A CASE OF H.I.V. POSITIVE WITH TUBERCULER INFECTION ; एच० आई०वी० के साथ टी०बी० से इन्फेक्टेड मरीज का केस


कुछ दिन पहले एच०आई०वी० से infected एक मरीज का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और इसके तत्सम्बन्धित परीक्षण किये गये /

मरीज की उम्र देखकर मुझे बहुत आश्चर्य हुआ क्योन्कि उसकी उमर के वल २१ साल की है / रोगी के रोग इतिहास को जानने की इछ्छा हुयी और मैने उत्सुकतावश उससे सारी तकलीफ बताने के लिये कहा / रोगी के साथ उसके गार्जियन भी थे /

मुझे यह मालूम करना था कि इतनी छोटी अवस्था मे इस नवयुवक को क्यो H.I.V. जैसा सन्क्रमण हुआ है /

जैसा मुझे बताया गया कि इस रोगी का ROAD accident हुआ था / इस दुर्घटना के बाद उसे अस्पताल मे भरती कराया गया था जहां इस रोगी को कुछ लोगो का रक्त चढाया गया था / इन्ही रक्त दाताओ मे कोई भी व्यक्ति एच०आई०वी० से इन्फेक्टेड होगा इसीलिये जब इस  रोगी को रक्त चढाया गया तो इसके भी HIV Infection  पैदा हो गया /

कुछ दिनो तक तो इसको जो तकलीफे हुयी उससे इलाज कर रहे डाक्टर यह समझ ही नही पाये कि इसे बीमारी क्या हो रही है ?

जब प्रदेश के एक चिकित्सा सन्स्थान मे इस रोगी को दिखाया गया तो सारी जान्च करने के बाद पाया गया कि इसे HIV Infection है /

कुछ दिनो तक HIV  का इलाज करने के बाद इस रोगी का खून जब फिर टेस्ट किया गया तो पता चला कि इसे टी०बी० यानी ट्यूबर्कुलोसिस का भी infection  साथ साथ है /

कई साल तक इलाज करने के बाद भी इस रोगी को जब कोई माकूल इलाज नही मिला और इसकी तकलीफे नही ठीक हुयी तब इसको किसी  हमारे यहा से इलाज करा चुके रोगी ने इलाज के लिये हमारे केन्द्र मे जाने की सलाह दी /

मैने इसका ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और अन्य तत्सम्बन्धित टेस्ट किये और जड़ मूल की diagnosis  करके इस केस की अनालाइसिस की गयी /

नीचे दिये गये ट्रेस रिकार्ड मे आयुर्वेद के मौलिक सिध्धन्न्त यथा वात और पित्त और कफ दोष का शरीर मे कितनी उपस्तिथि है इसको जानने के लिये शरीर मे निश्चित किये गये points  की mapping के स्थान का रिकार्ड किया गया है / ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी मशीन के जरिये लिये गये ट्रेस रिकार्ड HORIZONTAL POSITION य़ा SUPINE POSITION मे ही किये जाते है /

इस मरीज का यह रिकार्ड ऊपर बतायी गयी शारीरिक स्तिथि मे की गयी है / ट्रेस रिकार्ड मे OBSERVATION से पता चला है कि ;

[१] रोगी को त्रिदोषज यानी सन्निपातिक यानी वात और पित्त और कफ तीनो दोषो का मिश्रित AETIOLOGY  मौजूद है /

[२] वात स्थान और पित्त स्थान और कफ स्थान की रिकार्डिन्ग pattern सीधी straight line मे  न होकर अर्ध चन्द्राकार और गोलाकर ZIG ZAG PATTERN   मे है /

यह तभी होता है जब electrical diffusion रुक रुक कर आता है और यह एक जैसा नही होता है / ELECTRICAL DIFFUSION अगर रुक रुक कर आते है और रिकार्ड होते है तो यह एक तरक की शारीरिक anomaly  होती है , इसके कई मायने आयुर्वेदिक सिधधान्तो के हिसाब से interpret  किये जाते है /

यह तय किया गया कि इस रोगी को त्रिदोषज व्याधि है /   HIV001

मरीज की व्याधि का और अधिक और pin point सुस्पष्ट निदान ग्यान का अध्ध्य्यन करने के लिये  इस मरीज का TREAD MACHINE E.T.G. AYURVEDASCAN  परीक्षण किया गया /

TREAD MACHINE  मे दौडाकर परीक्षण करने से मरीज का शरीर VERTICAL POSITION   मे होता है / इससे शरीर के सारे viscera फैलते है और उनमे रक्त सन्चार अधिक बढता है / ELECTRICAL DIFFUSION की गति बढती है जिससे शरीर के अन्गो की वास्तविक कार्य क्षमता pathophysiology और pathology जो HIDDEN STAGES   मे होती है , वह सब उभर कर सामने आ जाती है /

नीचे उन्ही सब स्थानो का रिकार्ड किया गया है जो ऊपर के स्थानो मे रिकार्ड करके प्राप्त किया गया है / नीचे के रिकार्ड का पाठक अवलोकन करे /

[१] वात स्थान का रिकार्ड देखने पर पता चलता है कि यहां की रिकार्ड की गयी ट्रेसेस शरीर की गर्मी से बाधित है और अन्दरूनी accumulated heat जितनी normal condition  मे  exhaust  होना चाहिये , ऐसा नही हो पा रहा है /

[२] Electrical diffusion  की स्तिथि उसी तरह की है लेकिन इसका लेवेल अधिक है जैसा कि horizontal position  मे है /

[३] पित्त और कफ स्थान के रिकार्ड देखने से पता चलता है कि इस रोगी को LIVER & PANCREAS & SPLEEN   इन तीनों की CUMULATIVE problem  है / यह कितना कितना और किस स्तर का है यह measurement  के बाद ही पता चलता है /

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LUMBER REGION  से लिये गये रिकार्ड से पता चलता है कि बड़ी आन्त और छोटी आन्त दोनो की कार्य विकृति उपस्तिथि है और उनमे IRRITABLE BOWEL SYNDROMES तथा  INFLAMMATORY CONDITION OF BOWELS  उपस्तिथि है /

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अन्दरूनी गले और दोनो फेफड़ो का परीक्षण करने के बाद पता चला है कि इसके फेफड़ो मे विकृति है / फेफ्ड़ो की विकृति को जान्चने के लिये चार से अधिक स्थानो का मुख्य रूप से परीक्षण करते है / इसके अलावा रक्त का परीक्षण करके पता करते है कि शारीरिक क्षय की स्तिथि कैसी है और chemical chemistry  किस तरह की है /

रोगी का पहले ही परीक्षण हो चुका था और उसकी diagnosis establish  की जा चुकी थी /

लेकिन आयुर्वेदिक चिकित्सा के लिये इस तरह के परीक्षण की एक सीमित सहायता निदान के लिये मिलती है /

सन्निपातिक अथवा त्रिदोषज रोग  के लिये वात क्षीण और पित्त अति बृद्द और कफ अति क्षीण    अवस्था का मरीज के अन्दर उपस्तिथि मिला है / इस तरह  के COMBINATION   से यह मदद मिलती है कि किस तरह की औषधियो का चयन और कैसा management  मरीज का होना चाहिये /

पित्त की अति ब्रध्धि को शान्त करने के लिये उपयुक्त औषधियो का चयन किया गया है और रोगी को आयुर्वेदिक दवाओ को खाने के लिये prescription  दिया गया है /

H.I.V. और TUBERCULOSIS   से ग्रसित इस रोगी को आयुर्वेद की चिकित्सा करने से अराम मिला है /

यह establish  करने का आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान को एक evidence base  मिला है कि एच०आई०वी० के रोगी का इलाज  “सन्निपातिक” या “त्रिदोषज” आधार पर करना चाहिये / इससे एच०आई०वी० रोगी की  चिकित्सा और इलाज करने मे अवश्य सफलता मिलती है /

CERVICAL SPONDYLITIS ; AYURVEDA CURES AND ROOT OUTS DISEASE CONDITION ; सर्वाइकल स्पान्डिलाइटिस ; आयुर्वेद चिकित्सा से सम्पूर्ण रोग मुक्ति


सर्वाइकल स्पान्डिलाइटिस CERVICAL SPONDYLITIS  यह रोग या बीमारी गरदन की रीढ की सात गुरियो या सात अलग अलग रीढ की हड्डियो के हिस्से और इन हद्दियों के  जोड़ो के बीच पैदा होने वाली कार्य विकृति या विकृति के कारण पैदा वात-दोष अथवा inflammation के कारण “मान्स्पेशियो और इसके सहारे जाने वाली नसो और नाडियों और लीगामेन्ट्स और टेन्डन्न्स ” मे सूजन आने के कारण relaxion and contraction की कार्य क्षमता मे कमी आने यानी इन हिस्सो का कड़ा होना और ्सामान्य मुलायम होने की अवस्था का कठोर होने की अवस्था की ओर जाने और इस बदलाव के होने के कारण से पैदा दबाव की एवज से यह बीमारी पैदा होती है /

नीचे माडल के द्वारा दर्शाया गया है कि रीढ की हड्डी के सर्वाइकल भाग  की सात गुरिया किस तरह से एक दूसरे से जुड़ी होती है और गर्दन को घुमाने मे मदद करती हैं /

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पहले कहा जाता था कि यह रोग ४० साल और इससे अधिक की उम्र के लोगो को होता है लेकिन अब हाल यह है कि आधुनिक समय की जीवन शैली के जीने के आदी हो चुके सभी उम्र के लोग इस बीमारी से प्रभावित होने लगे है / चाहे बच्चे हो या अधिक उम्र के किशोर  अथवा जवान या बूढे लोग, सभी के सभी इस बीमारी की चपेट मे आने लगे है / महिलाये और पुरुष दोनो ही ब्रराबर बराबर इस बीमारी की चपेट मे आ चुके है /

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सर्वाइकल स्प्पान्डिलाइसिस रोग मे बहुत तरह के लक्षण मिलते है / यह बहुत विचित्र तरह की बीमारी है जिसके कारण चिकित्सको को वास्तविक रोग निदान करने मे बहुत तरह का भ्रम अथवा गलत diagnosis  होने का खतरा बना रहता है / गलत निदान होने से यह समझना बहुत मुश्किल होता है कि डाक्टर बजाय सर्वाइकल स्पान्शिलाइटिस की तकलीफ के किसी दूसरी बीमारी का इलाज करना   शुरू कर देते है / 

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लिहाजा मरीज की हालत अच्छी होने के बजाय और अधिक खराब होने लगती है / यह तो एक बात हुयी द्सरा सबसे खराब असर यह होता है कि दवाओ का कुप्रभाव भी शरीर मे पड़्ने लगता है और इसके कारण सर्वाइकल की तकलीफ होना तो दूर इससे भी बड़ी बीमारिया मरीज के लिये पैदा हो जाती है /

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जिनका इलाज इसी बीमारी के साथ साथ चलने लगता है / फिर तीसरी बीमारी पैदा हो जाती है और इसका भी इलाज चलने लगता है और यह सिल्सिला कहां तक चलता है यह कोई नही जान्ता /

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नीचे के माडल मे सर्वाइकल हिस्से को देखिये कि किस प्रकार से रीढ की हड्डी का यह हिस्सा लीगामेन्ट्स , टेन्डन्स, मान्स्पेशियों से जुड़ता है और किस तरह से गरदन को सीधा टिकाये रखता है / अगर यह सब articulation  न हों तो किस तरह गरदन टिक सकती है यह सोचने का विषय है /

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नीचे के चित्र मे कौन कौन सी गरदन की मान्श्पेशिया कितनी लम्बाई की होकर और सिर से सीने और पेट तक फैलती जाती है , यह दर्शाया गया है / वास्तव मे तब सर्वाइकल की तकलीफ होती है तो शरीर की बहुत सी मान्श्पेशियां affected  हो जाती है /

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इस तकलीफ के बहुत विचित्र प्रकार के लक्षण देखने मे आते है जिन्हे निदान ग्यान के लिये समझना बहुत आवश्यक होता है / नीचे यही सब बताने का प्रयास किया गया है कि किस प्रकार सर्वाइकल स्पान्डिलाइटिस के कारण क्या क्या दिक्कते सामने आती है /

1- बहुत से लोग सिर दर्द की समस्या से जूझा करते है / कितनी ही दवा और इलाज  कराते रहते है लेकिन सिर का दर्द जाने का नाम नही लेता है / निदान करने वाले चिकित्सक इसका नाम  MIGRAIN  / CLUSTER HEADACHE / NEURALGIC HEADACHE / NEURALGIA  आदि आदि नाम बोधन से रोग बताते है /

2-  बहुत से रोगी सिर घूमने और चक्कर आने की शिकायत किया करते है / ऐसे चक्कर लेटने पर अथवा लेटकर ऊठने पर अथवा चारपायी या बिस्तर पर करवट बदलने या सिर मोडने पर अथवा गरदन घुमाने अथवा नीचे झुककर काम करने पर अचानक आ जाते है , जिसकी कोई सम्भवना नही होती है / अचानक इस तरह से चक्कर आ जाने से बहुत से रोगी घबरा जाते है कि उनको यह क्या हो गया है ?

३= बहुत से रोगियों को हाथ की उन्गलियों मे झन्झनाहट होने लगती है जैसे कोई कीड़ा रेन्ग रहा हो या बहुत सी चीटीयां चल रही हों / यह सुन्नपन या झन्झनाहट दोनो हाथो मे बहुत से मरीजो को होने लगती है जिससे वह कोई काम नही कर पाते है /

४- बहुत से रोगी कन्धे की मान्श्पेशियो और कन्धे का दर्द बताया करते है / कोई कोई पीठ का दर्द बताते है / निदान्ग्य इसे peri arthritis / shoulder pain / muscu;lar pain बताते है /

५- बहुत से लोगो को सीने के ऊपरी हिस्से मे दर्द होने लगता है जिसे वह हृदय रोग समझने लगते है / हृदय रोग और सर्वाइकल स्पान्डिलाइटिस के दर्द मे फर्क होता है / सर्वाइकल स्पान्डिलाइटिस का दर्द गर्दन के पीछे की मान्श्पेशियो से होकर सीने के ऊपरी हिस्से की ओर आता है / यह दर्द गर्दन घुमाने या कन्धा घुमाने और सीने की मान्श्पेशियो को कस कर दबाने से शान्त हो जाता है / लेकिन हृदय के दर्द मे ऐसा नही होता है / बल्कि दिल का दर्द बीच सीने से उठता है और मान्श्पेशियो को दबाने से नही कम होता है और हिलने दुलने से बढता है / इसलिये diagnosis  मे बहुत अहतियात बरतने की जरूरत होती है ताकि किसी किस्म का कोई सन्शय न रहे / ऐसे रोगियो का ECG और TMTECG सामान्य निकलते है और कोई विकृति नही पायी जाती है /  ECG CONTINUOUS MONITORING सिस्टम द्वारा लम्बे समय यानी चार या पान्च घन्टे बाद तक लगातार चेक करने पर किसी प्रकार की HEART  / CARDIAC विकृति नही मिली  है /

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५-बहुत से रोगियो को गरदन के चारो ओर बहुत दर्द होता है जो गरदन को दाये अथवा बाये घुमाने या ऊपर नीचे करने से बहुत तेजी से बढता है और स्थिर अवस्था मे रखने पर दर्द ठीक रहता है / पन्खे की हवा मे अथवा तेज हवा के झोन्के से यह दर्द और बढता है / सिर ढक लेने पर ऐसा दर्द कम हो जाता है /

६- बहुत से रोगियो को दर्द नही होता यानी उनकी तकलीफ PAINLESS  होती है लेकिन ऐसे मरीजो को  दर्द की बजाय NUMBNESS यानी सन्ग्या शून्यता या सन्ग्या हीनता का अनुभव हो्ता है / यानी उनको पता ही नही चलता कि उनके गर्दन है भी या नही / मरीज को चुटकी काटने का पता भी नही चलता और न ही किसी नुकीली चीज को चुभोने पर भी पता नही चलता कि उनको कोई नुकीली चीज चुभाई जा रही है /

७- बहुत से रोगियो को ऐसा अहसास होता है कि उनके सिर पर कोई बर्फ से भरी हुयी टॊपी रख दी गयी है और उनको इतनी ठन्डक लगती है कि उनको गरम बनाये रखने के लिये सिर पर साफा या मोटा कपड़ा ढकने की जरूरत पड़ जाती है /

८- यह भी देखने मे आया है कि जिन मरीजो को CERVICALSPONDYLITIS की तकलीफ होती है उनको ठन्डक बहुत लगती है / ऐसे मरीजो को ठन्डा पानी छूने से भी गरदन मे दर्द होने लगता है / अगर स्नान करने का पानी ठन्डा है तो जैसे ही स्नान ऐसे पानी से करते है तो उनकी गर्दन अचानक अकड़ जाती है और दर्द होने लगता है /

९- कुछ ऐसे भी मरीज दिखाई दिये है जिनको दर्द के साथ ऐसा महसूस होता है कि उनको सान्स लेने मे दम घुट रहा है यानी उनको लगता है कि उनको शायद Oxygen  कम मिल रही है लेकिन वास्तविकता मे ऐसा होता नही है /  PULS OXYMETER  से लम्बे समय तक जान्च करने के बाद ऐसे लोगो का आक्सीजन परसेन्ट ९९% और उनकी नाडी की चाल सामान्य पायी गयी /  ऐसे रोगियो के फेफड़ो की जान्च मशीनो द्वारा करने के बाद  फेफडे की कार्य क्षमता सामान्य और मजबूत पायी गयी है /

१०- बहुत से मरीजो को पैदल चलने पर कन्धे और सीने की मान्श पेशियो मे दर्द होने लगता है /

११- बहुत से मरीजो को गर्दन इधर उधर घुमाने से  कट कट की अवाज आती है , कोई कोई चरचराहट की आवाज जैसी बताता है, कोई कोई बताता है जैसे मिट्टी के दो बरतन आपस मे रगड़्ते है वैसी हीआवाज गरदन इधर उधर घुमाने मे होती है /

१२- बहुत से रोगियो को चेहरे की मान्श पेशियो मे दर्द अथवा लकवा हो जाने जैसे लक्षण होते है / उनको लगता है जैसे चूहे के पन्जे उनके FACE   मे चुभ रहे हैं / 

कहने का मतलब यह कि CERVICAL SPONDYLITIS  की तकलीफ मे बहुत तरह के sensations  मरीज को महसूस होते है और इस तरह के sensations  होने से diagnosis  मे भी भ्रम पैदा होने की समभावना हमेशा बनी रहती है /

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X-RAY  द्वारा इस बीमारी की सटीक पहचान हो जाती है लेकिन MRI या CT SCAN द्वारा भी इसको ज्यादा अच्छी तरह से निदान करते है

ETG AYURVEDASCAN  आयुर्वेद के परीक्षण द्वारा भी सर्वाइकल स्पान्डिलाइटिस की स्तिथि का निदान किया जाता है /

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आयुर्वेद और आयुष चिकित्सा विग्यान मे इस बीमारी का बहुत सटीक और अचूक इलाज है जो कठिन से कठिन स्तिथि को आरोग्य देने मे सक्षम है / आयुर्वेद मे इसे वात रोगो की श्रेणी मे रखते है और इसका सन्सकृत नाम “मन्या स्तम्भ” है /

आयुर्वेद की चिकित्सा करने मे cervical spondylitis  बहुत सुगम और आसान तरीके से आरोग्य होती है और एक बार ठीक होने पर यह बार बार कम होती है / आयुर्वेद चिकित्सा करने से धीरे धीरे दर्द और चक्कर आने की शिकायत का permanent  इलाज होता है /

आयुर्वेद चिकित्सा मे हजारो की सन्ख्या मे बहुत उच्च कोटि के औषधियो की सन्ख्या मौजूद है जो cervical spondylitis  जैसी बीमारियो का इलाज करने मे मुफीद साबित हुयी है / इनमे गूगल घटित औषधिया और रस रसायन औषधिया चमत्कारिक प्रभाव डालती है / क्वाथ और अन्य अनुपान का औषधियो के साथ उपयोग करने से तो मूल औषधियो की ताकत और ज्यादा होने से बहुत शीघ्रता से लाभ होता है / 

सर्वाइकल स्पान्डिलाइटिस रोग अगर ज्यादा पुराना नही है तो आयुर्वेद चिकित्सा द्वारा १५ से २० दिन मे ठीक हो जाता है / अधिक पुराना और बहुत क्रानिक हो तो ४० दिन औषधि प्रयोग से ठीक हो जाता है /

यह बीमारी मॊटर वाहन और साइकिल चलाने वालो को बहुत होती है / यह उन लोगो को भी होती है जो  ज्यादा देर तक् कम्प्य़ूटर पर बैठकर काम करते है / ऐसे लोगो को इस रोग से बचने के लिये गर्दन के चारो ओर लम्बी तौलिया या सूती अन्गौछा या सूती धोती लपेट लेना चाहिये और तब काम करना चाहिये /

ठ्न्डे पानी से नहाने से यह बीमारी बहुत जोर पकड़ती है इसलिये ऐसे पानी से स्नान करे जो न अधिक गरम हो और न अधिक ठन्डा / जिन्हे AIR CONDITIONER  मे सोने कीआदत है वे गर्दन मे और सिर मे सूती कपड़ा लपॆत ले और तब सोयें / यह बीमारी हर तरह की ठन्डक से बढती है इसलिये ठन्दक से जितना भी बचने का उपाय करेन्गे उतना ही ठीक होगा / 

इस बीमारी का HOMOEOPATHIC MEDICAL SYSTEM   मे बहुत सटीक इलाज है / सर्वाइकल स्पान्डिलाइसिस के इलाज मे अगर होम्योपैथिक चिकित्सा के साथ साथ आयुर्वेद की भी दवाओ का सेवन करे तो यह बीमारी बहुत तेजी से ठीक होती है और आरोग्य की speed  देखकर बहुत ताज्जुब होता है /

ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन  और इसके सप्लीमेन्टरी परीक्षण कराने के बाद CERVICAL SPONDYLITIS  का इलाज करने से यह बीमारी शत प्रतिशत ठीक होती है चाहे उसका कैसा भी स्वरूप हो और कैसी भी तकलीफ हो / 

इस बीमारी मे पन्चकर्म भी करते है लेकिन यह मरीज की अवस्था और बीमारी की गहरायी पर निर्भर करता है कि मरीज को पन्चकर्म की जरूरत है भी या नही /

योग के कुछ आसन इस बीमारी के लिये बहुत मुफीद है जिन्हे करने से बहुत आराम मिलती है /

बहुत से लोग इस बीमारी मे गर्दन मे लपॆटने वाला कपडे का hard अथवा soft पट्टा बान्धते है / इसके बारे मे जिन लोगो ने पट्टा बान्धा है और इस्तेमाल किया है उनका कहना है कि इससे गरदन कम्जोर होती है और सीने की पसलियो मे दर्द होने लगता है / पट्टा लगाने से कुछ लिगो का कहना है कि यह सान्स लेने मे दिक्कत करता है / वही कुछ लोग इसे सही मानते है कि पट्टा उस समय लगाना चाहिये जब वह सवारी या यात्रा बस अथवा ट्रेन से कर रहे हो या कम्प्यूटर पर काम कर रहे हो या उस समय जब गर्दन झुकाने का काम ज्यादा समय तक करना हो / बाकी समय पट्टा नही लगाना चाहिये जब जरूरत हो तब इस्तेमाल करे / वास्तव मे पट्टा लगाने का उद्देश्य यह है कि गरदन के movement  को  inhibit  किया जाये / बहुत से लोग सूती कपड़े का दो अथवा ढाई मीटर लम्बा और एक मीटर चौड़ा कपड़ा गर्दन मे ढीला ढीला लपेट लेते है और अप्ना काम किया करते है / इस तरह से कपड़े का फेटा लगाने से स्पान्डिलाइटिस के रोगी बताते है कि गरदन मे एक तरह की गरमाहट होकर गरदन की सिकाई होती है और सम्बन्धित मान्स पेशियो मे मुलायमता आती है जिससे मान्स पेशियां relax  होकर दर्द कम होता है और  अकड़न ठीक होती है /

मेरे सम्पर्क मे कुछ ऐसे लोग भी आये जिन्होने इस बीमारी मे आपरेशन भी कराया है लेकिन जितने लोगो ने आपरेशन कराया वे सब के सब विकलान्ग हो चुके है और बिस्तरे पर लेट कर अपना जीवन गुजार रहे है अथवा किसी काम करने के काबिल भी नही है /  ये आपरेशन कराकर विकलान्ग हो चुके लोग मेरे पास इलाज के लिये आये थे / जिन्हे मैने इलाज करने से इन्कार कर दिया क्योन्कि surgicl interventions  के बाद कुदरती गरदन की बनावट समाप्त हो जाती है और ऐसे मे healing  बहुत मुश्किल हो जाती है /

कुल मिलाकर यही कहून्गा कि अगर आयुर्वेद और होम्योपैथी तथा पचकर्म और योग के आसन सम्मिलित करके CERVICAL SPONDYLITIS  की चिकित्सा करते है तो यह बीमारी अवश्य ठीक होती है और रोगी सामान्य जीवन ठीक उसी तरह से जी सकता है जैसा वह बीमार होने से पहले जी रहा था / 

LEUCODERMA / WHITE SPOT / VITILIGO EVIDENCE BASED CURED CASE ; सफेद दाग / वीटीलिगो / ल्यूकोडेर्मा के रोगी के आरोग्य होने के सबूत के साथ विवरण


यह एक २५ साल के रोगी का सफेद दाग से आरोग्य होने के PHOTO evidence के साथ बताया जारहा है कि किस प्रकार से ETG AyurvedaScan और इसके सम्बन्धित परीक्षण कराने के बाद आयुर्वेद का इलाज कराने से साफेद द्दग की बीमारी चाहे जिस स्तर की हो, वह अवश्य ठीक होती है /

प्रस्तुत रोगी की उम्र इस समय २५ साल की है / इसको १५ साल से सफेद दाग की बीमारी है / जब यह १० साल की उम्र का था तब इसे सफेद दाग होने शुरू हुये थे /

तमाम एलोपैथी का इलाज और होम्योपैथी का इलाज और आयुर्वेद का इलाज करने के बाद भी यह नही ठीक हुआ और स्फेद दाग इसके सारे शरीर मे फैल गये / शरीर का ऐसा कोई भी हिस्सा या अन्ग नही था जहां पर सफेद दाग न मौजूद हो /

लगभग ११ माह पहले यह रोगी मुझे दिखाने के लिये आया था / इसके पिता एक डाक्टर है जो कानपुर से लगभग ३० किलोमीटर दूर अपनी प्रायवेट प्रैक्टिस करते है /

इस लड़्के का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और दूसरे परीक्शण करने के बाद इसको आयुर्वेद की दवा खाने के लिये पर्चा लिख दिया गया था /

नीचे का लिया गया चित्र उस समय का है जब ११ महीना पहले रोगी इलाज के लिये आया था / इस रोगी के सारे शरीर मे सफेद दाग है [जो अब नही है या बहुत अधिक सन्ख्या मे ठीक हो चुके है ]

इस चित्र को ध्यान से और बहुत गौर करके देखिये कि किस तरह का इसका रन्ग और स्वरूप है /

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ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित आयुर्वेदिक दवाओ के इलाज करने के पान्च महीने यानी आयुर्वेदिक द्वाओ को पान्च महीने खाने के बाद यह रोगी दुबारा प्रामर्श के लिये कान्पुर आया था / उस समय यह चित्र लिया गया था /

रोगी के पान्च महीने के इलाज के बाद सफेद दाग मे क्या क्या परिवरतन हुये है इसे भी बहुत गौर के साथ देखिये /

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आयुर्वेदिक दवाओ के ११ महीने के बाद सफेद दाग की स्तिथि देखिये / यह लगभग ठीक हो चुका है / देखने मे नही लगता कि कही सफेद दाग है , लेकिन कैमरे की फ्लश के चमकने से यह बहुत अधिक स्पष्ट दिखाई देते है /

नगी आन्खो से देखने पर यह सफेद दाग २ फिट की दूरी  से नही दिखाई देते है

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ऊपर जिस चित्र को दिखाया गया है वह हिस्सा मरीज की पीठ की ओर का है /

नीचे का चित्र मरीज की पेट की ओर का है / नीचे का चित्र ११ माह पहले का है , जब रोगी सफेद दाग के इलाज के लिये आया था / इसे बहुत ध्यान से देखिये / इस सफेद दाग मे कही भी किसी भी प्रकार की कोई काली चित्ती या काला धब्बा नही है और यह एक्दम सफेद है /

OLYMPUS DIGITAL CAMERA.नीचे का चित्र लगभग पान्च माह पहले का है जब मरीज दुबारा परामर्श के लिये आया था ./ इसे देखिये और पहले के चित्र से तुलना करिये कि MELANIN PIGMENT किस तरह से सफेद दागो मे भर रहा है /

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लगभग  ११ माह आयुर्वेदिक इलाज करने के बाद इस रोगी के शरीर के दाग मे किस तरह के परिवर्तन आये है , यह देखिये /

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रोगी के शरीर के सारे शरीर मे सफेद दाग थे जिनमे से बहुत से अधिकान्श ठीक हो चुके है और जो बाकी बचे है वे भी सफेदी छोड़्कर काले और त्व्चा के रन्ग के धीरे धीरे हो रहे है /

१५ साल पुराने सफेद दाग के रोगी का इतनी जल्दी ठीक होना यह सब ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और इसके सप्लीमेन्टरी परीक्षण आधारित आयुर्वेदिक इलाज के परिणामो का एक ऐसा साक्ष्य है जिसे किसी भी कीमत पर नकारा नही जा स्कता है /

हम्ने हमेशा कहा है कि LEUCODERMA / VITILIGO / WHITE SPOTसफेद दाग या ल्यूकोडेर्मा अब लाइलाज नही रहा है / इसका सटीक और अचूक इलाज आयुर्वेद की नई आविश्कार की गयी तकनीक E.T.G. AYURVEDASCAN TECHNOLOGY  पर आधारित होकर किया जता है तो यह अवश्य ठीक होता है /

हमारे रिसर्च केन्द्र मे सफेद दाग के जितने  भी मारीज ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित इलाज कराने के लिये आये है वे सभी के सभी शत प्रतिशत ठीक हुये है / 

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EPILEPSY WITH IMPOTENCY ; A CASE OF 25 YEARS OLD YOUNG PERSON ; मिर्गी रोग के साथ नपुन्सकता ; २५ साल के नवयुवक के एक केस का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित अध्ध्य्यन


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२५ साल के एक नवयुवक का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित परीक्शण किया गया जिसे मिर्गी के साथ नपुन्सकता की बीमारी थी /

नीचे दिया गया ट्रेस रिकार्ड ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की ट्रेसेज का है जो मरीज के सिर और शरीर के दूसरे हिस्से से लेकर रिकार्ड की गयी है और यह मरीज का रिकार्ड horizontal position  मे rest  की स्तिथि मे  लेकर किया गया है /

इस रिकार्ड मे दिमाग के पान्चो हिस्सो का elecrical diffussion level record किया गया है /

इस रिकार्ड मे Temporal region  और Frontal region सामान्य से अधिक और Parietal region  सामान्य से कम प्राप्त हुआ है /

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नीचे का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की ट्रेसेज का रिकार्ड मरीज को TREAD Machine ट्रीड मशीन पर दौड़ाकर रिकार्ड किया गया है / जिन स्थानो पर पहले  HORIZONTAL POSITION  पर रिकार्ड किया गया है , उन्ही उन्ही स्थानो पर vertical position running condition  पर नीचे का ट्रेस रिकार्ड लिया गया है / दोनो मे फर्क देखा जाना चाहिये/

Disease Diagnosis  के हिसाब से यह आवश्य्क भी है कि बदली हुयी शारीरिक अवस्थाओ मे बीमारियो और शरीर के कार्य कलापो मे क्या क्या परिवरतन आते है और इन परिवर्तनो  के अध्ध्य्यन के बाद  किस तरह के निष्कर्ष निकाले जाने चाहिये , आयुर्वेदिक आयुश इलाज के लिये यह जानना बहुत जरूरी है /

दौडाकर किये जाने के बाद वात और पित्त दोष का उभर कर सामने आना यह बताता है कि इस मरीज को पित्तज-वातज मिश्रित विकृति है / 

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नीचे का ट्रेस EPIGASTRIUM REGION  का है जिसे आराम की स्तिथि मे horizontal position  मे लिया गया है / इस रोगी के इफीगैस्ट्रियम मे सूजन है और बाहर से हलका धचका देने पर बहुत painful  है / 

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नीचे का ट्रेस EPIGASTRIUM REGION क है जो tread machine  मे दौड़ाकर रिकार्ड किया गया है / दौड़ाकर जब ई०टी०जी० रिकार्ड किया जाता है तो visceras  की hide anomalies  उभर कर स्पष्ट रूप से सामने आ जाती है / सूजन का स्पष्ट मुजाहरा इन ट्रेसेस मे दिखाई दे रहा है /

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.नीचे के त्रेस शरीर के उन स्थानो से रिकार्ड किये जाते है जहा से यह पता चल सके कि शरीर का circulation पैरो की तरफ है या सिर की तरफ / .

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दौडाकर किये गये etg ayurvedascan  ट्रेस का स्वरूप देखिये/ मानसिक रोगो और मन्सिक टेन्शन करने वाले रोगियो मे इसी तरह के ट्रेस मिलते है जिनसे निदान होता है कि उनको किस तरह की और किस nature  की तकलीफ अथवा रोग है /

इस तरह कॊ diagnosis से आयुर्वेद की औषधियो का चयन बहुत सुगम और सटीक और अचूक होता है जो कभी भी नही फेल होता है /

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नीचे की रिकार्ड की गयी ट्रेस E.T.G. AYURVEDASCAN CONTINUOUS TRACE RECORDER द्वारा प्राप्त की गयी है /

दिमाग और सिर तथा TORSO ORGANS  के चुने गये हिस्सो का रिकार्ड किया गया ताकि पता चल सके कि रोगी की किस तरह की बीमारी developए  हो रही है /

यह पहला ट्रेस रिकार्ड है जो पहले के शुरुआती ३० सेकन्ड का है /

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रोगी को बिस्तर पर लिटाकर लगभग चार घटे के लगातार रिकार्ड करने के बाद सबसे अन्त का रिकार्ड नीचे दिया गया है /

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ऊपर के रिकार्ड और बाद के रिकार्ड के चार घन्टे के अन्तराल के ट्रेसेस का अध्ध्य्यन करने के बाद पता चला कि इस रोगी के मश्तिष्क के दोनो हिस्सो के बीच के साथ होने वाले signal diffussion और signal recieveing  के बीच मे fraction of seconds  का अन्तर आता है जिसे electrical इम्बलन्चेस के कारण होता है ऐसा मानते हैं /

इसके अलावा TORSO ORGANS  की anomalies भी सामने आयी है /

जब सभी आन्कड़ो का  विस्तार पूर्वक विष्लेषण करने के बाद निष्कर्ष निकाला जाता है कि मरीज के अन्दर किस तरह की anomalies  और disorders  मौजूद है तब उस आधार पर इलाज करने से रोगी अवश्य ठीक होते है चाहे उनको कैसी भी और किसी भी तरह की बीमारी क्यो न हो ???

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ABOUT “AYURVEDA” , EXCEPT FEW ASIAN COUNTRIES, MOST OF THE GLOBAL NATIONS AND POPULATION DO NOT KNOW EVEN LEAST WELL ABOUT INDIAN AYURVEDA MEDICAL SYSTEM


I have treated and presently I am treating almost patient from FIVE CONTINENTS i.e. from ASIA from AFRICA, from AUSTRALIA from AMERICA , from EUROPE.

In between these visitor patient, most of the Non Resident Indians and their NATIVE FRIENDS of that corresponding countries, where they live, come for the ETG AyurvedaScan examination and for supplementary tests.

It came in notice that except few Asian countries , outside of the boundaries of these few nations, no body knows about the AYURVEDA MEDICAL SYSTEM , which is practiced at large level in INDIA. Most of the natives are not well aware of the facts that Allopathy claims no treatment for many  disorders  and disease conditions , factually can be well treated by Ayurvedic treatment. The citizens of these country do not know about Ayurveda, while their NRI friends , when told about Ayurveda Cure , they feel a solution of their problems.

Almost in these countries , Allopathy is practiced and their is no alternative therapy present in these countries , by which any individual can shift for treatment , if he is not satisfied by the Allopathic treatment. Even then Homoeopathy is not practiced in these countries. Their is no question of practice of Unani and Sidhdha system of medicine , as they donot know even least about these therapies.

Like other human beings, who are not satisfied with the Allopathic treatment, available in their country, everyone seeks to like an alternative way of the therapies for shifting to a better solution of their problem’s solution, AYURVEDA could be a choice for them.

This is the reason for their visits to India for an AYURVEDIC sOLUTION of their problems.

AYURVEDA  is a complete health / medical system covering the whole aspects of the human disorders, whatever they may be.

In this regard, I want to convey to the entire population of the GLOBE that if they are not satisfied with the ALLOPATHY treatment for their disorders, they should go for the Ayurvedic treatment and in this therapy their problem’s solution is present.

Everyone should try Ayurveda ones before going to any surgical interventions, because most of the disorders are covered and cured by the AYURVEDA-AYUSH treatment.

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HOMOEOPATHIC FUNDAMENTALS EVALUATION ; A CASE OF MENTAL PATIENT ; SUFFERING FROM MENTAL STRESS WITHOUT ANY REASON


A 32 year old man from MUMBAI came to KANPUR for his mental problem.

He was not in a position to narrate his complaints fully.

He was examined by me continuous for two consecutive days to explore his complete problem what he feels?

His ETG AyurvedaScan FIVE TESTS including AYUSH BLOOD and AYUSH URINE examination were done along with other test related with his problem.

Here we take only HOMOEOPATHIC FUNDAMENTAL DIAGNOSIS done by E.H.G. HOMOEOPATHYSCAN and Homoeopathy BLOOD EXAMINATION.

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See Blood report and compare with the TREAD MACHINE  results. Similarity is mostly seen in the findings of Electrical scan and Blood examination  and  Tread machine scan.

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Examination by TREAD MACHINE E.H.G. HOMOEOPATHYSCAN gave the root problem which was related and originated by PSORA and SYCOSIS. The patient SYPHILIS level was within normal limit.

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Patient is PSORIC  with Sycosis effects. Blood examination is also confirms the PSORA and Sycosis effects and TREAD machine examination is also shows the organs affected reflecting the view of PSORA and Sycosis.

In our research center we are investigating  much more about the exploration and possibilities of the evaluation of HAHNEMANNIAN PRINCIPALS  in most scientific ways for entire Homoeopathic fraternity.