आयुर्वेद: आयुर्विग्यान:आयुर्वेदास्कैन:ई०टी०जी०:आयुषमन::AYUSH Therapies


On Demand from Ayurveda Doctors , Ayurveda Medical Practitioners and Patients from remote and diastal areas both from all States of India and from Foreign Land for facility availability of ETG AyurvedaScan examination at their nearet places.

We have decided to establish “Franchise” for ETG AyrvedaScan examination center in all cities of India in every State and so on Global stage.

The invest will be round about Rs 1,60,000 /- approximately. Anybody can procure and establish our Franchise, but prefenrence will be given to scientific background personals, Ayurveda practitioners and persons related to any medical branch and in any discipline.

Details can be had from the followings;

Manager [Franchise]
Kanak Polytherapy Clinic and Research Centre,
67/70, BhusatolI Road, Bartan Bazar,
KANPUR-208001, UP

For HomoeopathyScan and Unani-AyushScan , those who are interested , they should write seperately. The investment will be same and will be given to FIRST COME FIRST GAIN under policy.

आयुर्वेद की पहली और अकेली शरीर के परीक्षण की विधि “ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन” की सुविधा अभी तक मरीजों और डाक्टरों के लिये केवल कानपुर शहर मे ही उपलब्ध रही है, जहां देश और विदेश तथा दूर दूर से मरीज अपने शरीर का परीक्षण कराने के लिये हमारे मुख्य केन्द्र , “कनक पालीथेरेपी क्ळीनिक एवं रिसर्च सेन्टर, कानपुर मे आकर हमारे द्वारा दी जा रही सेवाओं का लाभ उठाते आ रहे हैं /

सबसे ज्यादा तकलीफ दूर के मरीजों के लिये थी, जो यहां नही आ सकते है, लेकिन वे परिक्शण कराना चाहते है / हमने ऐसे मरीजों के लिये और आयुर्वेद के डाक्टरों के लिये हमारे द्वारा स्थापित किये गये “फ्रेन्चाइजी” केन्द्रों के जरिये ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परिक्षण के लिये व्यवस्था करने का निर्णय लिया है /

हमने निर्णय लिया है कि ;
[१] देश के सभी राज्यों में प्रत्येक बड़े शहर में केवल एक “फ्रेन्चाइजी” स्थापित / नियुक्त किया जायेगा / वहां कोई दूसरा नही नियुक्त होगा /
[२] विदेशों मे भी केवल एक स्थान पर केवल एक फ्रेन्चाइजी नियुक्त होगा
[३] ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की फ्रेन्चाइजी कोई भी ले सकता है / चिकित्सा व्यव्साय से सम्बन्धित लोगों को प्राथमिकता दी जायेगी /
[४] फ्रेन्चाइजी के लिये धन का निवेश लगभग अनुमानित रुपया 1,60,000/- एक लाख साठ हज़ार का होगा /
[५] KPCARC, Kanpur द्वारा ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन से सम्बन्धित मशीन, साफ्ट्वेयर, एसेसरीज और आवश्यक ट्रेनिन्ग दी जायेगी और हमारे सन्स्थान द्वारा पूरी सहायता की जायेगी /

अधिक जानकारी के लिये पत्र लिखें /

मैनेजर (Frenchise),
कनक पालीथेरापी क्लीनिक एवं रिसर्च सेन्टर,
६७/७०, भूसाटोली रोड, बरतन बाज़ार,
कानपुर-२०८००१ , उत्तर प्रदेश

होम्योपैथिक डाक्टरों के लिये EHG HomoeopathyScan तथा यूनानी चिकित्सकों के लिये यूनानी-आयुष स्कैन Unani-AyurshScan के लिये होम्योपैथी के चिकित्सक और यूनानी स्कैन के लिये यूनानी चिकित्सक अलग से आवेदन कर सकते हैं / सभी चिकित्सा विधियों के पैकेज की इन्वेस्ट्मेन्ट समान है /

On Demand from Ayurveda Doctors , Ayurveda Medical Practitioners and Patients from remote and diastal areas both from all States of India and from Foreign Land for facility availability of ETG AyurvedaScan examination at their nearet places.

We have decided to establish “Franchise” for ETG AyrvedaScan examination center in all cities of India in every State and so on Global stage.

The invest will be round about Rs 1,60,000 /- approximately. Anybody can procure and establish our Franchise, but prefenrence will be given to scientific background personals, Ayurveda practitioners and persons related to any medical branch and in any discipline.

Details can be had from the followings;

Manager [Franchise]
Kanak Polytherapy Clinic and Research Centre,
67/70, BhusatolI Road, Bartan Bazar,
KANPUR-208001, UP

For HomoeopathyScan and Unani-AyushScan , those who are interested , they should write seperately. The investment will be same and will be given to FIRST COME FIRST GAIN under policy.

विश्व की आयुर्वेद की पहली और अकेली सम्पूर्ण शरीर का परीक्षण करने की तकनीक इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी ; ई० टी० जी० आयुर्वेदास्कैन सिस्टम तकनीक अब पूर्णरूपेण कम्प्य़ूटेराइज्ड हो गयी है / इसकी रिपोर्ट के द्वारा [१] आयुर्वेद के मौलिक सिध्धान्तों का शरीर में उपस्तिथि आंकलन और [२] रोग-निदान अथवा शरीर के सभी अन्गों के समान्य अथवा असामान्य अवस्था के ग्यान और pathophysiological और pathological बीमारियों का पता चल जाता है /

कम्प्य़ुटेराइज्ड तकनीक हो जाने से अब ETG AyurvedaScan Report कुछ मिनट में बन जाती है / इसका सबसे बडा फायदा आयुर्वेद के चिकित्सकों को यह होगा कि चिकित्सक रिपोर्ट के आधार और प्राप्त डाटा फाइन्डिन्ग्स को लेकर मरीज का तुरन्त इलाज शुरू कर सकते हैं /

ETG AyurvedaScan system की रिपोर्ट में समाहित Instant selection of Ayurvedic Remedies हिस्सा, आयुर्वेदिक चिकित्सकों को मरीज की आवश्यकता और उसके symptoms और बीमारी के हिसाब से दवाओं के चुनाव की सुविधा देता है जिससे चिकित्सक आयुर्वेद की सही और कारगर औषधियों का तुरन्त चुनाव करके मरीज का इलाज शुरू कर सकते हैं /

किसी समय और अब भी वर्तमान में बचपन से सुनते चले आ रहे थे कि कानपुर शहर में दुनिया के सबसे ज्यादा टी०बी० यानी राजयक्षमा यानी Tuberculosis के मरीज पाये जाते है / जब स्ट्रेप्टोमायसिन और पेन्सिलीन जैसी दबाओं का आविष्कार तक नही हुआ था, मेरे पिता जी टी०बी० के मरीजों का इलाज आयुर्वेदिक दवाओं से किया करते थे / उस समय टी०बी० रोग से ग्रसित होने का मतलब होता था जैसे आज कैन्सर जैसी लाइलाज बीमारी से कोई ग्रसित हो जाय यानी कि मृत्यु निश्चित और जीवन की आशा का कम होना /

लेकिन आधुनिक चिकित्सा विग्यान से एक फायदा लोगों को यह अवश्य हुआ कि टी०बी० के रोगियों का जीवन काल काफी बढ गया / शुरू शुरू के एलोपैथी के इलाज वास्तव में ब्रम्हास्त्र साबित हुये, लेकिन धीरे धीरे लोग दवाओं के प्रभाव से resistent होने लगे / तभी कुछ नयी दवायें आनी शुरू हुयी और उसके बाद कई सालों से इन्ही दवाओं द्वारा इलाज किया जाता रहा है / आज भी किया जा रहा है /

ऐसा नही है कि TDR के केसेज अभी अभी सरकार के सन्ग्यान मे आये हों / GSVM Medical College and Hospital कानपुर मे डाक्टर / प्रोफेसर और private चिकित्सक समाज ने काफी पहले TDR के मरीज देखे हैं /

मुझे भी कई मरीज देखने को मिले जिन्हे TB के इलाज की दवाओं से फायदा मिलना बन्द हो गया था / इस अवस्था में मैने मरीज को सलाह दी कि [ पहला -१] वह अपना TB के इलाज के लिये जो भी एलोपैथी की दवायें ले रहा है , उसे कतई न बन्द करे और उसे चालू रखे / [दूसरा-२] वह अपनी general health condition के improvement के लिये प्रयास करे, जिसमे व्यक्तिगत स्वच्छता, पौषटिक भोजन, खुली हवा में दिन में बैठना, sex से दूरी बनाये रखना, आराम करना और अपनी ताकत भर मेहनत करना आदि आदि [तीसरा-३] आयुर्वेदिक दवाओं का सेवन करना /

आयुर्वेदिक दवायें खाने के बाद धीरे धीरे मरीज की हालत सुधरने लगती है और वह पुन: अपना स्वास्थय प्राप्त कर लेता है / अधिकतर मरीज आयुर्वेदिक दवा की खुराकें लेते रहते है, इस भय से कि कहीं उनकी तकलीफ फिर से relapse न हो जाये /

मेरा अनुभव है कि TDR के मरीजों में चिकित्सकों को समन्वित चिकित्सा यानी combined treatment आजमाना चाहिये / आयुर्वेद मे ऐसी बहुत सी औषधियां हैं जो मरीज की बीमारी के साथ साथ उनकी General Health Condition को इम्प्रूव करके रोग मुक्त करती हैं /

होम्योपैथिक दवाओं की Lower पोटेन्सी का प्रभाव मानव शरीर में बहुत तेजी से होता है , उसी तेजी से जैसे आयुर्वेद या एलोपैथी की दवाओं के असर होते है /

लोवर पोटेन्सी से तात्पर्य सेन्टीसमल स्केल की ३ और ६ पोटेन्सी से है और डेसिमल स्केल की 2X या 3X या 6x पोटेन्सी से है /

क्ळीनिक में आये मरीजों पर किये गये प्रयोगों से प्राप्त निष्कर्ष को conclude करके देखा गया है कि अगर लोवर पोटेन्सी की दवाओं को मरीज के symptoms की totality के अनुसार मिलान करके कई दवाओं के combination को alternate करके उपयोग करते है तो मरीज का इलाज बहुत confidence के साथ कर सकते है / ट्राइटुरेशन वाली दवाओं को mixture बना कर दिया जा सकता है /

उदाहरण के लिये ; यदि किसी मरीज को Ulcerative Colitis के साथ पेट में गैस बनने की शिकायत है, पेट में ऐठन होती है और उसे हल्का बुखार है तो निम्न फार्मूला उपयोगी होता है /

Merc sol 3X
Carbo veg 3x
Magnesia Phos 3x
Kali Muriaticum 3x

इन चारों दवाओं को यदि २ या ३ या चार घन्टे के अन्तर से देते है तो मरीज की तकलीफ पहली खुराक खाने के बाद से ही सुधरने लगती है /

यदि होम्योपैथिक दवाये डायल्यूशन मे उपयोग करते हैं तो ३ या ६ पोटेन्सी की दवायें लेना चाहिये /
उदाहरण के लिये सभी तरह की टान्सिलाइटिस, फैरिन्जाइटिस, ळैरिन्जाइटिस के रोगियों के लिये निम्न फार्मूला उपयोगी होता है /

Phytolacca 3
Balladonna 3
Bryonia 3
Merc cor 3
Lachesis 3

इन सभी दवाओं की २ – २ बून्दे मिलाकर दिन में कई बार देने से बहुत सी respiratory tract की बीमारियों में आराम मिलता है और पहली खुराक खाने के बाद से ही आराम मिलनी शुरू हो जाता है /

होम्योपैथी की लोवर पोटेन्सी हमेशा बहुत तेजी से फायदा पहुचाती है और इसे Acute या sharp acute या semi acute या emergent painful condition में विश्वास के साथ मरीजों मे उपयोग करना चाहिये /

हर मरीज यह चाहता है कि उसे जो भी बीमारी है , उसका इलाज सबसे बेहतर किस सिस्टम में है / उसे आयुर्वेद का इलाज कराना चाहिये या एलोपैथी का इलाज कराना चाहिये या होम्योपैथी का इलाज कराना चाहिये या यूनानी का अथवा प्राककृतिक चिकित्सा या योग का या सर्जिकल बीमारियों की कौन कौन सी स्तिथियां किन किन बीमारियों को ठीक करने के लिये उप्युक्त हैं /

सधारण तौर पर मै वर्षों से यह observe करता चला आ रहा हूं कि शायद ही किसी व्यक्ति को यह पता हो कि उसे जो भी तकलीफ हुयी है , उसका सही इलाज कहां पर हो सकता है ? मैने अक्सर देखा है कि यह पहले भी देखता था और आज भी देखता हूं कि लोग गलत इलाज का शिकार होकर अपनी मौत अपने आप बुला रहे हैं और अपनी अन्तिम अवस्था के लिये खुद को गले लगा रहे हैं / बहुत से ऐसे मरीज देखे हैं जिनको डाक्टर साहब कभी टायफाइड बता रहे है, कभी unknown infection , कभी आन्तों की टी०बी०, कभी फेफड़े का न्य़ूमोनिया, कभी कुछ कभी कुच और जब मरीज मर गया तो सब्से बाद मे बता डाला कि इसे hepatitis B हो गयी थी, इसलिये मर गया /

वास्तविकता यह है कि लोग गलत इलाज से मर रहे हैं / गलत diagnosis से मर रहे है / एक उदाहरण देता हूं / एक सज्जन अपना इलाज किसी हकीम से करा रहे थे / हकीम साहब ने जो भी दवा दी हो यह मुझे नही पता है, लेकिन एक दिन यह सज्जन बेहोश होकर गिर पड़े , दोस्तों और सहयोगियों ने मोबाइल पर हकीम साहब को बुरा भला कहा, हकीम साहब ने हाथ खड़े कर दिये कि अब मै इनका इलाज नहीं करून्गा / बाद मेम यह मेरे पास आ गये / मैने उनका इलाज किया और उस इलाज से वह काफी ठीक हो गये / यह सज्जन अपना व्यापारिक काम भी कर रहे थे और दवा भी कर रहे थे / सब कुछ सामान्य जैसा था / मुझे उनकी घर की स्तिथि पता थी / मरीज के तीन लड़्कियां हैं जिनमें एक तो शादी लायक है और दूसरी शादी के लिये तैयार है / म्ररीज का काम ब्याह शादियों में मडप सजाने का है / ब्राम्हण परिवार से हैं / मैने इनका ई०टी०जी० परिक्षण किया था , जिसमें इनको Psychosomatic Disorders निकला था / मैने मरीज से कहा कि उसे दिमागी उलझन के कारण शारीरिक बीमारियां हैं / इस पर मरीज मेरे ऊपर बहुत नाराज हुआ और कहा कि आप तो मुझे पागल बताये दे रहे हैं / मैने समझाया कि उसे दिमागी चिन्ता , आर्थिक दबाव से उतपन्न विषाद आदि के कारण तकलीफ है / बाद मे मैने परिवार वालों के कहने पर मरीज की तसल्ली के लिये उसे दूसरे डाक्टरों के पास जाने के लिये कहा /

परिवार के लोग उसे एक Heart specialist के पास ले गये / उसने ECG, TMT , Blood test . Ultrasound, Xray सभी करा दिये / सभी Normal सामन्य निकले और स्पेशियलिस्ट्ने कहा कि उसे कोई हृदय से सम्बन्धित बीमारी नही है / मरीज के यह पूछने पर कि जब ्बीमारी नही है तो वह अब क्या करे? Heart specialist ने कहा कि वह किसी MD डाक्टर को दिखाकर सलाह ले / मोहल्ले के लोगों नें मरीज को सुझा दिया कि वह किसी हड्डी वाले को दिखा दे / हड्डी वाले ने कहा कि उसको कोई हड्डी की बीमारी नही है , वह भी बहुत से pathological examination के बाद बताया और कहा कि किसी KIdney specialist को अपना गुर्दा चेक करा दे / मरीज गुर्दा वाले के पास गया, उसने कहा कि लग रहा है आपको कैन्सर ले लक्शण हो रहे हैं इसलिये कानपुर मे इलाज न करायें, लखनऊ जाकर SGPGI में इलाज करायें /

एक दिन मरीज मेरे पास आया और यह सब राम कहानी बतायी / उसने कहा कि मुझे कहीं से भी आराम नहीं मिली है / आपकी दवा खाकर मुझे बहुत आराम मिली थी, वह भी सब आराम खतम होकर नई नई दूसरी तकलीफें पैदा हो गयी हैं / मुझे दिन पर दिन परेशानी हो रही है , अब आप फिर से इलाज करिये / मुझे ढेर सारी दवायें खानी पड़ रही है , जिससे मेरा पेट खराब हो गया है मैने उससे कहा कि अभी वह अपने डाक्टर की दवा का कोर्स पूरा कर ले / जब यह कोर्स पूरा हो जाये उसके चार महीने बाद इलाज के लिये आना /

मेरा मरीज से यह कहने का मकसद था कि वह तमाम तरह की प्रेस्क्राइब की गयी Antibiotics, Minerals, Steroids युक्त दवायें ले रहा था जिसके साइड इफ़ेक्ट्स लग रहे थे / अगर मै इस समय आयुर्व्दिक या होम्योपैथिक इलाज शुरू करता तो उसकी सभी तकलीफें एक्दम से उभर कर जानलेवा बन जाती और मेरे लिये अनावश्यक मुसीबत बन जाती, इसलिये मैने उसको मना किया कि वह जब भी मेरे पास इलाज के लिये आये , वह चार महीने तक कोई भी दवा न ले और उसके बाद इलाज के लिये आये / चार महीने में एलोपैथी की दवाओं के असर कम हो जाते हैं और इस समय आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक का इलाज करना सबसे ज्यादा सुर्क्षित और लाभदायक होता है /

 

फेफडे़ के कैन्सर से ग्रसित एक ७२ साल के रोगी का शास्त्रोक्त आयुर्वेदिक इलाज ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित फाइन्डिन्ग्स को लेकर किया गया /

इस रोगी का इलाज कानपुर के चिकित्सको द्वारा किया गया , लेकिन उसे आराम नहीं मिली / रोगी को अति कष्टदायक खान्सी , जिसे कुछ चिकित्सकों ने बताया कि ब्रान्काइटीस है कुछ ने कहा दमा या अस्थमा है, किसी ने कहा कि टी०बी० है / खून की जान्च, एक्स रे, अल्ट्रा साउन्ड से कुछ विशेष निदान नहीं हो पाया, न हीं रोगी को दी गयी एलोपैथी की दवाओं से कोई आराम मिली / एक चिकित्सक ने FNAC जान्च कारायी तब पता चला कि मरीज को फेफडे़ का कैन्सर हो गया है / एलोपैथी के चिकित्सक की दवा से लाभ न मिलता देखकर , मरीज आयुर्वेद की चिकित्सा कराने के लिये मेरी क्ळीनिक में आया /

मैने उसके सारे प्रेस्क्रिप्शन, जान्चे और एक्स रे आदि देखने के बाद कहा कि आपको एक ETG AyurvedaScan examination कराना पडे़गा , तभी पता चलेगा कि शरीर में क्या क्या दोष हैं और क्या क्या बीमारियों का स्वरूप है ?

मरीज जब पहली बार आया तो वह चल नहीं पा रहा था और उसे तीन लोग पकड़ कर क्ळीनिक में लाये थे / उसकी सान्स बहुत तेज चल रही थी और वह सान्स के तेज चलने के कारण बोल नहीं पा रहा था , उसे बलगम के साथ खून से सना हुआ कफ निकल रहा था / तेज खान्सी रुकने का नाम नहीं ले रही थी / मरीज बड़ा कमजोर था / उसकी इस दयनीय स्तिथि में मुझे उसका ई०टी०जी० परीक्षण करना पडा / इस रोगी की दशा देखकर मुझे उसकी पीड़ा की गहरायी का अन्दाजा हो रहा था /

परीक्षण के पश्चात फौरी तौर पर मैने उसको दवायें दी और उसे दूसरे दिन बुलाया ताकि उसका सुचारु रूप से इलाज ई०टी०जी० रिपोर्ट पर आधारित किया जा सके /

..[ बाकी अगली पोस्ट में ....शीघ्र ही..... to be loaded further material soon in future ]

जाड़े के दिनों में रातें बहुत लम्बी होती है / दिन छोटे होते है और सुबह तथा शाम को ठन्ड होने लगना एक कुदरती स्तिथि है / मनव शरीर का बाहरी तापमान ९६.५ से लेकर ९८.५ तक होता है / मानव के अन्दर मरकज का तापमान १०२ डिग्री के आसपास होता है / यह शारीरिक गर्मी शरीर के अन्दर होने वाली मेटाबालिक गतिविधियों के कारण से होती है /

लगातार सर्दी लगते रहने से अन्दर का केन्द्रीय तापमान कम होने लगता है / शरीर के अन्दर के घटते ताप्मान के कारण शरीर का ताप्मान जब घटना शुरू होता है , तब हाइपोथरमिया की स्तिथि बनती है / हाइपोथर्मिया यानी सरीर का तापमान का घटना और घटते जाना होता है / शरीर के अन्दर और बाहर बहुत अधिक ठन्ड का अहसास होना , ऐसा लगना कि शरीर बर्फ जैसा ठन्डा हो रहा है, ऐसा महसूस होना जैसे बहुत ठन्डे पानी से स्नान कर रहे हों / हाथ पैरों के साथ साथ धड़ का बर्फ जैसा ठन्डा हो जाना आदि बातें सामने आती है /

इस तरह की स्तिथि में शरीर का Basic Metabolic Rate बिगड़ता है /

यह स्तिथि तब पैदा होती है, जब ऐसे वाहन से सफ़र कर रहे हों, जिनमें हवा बहुत तेज लग रही हो और शरीर को गर्म रखने के साधन न हों / ऐसी परिस्तिथि हो, जहां शरीर को गर्म रखने के कोई उपाय न हों और ठन्डक में कई घन्टॊं तक बैठना पडे या रात में सोना पडे़ / रात में सोते समय शरीर को गर्म रखने के लिये रजाई जैसे साधन न हों और रात भर ठिठुरना पडे़ /

ऐसे महौल में शरीर को सर्दी expose कर जाती है और हाइपोथरमिया की स्तिथि पैदा हो जाती है /

जिन लोगों को हृदय में रक्त का थक्का बनने की शिकायत हो अथवा Brain Stroke के मरीज हों , जिनको रक्त में थक्का बनने की शिकायत हो , ऐसे रोगी बहुत सावधान रहें / ठन्डक के exposure से उनकी तकलीफें बढ सकती है /

क्या करें ?

१- जहा सोने का स्थान हो , वह वायु के झोन्को से निर्वात हो /
२- सोते समय शरीर को गर्म रखने के लिये उपयुक्त रजाई, कम्बल, ऊनी वस्त्र आदि का इन्तजाम कर ले
३- शरीर को ठन्डक से बचाने के लिये शरीर को गर्म रखने वाले वस्त्रों का उपयोग करे /
४- ठन्डे पानी का उपयोग मत करें / पीने के लिये पानी में थोड़ा सा गर्म पानी मिला ले और तब पानी पियें /
५- अधिक ठन्डा पानी पीने से पेट का सामान्य तापमान कम होता है, जिससे अधिक ठन्डक का अनुभव होता है /
६- कमरे को गर्म बनाये रखने के लिये हीटर आदि का उपयोग करें /
७- ठन्डक लग जाने की स्तिथि में अपने दोनों पैर गरम और गुन्गुने पानी में १० मिनट तक रखे / यह काम बन्द कमरे में जहां हवा का झोन्का न आ रहा हो वहां करें, जिस समय पैर को गरम पानी में सेन्क के लिये रखें, उस समय शरीर को ऊनी शाल से ढक लें /
८- Cold Exposure की स्तिथि में अपने पारिवारिक चिकित्सक से सलाह लें और उचित उपचार लें /

फिल्म कलाकार देव आनन्द का मै हमेशा फैन रहा हूं / बचपन में जब मैने पहली फिल्म देखी थी , वह थी “नास्तिक” , जिसमें नालिनी जयवन्त हीरोइन थी / नलिनी जयवन्त का चेहरा और एक्टिन्ग मुझे पसन्द आयी / मै चोरी से फिल्म देखता था / कुछ हीरोइनें मुझे अच्छी लगती थी जैसे, नालिनी जयवन्त, श्यामा, निम्मी / हीरो उस समय मेरा कोई फेवरेट नहीं था / कारण यह था कि उस समय स्टन्ट फिल्में , जो मार धाड़ से भरपूर होती थी, उनके हीरो जैसे सोहराब मोदी, रन्जन, महिपाल, जयराज आदि अधिक जानदार लगते थे / एक बार एक स्टन्ट फिल्म देखने गया, तो टिकट नही मिली / इस कारण से एक दूसरे सिनेमाघर गया और यह वह फिल्म थी,जिसमें शीला रमानी हीरोइन थी और देव आनन्द हीरो / किशोरावस्था थी, इसलिये मार धाड़ वाली फिल्में मुझे और मेरे मित्रों को बहुत अच्छी लगती थी / जिस फिल्म में लड़ाई झगड़ा के सीन न हो, फाइटिन्ग न हो वह फिल्म देखना बेकार समझते थे / मै रोमान्टिक फिल्में कम देखता था, जिस मार धाड़ वाली फिल्म को देखने आये थे उसका टिकट नहीं मिला / घर वापस आना नहीं चाहते थे, लिहाजा साथ के मित्रों के आग्रह पर देवानन्द की फिल्म जिसमें शीला रमानी हीरोइन थी और हीरो देवानन्द थे, देखने के लिये राजी हो गया /

यह पहली रोमान्टिक फिल्म थी, जिसे मैने रुपहले पर्दे पर देखा / देव आनन्द मुझे आकर्षक हीरो लगे / फिर बाद में मैने उनकी फन्टूश फिल्म, जिसमें ऐ मेरी टॊपी पलट के आ, न अपने फन्टुश को सता और दुखी मन मेरे सुन मेरा कहना जैसे आकर्षक गाने थे, मुझे बहुत पसन्द आयी / देव आनन्द का खिलान्दड़ा अन्दाज और उनके शरीर के लटके झटके तथा एक्टिन्ग के अन्दाज को देखकर मै उनका मुरीद हो गया / फिर मैने उनकी लगभग सभी फिल्में देखीं /

मुझे सिने स्टारों मे केवल कुछ हीरो पसन्द आये / नम्बर एक पर तो देवानन्द ही है / इसका कारण यह रहा कि मुझे ऐसे लोग पसन्द हैं जो हमेशा गमगीन रहते हैं, हमेशा अपना दुखड़ा रोते रहते हैं, खुद तो हन्सते हसाते नहीं, जहां बैठते हैं , वहां का माहौल भी गमगीन बना देते है / मेरी आदत है कि मै उन लोगों के बीच बैठना कम पसन्द करता हूं , जो महौल में गमगीनी पैदा कर देते है / नम्बर दो पर मेरी पसन्द के हीरो हैं शम्मी कपूर और नम्बर तीन पर धर्मेन्द्र /

कुछ दशक पहले दिल्ली से प्रकाशित साप्ताहिक हिन्दुस्तान पत्रिका में देव आनन्द ने कई लेखों की एक सिरीज लिखी थी, प्रकाशित हुयी थी / इसमे उन्होने अपने मन की बात कहते हुये लिखा था, [१] कि वे पीछे मुड़्कर नहीं देखते कि क्या हो चुका है [२] कि आगे जो भी करने का विचार होता है , कोशिश करता हूं कि वह पहले से ज्यादा अच्छा हो [३] कि जब मै एक काम खत्म कर लेता हूं तो मै चुप्चाप नहीं बैठता और दूसरे काम की शुरुआत के लिये सपने देखने लगता हूं /

जब लेख मे मैने देवानन्द का लिखा यह पाठ पढा तो इससे मै बहुत inspire हुआ और बहुत प्रभावित भी / आज भी यह बातें मुझे याद आती हैं / उनके लटके झटके, उनकी चाल, उनकी अपनी गरदन बायीं तरफ झुकाकर और बायें हाथ को झटके के साथ बाहर फेंकने का एक्शन, उनकी चाल और चलते समय दोनों हाथों का सामने की तरफ लय बध्ध होकर एक खास अन्दाज में और खास एकशन मे चलना, उनका आन्खों द्वारा विभिन्न भावों का दरशाना और इसके साथ उनकी खास आवाज में डायलागों की डिलीवरी हमे सालों साल तक उनकी याद दिलाती रहेगी / सभी जानते है कि इस भौतिक सन्सार को छोड़कर सबको एक न एक दिन जाना है / ८८ साल की उमर कम नहीं होती / देव आनन्द भले ही इस दुनियां में न हों, लेकिन उनकी फिल्मी कृतियां , उनकी फिल्में उन्हे हमेशा जिन्दा बनाये रखेन्गी / जो भी देखेगा, वह उन्के अल्हड़्पन, मस्त मौला अन्दाज, इश्क करने की फर्माइश और जिन्दा दिली को कभी भी नहीं भूल पायेगा, देवानन्द जैसा कलाकार अब कभी भी फिर नहीं पैदा होगा /

हमे शोक न मनाकर इस बेहतरीन और बेमिसाल कलाकर को देवानन्द के इसी अल्हड़ पन के अन्दाज में अन्तिम विदाई देना चाहिये /

जाड़े के दिनों मे जब ठन्डक बढती है या घटती है तब सबसे पहले शुरुआत में गले की खरास, खान्सी और श्वास नली की दिक्कते पैदा हो जाती है / ऐसा इसलिये होता है क्योन्कि घर के अन्दर रहने में और घर के बाहर निकल कर आने में मौसम की हवा का प्रभाव शरीर के श्वसन सन्सथान को सबसे पहले प्रभावित करता है / कारण वही है , हवा के अन्दर समाहित ठन्डक का स्तर और शरीर की गर्मी से उसका ताल्मेल ठीक से न बैठ पाना / यह सीधे सीधे cold exposure की स्तिथि होती है / जैसे ही शरीर की conditioning होने का procedure शुरू होता है, वैसे ही दबी हुयी inflamatory condition precipitate होकर अपना inherent effects सतह पर ला देती है और इस स्तिथि में तकलीफ के लक्षण प्रकट हो जाते है / जिन्हे खान्सी, गले की खरास और श्वास नली से सम्बन्धित विकार समझा जाता है /

बेहतर यही है कि सभी लोग उस कहावत को हमेशा ध्यान मे रखे और वह है “Prevention is better than Cure” / थोडी सी सावधानी से सभी लोग बड़ी तकळीफें होने से बच सकते हैं /
इसलिये जब भी घर से बाहर निकलें शरीर को गर्म बनाये रखने वाले कपड़े चाक चौबन्द होना चाहिये / बहुत ठन्दी हवा में ज्यादा देर बाहर न रहें / मैने observe किया है कि जिनको Cervical spondylitis या रीढ की कोई तकलीफ होती है , उनको ठन्डक बहुत महसूस होती है और इसी कारण से उनका शरीर बहुत अकड़ता है और मान्शपेशियों मे तकलीफ पैदा हो जाती है / ऐसे लोगों को Cold air exposure बहुत जल्दी होता है /

जिन्हे खान्सी हो जाय वे आयुर्वेदिक औषधिया या घरेलू उपचार ले / खान्सी के लिये एक चम्मच अदरख का रस लेकर एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर दिन में कई बार सेवन करना चाहिये / इसमे यदि आधा चम्मच हल्दी का चूर्ण मिला लें तो अधिक प्रभावकारी औषधि हो जाती है / गले की खरास और शवसन सन्सथान की तकलीपॊं में भी यही फार्मूला कामयाब है / लेकिन इसकी मात्रा अधिक कर लेनी चाहिये /

खान्पान मे परहेज करने और आयुर्वेदिक दवा खाने से ऊपर बतायी गयी तकलीफें एक ही दिन में
ही ठीक हो जाती हैं और आराम मिल जाती है / लेकिन यदि Cold exposure की intensity अधिक होगी तो ठीक होने में की दिन लग जाते है /

आयुर्वेदिक दवाये, जिन्हे खान्सी आदि तकलीफों में उपयोग कर सकते हैं /
१- त्रिभुवन कीर्ति रस
२- गोदन्ती रस
३- आनद भैरव रस
४- तालीशादि चूर्ण
५- सीतोपलादि चूर्ण
६- चित्रक हरीतकी
७- वासावलेह

आयुर्वेद में हजारों की सन्ख्या में खान्सी जैसी तकलीफों के लिये फार्मूले दिये गये है / उक्त दवाये किसी वैध या आयुर्वेद डाक्टर से जानकारी प्राप्त करके प्रयोग करे तो सबसे अच्छा होगा /

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Aapane Likha, bahut khusi huyi आपने लिखा, बहुत प्रसन्नता हुयी

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