नाड़ी-परीक्षण का माया जाल ; नाड़ी परीक्षण का दावा करने वाले वैद्य या आयुर्वेदिक चिकित्सक अपने मरीजों को बेवकूफ बनाते हैं ; Vaidya befooling patient in view of NARI-PARIKSHAN

अक्सर लोग और मरीज बताते हैं कि उस शहर में या इस शहर में या उस कस्बे में या उस गांव में बहुत बड़े वैध हैं ’ जो नाड़ी परिक्शण में बहुत माहिर हैं और नब्ज को पकड़्ते ही तोते की तरह बोलने लगते है कि उनको क्या क्या बीमारी है ? वैद्य जी यहां तक बता देते हैं कि आपने कल क्या खाया था और आगे क्या खाना चाहते है या आगे आपकी खाने की क्या इच्छा होगी ? यह सब वैद्य जी इस तरह बताते हैं जैसे चिकित्सक महोदय वैद्य न होकर कोई महान ग्यानी ध्यानी हों /

मै ऐसे चमत्कारिक गुण रखने वाले और सटीक नाड़ी परीक्षण करने वाले वैद्य की तलाश में हमेशा रहता हूं / लेकिन मुझे पिछले ५० साल से कोई भी नाड़ी वैद्य नही मिला, जो पूरी तरह से सही हो और इस तरह के सटीक और सही दावों पर खरा उतरता हो जैसा कि आयुर्वेद मे बताया गया है /

नाड़ी विग्यान का अध्ध्यन और नाड़ी का परिक्षण करने की विधि का मैने बहुत गहरायी से practice मनोयोग के साथ किया है / आज भी बहुत मनोयोग के साथ कर रहा हूं / अब तो आयुर्वेद की नई तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन द्वारा नाड़ी परिक्शण की सभी बातें और नाड़ी विग्यान का सभी ग्यात नप कर उसकी मौजूद intensity के साथ हो जाता है, ऐसी गूढ बातों का ग्यान ढून्ड़ने का प्रयास बराबर चलता रहता है / इन्जीनियरिन्ग के बहुत से छात्र नाड़ी परिक्षण यन्त्र बनाने का प्रयास कर रहे हैं , उनको मै बताता हूं कि अपने यन्त्र में वे यह परिवर्तन करे जो दूसरे नही बना पाये है और इसे मेरे बताये गये ideas को लेकर यन्त्र को इस तरह से बनायेन्गे तो जबर दस्त कामयाबी मिलेगी और यह विश्व का सर्वोत्तम नाड़ी यन्त्र बन जायेगा / आई०आई०टी० कानपुर के छात्र तथा कुछ दूसरे इन्जीनियरिन्ग सन्स्थानों के छात्र ऐसे प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं /

मुझको जहां भी लोगों ने या मरीजों ने बताया कि अमुक स्थान पर नाड़ी परीक्शन करने वाले बहुत माहिर और expert वैद्य है, मै ऐसे expert से मिलने के लिये उनके पास दूर दूर तक की यात्रा करके और अपना समय बरबाद करके वहां जाता हूं ,वैद्य जी के ग्यान को परखता हूं, लेकिन जैसा दावा मरीजों ने या लोगों ने किया और बड़ी बड़ी बातें की वे सब झूठ और झूठ का पुलिन्दा निकली और कुछ भी ऐसा नही था जो चमत्कारिक लगे / बताये गये दावे की हकीकत सही नही था / सब कुछ गलत निकला / बाद में मैने उन सब मरीजों और अन्य लोगों की तलाश की जो इस तरह का भ्रामक प्रचार करते हुये मिले थे / मैने उनको फटकारा और ताकीद की कि इस तरह का दावा और प्रचार न करें /

दर असल मेरी आदत है कि जब कोई कहता है कि फलाने डाक्टर ने इलाज करके मरीज को  यह चमत्कार दिखाया या वह चमत्कार , इसे  मै केवल सुन लेता हूं और अपनी कोई प्रतिक्रिया नही व्यक्त करता / इसका कारण यह है कि बताने वाले सिर्फ लफ्फाजी करते है और कोई भी व्यक्ति बह्त गम्भीर नही होता है, यह हम सब देश वासियों  की मानसिक आदत है / एक अच्छे श्रोता होने के नाते मै मरीजों की ऐसी बकवास सुनता रहता हूं जिसमे कुछ भी वास्तविक नही होता / लेकिन जब मै इन सब दावों को वैग्यानिक परीक्षण की कसौटी पर कसता हू तो बहुत बेरहमी के साथ दावों को पुष्ट करने के लिये वह सभी तकनीक अपनाता हू जो दावों कि सत्यता को परखने  के लिये जरूरी होते है / ऐसे कड़े परिक्षणों की स्तिथि में नड़ी विग्यान के दवे करने वाले सभी खोखले निकलते हैं /

इसके पीछे की मानसिकता यह है  कि लोग जिस वैद्य के पास नाड़ी दिखाने के लिये आते हैं , वे उस वैद्य को नीचा दिखाने के लिये एक बड़ी लकीर खींचते हैं और super-seedकरने की कोशिश करते हैं कि फलां वैद्य तो ऐसे देख कर बताते थे कि क्या मर्ज है / यह सब वैद्यों की कमजोरी की नस पकड़ कर मरीज करते हैं /

ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के परीक्षण के बाद यह सब धान्धली नही चलती है /

हकीकत यह है कि नाड़ी परीक्षण करना वैद्य की नौटन्की के अलावा और कुछ भी नही है / आयुर्वेद चिकित्सक इसमें कोई कुछ खास करता हो , ऐसा कुछ भी नही है / ये सब आयुर्वेद में बतायी गयी बातों को समझ कर केवल बताते रहते हैं / इसे कोई भी कर सकता है, यदि उसे आयुर्वेद के निदान ग्यान प्रकृति, दोष आदि के बारे में अध्ध्यन हो / हां, यह जरूरी है कि आयुर्वेद चिकित्सक बहुत घाघ किस्म का हो, बातों मे बहुत चतुर हो,दूसरे को बेवकूफ बनाने मे बहुत माहिर हो और शास्त्र का ग्यान हो या न हो , लेकिन परिस्तिथियों को कैसे अपने अनुकूल बना ले यह गुण जरूर होने चाहिये /

सत्य तो यह है कि सभी 96 percent महिलायें “पित्त” प्रकृति की होती हैं,बाकी की 04 percent चार प्रतिशत महिलाये मिश्रित प्रकृति की होती हैं,ऐसा ही पुरुषों के साथ है , ९६ प्रतिशत पुरुष “कफ” प्रकृति के होते हैं और चार प्रतिशत मिश्रित प्रकृति के होते हैं/ इसमें दूसरे दोष की मिश्रित intensity कितनी होगी इसे ब्यक्ति या जिसका परीक्षण किया जा रहा है उसे देखने से ही पता चल पाता है /

असली नाड़ी परीक्षण Radial Pulse examination से केवल  [१] व्यति जीवित है या मर चुका है [२] प्रति मिनट नाड़ी  की चाल कितनी है [३] नाड़ी की गति कैसी है [४] नाड़ी का प्रेशर कितना है [५] आयुर्वेद के हिसाब से नाड़ी परीक्षित करने के लिये उनगलियों का दबाव रेडियल पल्स पर देने से  किस अन्गुली के नीचे throbbing sensation  अधिक या कम महसूस होता है, इतना ही ग्यात कर सकते हैं / इसके अलावा अगर कोई दावा करता है तो सिवाय बेवकूफ बनाने के और कुछ नही करता /


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