नाक की होने वाली यह बहुत प्रसिद्द तकलीफ है / अक्सर जुखाम सभी प्राणियों के होते हैं, ऐसा कोई भी नही है जिसे जुखाम न होता हो / यह बहुत कामन तकलीफ है / आम्तौर पर जुखाम बिना दवा और केवल मात्र परहेज करने से ही ठीक हो जाते हैं और एक दिन से लेकर एक सप्ताह मे ज्यादा से इयादा समय लगता है इसे पूर्ण आरोग्य प्राप्त करने में / लेकिन जब जुखाम बार बार हो और जरा सी भ सर्दी या गरमी या मौसम के बदलाव से जुखाम होने लगे, दवा करते करते कई सपताह लग जायें और एक जुखाम ठीक न हो और उसी बीच में दूसर जुखाम पैदा हो जाये तो इसे बीमारी मानकर निदान करते है /
बार बार जुखाम होना या एक जुखाम का होना न ठीक हो पाये और इसी बीच में दूसरा जुखाम हो जाये , दूसरा जुखाम भी इलाज करने के बाद जैसे ही ठीक होने की कगार पर आये कि तीसरा जुखाम का दौरा पड़ जाये और यह सिल्सिला चालू रहे तो इसे गम्भीर बीमारीसमझ कर इलाज करना जरूरी हो जाता है /
साल मे मौसम बदलने पर यदि जुखाम ओ तीन बार हो जाये तो इसे सामान्य स्वास्थ्य परिवर्ध्न की प्रक्रिया समझना चाहिए / लेकिन जब यह उग्र रूप ले , बार बार हो तो इसे बीमारी समझना चाहिये और इसका इलाज बीमारी समझ कर करना चाहिये /
जुखाम सर्दि और गर्नी की प्रतिक्रिया स्वरूक हो जाते है , जैसे अचानक मौसम में परिवरतन, ठ्न्दे स्थान से एक्दम से गरम स्थान पर आ जाना आदि, समय कुसमय ठन्दे पानी से स्नान या नदी मे स्नान करना आदि , यह सबसे बडा कारण होता है /
बहुत पुराना जुखाम इन्फेक्श्न होने से या इन्फ़ेक्सन होने के असर से होता है / इसमे सबसे पहले koch’s infection या tubercular infection हो सकता है / कभी कभी गले के sterptococci या staphilococci के कारण भी हो सकता है / जब तक यह इन्फ़ेक्सन कम नही होता या जाता नही है, तब तक जुखाम ठीक नही होता और बाद मे यह पीनस और ज्यादा जटिल बीमारियों मे तब्दील हो जाता है /
ऐसे जुखाम दूसरी अन्य बीमारियां पैदा कर देते है / जिनमें टोन्सिल्लितिस, यूवेलाइटिस, tracheal, laryngeal, pharyngeal, respiratory tract inflammation और pulmonaru organs related ्बीमारियां शामिल हैं / जल्दी ही इलाज नही क्या गया तो गम्भीर न्बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं /
पुराने जुखाम का इलाज अगर बहुत emergent condition है या बहुत complicated स्तिथि है तो कुछ दिन के लिये allopathic medicines का कोर्स कर लेना चाहिये जब स्तिथि सामन्य हो जाये तो फिर आयुर्वेद या होम्योपैथी या प्राकृतिक चिकित्सा या यूनानी का इलाज करना चाहिये, इससे जुखाम की तकलीफ धीरे धीरे सामान्य हो जाती है//
आयुर्वेद मे प्रकृति और दोष निर्धारण करके औषधियों का चुनाव करते हैं , जिसके लिये किसी वैद्य या आयुर्वेद चिकित्सक की सहायता लेना चाहिये / लेकिन कुछ सामन्य औषधियां है, जिन्हे सभी लोग उपयोग कर सकते हैं /
१- चित्रक हरीतकी
२- लक्षमी विलास रस नार्दीय
३- वासावल
४- अगस्त्य हरीतकी
५-स्तोपलादि चूर्ण
६- अभ्रक भस्म
सामय तौर पर उपरोक्त औषधियों का एकल प्रयोग या सामिलित प्रयोग रोग की अवस्था के अनुसार किया जाता है / इसे सुबह शाम शहद या सादे पानी या अन्य रोगोचित अनुपान के साथ सेवन कराते है /
आयुर्वेद की चिकित्सा से शत प्रतिशत पुराने और बिगड़े हुये जुखाम ठीक हो जाते हैं / अगर ETGAyurvedaScan का परीक्षण कराकर इलाज करायें तो शीघ्र आरोग्य प्राप्ति के लिये और बेहतर रिजल्ट मिलते हैं /
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