Posted by: prakruti on: November 1, 2009

बहुत अजीब सा लगता है जब कोई यह कहे कि आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान में झोला छाप डाक्टर पैदा हो रहे हैं । ऐसा गलत भी नहीं है । मैने कई बार इस ब्लाग में ऐसी ही बहुत सी बातें कहीं है ।
महामहिम परम आदरणीय राष्ट्रपति श्री मती पाटिल जी का कहना बिल्कुल शत प्रतिशत सही है कि आयुर्वेद के नाम पर जिस तरह से झोला छाप वैद्य पैदा हो रहे हैं, उन पर अन्कुश लगाना जरूरी और बहुत जरूरी है । इस बारे में उनकी चिन्ता जायज है क्योंकि एक ऐसा चिकित्सा विग्यान जिसे समय और अनुभव की कसौटी पर प्रकृति के अति निकट होने और तदनुसार भारतीय दर्शन का एक अन्ग होने पर जिस तरह का गौरव महसूस किया जाना चहिये था, उसकी कमी की आन्च महसूस किया जाने लगा है । यह सब गिरावट इसलिये हो रही है क्योंकि आयुर्वेद को लोगों ने व्यवसायिकता से जोड़ दिया है ।
जब तक आयुर्वेद एक प्रकार का दर्शन शाश्त्र बना रहा , तब तक तो ठीक ठाक रहा, इसमें ज्योंही व्यवसायिकता का पुट मिला कि इसमें भ्रस्टता का समवेश होना शुरू हुआ । आज जिस प्रकार से आयुर्वेद को ब्यापार बनाया जा रहा है , यह एक शुभ लक्षण नही है ।
यद्यपि अभी समय है और बहुत कुछ किया जा सकता है, लेकिन यह सब सरकार के भरोसे किया जाय, यह उचित नहीं लगता । बेहतर है वैद्य समाज इस समस्या को समझे और इस क्षेत्र में आ गयी खराबियों को पूरी ईमान्दारी के साथ दूर करने का प्रयास करे ।
महामहिम जी ने जिन अन्य बातों की ओर वैद्य समाज का ध्यान खींचा है , उन बातों पर भी गौर करना अतिआवशयक है ।
उम्मीद है वैद्य समाज के सन्गठन व्याप्त बुराइयों को दूर करने का प्रयास करेंगे ।
आत्मन मुनेन्द्र, मैं चिट्ठों पर लिंक के रूप में नहीं दिलों में रहता हूं ये तो आप बखूबी जानते हैं फिर गुरुदेव को संबोधित करके ऐसा लिखने की वजह क्या है? शायद हो सकता है कि आपको लगा हो कि प्रेम और आदर वणिकों के लेनदेन जैसा व्यवहार है। अरे मेरे भाई! इसी चिट्ठे पर गुरुदेव ने दुनिया के सामने लिखा है कि मैं उनका एकलव्य शिष्य हूं । दूसरी बात कि मैं सचमुच झोलाछाप ही हूं ये तो आप देख चुके हैं कि मैं बैग लादे कहां कहां भटकता रहता हूं :)
आदरणीय गुरुदेव से मुनेन्द्र की हिमाकत के लिये मैं निजी तौर पर क्षमाप्रार्थी हूं। मेरा नाम यहां लिंक करा हुआ था ये मुझे सचमुच नहीं पता है और फिर निवेदन करता हूं कि इसकी आवश्यकता ही नहीं है हमारे संबंध औपचारिकताओं से बहुत आगे हैं।
सादर नमन
November 13, 2009 at 2:31 PM
शायद आपने डा.रूपेश श्रीवास्तव को भी झोलाछाप समझ लिया इसलिये उनसे जुड़ी लिंक को अपने ब्लाग से हटा दिया जबकि वो तो अपने ब्लाग पर अभी भी आप और शास्त्री फिलिप जी को अपना मार्गदर्शक बताते हुए चिपकाए हुए हैं। मुझे भली प्रकार याद है कि एक समय डा.रूपेश श्रीवास्तव आपके ब्लाग पर लिंक करे हुए थे लेकिन ये व्यवहार आपका स्वभाव है और वो व्यवहार उनका स्वभाव है लिंक करने से दिल तो नहीं जुड़ जाता। ये काम तो डा.रूपेश को ही शोभता है कि सबके लिये जान दिये रहें।
November 13, 2009 at 8:59 PM
……….. Reply by Dr. D.B. Bajpai………..डा० रूपेश श्रीवास्तव जी एक “क्वालीफाइड आयुर्वेदिक चिकित्सक” हैं ।