Posted by: prakruti on: April 24, 2009
दिल्ली के एक स्कूल की लड़्की की मौत अस्थमा के अटैक से उसके कालेज में ही हो गयी ।
मेरे विचार से और मेरे अनुभव में यह आया है कि पिछले 45 वर्षों में मैने किसी को भी अस्थमा के ऐसे अटैक से मरते हुये नहीं देखा है । दौरा जरूर पड़ा, लेकिन ऐसी मौत तो नही देखी, विषेश कर इस उम्र में , इतनी छोटी उम्र में कोई मरा हो, वह भी दमा से, ऐसा मुझे याद नहीं आता ।
जब मैने Practice शुरू की थी, उस समय मैं एलोपैथी की दवाओं से चिकित्सा कार्य करता था । यह वह जमाना था , जब एलोपैथी में दवायें मिक्सचर करके बनाई जाती थीं और मरीजों को दी जाती थीं । पेटेंट दवाओं का चलन ही नहीं था । डाक्टर मरीज के रोगों का निदान करते थे और उसी हिसाब से नाप तौल कर दवायें और उनकी मात्रा सेट की जाती थीं । तब एलोपैथी का इलाज कुछ कुछ individual मरीज की तकलीफ के हिसाब से हो जाता था ।
जर्मनी से वापस आने के बाद, मैने Homoeopathy की प्रैक्टिस शुरू की । इसका कारण यह था कि मुझे एलोपैथी की प्रक्टीस करने में आनन्द नही आ रहा था । एक तो लिमिटेशन, दूसरा मुझे इस बात का ग्यान हो जाता कि इस मरीज का इलाज यदि होम्योपैथी या आयुर्वेद से किया जाये तो सबसे बेहतर है, क्योंकि इस तकलीफ का एलोपैथी में कोई इलाज नही है । या इस बीमारी का इलाज सर्जरी है । मैं मरीज को उचित सलाह देता कि उसे क्या इलाज करने में फायदा है ।
आज भी इसी तरह की प्रैक्टिस करता हुं, जहां जैसी जरूरत समझता हू, वहां उचित औषधि का उपयोग करता हू ।
Asthama के समबन्ध में मेरा अनुभव शुरू से ही बहुत पाजिटिव रहा है । आज भी अस्थमा के मरीजों का इलाज करता हुं । मेरे अनुभव में कुछ बातें आयीं हैं , जिन्हें मै सबके साथ शेयर करना चाहता हूं । सबसे पहले बच्चों के अस्थमा के बारे में बताता हूं । एक बात सभी को ध्यान करना चाहिये कि 99.9 % बच्चों को Spasmodic Croup की बीमारी की तकलीफ होती है, जो अस्थमा की जैसी लगती है, लेकिन अस्थमा नहीं होता । चिकित्सक अधिकांशत: Spasmodic croup और Asthama में फर्क नहीं कर पाते, इसलिये भ्रम में asthama का इलाज होता रहता है । इस तरह से किये गये इलाज का खामियाजा मरीज को भुगतना पड़्ता है । मेरे पास रोजाना ही गलत चिकित्सा के परिणामॊ को भुगतने वाले मरीज आते रहते है, अब इसे क्या कहा जाये ? मैने पाया कि चिकित्सक Inhalers का उपयोग बिना आगा पीछा सोचे हुये कर रहे है । उन्हे इससे कुछ भी लेना देना नहीं है कि भविष्य में इन बच्चों के फेफड़ों का क्या हाल होगा ? Inhalers में स्टेरायड होता है, जो अपने आप में ही एक खतर्नाक दवा है ।
अधिक दिनों तक steroid के उप्योग से शरीर के वाइटल पार्ट्स यानी दिमाग, हृदय, लीवर, आंते, हड्डियां आदि के साथ साथ फेफड़े भी कमजोर होते है । जाहिर है, फेफड़े कमजोर होन्गे तो आक्सीजन शरीर को जिन्दा रखने के लिये
कहां से मिलेगी ? कभी कभी फेफ्ड़ॊं की बीमारी के साथ साथ Heart Problems भी पैदा हो जाती हैं । एलोपैथी कि दवायें शरीर की जीवनी शक्ति को कम करती हैं ।
मेरे विचार से इस लड़्की की मौत अस्थमा की दवाओं के दुष्परिणाम, शरीर के Vital parts के कमजोर होने और शारीरिक कम्जोरी तथा Pulmonary weakness की वजह से हुयी होगी ।
मैं एक बार फिर सबको आगाह करता हुं कि आस्थमा या दमा जैसी तकलीफ में एलोपैथी की एक आध दवा बहुत जरूरत होने पर खायें, लेकिन इसके साथ साथ आयुर्वेद या होम्योपैथी या यूनानी दवायें अधिक सेवन करें । इससे आरोग्य प्राप्त करने में बहुत मदद मिलेगी । इन्हेलर के सहारे ना रहें , तो ज्यादा अच्छा है । बहुत कष्ट होने पर अवश्य प्रयोग करें, लेकिन ऐसा खान पान , आहार, झीवन शैली अपनायें, जिससे बचाव होता रहे । आरोग्य प्राप्त करने के रास्ते बहुत हैं, इन्हें ढून्ढना आपका काम है ।
May 28, 2009 at 7:34 PM
Kpy Asthma Ka Saaaaahi Upchar Likhe