Posted by: prakruti on: May 2, 2009



बाबा राम देव द्वारा योग विज्ञान पर प्रकाशित की जाने वाली पत्रिका योग सन्देश के अप्रैल २००९ के अन्क में इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राम तकनीक का उल्लेख किया गया है । हलांकि यह इस तकनीक पर स्वतन्त्र लेख नहीं है, फिर भी विद्वान लेखक नें अपने लेख में इसका उल्लेख करके आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान को अत्याधुनिक तकनीक से लैस होने की बात करके सम्पूर्ण विश्व में यह सन्देश देने की कोशिश की है कि आयुर्वेद भी अब निदान ज्ञान की तकनीक, उन्गलियों के साथ साथ, मशीनी युग में और लैप्टाप तक आ चुकी है और इसे अब किसी भी कीमत पर आधुनिक चिकित्सा विज्ञान से निदान ज्ञान के मामले में कम न आंका जाये ।
बेहतर होता , यदि ई०टी०जी० तकनीक पर , इस पत्रिका में और लेख प्रकशित किये जाते, ताकि विश्व समुदाय को विस्तार से पता चल सके कि यह तकनीक आयुर्वेद में क्या गुल खिला सकती है ?
प्रचार के समीकरणों के ये वणिक जन खूब समझते हैं इसलिये शंखद्राव पर आधारित औषधियों वाली बात पर लिखते हैं “एक चिकित्सक”…. चिकित्सक का नाम दे देने में उसकी प्रसिद्धि इनकी मेहनत से जमाई पुस्तक योगसंदेश के द्वारा हो जाएगी तो बिना किसी फ़ायदे के क्यों उसका नाम दें। इसे कहते हैं शुद्ध व्यवसायि नजरिया। यदि नाम लिख देते तो रामदेव और उनके जोड़ीदार की कीर्ति धूमिल हो जाती जो बिना किसी आयुर्वेद या चिकित्सा की डिग्री आदि के लोगों को फ़ोकट की सलाहें देकर वाहवाही लूट रहे हैं। प्रयास रहेगा कि ये बनिये आपका नाम लिखें और इस बात का स्पष्टीकरण दें कि क्या लेखक को इन शोधों को करने वालों के नाम नहीं पता है या जानबूझ कर प्रकाशित नहीं करे गए हैं। आपका आशीर्वाद बल प्रदान करता है।
सादर चरण स्पर्श
May 3, 2009 at 1:04 PM
गुरूदेव,रामदेव जी के मैनेजमेंट की नजर तो पड़ी कम से कम ई.टी.जी. पर वरना उन्हें तो ई.सी.जी. के आगे जाने में ही पता नहीं क्या पूर्वाग्रह था। मेरे लिये ये एक मिशन है कि हर उस व्यक्ति को झकझोरूंगा जो इस क्षेत्र से जरा सा भी संबद्ध है। आपका आशीर्वाद शक्ति देता रहता है।
सादर चरण स्पर्श
डा.रूपेश श्रीवास्तव
………..Reply by Dr.D.B.Bajpai………..देर आयद, दुरुस्त आयद यानी देर से सही लेकिन ठीक किया । एक बात का जिक्र करना तो भूल ही गया, वह यह कि बाबा जी की पत्रिका मे इसी पेज पर मेरे द्वारा किया गया दूसरा शोध कार्य भी छापा गया है, जो “शन्ख्द्राव पर आधारित औषधियां ” पर है ।