मारत में रिसर्च करने वालों की स्तिथि ; Fate of RESEARCHERS in INDIA


भारत देश में रिसर्च करने वालों का क्या हाल होता है ? इसका प्रत्यक्ष हाल मुझसे ज्यादा और कौन जान सकता है , आइये आप भी इन सबका मुलाहजा फरमाइये /

उपरोक्त पत्र को देखिये , यह मेरे  १८ साल की मेहनत के बाद मिला हुया परिणाम है /

भारत सरकार के कई  विभागों और अनुसन्धान सन्सथानों में ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन का परीक्षण किया जा  चुका  है , इसकी Pilot Study  भी की जा चुकी है /  मुझे इसकी मशीन बनानी है , जिसके लिये मैने National Innovation Foundation  को मदद करने के लिये लिखा था, जिसका मजमून देखिये जो ऊपर वाले पत्र में लिखा गया है /

यह उत्तर देखकर मै हैरान हूं और सोचता हू कि अगर मै कहीं “महा मूर्ख ” या “झोला छाप ” या  Quack Doctor  या ” गधा डाक्टर” या “घोड़ा डाक्टर”  होता , तो सबसे अच्छा और बेहतर होता / मै तो अल्प सन्ख्यक मुसलमान अथवा क्रिश्चियन अथवा जैन आदि अल्प सन्ख्यक समुदाय से भी नही हूं /  मै पिछड़ा , अति पिछड़ा , शेड्य़ूल कास्ट और शेड्यूल ट्राइब जैसे वर्ग से भी  नही हूं / मै सवर्ण हूं इसलिये मेरे लिये इस देश में कोई सुविधा रिसर्च कार्य और रिसर्च के विकास के लिये नही है ???????भारत सरकार को ऐसे ही सन्ग्या वाले और वर्ग भेद और वर्ग विभेद वाले वैग्यानिकों की जरूरत भी है , जो अधिक से अधिक  उनके वोट बैन्क बनें /

वास्तविकता यह है कि मै अपने आपको  आयुर्वेद और होम्योपैथी के प्रैक्टीशनर के अलावा प्राचीन और आधुनिक चिकित्सा विग्यान का छात्र और विद्यार्थी के अलावा अपने आप को और कुछ ज्यादा नही समझता , लेकिन लोग मुझे बहुत निकृष्ठ कोटि का वैग्यानिक भी मानते है /  हमारे जैसे बहुत छोटे किस्म के वैग्यानिकों का जब यह हाल है कि बिना किसी सहायता के अपने व्यक्तिगत प्रयासॊ से जितना भी किया और किन किन मुश्किलों को पार करके किया और मन में यह विचार कि इसकी मशीन बनी तो सारे विश्व के गरीब से लेकर अमीर तक इसका फायदा उठायेन्गे , ऐसा मै “वसुधैव कुटुम्बकम” की भवना कि सारा विश्व या इस धरती पर रहने वाले सभी लोग मेरा परिवार है  , इस आविष्कार का सारी दुनियां फायदा उठायेगी , यह मै विचार करता हूं /

लेकिन हालात दूर दूर तक पाजिटिव नजर नही आते क्योंकि मेरे पास पैसे और साधन दोनों ही नही हैं , ऐसे में न तो ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की मशीन बन पायेगी और न ही इसका फायदा कोई उठा पयेगा / मै जैसी मुश्किलें झेल रहा हूं उससे तो मै अन्दाजा लगा सकता  हू , उन  वैग्यानिकों के बारे में जो मुझसे ज्यादा हज़ार गुना बेहतर काम करना चाहते हैं लेकिन उनको मौका कोई नही  मिलता  है और मौका भी कोई नही देता है ??????

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One thought on “मारत में रिसर्च करने वालों की स्तिथि ; Fate of RESEARCHERS in INDIA

  1. What is the problem with the govt. institutes is not clear yet I firmly believe that govt agencies should come out for testing on science such innovations which Dr bajpayee like senior person en devour for mankind.It is sure he is not greedy and he only wishes to utilise his experience for poor peoples at large.AAYUSH deptt. must look to such proposal if it really want innovations to come.Even govt should amend the laws and provide budgetary provisions in the PLAN they finalize each year.I am not the known person of Dr bajpayee and only commenting in the wide interest of nation being a senior citizen and a retd class one officer of GOMP.

    ………..reply by Dr DBBajpai………..No doubt the condition of research in India is very very very poor in some sectors, which I have seen personally , when I visited several institutions, working rearches on various levels, even today I am in touch with the research institution for fabrication of ETG AyurvedaScan machine. I for the first time when called by the Ministry of Health and Familywelfare, Government of India , new delhi , the present officers, who were seniour Beurocrates of Government of India, appreciated my work with the comment that “you make impossible to possible” . but the Political front does not want progress in this field. The commetties are full of political personals and they do not understand what is in reality, therfore recommendations of thee researches are kept a side and no body then ask, where they are ?

    I am not doing this invention for me alone, I want that every person of this world should be benefitted by this technique. Unfortunately wih the best of my efforts, I couldnot mature my idea.

    For your information, Goverment of India, Department of AYUSH, NEW DELHI have examined this technology and Many times scientific presentations on various level have been done and PILOT STUDY of this techbology have been done at Cebtral Research Institute, New Delhi The technology is approved by the India Governmet since 2004 to 2009. Any one can take information under the Right to information act 2005 regarding this technology.This is a recognised technology from Indian Government.

    Dr DBBajpai , Ayurvedic Diagnostician
    Director and Chief ETG AyurvedaScan Investigator.

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