकों ने तरीका भी ढून्ढ निकाला है /

अपने मरीजों मे यही तरीका आजमाता हूं और मुझे सफलता भी मिली है / फिल्हाल इसके बारे में फिर कभी बताऊन्गा /

आज जिस खाद्य पदार्थ से निर्मित औषधि का जिक्र कर रहा हू , यह एक उत्कृष्ट खाद्य पदार्थ है / इसका बनाने का तरीका और सामग्री निम्न प्रकार है /

मन्साहारी लोग जो अन्डा का सेवन करते है, उनके लिये -

एक या दो अन्डा की पीली जर्दी एक बड़े कप में ले , इसमें जितना मीठा स्वाद् चाहते हैं उसके अनुसार शक्कर डाल लें, इसी में एक या दो चम्मच मृत सन्जीवनी सुरा मिला लें / अगर मृत सन्जीवनी सुरा न मिले तो अच्छे किस्म की रम अथवा ब्रान्डी मिला ले / इसे अच्छी तरह फेन्ट लें /

अब इस मिष्रण में डेढ या दो कप गर्म दूध मिला लें और अच्छी तरह इसे चम्मच से हिलाकर मिला लें /

इस तैयार मिश्रण में होम्योपैथी की दवाओं के तीन टिन्क्चर यथा Avena Sative Q, Alfalfa Q और Ashvagadha Q की प्रत्येक टिन्क्चर की दस दस बून्दें मिला लें /

इसे सुबह शाम ताजा बनाकर पीना चाहिये / भोजन के साथ भी ले सकते है /

इस तरह से तैयार खाद्योषधि यानी neutraceutical निम्न मरीजों के लिये लाभ दायक है /

१- शारीरिक रूप से कमजोर मरीज जिन्हे भोजन हजम करने में भी कठिनाइ लगती है , यह हल्का और सुपाच्य भोजन है यानी जल्दी हजम होने वाला पौष्टिक भोजन है /
२- जो कमजोर है जिनके शरीर में मान्स नही चढता है, दुबले पतले हैं, देखने में मिर्गिल्ली या मरियल काया वाले लगते हैं , उनके वजन को यह बढाने में यह सहायता करता है /
३- जिन्हे मानसिक तनाव बना रहता है, जिन्हे जल्दी से काम करने की आदत है, जिनका खाने पीने का कोई निश्चित समय नही है, उनके लिये यह पूर्ण खाद्य पदार्थ का काम करता है
४- इसके लगतार पीने से शारिरिक और मानसिक क्षमता पढती है

5- Very beneficial for those, who are MENTALLY ill and suffering from SLEEPLESS NESS, MENTAL FATIGUE, LOSS OF MEMORY and others similar mental disorders

जो लोग अन्डा या रम या ब्राडी से परहेज करते है , वे लोग केवल दूध के साथ होम्योपैथी के मदर टिन्क्चर मिलाकर तथा एक चम्मच शतावरी घृत मिलाकर अथवा एक या दो चम्मच महानारायन तेल या महामाष तेल मिलाकर सुबह शाम दो बार सेवन करें / यदि तेल अथवा घी किसी को न suite करे तो केवल दूध के साथ होम्योपैथी के बताये गये सभी टिन्क्चर को मिलाकर बनाय गया मिक्ष्चर सेवन करें /

ऐसा मानते हैं और यह मानव स्वभाव भी है कि लगभग सभी पुरूषों को सेक्स से सम्बन्धित कोई न कोई कमी बनी रहती है / पुरूषों के जननान्गों का बहुत महत्व है लेकिन इससे भी ज्यादा महत्व स्त्रियों के जनन अन्गों का है / फिल्हाल यहां चर्चा का विषय पुरुषों के sex organs से जुड़ी हुयी समस्याओं का है /

आयुर्वेद की दवाओं का विश्व कोष बतायी जाने वाली पुस्तक भारत भैषज्य रत्नाकर मे एक महत्व्पूर्ण योग दिया हुआ है, जिसके उपयोग से पुरुषों की बहुत सी sex related problems का इलाज किया जा सकता है /

“मदन प्रकाश चूर्ण” का formula जिसमें उच्च कोटि की आयुर्वेद की जड़ी-बूटियों का मिष्रण है, और जिसमें निम्न औषधियां मिली हुयी हैं, इस प्रकार है ;

सामग्री; ताल मखाना, मूसली, विदारीकन्द, सोठ,अश्वगन्धा, कौन्च के बीज, सेमर के फूल, बीज बन्द, शतावर, मोचरस, गोखरू, जायफल, घी में भूनी हुयी ऊड़द की दाल, , भान्ग और बन्सलोचन , यह सभी द्रव्य एक एक हिस्सा लेकर महीन से महीन चूर्ण बना लें और इस सभी वस्तुओं के चूर्ण के हिस्से के बराबर शक्कर लें और इस शक्कर को महीन से महीन पीसकर उपरोक्त चूर्ण में मिला लें /

यह अब पुरूष रोग को दूर करने की औषधि तैयार हो गयी /

इस चूर्ण की मात्रा २ से ४ ग्राम तक है और इसे सुबह शाम गाय के दूध अथवा जो भी दूध मिले उसके साथ या जिन्हे दूध माफिक न आता हो , वे मलाई या रबड़ी मिलाकर या घी मिलाकर या मक्खन मिलाकर या इनमे से कुछ भी न मिले तो सादा पानी के साथ सेवन करना चाहिये /

आयुर्वेद की इस औषधि के सेवन से निम्नांकित फायदे होते हैं ;

१- यह पौष्टिक चूर्ण है, इसके शरीर की पुष्टता बढाता है /

२- यह रसायन गुण युक्त है इसलिये यह चूर्ण आयुर्वेदोक्त सप्त धातुओं की रक्षा करके रस, रक्त, मान्स , मेद, अस्थि, मज्ज, और शुक्र धातुओं की बृध्धि करता है /

३- यह बाजीकरण योग है इसलिये यह कमजोर मनुष्यों को सम्भोग करने के लिये अधिक वीर्य उत्पादन के लिये सम्र्थ बनाता है /

४- डायबिटीज के रोगियों के लिये यह चूर्ण किसी वरदान से कम नही है / डायबिटीज के रोगियों की सम्भोग अथवा मैथुन करने की क्षमता कमजोर हो जाती है/ इस चूर्ण के सेवन करने से डायबिटीज के रोगियों को दोतरफा फायदा होता है / इससे प्रमेह की शिकायत भी दूर होती है /

५- जिनका शुक्र, हस्त मैथुन या अन्य अप्राकृतिक तरीके अपनाने के बाद पानी जैसा पतला हो गया हो , इस चूर्ण के सेवन करने से वीर्य शुध्धि होकर गढा और प्राकृतिक हो जाता है /

६- जिनके SEMEN में कोई भी विकृति हो, sperm counts कम हों या स्पेर्म न बन रहे हों , उन्हें इस औशधि का उपयोग जरूर करना चाहिये /

मदन प्रकाश चूर्ण को सभी प्रकार के शुक्र दोषों में उपयोग किया जा सकता है / शरीर की General Health Condition को improve करने के लिये तथा कु-पोषण से पीड़ित रोगियों के लिये यह एक लाभकारी औषधि है /

आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान के साधकों ने ऐसी ऐसी महान औशधियों के फार्मूले विकसित किये हैं , जिन्हे बीमार व्यक्तियों और गम्भीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों पर आजमाने के बाद यह सत्य प्रतीत होता है कि हमारे आयुर्वेद के महान साधकों ने इस दुनियां को कैसी अमूल्य निधियां प्रदान की हैं ?

जहां आयुर्वेद के ग्रन्थों में असीमित फार्मूले दिये गये हैं , वहीं कुछ ऐसे है जो बीमारियों के इलाज करने में हमेशा सफलता देते हैं / मृत सन्जीवनी सुरा आयुर्वेद की एक ऐसी औषधि है जो वाकई में किसी भी बीमारी के कारण मरने वालों के लिये “सन्जीवनी” जैसा काम आती है /

इस औशधि का फार्मूला शास्त्रों में इस प्रकार से दिया गया है /

नया गुड़ सवा ६ सेर, बबूल की छाल, बेर की छाल, सुपारी प्रत्येक १ सेर, लोध २० तोला, अदरख १० तोला, कूट पीस कर तथा गुड़ को ८ गुना सादे पानी में घोलकर किसी बडे बरतन में डाल दें और इस बरतन का मुख बन्द करके २० से ३० दिन तक सन्धान के लिये एकान्त में रख दें /

सन्धान के समय बीतने के बाद इस सारे द्रव्य में सुपारी, एल्वालुक, देवदारू,लौन्ग, पद्माख, खस, सफ़ेद चन्दन, सोया, अजवायन, काली मिर्च, सफ़ेद जीरा, स्याह जीरा, कचूर, जटामन्सी, दाल्चीनी, इलायची, जायफल, नागर्मोथा, गठिवन, सोन्ठ, मेथी, मेढासिन्गी, चन्दन , ये सब द्रव्य ढाई तोला लेकर मिला लें और इसमें ५ सेर पानी और मिलाकर सारी ऊपर की बतायी दवायें घोल दें /

अब इस सभी द्रव्य को अर्क निकालने वाले “भबका” यन्त्र में डाल कर इसका सुरा रूपी अर्क निकाल लें /

वास्तव में यह एक प्रकार की शराब होती है जो इलाज के लिये काम आती है / मै इस सुरा का उपयोग नीचे बतायी गयी बीमारियों में सफलता पूर्वक किया है /

१- ठन्डक यानी जाडा और बरसात के दिनों में होने वाली सभी तरह की बीमारियों में इसका उप्योग करना मरीज की जान बचाने के लिये रामबाण का काम करती है / मै हर मरीज को ५ मिलीलीटर से लेकर दस मिलीलीटर तक मृत सन्जीवनी सुरा को एक या दो उपयुक्त आसव या अरिष्ट के साथ बराबर मात्रा मे मिलाकर खाने के बाद दोपहर और रात में बताता हूं /

२- इस सुरा के उप्योग से बदन के दर्द में , musculo-skeletal problems से पैदा दर्द में बहुत आराम मिलती है / जिन्हे किसी भी तरह की दर्द हो , वे इसका उपयोग उपयुक्त आसव या अरिष्ट के साथ मिलाकर करें /

३- जिन्हे ळीवर , Hepatitis, Pancreas आदि की तकलीफ हो वे इसका उपयोग करके इन सभी अन्गों की सक्रियता को बढा सकते है /

४- जिन्हे सर्दि , जुखाम, खान्सी, सान्स की तकलीफें हों, वे इसका उपयोग कर सकते है /

५- प्रसव के बाद महिलाओं को इस सुरा का अव्शय सेवन करना चाहिये / यह महिलाओं के जननागों पर बहुत सटीक असर करता है और बहुत प्रभाव शाली है / इस सुरा की मालिश करने से बहुत फायदा होता है /

६- गठिया वात या मान्स्पेसियों के दर्द में इसकी मालिश करने से दर्द में बहुत फायदा होता है /

७- जिन्हे नीन्द न आती हो, जिन्हे मानसिक रोग हो, जिन्हे दिमागी काम बहुत अधिक करना रहता हो, वे लोग इसका सेवन अश्वगन्धारिष्ट, सारस्वतारिष्ट, द्राक्षारिष्ट आदि के साथ भोजनोपरान्त करें

इस सुरा के बहुत से प्रयोग मैने किये है / यह नशा लाने वाला पदार्थ है और शराब के बराबर का दर्जा है / इसलिये इसका अधिक उप्योग नशा पैदा करता है / इसकी अधिक्तम मात्रा ५ मिलीलीटर से १० मिली ळीटर तक है, इससे अधिक इसे कभी भी नहीं लेना चाहिये /

यह बाजार में नही मिलती है और न बिकती है , क्योंकि इस पर सरकार द्वारा बैन लगा हुआ है / लेकिन आयुर्वेदिक वैद्य अपने मरीजों के उपयोग के लिये बहुत कम मात्रा में आधा से एक लीटर तक बनाकर उपयोग कर सकते हैं / इसका खुले रूप में बेचना दन्डनीय अपराध है /

कभी कभी इस सुरा के बनाने वाले द्रव्य नही मिलते हैं, इसलिये मौके पर नही मिल पाती है , इसलिये यह जब तक न मिले तो मरीजों के हित में काम चलाने के लिये बहुत अच्छे ब्रान्ड वाली अन्ग्रेजी शराब “रम” का उपयोग कर लेना चाहिये / “रम” शीरे से बनती है और मृत सन्जीवनी सुरा गुड़ तथा औषधियों के मिश्रण से बनायी जाती है, जिसमें दवाओं के गुण भी शामिल हो जाते है /

मानव शरीर दो द्रव्य बहुत शीघ्रता से हजम करता है और हजम किये गये पदार्थ को सीधे सीधे खून में मिला देता है , ये दो द्रव्य हैं अल्कोहल और ग्लूकोज / स्पष्ट बात है कि जब आसव अरिष्ट सुरा जैसी वस्तु के साथ मिलाकर लिये जायेन्गे तो शरीर में प्रभाव भी शीघ्रता से करेन्गे /

कैन्सर जैसी बीमारी के मरीजों का बड़ी सन्ख्या में इलाज करने के पश्चात जितना भी अनुभव हुआ है , उसमे कुछ बातें मै सबसे शेयर करना चाहता हूं /

पहला अनुभव मेरी समझ में यह आया है कि अगर मरीज अपनी बीमारी का इलाज आयुर्वेदिक चिकित्सा का सहारा लेकर कराना चाहता है और कैन्सर की तकलीफ का पता रक्त की जान्च कराने और FNAC परीक्षण कराने से हो जाता है तो फिर उसे बायोप्सी परीक्षण से बचना चाहिये / बायोप्सी परीक्षण करा लेने के बाद आयुर्वेदिक चिकित्सा सफल नही होती है /

दूसरा अनुभव यह है कि आयुर्वेद की आधुनिक निदान ग्यान की तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्शण का सहारा लेकर जब कैन्सर के रोगियों की चिकित्सा करते हैं तो सफलता अवश्य मिलती है /

तीसरा अनुभव यह है कि चिकित्सा ऐसी होनी चाहिये जो कैन्सर की तेजी से बढने की प्रवृत्ति को धीमा करे और रोग की बढने की गति पर लगाम लगाये / इस “growing tendency” को दवाओं के उपयोग से जितना धीमा कर लेन्गे, मरीज की उम्र उतनी ही अधिक बढ़ जाती है /

चौथा अनुभव यह है कि मरीज की समान्य स्वास्थय अवस्था यानी General Health Condition को improve करने के लिये जितने प्रयास हो सके उसे करना चाहिये /

पान्चवां अनुभव यह है कि ETG AyurvedaScan हर महीने या हर दो माह में कर लेना चाहिये और जैसी फाइन्डिन्ग्स हों, उस पर base करके इलाज करना चाहिये /

छठा अनुभव यह है कि आयुर्वेदिक इलाज कराने से प्रथम अवस्था के मरीज को ९५ प्रतिशत पूर्ण आरोग्य और द्वितीय अवस्था के कैन्सर के मरीजों को कुछ तकलीफ के साथ आरोग्य कई सालों के लिये जीवन दायी होते हैं /

सातवां अनुभव यह रहा कि आयुर्वेदिक इलाज से मरीज के दर्द या रक्त बहने की tendency बन्द हो गयी या न के बराबर कष्ट बना रहा /

सर्जरी कराने के बाद आये कुछ सेलेक्टेड मरीजों का मैने उपचार किया है जो अधिकतम दस साल तक जीवित रहे हैं /

कैन्सर की गान्ठों का इलाज;

शरीर मे हो रही गाठों या गिल्टियों या ग्लैन्ड्स Glands से हमेशा सतर्क रहना चाहिये / ऐसा नही है कि सभी गान्ठें कैन्सर का स्वरूप ले लें य सभी तरह की गान्ठें कैन्सर मे ही तब्दील हो जायें / वास्तविकता यह है कि सभी तरह की गान्ठें कैन्सर नही होती / कैन्सर के हिसाब से glands  को दो भागों मे समझते है, एक वह जो कैन्सरस होती है और इन्हे malignent tumour अथवा glands के नाम से जानते है और दूसरा वह गान्ठें , जिन्हे benign tumour अथवा glands कहते हैं /  इसमें निदान या diagnosis करने में कि कौन सी गान्ठे कैन्सरस हैं और कौन सी नही, यह बहुत मुश्किल काम है / हमेशा निदान करने मे चूक बनी रहती है / कोई कोई गान्ठ tubercular भी होती है और कोई koch’s infection वाली , तथा कोई कोई किसी अन्ग की inflammatory condition  के कारंण “as a metastasis result” पैदा हो जाती है जैसे कि उदाहरण के लिये गले की बीमारियों जैसे tonsillitis, pharyngitis, laryngitis से गर्दन के चारों तरफ adenoids या lymphadenitis पैदा हो जाती है /

मैने पाया है कि जिन बच्चों को अक्सर tonsillitis या गले का इन्फेक्सन या ई०एन०टी० से सम्बन्धित तकलीफें होती है और इनको अधिक मात्रा में anti-biotics देकर लम्बे समय तक इलाज करते रहते है तो फेफड़ों मे गान्ठें हो जाने की सम्भावना बनी रहती है, ऐसा metastasis के कारण होता है /

मुझे कई साल पहले एक चार साल के बच्चे का X-ray देखने को मिला, जिसमे उसके दोनों फेफड़ॊ  मे chicken pox जैसे दानों के धब्बे पूरे फेफड़ों मे छाये हुये थे /  उन दिनों कानपुर में चेचक बहुत फैली हुयी थी / एलोपैथी के जो चिकित्सक बच्चे का इलाज कर रहे थे , वे तेज़ बुखार जो १०४ के आस्पास था उसको कम करने के लिये anti-pyeretic दवायें और anti-biotics के अलावा दूसरी दवायें दे रहे थे / पान्च छह दिन बाद बच्चे की सान्स फूलने लगी तब X-ray कराया गया / हुआ यह कि chicken pox का infection , suppress होकर फेफड़ॊ मे चला गया, जिससे जो दाने त्वचा में निकलने चाहिये थे , वे सब inward होकर फेफड़ॊ मे चले गये /

आयुर्वेद और होम्योपैथी में गान्ठों का बहुत सटीक इलाज है , यदि दोनों तरह की औषधियों का उपयोग इलाज के लिये किया जाता है तो सभी तरह की गान्ठों Glands  / tumour  का इलाज प्रभाव्कारी तरीके से किया जा सकता है / 

 

मेरे सम्पर्क में ऐसे बहुत से मरीज और उनके परिजन या मेरे दोस्तों ने यह ख्वाहिश की कि उनके लड़्कियां हैं और वे चाहते हैं कि अब की बार या अगली बार “लड़्का” ही पैदा हो तो ऐसे लोगों को मै आजमायी हुयी आयुर्वेद की औषधि का उपयोग कराता हूं /

आयुर्वेद में पुन्सवन यानी गर्भ के अन्दर लड़का पैदा होने का माद्दा बढाने के लिये आयुर्वेद के ग्रन्थों में बहुत से योग दिये गये हैं / हलान्कि इन शास्त्रोक्त योगों से प्रभावित होकर मैने कोई experiment नही किया है , लेकिन ‘एक दवा’ के उपयोग को मैने लगभग तीन दर्जन से अधिक दम्पत्तियों को प्रयोग कराया और सभी के “लड़का” पैदा हुये / यह एक आश्चर्य जनक तथ्य है /

दवा का नाम ‘पुन्सवनों सेट’ है और इसे ज्वाला आयुर्वेद भवन, मामू भान्जा रोड, अलीगढ, उ०प्र० से मन्गा कर जैसा दवा के सेवन का निर्देश दिया गया है , उसी प्रकार से उपयोग करें / यह बहुत महन्गी दवा नही है , लगभग ४००/- रुपये के अन्दर खरीद की जा सकती है /

इस दवा के सबसे अच्छे परिणाम pregnancy के जितने जल्दी पता चल जाने के साथ ही शुरू कर देने से मिलते हैं उतने बहुत देर से शुरू करने से नही मिल पाते हैं / इसलिये जितनी जल्दी हो सके pregnancy का पता चल जाने के साथ ही दवा शुरू कर दें /

जिन्हे लड़कियां होंने के बाद लड़के की ख्वाहिश हो, वे इस आयुर्वेद के वरदान स्वरूप औशधि का विधि विधान पूर्वक सेवन करायें, अवश्य लड़्का होगा /

 

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Aapane Likha, bahut khusi huyi आपने लिखा, बहुत प्रसन्नता हुयी

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