आयुर्वेद : आयुषमन : AYUSHMEN

आयुर्वेद को समझिये

Posted by: prakruti on: July 8, 2007

 

 

 

 

 

 

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     भगवान धन्‍वन्‍तरि , जिनसे आयुर्वेद की उत्‍पत्ति हुयी  /

    

 

आयुषमन  

                                                                                                                                                                                                                          वैकल्पिक चिकित्‍सा विधियों के अलावा समन्वित चिकित्‍सा के साथ साथ, अन्‍य सभी प्रकार की चिकित्‍सा विधियों का ज्ञान बोध कराने का प्रयास इस ब्‍लाग के माध्‍यम से रहेगा । 

 

आयुषमन AYUSHMEN को इस प्रकार से समझा जा सकता है ।                                                                                                                                                                                                                                    

 A – for  आयुर्वेद, आकूपन्‍क्‍चर, आकूप्रेशरचिकित्‍सा

Y – for योग चिकित्‍सा 

U – for यूनानी चिकित्‍सा 

S – for  सिद्ध चिकित्‍सा

H- for होम्‍यापैथी चिकित्‍सा

M – for Magneto therapy मैग्‍नेट / चुम्‍बक चिकित्‍सा E – for Electrotherapy including physiotherapy विद्युत चिकित्‍सा के साथ साथ फिजियोथेरेपी चिकित्‍सा  N – for Nature-cure प्राकृतिक चिकित्‍स

 

इलेक्‍ट्रोत्रिदोषग्राफी ई0टी0जी0 टेक्‍नोलांजी के  उपयोग और प्रयोग के बारे में तकनीक के आविष्‍कारक डा0 देशबन्‍धु बाजपेयी को सुनिये ।

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फोटो  घृतकुमारी , घीकुवार, ग्‍वारपाठा English: Barbedols Aloe, Latin:Aloe Veraयह आयुर्वेदिक औषधि यकृत, रक्‍त विकार, प्‍लीहा, त्‍वचा के रोग, गांठ इत्‍यादि बीमारियों में प्रयोग की जाती है । .

                                                                    

 

                                                                                               

 

 

आयुर्वेद , जिसे भारतीय चिकित्‍सा पद्यति भी कहते हैं, भारत भू खंड में विकसित लगभग 5000 वर्ष प्राचीन स्‍वास्‍थ्‍य से संबंधित विज्ञान है । यह वेदों से निकला हुआ ज्ञान है ,जिसे समय के अंतराल के साथ बाद में एक स्‍वतंत्र विज्ञान के स्‍वरूप में स्थिति हुआ ।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

आजकल भले ही आयुर्वैद के चिकित्‍सक को डाक्‍टर शब्‍द से संबोधित किया जा रहा हो , लेकिन प्रचीन काल से प्रयोग किया जानें वाला शब्‍द वैद्य है , जो आज भी लोग प्रयोग करते हैं । वैद्य शब्‍द वेद और द्वय दो शब्‍दों से मिला हुआ शब्‍द है  , जिसका शब्दिक अर्थ है दो वेद । अर्थात जो  दो वेद जानते थे यानी एक , जो चार वेदों में से कोई एक मुख्‍य वेद जानने वाला है और दूसरा , स्‍वास्‍थ्‍य रक्षा से जुड़ा हुआ वेद, जिसे आयुर्वेद कहते हैं , को जाननें वाला है ।  

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फोटो: पत्‍थर चूर    Latin : Bryophyllum . यह औषधि गुर्दे , यूरेटर, मूत्राशय की पथरी को पिघलाकर मूत्र के साथ बाहर निकाल देती है । गुर्दे की सभी प्रकार की बीमारियों में इसका उपयोग करते हैं ।

 

 

                    आयुर्वैद , भारतीय जीवन पद्धति का अंग 

भारतीय जीवन दर्शन में प्राचीनकाल से धर्म, कर्म, अर्थ , काम , मोक्ष आदि आस्‍थाओं और विश्‍वासों पर विजय पानें और इस उद्देश्‍य को प्राप्‍त करनें  के लिये सबसे जरूरी यह समझा गया कि पहले मानव शरीर की रक्षा की जाय । शरीर की रक्षा कैसे हो , क्‍या आहार, विहार अपनायें जांय जिससे शरीर स्‍वस्‍थ्‍य रहे और बीमारियों से दूर रहे । तभी जीवन के चरम उद्देश्‍य को पाया जा सकता है ।

   

मनीषियों नें मानव जीवन को जीवन्‍त बनानें के लिये चार आश्रमों में बांटा हैं ।

 1- बालाश्रम 2- गृहस्‍थाश्रम 3- सन्‍यासाश्रम 4- वानप्रस्‍‍थाश्रम,

ये चारो आश्रम 25 25 वर्ष की आयु को विभाजित करके बनाये गये हैं । इस प्रकार से हमारे पूर्वजों नें मनुष्‍य की आयु 100 वर्ष की र्निधारित की है । उक्‍त आश्रमों में 25 वर्ष के अन्‍तराल में क्‍या क्‍या करना है, इसका वर्णन बताया गया है ।   

 

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फोटो केशराज  Latin: Ecalypta Alba    यह औषधि  उच्‍च रक्‍तचाप, हृदय रोगों, यकृतप्‍लीहा से संबंधित रोगों, सफेद दाग, सभी प्रकार के इन्‍फेक्‍शन इत्‍यादि को दूर करती हैं ।        

 

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       आधुनिक आयुर्वेद

 

आयुर्वेद चिकित्‍सा विज्ञान को नष्‍ट करनें के लिये समय समय पर छोटे बड़े सभी प्रकार के प्रयास किये गये । सम्राट अशोक के जमानें में खून खराबा रोकनें के नाम पर आयुर्वेद का  ‘’ शल्‍य चिकित्‍सा विज्ञान ‘’ सबसे अधिक प्रभावित हुआ । अपनें राज्‍य में सम्राट अशोक नें वध करनें , मार काट से संबंधित सभी कार्यों को रोक दिया । जिससे उस समय होंनें वाले समस्‍त ‘’शल्‍य चिकित्‍सा कार्य’’ बन्‍द हो गये ।  लेकिन इस प्रतिबन्‍ध के बाद  रस चिकित्‍सा ने बहुत प्रगति की । महात्‍मा बुद्ध के कई योग्‍य शिष्‍यों ने कठिन और असाध्‍य रोंगों के उपचार के लिये बहुत सी नई औषधियों की खोज की, जिनमें नागार्जुन सबसे प्रमुख हैं ।  समय समय पर विदेशी आक्रान्‍ताओं के भारत पर आक्रमण करनें के कारण आयुर्वेद के मूल ग्रंथ आक्रान्‍ताओं द्वारा लूट लिये गये । मुगलों के आने के बाद तो स्थिति और खराब हो गयी । अंग्रेजों के आनें के बाद , यद्यपि आयुर्वेद को कोई विशेष प्रोत्‍साहन नहीं मिला , फिर भी इस समय के अन्‍तराल में आयुर्वेद जहां और जैसा था, यह स्थिर रहा । अंग्रेजों   के समय में  युरोपियन चिकित्‍सा का आगमन हुआ । जिसे एलोपैथी के नाम से सभी जानते और समझते हैं ।स्‍वतन्‍त्रता के पश्‍चात भारत सरकार ने धीरे धीरे और धीमीं गति से आयुर्वेद को विकास करनें हेतु प्रोत्‍साहन प्रदान किया है । शिक्षण, प्रशिक्षण, शोध, प्रचार, प्रसार, व्‍यावसायिक और गैर व्‍यावसायिक क्षेत्रों मे आयुर्वेद की विभिन्‍न शाखाओं मे उल्‍लेखनीय कार्य किये जा रहे हैं । 

                       आयुर्वेद हमें क्‍या शिक्षा देता है ?

 

 

आयुर्वेद हमें कई प्रकार की शिक्षा देता है । एक तो यह कि हमे वे कौन से नियम पालन करनें चाहिये, जिससे शरीर स्‍वस्‍थ्‍य रहे, शरीर की कार्य प्रणाली सुरक्षित रूप से काम करती रहे ताकि शरीर बीमार न हो । दूसरा , यदि किसी कारण से शरीर बीमार हो जाये, तो कौन सा उपचार करना चाहिये ताकि बीमार शरीर पुन: स्‍वास्‍थ्‍य प्राप्‍त कर ले । तीसरा यह हमें उन द्रव्‍यों के औषधीय गुण, कर्म के   बारे में बताता है जो वनस्‍पति, प्राणिज, जान्‍तव , धात्विक या अन्‍य स्‍वरूप में प्रकृति में पाये जाते है । चौथा , यह खाद्य पदार्थों के गुण कर्मों के बारे में बताता है , जो परिवार मे खानें , पीनें , लगानें आदि में उपयोग करते हैं 1 पांचवां , यह मीमांसा दर्शन को दर्शाता है , जिसमें प्रकृति और पुरूष के सम्‍बन्‍ध की बात कही गयी है ।  धर्म , दर्शन, सदाचार, सामुदायिक हित आदि आदि के बारे में बहुत कुछ बताया गया है । इस प्रकार जहां   आयुर्वेद एक तरफ चिकित्‍सा विज्ञान है , वहीं दूसरी तरफ यह पूर्ण एवं स्‍वस्‍थ्‍य जीवन प्राप्‍त करनें का साधन बताता है ।     

 

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हर्बल दर्द निवारक चाय , उत्तम कोटि की आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों का विशुद्ध मिश्रण है । यह चाय पीनें से सभी प्रकार के दर्द ठीक होते हैं । यह सूजन को कम करती है और हल्‍के बुखार को ठीक करती है ।

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निम्‍न वेब साइट आयुर्वेद , होम्‍योपैथी और आधुनिक चिकित्‍सा विज्ञान के विषयों से संबंधित है । इन्‍हें जन साघारण हिन्‍दी भाषा में भी प्रस्‍तुत किया गया है ।  

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यह वेबसाइट आयुर्वेद के 5000 वर्षों के इतिहास मे साक्ष्‍य आधारित प्रस्‍तुति इलेक्‍ट्रो-त्रिदोष-ग्राफी की खोज के बारे में जानकारी देती है ।

http://etgind.wordpress.com

यह वेब साइट होम्‍यापैथिक चिकित्‍सा विज्ञान को साक्ष्‍य आधारित चिकित्‍सा सिद्ध करनें की खोज से संबंधित जानकारी प्रदान करती है ।

http://electrohomoeography.wordpress.com

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यह वेब साइट इलेक्‍ट्रोकार्डियोग्राफी की नई खोज की गयी मशीन के बारे में जानकारी देती है ।

http://ecgi.wordpress.com

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‘’कन्‍या भ्रूण हत्‍या’’ , यह एक समस्‍या है जो सामाजिक और आर्थिक तानाबाना से जुड़ी हुयी है । लोग लड़कियों का गर्भपात क्‍यों कराना चाहते हैं, इस बारे में जानिये और समझिये ।

http://larakiyan.wordpress.com  

 

   डा0 देशबन्‍धु बाजपेई से आन लाइन कन्‍सल्‍टेशन   के लिये , स्‍वास्‍थ्‍य और चिकित्‍सा से सम्‍बन्धित सभी प्रकार के प्रश्‍न , निम्‍न वेब साइट के ‘’ कमेंन्‍ट बाक्‍स ‘’ के द्वारा भेज सकते हैं । डा0 देश बन्‍धु बाजपेयी पिछले 40 वर्षों से एलोपैथी, होम्‍योपैथी और आयुर्वेद के साथ साथ अन्‍प चिकित्‍सा विधियों का प्रयोग करके लाभ प्रदान कर रहे हैं ।                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                    http://drdbbajpai.wordpress.com


 

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कृपया इन वेब साइट के बारे में दुंनिया के लोंगों का बतायें । ये सब तकनीकें एक भारतीय द्वारा ईजाद की गयीं हैं ।

 

5 Responses to "आयुर्वेद को समझिये"

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स्वागत है मित्र.

डॉ साहब,

आज पहली बार आपके इस चिट्ठे पर आया एवं आपकी रचनाओं का अस्वादन किया. आप अच्छा लिखते हैं, लेकिन आपकी पोस्टिंग में बहुत समय का अंतराल है. सफल ब्लागिंग के लिये यह जरूरी है कि आप हफ्ते में कम से कम 3 पोस्टिंग करें. अधिकतर सफल चिट्ठाकार हफ्ते में 5 से अधिक पोस्ट करते हैं — शास्त्री जे सी फिलिप

मेरा स्वप्न: सन 2010 तक 50,000 हिन्दी चिट्ठाकार एवं,
2020 में 50 लाख, एवं 2025 मे एक करोड हिन्दी चिट्ठाकार!!

pet me bahot jalan hoti hai please koe aisa ilaj bataye jo hame fayda karde hum bahot pareshan hai

@ Reply by Dr. D.B. Bajpai……………………………Aap Ayurvedic ilaj ke saath saath Prakrtik chikitsa yani Naturecure ka ilaj karayein to bahut shighrata se thik ho jayeinge, kisi Naturecure wale Doctor se sampark karein, isake alawa yadi yah nahin kar patey hain to strict parhej , khanpaan ke saath saath Ayurvedic ya Homoeopathic dawayein lene se bhi aram mil jayega, is bimari mein Allopathy ka ilaj na karein , kyonki isase aapako koi vishesh phayada nahin pahuchanewala hai

hame pet me bahot jalan hoti hai sandas ki jagah par thoda sa sandas bhi gas ki tarah chipka rahata hai pet ki jo gas hai wo muh se ati hai pet ke andar se sandas se bhi zyada gandi

@ Reply by Dr. D.B.Bajpai………………………………Aaapaki takalief ka jawab upar likha diya gaya hai, wahin dekh lein, dhanyawad

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इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी : ई०टी०जी० का विश्व का पहला परीक्षण केन्द्र ::: ई०टी०जी० सेण्टर, E-52, खपरा मोहाल, खलील क्वार्ट्स कम्पाउन्ड, कैन्ट, कानपुर contact: 09336238994 :::आयुर्वेद की पहली और अकेली ; सम्पुर्ण शरीर का आयुर्वेदिक विधि विधान पूर्वक मौलिक सिद्धान्तों के निदान के अलावा सारे शरीर में व्याप्त रोगों के निदान का ज्ञान कराने वाली तकनीक का परीक्षण केन्द्र समस्त जनता, वैद्यों, आयुर्वेद के चिकित्सकों के लिये कानपुर शहर में स्थापित किया जा चुका है । यहां रोजाना सुबह ९ बजे से दिन २ बजे तक ई०टी०जी० परीक्षण किये जाते हैं । कोई भी रोगी व्यक्ति या अन्य लोग, जो भी परीक्षण कराना चाहते है, वे किसी भी दिन आकर अपना परीक्षण करा सकते हैं ।

इस परीक्षण को करने में केवल 10 मिनट [ Only Ten Minutes]लगते हैं । हमारे केन्द्र मे आकर एक बार परीक्षण कराने का शुल्क रुपया 1200/= [ Rupees One thousand and two hundred only ]खर्च करने पड़्ते हैं और रिपोर्ट तीसरे दिन दी जाती है । यदि शीघ्र और उसी दिन रिपोर्ट चाहिये तो उसके लिये रुपया चार सौ { Rupees Four Hundred extra ; Rs. 400/=} अधिक खर्चने होन्गे और रिपोर्ट दो से चार घन्टे में दी जायगी ।

World’s first Electro Tridosha Graphy Scanning Center : E.T.G. center, E-52, Khalil Quarters Compound, Khapara Mohal, Cantt,KANPUR 208001 :Contact: 9336238994 : 09:00 AM to 02:00 PM daily

Word’s First Electro Tridosha Graphy E.T.G. Technology Research Center::::: Kunmun ETG Research Center, 67-70, BhusaToli Road, KANPUR-208001, UP::::Contcat for ETG Examination ::Evening 06 PM to 09 PM daily::::Contcat in Person/ appointment by phone:::0512 2367773

ई०टी०जी० परीक्षण तकनीक का दूसरा केन्द्र :………. कुनमुन ई०टी०जी० रिसर्च इन्स्टीट्यूट, 67/70, भूसाटोली रोड, बर्तन बाज़ार, कानपुर 208001, उत्तर प्रदेश, भारत

आयुर्वेद का सबसे नया आविष्कार : इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी : ELECTRO-TRIDOSHA-GRAPHY {ETG}- New invention in Ayurveda

In Medical science, all examinations, scans are from the Allopathic medical science sides, for example Xray, Ultrasound, MRI, CT Scan, Microscopic examination etc. ELECTRO-TRIDOSHA-GRAPHY [E.T.G.] is the first and only scan of Ayurveda & the ultimate Ayurvedic diagnosis solutions' technique. Readers can get more information in the websites, mentioned below or search details in the blog. आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान का नया आविष्कार - इलेक॒ट्रो त्रिदोष ग्राफी, ई०टी० जी०, तकनीक से [१] आयुर्वेद के मॊलिक सिध्धान्त तथा [२] शरीर के रोग निदान , इन दोनो के विषय में Data sheet डाटा रिपोर्ट के स्वरुप में प्राप्त कर सकते है । वैद्यों और आयुर्वेदिक चिकित्सकों को इस विधि से प्राप्त डाटा पर आधारित होकर मरीज की चिकित्सा करने पर अवश्य लाभ होता है । इस तकनीक के बारे में अधिक जानकारी इसी वेब ब्लोग पर या अन्य स्वतन्त्र web blog पर देख सकते है ।

आपका स्वागत है : कृपया अपने विचार अवश्य लिखें

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Electro-Homoeo-Graphy {E.H.G.} : Homoeopathy mein naya Avishkar

EHG , vartaman samay mein Homoeopathy vigyan ke liye yah naya avishkar, ETG technology se nikal kar aaya hai. Is takanik se Homoeopathy ke teen siddhant "Psora, Sycosis, Syphilis" ka manav sharir mein vyapt star ko napa ja sakata hai, isake alava "Vital Force" ka star aur "sensitivity" ka star bhi naap sakatey hain. Is takanik se Homoeopathy ki dawaon ka chunav bhi kar sakatey hai, rog nidan bhi kar sakatey hai, jyada jankari ke liye upar darshayi gayi, web sites par jakar vivaran dekha sakatey hain

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Aapane Likha, bahut khusi huyi आपने लिखा, बहुत प्रसन्नता हुयी

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