मरीज को गुमराह और गलत सलाह देने से बचें ; Do not misguide or wrong advise to patient

पिछले कुछ सालों से ऐसा देखने में आया है कि बहुत से चिकित्सक मरीज को उनकी बीमारी के बारे मे सही जानकारी नही देते और अगर देते भी हैं तो गुमराह करने वाली जानकारी , जिससे मरीज का भला होने की बजाय उसका नुकसान ही अधिक होता है /

ऐसे सैकड़ों उदाहरण है जिन्हे मैने चिन्हित किया है कि उन मरीजों की चिकित्सा करने वाले चिकित्सकों ने उनको अपने फायदे के लिये गुमराह किया और सही सलाह नही दी / इन सब केसेस में ऐसा नही है कि छोटे स्तर के चिकित्सक गण ही शामिल हो बल्कि ऐसा भी देखने मे आया है कि शीर्ष स्तर के गण मान्य चिकित्सक, जिनको समझा जाता है कि वे ईमान्दारी से सलाह देते है, ये भी शामिल हैं /

हलान्कि सलाह देना और उसको मान लेना कि सलाह सही है या गलत , यह depend  करता है कि जिसे सलाह दी जा रही है उसका क्या reaction है  और वह दी जाने वाली सलाह को किस स्वरूप में देखता है /

मै एक वास्तविक उदाहरण देता हूं / मेरे पास बहुत से उदाहरण हैं, जिन्हें मै ्समय समय पर पेश करने की कोशिश  करून्गा / मेरा एक कर्मचारी जिसकी उमर लगभग ३७ साल है , मेरे दवाखाने का सारा कम सम्भालता रहा है / बज़ार से दवायें लाना, उनको कूटना पीसना, साफ सफाई रखना, देखभाल, घर के बाहर का काम यथा मुकदमों की पैरवी करना और रिश्तेदारों के यहा जाकर उनको सामान देना , मेरे साथ मेरा ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की मशीन और अन्य accessories  लेकर टूर पर जाना आदि काम शामिल रहे है / एक तरह से वह मेरा हाथ रहा है / मैने उसको अपने एक अन्य मकान में सेवा करने की एवज में मुफ्त रहने की जगह मुहैया करा दी है / पिछले साल यही कर्मचारी एक मन्जिला छज्जे पर खड़ा था, अचानक वह imbalance  होने से नीचे जमीन पर गिर ग्या / आसपास के लोग उसे उठाकर चारपाई पर लिटा दिया और दवा करने लगे / उसका पाखाना पेशाब रुक गया / यह स्तिथि उसकी थी / मुझे इस घटना के बारे मे एक सप्ताह बाद पता चला, जब उसे तकलीफ हुयी / इससे पहले मै अनभिग्य था कि वह कहां है और क्या कर रहा है / अक्सर वह १० या १५ दिनों के लिये नही आता था, क्यों कि कभी कभी मै स्वयम बाहर चला जाता हू /

मुझे मोबाइल फोन से मेरे करमचारी ने आठवें दिन  सारा वकया बताया और कहा कि मुझे किस तरह की तकलीफ है / मैने कर्मचारी के घरवाले घबारये कि क्या किया जाये सलाह दी कि रीढ की दिक्कत है और इसका X-ray और MRI  जान्च करा लेना चाहिये / दोनों जान्चे हो गयी और इन दोनों ही रिपोर्ट में केवल मान्स्पेशियों के compact हो जाने के अलावा कोई अन्य anomalies नही निकली / मैने कहा कि इसकी मान्स्पेशियों का सिकुड़ कर एक गुच्छा जैसा बन गया है जिसकी वजह से आटो नरवस सिस्टम द्वरा भेजे जाने वाले और ग्रहण करने वाले signal ्बाधित हो रहे है और इसीलिये अन्दर के विसरा काम नही कर पा रहे है / यह एक inflammatory stage  है , अभी तजा ताजा चोट लगी है इसलिये inflammatory condition excited stage में है, धीरे धीरे जब यह अपने आप repair करेगी  और जैसे जैसे repairing होती जायेगी, मरीज की हालत सुधरती चली जायेगी / इसको केवल आराम की जरूरत है और  औषधि उपचार की आवश्यकता है / मरीज के घर वाले  मेडिकल कालेज ले गये , वहां भी दुबारा जान्च की गयी औए यही सलाह दी गयी कि चार महीने तक बिस्तर पर आराम करे और फिर फीजियोथेरापी करा ले, जिससे धीरे धीरे आराम मिलेगा / कानपुर के कई नामी गिरामी  neuro surgeons को दिखया गया , सबने इसी सलाह को ditto किया और कहा कि ऐसे माम्ले में Surgical Intervention की फिलहाल कोई जरूरत नही  है /

लेकिन उसके घर वालों को किसी डाक्टर ने सलाह दे दी कि इसका आपरेशन करादो, यह ठीक हो जायेगा और आपरेशन के बाद यह चलने फिरने और दौड़ने लगेगा / फिर क्या था, घर वाले इस मृग मरीचका में फन्स गये और तुरत ताव आपरेशन का  खर्च जोड़ने की जुगाड़ में जमीन का प्लाट और गहना जेवर बेच दिये गये / मैने उन सबको मना किया और कहा कि अगर आपरेशन करा लोगे तो इसकी हालत अभी जितनी ठीक है  आपरेशन करा लेने के बाद इससे  भी अधिक खराब और बुरी हो जायेगी / लेकिन मेरी बात सुनी नही गयी / कई अन्य दूसरे डाक्टरों ने भी कहा कि सर्जरी मत करायें, लेकिन उसके  Family physician  उसका आपरेशन कराने पर अड़े हुये थे / मै समझ गया कि इसमे “दलाली का चक्कर” है /

बहर हाल उसका आप्रेशन कर दिया गया / कैसा ौर किस तरक का आपरेशन हुआ या किया गया , यह मैने जानने की कोशिश तो मुझे साफ साफ किसी ने नही बताया / जिस family physician ने आपरेशन कराने की सलाह दी थी और बड़े बड़े दावे आपरेशन कराने के बाद मरीज को दौड़ाने के लिये किये जा रहे थे , उनका अता पता नही है /

आज उसकी हालत यह है कि आपरेशन से पहले वह जितना उठ बैठ लेता था , चारपायी से उठ कर कुर्सी में घन्टा आध घन्टा बैठ लेता था, पाखान पेशाब के लिये थोड़ा चल फिर लेता था , वह सब आप्रेशन कराने के बाद खत्म हो गया, उल्टे हाल यह हो गया है कि अब उसने पिचले आठ महीने से बिस्तर पकड़ लिया है और दिनों दिन उसकी दुर्दशा होती जा रही है / पाखाना पेशाब बिस्तर पर कर रहा है /

ऐसे एक नही सैकड़ों  उदाहरण मौजूद है / लेकिन मुझे ताज्जुब लगता है और आश्चर्य होता है कि लोग जानते हुये भी इस तरह का कार्य करते हैं / मुझे  घुटने बदलवाने वाले मरीज मिले / इसमे से ९९ प्रतिशत का कहना है कि वे पहले ज्यादा अच्छे थे जब उन्होंने घूटना नही बदलवाया था, घुटना बदलवाने के बाद उनको और अधिक दिक्कते पैदा हो गयी हैं /

घूटना बदलवाने के अच्छे या खराब परिणामॊ और अनुभवों को जानने और समझने के लिये सबसे अच्छे मरीज पूर्व प्रधान मन्त्री अटल बिहारी बाजपेयी हो सकते है /

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