अन्ना हजारे का पुणे मे डा० सन्चेती द्वारा इलाज किये जाने को लेकर बाबा राम देव…………………??
Posted by: prakruti on: जनवरी 30, 2012

अन्ना हजारे का पुणे मे डा० सन्चेती द्वारा इलाज किये जाने को लेकर बाबा राम देव तथा अन्न्ना टीम के उनके सहयोगी लोगों द्वारा डा० सन्चेती के ऊपर गलत इलाज को लेकर की गयी टिप्पणियों से मै कतई सहमत नही हूं / मुझे इस तरह का शक करने वालों पर कतई सहानुभूति नही है / यह केवक बकवास है और इसके अलावा और कुछ भी नही है /
मै चिकित्सकों की मानसिकता को बहुत अच्छी तरह से समझता हूं / इस दुनिया का कोई भी चिकित्सक यह कभी नही चाहेगा कि उसके पास दवा और इलाज कराने के लिये आने वाले किसी भी रोगी का वह अहित सोचे / हर चिकित्सक चाहता है कि उसका रोगी जल्दी ठीक हो , जल्दी स्वस्थ्य हो / ऐसा वह अपनी कार्य निपुणता और कार्य दक्षता को परकहने के लिये भी करता है / एक मात्र उद्देश्य यह नही होता कि मरीज की जेब साफ कर दी जाय / कुछ व्यावसायिक उशूल भी होते है , जिन्हें मै समझता हूं यह सभी चिकित्सक पालन करते है / आने वाला हर रोगी उसे व्यावसायिक सफ़लता के साथ साथ उसकी रोजी रोटी के लिये परोक्ष अथवा अपरोक्ष स्वरूप में अपना योग दान करता है /
इसलिये किसी भी चिकित्सक पर ऐसा आरोप लगाना सत्य नही है /
मुझे जो सही बात का आनकलन करने का अन्दाजा है , वह कुछ इस प्रकार हो सकता है /
Respiratory Tract की बीमारियों में जब infection बढता है तो सिवाय anti-biotics , anti-allergic , anti-spasmodic दवायें देने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नही होता / मरीज की तकलीफ के management के लिये आक्सीजन देना या वेन्टीलेटर का उपयोग करना भी आवश्यक हो जाता है / कभी कभी steroid देने की जरूरत पड़ जाती है / यह सब कुछ मरीज की जान बचाने के लिये किया जाता है /
मेरा ख्याल है , डाक्टरों नें कमी बेसी यही किया होगा और जब तकलीफ कन्ट्रोल में आ गयी तो फिर कुछ दवायें कुछ हफ्ते तक लेने के लिये कहा जाता है /
यह दवाओं और मरीज की दिन चर्या और खान्पान पर निर्भर करता है कि वह अपने घर पर किस तरह का व्यवहार करता है / कभी कभी मरीज दो दफा दवा खाने के बजाय एक बार खाने लगता है , जिससे होता यह है कि मौका पाकर infection फिर जोर पकड़ लेता है / दवाओं के साइड इफेक्ट भी होते है जो बिल्कुल एलर्झि जैसे असर करते हैं / शरीर में सूजन आ जाना, सान्स लेने में तकलीफ होना, पेशाब में जलन होना, पेशाब कम होना, मल सूख्ना होना, कब्ज हो जाना, मान्स्पेशियो की कमजोर हालत आदि आदि तकलीफें होती हैं /Proper rest न करने से भी तकलीफें होती है /
मुझे लगता है कि अगर डा0 सन्चेती को “पद्म” पुरस्कार न दिया जाता , तो शायद इस तरह की बात न होती / यह सन्योग की बात है कि सब कुछ और सारा घटना क्रम इस तरह से हुआ है , जिससे किसी लिन्क को मिलाए जाने का ही शक अधिक होता है / भले ही कोई कितना भी ईमानदारी और बिना लालच के काम क्यों न कर रहा हो , लेकिन शक करने वाले तो शक के नजरिये से ही हर बात को देखेगे /
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Aapane Likha, bahut khusi huyi आपने लिखा, बहुत प्रसन्नता हुयी