आयुर्वेद : आयुषमन : AYUSHMEN

पुराने, कष्ट्साध्य, असाध्य, लम्बे समय तक चलने वाले और जीवन पर्यन्त चलने वाले रोगों में चिकित्सा व्यवस्था : Chronic, Incurable, difficult , lifelong disease conditions treatment

Posted by: prakruti on: June 5, 2009

इसे मेरा भाग्य कहें या दुर्भाग्य, मैने जब से अपनी चिकित्सा की प्रेक्टिस शुरू की है, मुझे अपने शुरू की गयी चिकित्सा के काल में पुरानी बीमारियों के इलाज से ही शुरूआत करनी पड़ी । यह सिल्सिला आज तक चल रहा है । मेरा चिकित्सा व्यव्साय का सबसे पहला केस एक स्त्री का था, जिसे बच्चा होने के बाद देखभाल न होने के कारण Severe Puperal Fever के साथ साथ अन्य complications हो गये थे ।

सन १९६८ मई महीने की बात है, दवाखान शुरू करने का पहला दिन था । मैं अपने पिता जी स्व० वैद्य शीतला सहाय बाजपेयी के साथ दवाखाने में बैठा था । पिता जी अपने मरीज देख रहे थे, मुझसे कोई दवा लेने वाला आया ही नहीं । काम बन्द करके रिक्शा करने के लिये सड़क पर खड़े थे कि तभी इस स्त्री का पति बदहवास स्तिथि में आया और घर में मरीज देखने के लिये आग्रह करने लगा । साथ में आये कई लोगों ने कहा कि स्त्री मरणासन्न अवस्था में पड़ी है और मौत के मुह में जा रही है ।

यह सुनते ही मेरे पिता जी ने मुझे साथ लेकर कहा कि जाकर देखो क्या बात है ? मै उसके पति के साथ उसके घर गया और उस कमरे का जो नजारा देखा, उसको देखकर मेरे पैतड़े ढीले पड़ गये । बाहर भीतर लोग जमा थे, अन्दर उसकी स्त्री बेसुध पड़ी थी, बीच बीच में चीख पड़ती थी, फिर वही हाल । यह नजारा देखकर मै खुद घबरा गया । मैने उसके पति से कहा कि आओ जल्दी दवा लेकर इसे खिलाओ और में उलटे पैर दवाखाने आया ।

मैने उसे “योगेन्द्र रस” स्वर्ण युक्त की एक एक रत्ती की दो खुराके बनाकर दीं और कहा की अभी शहद से एक खुराक खिला देना तथा दूसरी तब खिलाना जब पहली वाली खुराक एक घन्टे में असर ना करे । तभी रिक्सा आ गया था, मै पिता जी के साथ वापस घर आ गया । रास्ते में हम यही सोच रहे थे की यह औरत बचेगी नही और जब हम रात को घर लौटेंगे तो उसकी मृत्यु का समाचार सुनने को मिलेगा । यह दोपहर २ बजे की बात है ।

रात ८ बजे के करीब मैं और पिता जी मन में आशन्का लिये हुये घर/दवाखाना में पहुचे । वहां सन्नाटा छाया हुआ था । मन में आशन्का बलवती हुयी कि शायद रुग्ना चल बसी । कोई आस्पास दिखई भी नहीं दिया जिससे समाचार लेते । ५- १० मिनट बीत गये तभी रुग्ना का पति दूर से आता दिखाई दिया । उसे देखकर हम भी तनाव में आ गये । वह पास आकर चुप्चाप आकर खड़ा हो गया । मेरे पिता जी बोले ” बेटा, क्या करोगे उसकी इतनी ही जिन्दगी थी…” । अभी वह और कुछ कहते कि वह बोला, ” दादा ऐसी कोई बात नहीं है, दर असल मेरी पत्नी तो दवा की पहली खुराक खाने के आधे घन्टे में ही ठीक होना शुरू गयी थी । इस समय वह भूख भूख चिल्ला रही है । आपने परहेज तो बताया ही नहीं, अब बतायें कि उसे क्या खाने के लिये दिया जाये । मैने उसको दूसरी खुराक भी नही खिलायी है, वह भी बतायें कब खिलानी है ।”

यह सुनते ही मेरी तो खुसी का ठिकान ही नहीं था । मैने उसे परहेज बताया और कहा कि दवा की दूसरी खुराक रात को सोते समय खिला देना ।

इसके बाद से तो मेरे पास बड़े कठिन, पुराने असाध्य रोगी आने लगे । यह सिल्सिला अभी तक चालू है ।

पुरानी बीमारियों के इलाज में सब्से ज्यादा ध्यान मरीज की दिन चर्या, खान्पान, आचार व्यवहार, रहन सहन की तरफ़ ज्यादा ध्यान देना चाहिये । जब बीमारी बहुत पुरानी हो जाती है तो जीवनी शक्ति कमजोर हो जाती है और शरीर उतना तेजी से दवाओं को रिस्पान्स नहीं करता जितनी अपेक्षा की जाती है । इसलिये खान्पान और दिन चर्या की तरफ़ ध्यान देना जरूरी हो जाता है ताकि उसकी जीवनी शक्ति बढे , तभी औषधियों का लाभ मिल पाता है । यह मानना चाहिये कि दवायें सहारा देने के लिये हैं , बाकी का काम तो शरीर को ही करना होता है ।

आयुर्वेद में रसायन औषधियों का अतुल भन्डार है । यह चिकित्सक पर निर्भर करता है कि वह इनका उपयोग किस प्रकार से कर पाता है । हो सकता है कि एक रसायन किसी को सूट करे और वही दूसरे को नुकसान करे । इसलिये जो चिकित्सक आयुर्वेद के सिददान्तों का पालन करते हुये चिकित्सा व्यवस्था करते है, वे निश्चय ही सफ़ल होते है ।

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इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी : ई०टी०जी० का विश्व का पहला परीक्षण केन्द्र ::: ई०टी०जी० सेण्टर, E-52, खपरा मोहाल, खलील क्वार्ट्स कम्पाउन्ड, कैन्ट, कानपुर contact: 09336238994 :::आयुर्वेद की पहली और अकेली ; सम्पुर्ण शरीर का आयुर्वेदिक विधि विधान पूर्वक मौलिक सिद्धान्तों के निदान के अलावा सारे शरीर में व्याप्त रोगों के निदान का ज्ञान कराने वाली तकनीक का परीक्षण केन्द्र समस्त जनता, वैद्यों, आयुर्वेद के चिकित्सकों के लिये कानपुर शहर में स्थापित किया जा चुका है । यहां रोजाना सुबह ९ बजे से दिन २ बजे तक ई०टी०जी० परीक्षण किये जाते हैं । कोई भी रोगी व्यक्ति या अन्य लोग, जो भी परीक्षण कराना चाहते है, वे किसी भी दिन आकर अपना परीक्षण करा सकते हैं ।

World’s first Electro Tridosha Graphy Scanning Center : E.T.G. center, E-52, Khalil Quarters Compound, Khapara Mohal, Cantt,KANPUR 208001 :Contact: 9336238994 : 09:00 AM to 02:00 PM daily

Word’s First Electro Tridosha Graphy E.T.G. Technology Research Center::::: Kunmun ETG Research Center, 67-70, BhusaToli Road, KANPUR-208001, UP::::Contcat for ETG Examination ::Evening 06 PM to 09 PM daily::::Contcat in Person/ appointment by phone:::0512 2367773

ई०टी०जी० परीक्षण तकनीक का दूसरा केन्द्र :………. कुनमुन ई०टी०जी० रिसर्च इन्स्टीट्यूट, 67/70, भूसाटोली रोड, बर्तन बाज़ार, कानपुर 208001, उत्तर प्रदेश, भारत

आयुर्वेद का सबसे नया आविष्कार : इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी : ELECTRO-TRIDOSHA-GRAPHY {ETG}- New invention in Ayurveda

In Medical science, all examinations, scans are from the Allopathic medical science sides, for example Xray, Ultrasound, MRI, CT Scan, Microscopic examination etc. ELECTRO-TRIDOSHA-GRAPHY [E.T.G.] is the first and only scan of Ayurveda & the ultimate Ayurvedic diagnosis solutions' technique. Readers can get more information in the websites, mentioned below or search details in the blog. आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान का नया आविष्कार - इलेक॒ट्रो त्रिदोष ग्राफी, ई०टी० जी०, तकनीक से [१] आयुर्वेद के मॊलिक सिध्धान्त तथा [२] शरीर के रोग निदान , इन दोनो के विषय में Data sheet डाटा रिपोर्ट के स्वरुप में प्राप्त कर सकते है । वैद्यों और आयुर्वेदिक चिकित्सकों को इस विधि से प्राप्त डाटा पर आधारित होकर मरीज की चिकित्सा करने पर अवश्य लाभ होता है । इस तकनीक के बारे में अधिक जानकारी इसी वेब ब्लोग पर या अन्य स्वतन्त्र web blog पर देख सकते है ।

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Electro-Homoeo-Graphy {E.H.G.} : Homoeopathy mein naya Avishkar

EHG , vartaman samay mein Homoeopathy vigyan ke liye yah naya avishkar, ETG technology se nikal kar aaya hai. Is takanik se Homoeopathy ke teen siddhant "Psora, Sycosis, Syphilis" ka manav sharir mein vyapt star ko napa ja sakata hai, isake alava "Vital Force" ka star aur "sensitivity" ka star bhi naap sakatey hain. Is takanik se Homoeopathy ki dawaon ka chunav bhi kar sakatey hai, rog nidan bhi kar sakatey hai, jyada jankari ke liye upar darshayi gayi, web sites par jakar vivaran dekha sakatey hain

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Aapane Likha, bahut khusi huyi आपने लिखा, बहुत प्रसन्नता हुयी

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