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अश्वगन्धा पाक ; Ashvagandha Pak ; Ayurvedic Aphrodisiac

आयुर्वेद की अवलेह अथवा प्राश अथवा पाक प्रक्रिया द्वारा बनाये जाने वाले औषधियों की कल्पना का यह एक उतकृष्ट योग है /

अश्वगन्धा जिसे लेटिन में Withania somniferra कहते हैं, एक ऐसी भारतीय जड़ी-बूटी है जो सदियों से शरीर को पुष्ट करने, वीर्य उत्पादन करने, देह के दर्द, मान्स पेशियों के दर्द और जोड़ों के दर्द को दूर करने में बनाये जाने वाले योगों में मिलाकर उपयोग की जा रही है /

ऐसा ही एक शास्त्रोक्त योग है पाक कल्पना का, जिसे “अश्वगन्धा पाक” के नाम से ्जानते हैं / इसे बनाने के लिये निम्न प्रकार की प्रक्रिया को अपनाते हैं /

४०० ग्राम अश्वगन्धा चूर्ण को ६ किलो दूध में पकाते हैं / जब दूध गाढा हो जाये तब इसमें दाल्चीनी, इलायची, तेज्पत्ता और नागकेशर का चूर्ण १२ ग्राम, जायफल, केशर, बन्सलोचन, मोचरस, जाटामान्सी, चन्दन, खैरसार, जावित्री, पीपलामूल, लौन्ग, कनकोल, पाढ, अखरोट की गिरी, भिलावा की मीन्गी, सिन्घाडा, गोखरू, रस सिन्दूर, अभ्रक भस्म, नाग भस्म, वन्ग भस्म, लौह भस्म प्रत्येक ६ ग्राम लेकर चूर्ण बना लें और उपरोक्त गाढे किये गये दूध में मिला दें / साथ ही ३ किलो शक्कर मिलाकर धीमी और मन्द आन्च पर रखकर रबड़ी जैसा गाढा होने तक पका कर रख लें /

इस तरह से बनाये गये पाक को अश्वगन्धा पाक कहते हैं /

यह खाने में बहुत स्वादिष्ट होता है / इसको एक या दो चाय चम्मच भर लेकर सुबह शाम दूध या शहद या सादे पानी के साथ सेवन करना चाहिये /

जिन लोगों को

[१] शुक्र विकार हों यथा हस्त मैथुन करके अपना शरीर बर्बाद कर चुके हों
[२] अत्यधिक वीर्य क्षय के कारण दुर्बल हो गये हों
[३] अत्यधिक स्वप्न दोष के कारण मानसिक अथवा शारीरिक स्वास्थ्य बर्बाद कर चुके हों
[४] वीर्य की कमी से सम्भोग करने मे सक्षम न हों
[५] अन्य कोई वीर्य दोष हो गये हों

इसके अलावा यह Arthritis, joints pain, musculoskeletal, neurological problems की बहुत अच्छी दवा भी है / जिन्हे जोड़ों के दर्द हो खास कर बूढे हो चुके लोगों के लिये , उन्हे यह पाक बहुत लाभ दायक है /

इस पाक का स्वाद jam जैसा मीठा होता है , इसलिये इस पाक को सेन्की हुयी Bread slice पर पतला पतला लगाकर नाश्ते में खा सकते है और ऊपर से चाय या दूध या पान का सेवन कर सकते हैं /

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About prakruti

Born 20 November 1945. Graduate in Ayurveda, Homoeopathy and Modern western medicine, Inventer of "Electro-tridosha-graphy" and "Electro-Homoeo-grapy". Over 50 years Medical practice experience of Homoeopathy, Ayurveda, Herbal and Modern western medicne etc etc, Research and development of newly invented technology Electro Tridosha Graphy ; ETG AyurvedaScan system is under taken still with new estabilization of parameter for status quantification of the AYURVEDA PRINCIPALS and disease diagnosis.

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