आयुर्वेद : आयुषमन : AYUSHMEN

आयुर्वेद की तकनीक इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी ई०टी०जी० आयुर्स्कैन में कुछ परिवर्तन करके इलेक्ट्रो होम्यो ग्राफी ई०एच०जी० होम्यो स्कैन तकनीक का आविस्कार किया गया है । इस तकनीक द्वारा होम्योपैथी चिकित्सा विग्यान के आविष्कारक सैमुअल हाहनेमान द्वारा होम्योपैथी के सिध्धान्तों का यथा सोरा Psora, सायकोसिस Sycosis, सिफलिस Syphilis के अलावा वाइटल फोर्स Vital Force और आयडियोसिंक्रेसी Idiosyncracy/ susceptibility के शरीर में उपस्तिथी और बीमारियों के निदान इत्यादि छपी हुयी रिपोर्ट के स्वरूप में प्राप्त हो जाती है ।

होम्योपैथिक औषधियों का चुनाव Selection of Homoeopathic Medicine रेपर्टराइजेशन Repertorisation के द्वारा प्राप्त कर सकते है या प्राप्त लक्षणॊं के आधार पर Symptom based / Disease Diagnosis Based दवाइयों का चुनाव कर सकते है ।

हमारे मुख्य ई०टी०जी० केन्द्र, कनक पालीथेरपी क्लीनिक एवम रिसर्च सेन्टर, ६७/७०, भूसाटोली, बरतन बाज़ार, कानपुर Our Main E.T.G. Center , Kanak Polytherapy Clinic & Research Center, 67/70, Bhusatoli Road, Bartan Bazar, Kanpur में ई०एच०जी० होम्यो स्कैन की सुविधा कामर्सियल facility available commercially स्वरूप में उपलब्ध है । एक स्कैन परीक्षण रुपया Rs. 1200/- तथा होम्योपैथिक दवाओं का प्रेस्क्रिप्सन Prescription of Homoeopathic medicine लेने के लिये रुपया 300/- अधिक extra देने होन्गे । रिपोर्ट तीसरे दिन दी जाती है, लेकिन जो लोग उसी दिन रेपोर्ट लेना चाहते है, उन्हे रुपया 400/- अधिक देने होन्गे और रिपोर्ट ३ या चार घन्टे में दी जायेगी ।

Those , who wanted to seek Homoeopathic Treatment, E.H.G. Homoeo Scanning system will provide them fool proof treatment without any deviation.

पिचले कुछ सालों में मैने रीढ के रोगों में हो रही बढोतरी को देखा है । मुझे यह महसूस होता है कि यह बढोतरी कई कारणॊं से होरही है । कुछ प्रमुख कारण यह हो सकते हैं ।

१- उठने बैठने सोने आराम करने के पोस्चर में अनावस्यक तनाव रीढ की हड्डियों की ओर तनाव पैदा होना

२- लम्बी दूरी की यात्राओं का रोजाना लम्बे समय तक बैथे रहने या खड़े होने की स्तिथी में तय करना

३- कार, मोटर साइकिल या वहनों का लमबे समय तक ड्राइव करना

इनके अलाव भी बहुत से करण समझ मे आये है जिनमे कम्प्यूतर मे ज्यादा देर तक काम करने, रीढ की हड्डी में गिर जाने या किसी एक्सीडेन्ट से चोट लग जाने, या अन्य किसी कारण या बीमारी से रीढ में कोई तकलीफ पैदा होने से

और भी वजहें हो सकती है ।

मुझे अधिकतर इस बीमारी से ग्रसित मरीज जो भी मिले , उनकी उम्र २० साल से लेकर ४५ साल की उम्र वाले मिले । इसमे से कै ऐसे थे जिन्होने बिस्तरा पकड रखा था ।

ऐसे सभी मरीज एलोपैथी कि दवायें ले रहे थे जिनमें केवल पेन किलर्स, विटामिन की गोलिया और जरूरत से ज्यादा स्टेरायद ले रहे थे । यह सब दवायें लेते लेते जब इन दवाओं का असर खतम हो गया और इन प्रेस्क्रिप्सन से भी आराम मिलना बन्द हो गया तब बहुत खराब हालात में ऐसे मरीज हमारे पास इलाज के लिये आये ।

हमने इन सभी मरीजों का ई०टी०जी० परिक्शण किया और तदनुसार उनके पूरे शरीर के अन्गों में कहांकहां व्याधियां व्याप्त है और कौन कौन से अन्ग कितना काम कर रहे है ? शरीर में त्रिदोष की क्या स्तिथि है इतयादि इत्यादि बातों को सोच समझ्कर जब इलाज किया गया , तब जाकर लगभग १५ दिन बाद ऐसे मरीजों को आराम मिलना शुरू हुआ ।

हम ऐसे मरीजों के साथ कम्बाइन्ड चिकित्सा का उपयोग करते हैं । जिसमे आयुर्वेद, होम्योपैथी, य़ूनानी दवओं के साथ साथ एलोपैथी के पेन किलर्स का उपयोग करते है, ताकि मरीज को दर्द बिल्कुल न हो और उसे दर्द क अहसा हो तो न के बराबर । कुछ दिनों बाद पेन किलर्स छूट जाते है और मरीज धिरे धिरे आयुर्वेद या होम्योपैथी या पर अधारित हो जाते है। हम इन मरीजों को मैग्नेट थेरप्य, अकूपन्क्चर, प्राक्रतिक चिकित्सा, फीजियोथेर्रेपी, पन्चकर्म आदि का उपयोग करते है ।

हमारा मानना है कि रीड़ की बीमारियों में यदि प्ररम्भिक अवस्थाअमें इलाज ले लिया जाय तो एन्काइलोसिन्ग स्पान्दिलाइटिस जैसी तकलीफें भी दूर की जा सकती हैं ।

लेकिन यह तभी सम्भव है जब इलाज करने वाल चिकित्सक चिकित्सा कर्य में निपुण हो ।

हम नब्बे दिनों के बाद या जब जरूरत होती है तब रोगी के रोग की स्तिथि कि मानीटरिंग ई०टी०जी० परिक्षण से लगतर करते रहते है जिससे इलाज बहुत सटीक , सही और प्रभाव्शाली हो जाता है और किसी प्रकार कि गलती होने की सम्भावना न के बराबर होती है ।

सर्जरी से बचें Avoide Surgical Interventions

रीढ की हड्डियों की बीमारियो में सर्ज्ररी न करायें तो अछ्छा है । जब तक कि बहुत महत्व पूर्ण स्तिथि न आ जाये तब तक नये और कुछ पुराने हो गये रोगों में सर्जरी न करायीं तो अच्छा होगा । मैने बहुत से रोगियों को देखा है कि  वे रीढ की सर्जरी कराने के बाद एक्दम अपन्ग हो गये और फिर उनका सारा जीवन बिस्तरे पर ही लेटे लेटे बीता और कोई भी औषधिया उनको आराम नहीं दे सकीं । ईसलिये बेहतर यही है कि बहुत सोच समझ कर सर्जरी के बारे में विचार करें ।

एलोपैथी और आयुर्वेद में कुछ बुनियादी फर्क है और इसे एक जैसा समझने की भूल कतई नही करना चाहिये ।

अक्सर लोगों के मस्तिश्क में यह विचार बना हुआ रहता है कि एलोपैथी और आयुर्वेद एक जैसे ही है।

यह समझना बड़ी भूल है ।

एलोपैथी का कन्सेप्ट यह है कि यह मानव शरीर को एक मशीन की तरह से आन्कलन करती है । जैसे एक डीजल इन्जन के बनाने में तरह तरह के पुर्जे लगाये जाते है और तब यह सब पुर्जे मिलाकर एक इन्जन बनान्ते है और तब इससे काम लेते है , ठीक इसी प्रकार एलोपैथी मनव शरीर को समझती है । एलोपैथी का यह भी मानना है कि शरीर का हर अन्ग एक अलग ईकाई है और इसका शरीर के दूसरे अन्गो से कोई रिश्ता नहीं होता । उदाहरण के लिये दिल, गुर्दा, लीवर, मस्तिष्क, गला आदि सब अलग अलग अन्ग हैं और इनका आपस मे कोई सम्बन्ध नहीं है, अगर यह सब अन्ग बीमार हो जायें तो इनका इलाज अलग अलग करना चाहिये ।

लेकिन आयुर्वेद और दूसरी आयुष चिकित्सा विग्यान का कहना है कि ऐसा नहीं है, मानव शरीर एक ईकाई है और इसे ईकाई के तौर तरीकों से समझ कर इलाज करना चहिये । इन सभी चिकित्सा विग्यान में कहा गया है कि जब शरीर बीमार हो तो शरीर की सम्पूर्ण  व्याधियोंक इलाज एक साथ करना चाहिये ।

एलोपैथी जहां रोगों के मूल कारणों में इन्फेक्सन/बैक्टीरिया या अन्य को देखती है वहीं तुलनात्मक तौर पर आयुर्वेद , होम्योपैथी, योग, प्रक्रतिक , यूनानी चिकित्सा इत्यादि के अपने अपने मूल सिद्धान्त है जो प्रकृति से जुड़े हुये है और यह स्वीकार करते है कि मानव शरीर धरती में प्राप्त सभी पान्च तत्वों से मिलकर बना है, इसलिये मनव शरीर के रोगों की चिकित्सा भी इन्ही तत्वों से मिलाकर की जानी चहिये ।

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बहुत अजीब सा लगता है जब कोई यह कहे कि आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान में झोला छाप डाक्टर पैदा हो रहे हैं । ऐसा गलत भी नहीं है । मैने कई बार इस ब्लाग में ऐसी ही बहुत सी बातें कहीं है ।

महामहिम परम आदरणीय राष्ट्रपति श्री मती पाटिल जी का कहना बिल्कुल शत प्रतिशत सही है कि आयुर्वेद के नाम पर जिस तरह से झोला छाप वैद्य पैदा हो रहे हैं, उन पर अन्कुश लगाना जरूरी और बहुत जरूरी है । इस बारे में उनकी चिन्ता जायज है क्योंकि एक ऐसा चिकित्सा विग्यान जिसे समय और अनुभव की कसौटी पर प्रकृति के अति निकट होने और तदनुसार भारतीय दर्शन का एक अन्ग होने पर जिस तरह का गौरव महसूस किया जाना चहिये था, उसकी कमी की आन्च महसूस किया जाने लगा है । यह सब गिरावट इसलिये हो रही है क्योंकि आयुर्वेद को लोगों ने व्यवसायिकता से जोड़ दिया है ।

जब तक आयुर्वेद एक प्रकार का दर्शन शाश्त्र बना रहा , तब तक तो ठीक ठाक रहा, इसमें ज्योंही व्यवसायिकता का पुट मिला कि इसमें भ्रस्टता का समवेश होना शुरू हुआ । आज जिस प्रकार से आयुर्वेद को ब्यापार बनाया जा रहा है , यह एक शुभ लक्षण नही है ।

यद्यपि अभी समय है और बहुत कुछ किया जा सकता है, लेकिन यह सब सरकार के भरोसे किया जाय, यह उचित नहीं लगता । बेहतर है वैद्य समाज इस समस्या को समझे और इस क्षेत्र में आ गयी खराबियों को पूरी ईमान्दारी के साथ दूर करने का प्रयास करे ।

महामहिम जी ने जिन अन्य बातों की ओर वैद्य समाज का ध्यान खींचा है , उन बातों पर भी गौर करना अतिआवशयक है ।

उम्मीद है वैद्य समाज के सन्गठन व्याप्त बुराइयों को दूर करने का प्रयास करेंगे ।

Today is the birthday of Lord Dhanavantari, the father of Ayurveda. It is said that Lord Dhanavantari is the elder brother of Goddess Laxami, the queen of wealth.

one of my pupil from Ganjdundawara, Distt : Etah have send me an email. I am giving ehere the copy of the same for the readers.ganj

I wish for all readers and visitors of thise site, “May Lord Dhanavantari bless all with the health, wealth and prosperity.”

प्रति वर्ष सभी आयुर्वेद के चिकित्सक भगवान धनवन्तरि देव का जन्म दिन धनतेरस के दिन मनाते हैं ।

इस वेब साइट पर आने वाले सभी भाई और बहनों के लिये मैं भगवान धनवन्तरि देव से प्रार्थना करता हूं कि सभी लोगों पर उनकी कृपा बनी रहे, सभी स्वस्थ्य हों, सभी सुखी हों, सबकी मनो कामनायें पूरी हों । तथास्तु ।

ईश्वर की कृपा, भगवान धनवन्तरि देव के आशिर्वाद और माता दुर्गा भवानी की अनुकम्पा से आज दिनान्क २६ सितम्बर २००९ को कई वर्षों से लम्बित आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान के लिये नवीन आविष्कृत रोगों के निदान ग्यान और आयुर्वेद के मौलिक सिद्धान्तों को साक्ष्य स्वरूप प्रस्तुत करने वाली तकनीक इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी ई०टी०जी० मशीन का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है ।

इसके निर्माण कार्य में लगे हुये हार्डवेयर और साफ़्ट वेयर इन्जीनियरों ने बताया है कि वे इस मशीन का निर्माण एक निश्चित समय सीमा के अन्दर कर देंगें ।

इस मशीन में २१ से अधिक लीड की रेकार्डिंग एक साथ होगी और रिकार्डिंग के साथ ही तत्काल रिपोर्ट मिल जायेगी जिसमे कुछ मिनटॊं का समय लगेगा ।

हमारा प्रयास रहेगा कि इस मशीन को अत्याधुनिक तकनीक से लैस किया जाये । हलाकि इसके साथ एक लैप्टाप कम्प्यूटर तथा एक प्रिन्टर की आवश्यकता होगी । मशीन और साफ्ट वेयर इनके साथ ही यू०एस०बी० पोर्ट से जोड़े जायेंगे । मशीन से जुड़े सेन्सर रोगियों के शरीर में निर्धारित स्थानों पर चिपकाये जायेंगे ।

जैसा कि सभी जानते हैं कि अभी तक इस परीक्षण के लिये हृदय रोग की जान्च के लिये प्रयोग की जाने वाली इलेक्ट्रो कार्डियो ग्राफी ई०सी०जी० मशीन के केवल रिकार्डर का उपयोग आयुर्वेद के इस स्कैन ई०टी०जी० के लिये किया जाता है । इस रिकार्ड किये गये ट्रेस को बाद में कम्प्य़ूटर की मदद से मैनुअली तरीके से रिपोर्ट बनायी जाती थी जिसमें लगभग २ घन्टे लग जाते थे । प्रस्तावित मशीन केवल कुछ मिनटॊ में यह काम पूरी कर देगी ।

आयुर्वेद हर व्यक्ति को यह बताता है कि शरीर को स्वस्थ्य कैसे बनाये रखना चाहिये । इस शिक्षा के बाद आयुर्वेद यह बताता है कि यदि कोई व्यक्ति बीमार पड़ जाय तो उसे क्या सावधानी बरतना चाहिये, क्या दवायें उपयोग करना चाहिये जिससे बीमार व्यक्ति शीघ्र स्वास्थय प्राप्त कर ले । पुन: स्वस्थय हो जाये ।

यह नियम सभी प्रकार के बीमारियों से ग्रसित व्यक्तियों के लिये है ।

आयुर्वेद बताता है कि गलत रहन सहन और आद्तों से ओयक्ति बीमार होता है । इसलिये दिल के बीमारों को इस बात का विशेष खयाल करना चाहिये ताकि वे स्वस्थय बनें रहें ।

आयुर्वेद में दिल के रोगों की चिकित्सा के लिये बहुत सी औषधियां हैं जिनके सेवन से दिल के रोगों से बचा जा सकता है और यदि दिल के रोग हो जायें तो उनकी चिकित्सा भी की जा सकती है ।

Regular intake of Ayurvedic medicines LOHASAVA & KUMARIASAV can prevent Cardiac disorders. These medicines can be taken by all heart problem’s sufferers.

कुदरती खानपान और बताये गये तौर तरीकों के अपनानें से दिल के रोगॊं से बचा जा सकता है ।

A news article is published in INDIA NEWS WEEKLY magazine published from NEW DELHI issue September 12-18, 2009 under title “GUMANAMI KE ANDHERE MEIN ETG AVISHKAARAK”

I am giving here thye photocopy of the article for the readers.

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I personally appreciate the correspondent of this feature writer that she have given the true and correct informations.

Thanks to INDIANEWS magazine and thanks to related team writers.

Leucoderma Victim’s e-mail Letter, expressing his views

Posted by: prakruti on: September 6, 2009

Letter-dhavan

Today I recieved an e-mail, the photo-copy of the mail is enclosed here. The letter contains the important points and so that I would like to share the contents of letter for the benefits of the others victims of Leucoderma and Vitilago. I want to reply of the letter individually, but some important contents and the experiences of the patient, which I want to share with the other victims. This is a troublesome disease.

I reply here to all concerns that  this condition is totally treatable and curable, but the conditions are with the part of the patient and so also with the physician. Modern western medicine have no deciding role in the treatment of Leucoderma. Homoeopathy have some role in the treatment, but I am afraid to say that it may work and it may not. The treatment with the Homoeopathy is always with the suspence, uncertain and  doubtful, it is because, if the novices Homoeopathic Physician deals the pqtient. I have seen that many case have been spoiled by the new commers of the Homoeopathy and then they came in condition of untreatable. So if you want to take the treatm,ent of Homoeopathy, you should go to experienced Homoeopath of old age. Second the part of the patient is also very important. The management and the treatment should be maintained by the patient including his living style, food habits, climatic conditions etc etc.

Generally , I prefers Leucoderma  patient to take Ayurvedic medicines, which are safe, harmless and very effective. Ayurvedic treatment or Unani treatment are promising cure/ relief  the diseased conditions.

Regarding my way of treatment, my  (1) first step is to go  for  Electro Tridosha Graphy E.T.G. Examination, without this examination , I can not take any further step. (2) After this examination, when I get all the Data, then I physically examine the diseased parts/ailments/syndromes conditions/normal and abnormal organs etc conditions and then after this varification select the medicine according to the findings of Ayurvedic tridosha and diagnosis.

This is afoolproof method of the treatment, without any deviation, doubt or other uncertainity. Because ETG provides the pinpoint diagnosis of the disease, doshas, saptadhau, oj and other conditions.

Management of the case is dependent upon the findings of the ETG , food habits , living styles are also instructed according to the findings of the patient.

जब से  और जिस उम्र से मुझे समझ आने लगी और मैं सिनेमा और सिनेमा के कलाकारों के बारे मे समझ रखने लगा, तब से  फिल्म स्टार देव आनन्द मुझे सबसे प्यारे लगने लगे । मैं आठ साल का रहा हून्गा, मेरे बहनोई मुझे देवानन्द की फिल्म दिखाने ले गये, फिल्म का  नाम मुझे याद नही, लेकिन हीरोइन का नाम याद है , हीरोइन  ”शीला रमानी” थी । मुझे देव आनन्द के हाव भाव बहुत पसन्द आये और मै उनकी नकल करने लगा ।

धीरे धीरे देव आनन्द मेरे प्रिय हीरो हो गये । मैने उनकी सभी फिल्में देखीं है । कोई भी नहीं छूटी । कई कई बार फिल्में देखी, आज भी मेरे अन्दर देव आनन्द का क्रेज़ वैसा ही है जैसा कि आठ साल की उम्र में था ।

परोक्ष और अपरोक्ष यानी चेतन मन और अवचेतन मन में मेरे अन्दर कहीं न कहीं देव आनन्द मौजूद रहते हैं । आज भी मै काम करते करते भूल जाता हूं कि मेरी उम्र ६३ वर्ष की हो गयी है और मुझे ज्यादा मानसिक और शारीरिक काम नहीं करना चाहिये । ळेकिन जब मै काम में जुट जाता हूं तो भूल जाता हूं कि मेरी उम्र क्या है ? अपरोक्ष मन से मुझे समझ में आता है कि मै अभी २० बीस साल का हूं और यही समझ कर मै काम करने में जुटा रहता हू। यह कम उम्र की मान्सिकता मेरे ऊपर हाबी हो जाती है । लेकिन जैसे ही ध्यान आता है मै आराम करने चला जाता हूं ।

लोग मेरी वास्तविक उम्र से १५-२० साल कम समझते हैं । मेरे बाल ३० साल की उम्र में सफेद हो गये थे , जब मै जरमनी में था। भारत वापस आने पर मेरे बाल जयादा तेज़ी से सफेद होने लगे और कुछ साल में एक्दम झकाझक सफेद । मैने कभी डाई नहीं लगायी । एक आध बार मेंहदी लगाने से मुझे सर्वाइकल स्पान्डिलाइटिस का दर्द होने लगा था, तब से फिर कभी कोई बाल रंगने का प्रयास नहीं किया ।

यह सच है कि देव आनन्द मेरे मन में बसते है । सत्तर के दशक में दिल्ली से प्रकशित होने वाली साप्ताहिक पत्रिका “साप्ताहिक हिन्दुस्तान” में देव आनन्द ने एक सेरीज में कुछ लेख लिखे थे । एक लेख में उन्होने अपनी सफ़लता का राज बताते हुये लिखा था कि “मैं पीछे मुड़्कर नहीं देखता कि मैने क्या किया ? “

यह बात मुझे बहुत इन्स्पायर करती है । मै भी पीछे मुड़्कर नही देखता कि मैने क्या किया ? जो किया सो ठीक किया, गलत हो या सही, यह सुधार तो होते रहते हैं । त्वरित एक्सन न लेने , समय पर काम न करने का खमियाजा वही लोग उठाते हैं जो अकर्मण्य होकर चुप्चाप बैठे रहते हैं । मै पहले सोचता हू फिर करता हू । मेरे काम करने में क्या कमी रही , यह सब सुधार तो होते रहेन्गे । अगर यह सब मस्तिस्क में न होता, तो ई०टी०जी० जैसी जटिल तकनीक कभी जन्म न ले पाती ।

मुझे देव आनन्द की एक फिल्म का सीन कभी नही भूलता, इसे मै दिन में कई बार याद करता हूं । मधुबाला के साथ उनका एक गाना है ” अच्छा जी मैं हारी चलो मान जाओ न, देखी सबकी यारी मेरा दिल जलाओ न ” । इस गाने में मधुबाला कहती है “जीवन के ये रास्ते लम्बे हैं सनम, काटेंगे ये जिन्दगी ठोकर खाके हम, देखो दिल न तोड़ॊ, छोड़ॊ हाथ छोड़ो, छोड़ दिया तो हाथ मलोगे सम्झे “  इस गाने में दोनों कलाकारों के फेसियल एक्स्प्रेसन्स इतने नेचुरल लगे , मुझे यह भूलता नहीं । शायद गाने का यह हिस्सा मेरे जीवन की किसी घटना के किसी हिस्से से मेल खाता है ।

दिसम्बर सन १९८१, दिसम्बर  १९८२ और दिसम्बर १९८३ में जब मै बम्बई पढायी करने गया था,उस समय मैं देव आनन्द से मिलने उनके आफिस गया था । लेकिन मेरा दुर्भाग्य कि मै उनसे नही मिल पाया । एक बार वे सूटिन्ग के सिल्सिले में देश से बाहर थे । बाकी मुझे याद नहीं कि उन्के आफिस बियरर ने मुझे क्या उत्तर दिया था ?

आज भी मेरी तमन्ना देव आनन्द से मिलने की है, लेकिन मै चाहता हू कि मै जब उनसे मिलूं तो उनका एक ई०टी०जी० परीक्षण करके यह देखूं  कि देव साहब का शरीर आखिर क्यों इतना हिलोरें मारा करता है और  उनके अन्दर की कौन सी ऐसी नस और नाड़ियां है जो उनको हमेशा झक्झोरा करती हैं और चैन से बैठने नही देती ?

इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी : ई०टी०जी० का विश्व का पहला परीक्षण केन्द्र ::: ई०टी०जी० सेण्टर, E-52, खपरा मोहाल, खलील क्वार्ट्स कम्पाउन्ड, कैन्ट, कानपुर contact: 09336238994 :::आयुर्वेद की पहली और अकेली ; सम्पुर्ण शरीर का आयुर्वेदिक विधि विधान पूर्वक मौलिक सिद्धान्तों के निदान के अलावा सारे शरीर में व्याप्त रोगों के निदान का ज्ञान कराने वाली तकनीक का परीक्षण केन्द्र समस्त जनता, वैद्यों, आयुर्वेद के चिकित्सकों के लिये कानपुर शहर में स्थापित किया जा चुका है । यहां रोजाना सुबह ९ बजे से दिन २ बजे तक ई०टी०जी० परीक्षण किये जाते हैं । कोई भी रोगी व्यक्ति या अन्य लोग, जो भी परीक्षण कराना चाहते है, वे किसी भी दिन आकर अपना परीक्षण करा सकते हैं ।

इस परीक्षण को करने में केवल 10 मिनट [ Only Ten Minutes]लगते हैं । हमारे केन्द्र मे आकर एक बार परीक्षण कराने का शुल्क रुपया 1200/= [ Rupees One thousand and two hundred only ]खर्च करने पड़्ते हैं और रिपोर्ट तीसरे दिन दी जाती है । यदि शीघ्र और उसी दिन रिपोर्ट चाहिये तो उसके लिये रुपया चार सौ { Rupees Four Hundred extra ; Rs. 400/=} अधिक खर्चने होन्गे और रिपोर्ट दो से चार घन्टे में दी जायगी ।

World’s first Electro Tridosha Graphy Scanning Center : E.T.G. center, E-52, Khalil Quarters Compound, Khapara Mohal, Cantt,KANPUR 208001 :Contact: 9336238994 : 09:00 AM to 02:00 PM daily

Word’s First Electro Tridosha Graphy E.T.G. Technology Research Center::::: Kunmun ETG Research Center, 67-70, BhusaToli Road, KANPUR-208001, UP::::Contcat for ETG Examination ::Evening 06 PM to 09 PM daily::::Contcat in Person/ appointment by phone:::0512 2367773

ई०टी०जी० परीक्षण तकनीक का दूसरा केन्द्र :………. कुनमुन ई०टी०जी० रिसर्च इन्स्टीट्यूट, 67/70, भूसाटोली रोड, बर्तन बाज़ार, कानपुर 208001, उत्तर प्रदेश, भारत

आयुर्वेद का सबसे नया आविष्कार : इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी : ELECTRO-TRIDOSHA-GRAPHY {ETG}- New invention in Ayurveda

In Medical science, all examinations, scans are from the Allopathic medical science sides, for example Xray, Ultrasound, MRI, CT Scan, Microscopic examination etc. ELECTRO-TRIDOSHA-GRAPHY [E.T.G.] is the first and only scan of Ayurveda & the ultimate Ayurvedic diagnosis solutions' technique. Readers can get more information in the websites, mentioned below or search details in the blog. आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान का नया आविष्कार - इलेक॒ट्रो त्रिदोष ग्राफी, ई०टी० जी०, तकनीक से [१] आयुर्वेद के मॊलिक सिध्धान्त तथा [२] शरीर के रोग निदान , इन दोनो के विषय में Data sheet डाटा रिपोर्ट के स्वरुप में प्राप्त कर सकते है । वैद्यों और आयुर्वेदिक चिकित्सकों को इस विधि से प्राप्त डाटा पर आधारित होकर मरीज की चिकित्सा करने पर अवश्य लाभ होता है । इस तकनीक के बारे में अधिक जानकारी इसी वेब ब्लोग पर या अन्य स्वतन्त्र web blog पर देख सकते है ।

आपका स्वागत है : कृपया अपने विचार अवश्य लिखें

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Electro-Homoeo-Graphy {E.H.G.} : Homoeopathy mein naya Avishkar

EHG , vartaman samay mein Homoeopathy vigyan ke liye yah naya avishkar, ETG technology se nikal kar aaya hai. Is takanik se Homoeopathy ke teen siddhant "Psora, Sycosis, Syphilis" ka manav sharir mein vyapt star ko napa ja sakata hai, isake alava "Vital Force" ka star aur "sensitivity" ka star bhi naap sakatey hain. Is takanik se Homoeopathy ki dawaon ka chunav bhi kar sakatey hai, rog nidan bhi kar sakatey hai, jyada jankari ke liye upar darshayi gayi, web sites par jakar vivaran dekha sakatey hain

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Aapane Likha, bahut khusi huyi आपने लिखा, बहुत प्रसन्नता हुयी

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  • prakruti: ...........Reply by Dr.D.B. Bajpai...........anyone of you reader can translate this Japaniese Language into English or Hindi. Thanks
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