डायबिटीज यानी खून में शक्कर का अधिक होना ; ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित इलाज से पूर्ण आरोग्य सम्भव


खून में शक्कर अथवा सूगर का अधिक पैदा होना जैसी तकलीफों को “डायबिटीज” या Diabetes के नाम से जानते है / यह बहुत सामान्य और तेजी से फैलने वाला रोग साबित हो रहा है /

लगभग ६० साल पहले डायबिटीज बीमारी को कोई जानता तक नही था / इसका कारण यह था कि निदान ग्यान के लिये कोई माकूल और भरोसे मन्द तकनीक नही थी, जो यह पहचान कर ले कि अमुक व्यक्ति को डायबिटीज हुयी है / कुछ पहचान अवश्य थी जिनसे यह पता चल जाता था कि अमुक को डायबिटीज की शिकायत है , मसलन [१] पेशाब करने के बाद पेशाब में चीन्टी अथवा चींटॊ का झुन्ड लगना [२] बार बार पेशाब होना [३] एक बार में बहुत अधिक मात्रा में पेशाब का होना [४] रात में कई कई बार पेशाब होना, जिससे नींद बार बार टूटना [५] प्यास बहुत अधिक लगना और बार बार बहुत ज्यादा मात्रा में पानी का पीना [५] भूख बहुत लगना [६] शरीर का मोटा होता जाना या शरीर अगर मोटा है तो दुबला होता जाना [७] त्वचा का रूखा हो जाना [८] घाव या कट जाने या खरोंच लग जाने के बाद जल्दी पकना और मवाद पड़ जाना तथा घाव का जल्दी जल्दी नही भरना [९] नपुन्सकता का आना [१०] महिलाओं में गर्भ धारण करने की क्षमता का कमजोर होना [११] नेत्रों की दॄष्टि का कमजोर होना आदि आदि /

जब यह सब लक्षण होते थे तो मधु-प्रमेह या डायबिटीज की आशन्का होती थी और यह निदान होता था कि मधु प्रमेह का इलाज रोगी का किया जाना चाहिये, ऐसा निर्धारित करते थे / ६० साल पहले लोग आयुर्वेदिक दवा और पथ्य परहेज का पालन करके डायबिटीज पर नियन्त्रण कर लेते थे और पूर्ण जीवन प्राप्त करते थे / उस जमाने में केवल पेशाब की जान्च द्वारा ही पता करते थे कि डायबिटीज है या नही है / बेनेडिक्ट सोल्यूशन को परख नली में डालकर स्प्रिट बर्नर से गर्म करके और फिर उसमें पेशाब की कुछ बून्दें छोड़्कर सोल्य़ूशन का रन्ग देखा जाता था और इस रन्ग परिवरतन को देखकर निर्धारित करते थे कि कितनी पेशाब में शूगर है / आयुर्वेदिक दवा का कितना असर होता है यह भी इसी टेस्ट से पता चल जाता था /

इस जमाने में डायबिटीज को दो भागों में शुमार करते थे / [१] Glycosuria [२] Glycoceamia [डायबेटीज इन्सीपिडस और डायबेटीज मेलायटिस ]
ग्लाइकोसूरिया का मतलब सीधा सीधा यही होता था कि मरीज को पेशाब के साथ शक्कर जाने की शिकायत है / ग्लायकोसीमिया का मतलब यही होता था कि खून में शक्कर अधिक होने की शिकायत है / साठ के दशक में खून की शक्कर जान्चने का तरीका बहुत पेचीदा होता था /

इससे पहले लोगों को और चिकित्सक समुदाय को यही पता था जैसा कि उस जमाने की Practice of Medicine की किताबों मे जिक्र मिलता है / बदलते समय के साथ साथ आज हाल यह है कि डायबेटीज टाइप १ से लेकर डायबेटीज टाइप ४ तक का शुमार किया जाने लगा है /

फिर भी आधुनिक चिकित्सा विग्यान के चिकित्सानुकूल क्षेत्र में डाय्बेटीज रोग के इलाज के लिये नित नई बातें सामने आ रही है / इस पर अध्ध्य्यन भी किये जा रहे हैं /

आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान में भी आयुर्वेद के चिकित्सक प्रयोग कर रहे हैं लेकिन यह सब औषधियों को लेकर है / क्या आयुर्वेद के मौलिक सिध्धन्तों पर इस रोग के बारे में कोई अध्ध्यन हुआ है ? ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित अध्ध्यन कई साल पहले किया गया था, जिसमे १०० (एक सौ) मरीजों का पूरा रिकार्ड अध्ध्यन करके हमने अपने निष्कर्ष इसी वेब ब्लाग पर देकर सारी दुनियां को यह बताने की कोशिश की है, जो नीचे दी गयी है ;

१- यह कि pancrease अकेले डायबिटीज की बीमारी पैदा करने के लिये जिम्मेदार नही है
२- यह कि Liver अगर ठीक काम न करे या Liver Patho-physiology हो तो भी यह बीमारी होती है
३- यह कि small intestines ठीक कार्य न करे या small intestines की patho-physiology हो, तो भी यह तकलीफ होती है /
४- यह कि Gall Bladder और spleen दोनो का सम्मिलित कार्य यानी pathophysiology असामान्य हो तो भी यह तकलीफ होगी
५- यह कि Large Intestine की pathophysiology होगी तो भी डायबिटीज की बीमारी होती है
हमारे इस निष्कर्ष की बहुत आलोचना की गयी और यह चिकित्सकों के बीच में आलोचना का विषय बन गया / इस अनुसन्धान के प्रकाशन के बाद लोगों ने ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की इन findings की जमकर खिल्ली उड़ाई / लेकिन इस ETG findings के प्रकाशन के डेढ साल बाद इस को उस समय बल मिल गया और हमारी findings को सही रास्ता मिला , जब जापान के वैग्यानिकों नें अपने प्रयोगों से यह सिध्ध करके सारी दुनियां को बताया कि डायबेटीज के लिये अकेले Pancrease जिम्मेदार नही है , बल्कि Liver के कारण भी डायबिटीज हो सकती है / जापान के वैग्यानिकों के यह सब निष्कर्ष भारत के अन्ग्रेजी और हिन्दी समाचार पत्रों मे प्रकाशित हुयी / हमारी बात सही निकली , जो खिल्ली उड़ा रहे थे, उनकी जबान बन्द हो गयी /

कुछ दिनों के अन्तराल के बाद ब्रिटिश वैग्यानिकों के शोध करताओं नें यह निष्कर्ष निकाला कि छोटी आन्तों के कार्य विकृति के कारण भी डायबिटीज होती है / अगर छोटी आन्तों की लम्बाई को काटकर छोटा कर दिया जाय तो डायबिटीज पर कन्ट्रोल किया जा सकता है /

इसके कुछ दिनों बाद आस्ट्रेलिया के वैग्यानिकों ने शोध करके बताया कि बड़ी आन्तों के कारण भी डायबिटीज होती है / अगर बडी आन्तों को काटकर लम्बाई घटा दी जाय तो डाय्बिटीज को कन्ट्रोल कर सकते हैं /

वैग्यानिकों के ऐसे निष्कर्ष से ETG AyurvedaScan की findings को बहुत सपोर्ट मिला / इसलिये कि अगर यह शोध हमे करने पड़्ते तो इसमें करोड़ो रुपये खर्च होते , जो हमारी क्षमता से परे है और हमारे लिये सपने जैसी है /

डाय्बेटीज के मरीजों का इलाज आज दिन भी ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की परीक्षण फाइन्डिन्ग्स से किया जा रहा है / सभी मरीज लाभान्वित हुये है / हमे शत प्रतिशत रिजल्ट मिलते है /

एक बात और, Type 1और Type 2 और Type 3 [beginning] के मरीज जल्दी ठीक होते है जब कि टाइप ३ [एडवान्स] और टाइप ४ को ठीक होने में तुलनात्मक स्वरूप में अधिक समय लगता है / ऐसे मरीजों में हाई ब्लड प्रेशर या हृदय रोग यदि होता है तो वह भी उपचार के साथ साथ सुरक्षित होते है और बेहतर तरीके से ठीक होते हैं / बहुत एड्वान्स लेवल के मरीज यद्यपि निदान के डृष्टि कोण से सही बीमारियों का पता ई०टी०जी० आयुर्वेदस्कैन के जरिये रिपोर्ट के कर लेते हैं लेकिन समस्या औषधियों के प्रभाव को लेकर होती है और बीमारी के management तथा रोग के treatment को लेकर होती है, जो सिर्फ आरोग्यशाला या पन्चकर्म केन्द्र में ही रहकर की जा सकती है /

इस रोग में अगर रोगी परहेज और औषधियों का कुछ समय तक उपयोग करे तो टाइप एक तथा टाइप दो डायबिटीज अवश्य ठीक हो जाती है /

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3 thoughts on “डायबिटीज यानी खून में शक्कर का अधिक होना ; ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित इलाज से पूर्ण आरोग्य सम्भव

  1. Dear Sir
    i am suffering with diabetes for last 5 years. the medication i am taking is Insulin Novorapid and Novomix ( thrice a day) and the tablet is Glizid M.( twice a day).
    still the sugar levels are not in controll.
    i am staying in Uganda Africa. could you please help me out to cure it with your ayurcvedic medicines. please sugguest.

    ………..reply………..patient from AFRICA, who came to Kanpur for ETG AyurvedaScan based Ayurvedic+Ayush diagnosis and treatment often told me that in AFRICAN countries large number of populations are affected from Diabetes duly treated by Allopathic medicines and with Insulin even then after treatment without any marked result.

    I can not say , how the version is true and upto which level, unless I could not see and observe personally, the reasons behind it, cropping the problems.

    Anyway you can use ayurvedic + ayush remedies for better management of the problem according to your wish . Thanks

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