LEUCODERMA / WHITE SPOT / VITILIGO EVIDENCE BASED CURED CASE ; सफेद दाग / वीटीलिगो / ल्यूकोडेर्मा के रोगी के आरोग्य होने के सबूत के साथ विवरण


यह एक २५ साल के रोगी का सफेद दाग से आरोग्य होने के PHOTO evidence के साथ बताया जारहा है कि किस प्रकार से ETG AyurvedaScan और इसके सम्बन्धित परीक्षण कराने के बाद आयुर्वेद का इलाज कराने से साफेद द्दग की बीमारी चाहे जिस स्तर की हो, वह अवश्य ठीक होती है /

प्रस्तुत रोगी की उम्र इस समय २५ साल की है / इसको १५ साल से सफेद दाग की बीमारी है / जब यह १० साल की उम्र का था तब इसे सफेद दाग होने शुरू हुये थे /

तमाम एलोपैथी का इलाज और होम्योपैथी का इलाज और आयुर्वेद का इलाज करने के बाद भी यह नही ठीक हुआ और स्फेद दाग इसके सारे शरीर मे फैल गये / शरीर का ऐसा कोई भी हिस्सा या अन्ग नही था जहां पर सफेद दाग न मौजूद हो /

लगभग ११ माह पहले यह रोगी मुझे दिखाने के लिये आया था / इसके पिता एक डाक्टर है जो कानपुर से लगभग ३० किलोमीटर दूर अपनी प्रायवेट प्रैक्टिस करते है /

इस लड़्के का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और दूसरे परीक्शण करने के बाद इसको आयुर्वेद की दवा खाने के लिये पर्चा लिख दिया गया था /

नीचे का लिया गया चित्र उस समय का है जब ११ महीना पहले रोगी इलाज के लिये आया था / इस रोगी के सारे शरीर मे सफेद दाग है [जो अब नही है या बहुत अधिक सन्ख्या मे ठीक हो चुके है ]

इस चित्र को ध्यान से और बहुत गौर करके देखिये कि किस तरह का इसका रन्ग और स्वरूप है /

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ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित आयुर्वेदिक दवाओ के इलाज करने के पान्च महीने यानी आयुर्वेदिक द्वाओ को पान्च महीने खाने के बाद यह रोगी दुबारा प्रामर्श के लिये कान्पुर आया था / उस समय यह चित्र लिया गया था /

रोगी के पान्च महीने के इलाज के बाद सफेद दाग मे क्या क्या परिवरतन हुये है इसे भी बहुत गौर के साथ देखिये /

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आयुर्वेदिक दवाओ के ११ महीने के बाद सफेद दाग की स्तिथि देखिये / यह लगभग ठीक हो चुका है / देखने मे नही लगता कि कही सफेद दाग है , लेकिन कैमरे की फ्लश के चमकने से यह बहुत अधिक स्पष्ट दिखाई देते है /

नगी आन्खो से देखने पर यह सफेद दाग २ फिट की दूरी  से नही दिखाई देते है

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ऊपर जिस चित्र को दिखाया गया है वह हिस्सा मरीज की पीठ की ओर का है /

नीचे का चित्र मरीज की पेट की ओर का है / नीचे का चित्र ११ माह पहले का है , जब रोगी सफेद दाग के इलाज के लिये आया था / इसे बहुत ध्यान से देखिये / इस सफेद दाग मे कही भी किसी भी प्रकार की कोई काली चित्ती या काला धब्बा नही है और यह एक्दम सफेद है /

OLYMPUS DIGITAL CAMERA.नीचे का चित्र लगभग पान्च माह पहले का है जब मरीज दुबारा परामर्श के लिये आया था ./ इसे देखिये और पहले के चित्र से तुलना करिये कि MELANIN PIGMENT किस तरह से सफेद दागो मे भर रहा है /

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लगभग  ११ माह आयुर्वेदिक इलाज करने के बाद इस रोगी के शरीर के दाग मे किस तरह के परिवर्तन आये है , यह देखिये /

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रोगी के शरीर के सारे शरीर मे सफेद दाग थे जिनमे से बहुत से अधिकान्श ठीक हो चुके है और जो बाकी बचे है वे भी सफेदी छोड़्कर काले और त्व्चा के रन्ग के धीरे धीरे हो रहे है /

१५ साल पुराने सफेद दाग के रोगी का इतनी जल्दी ठीक होना यह सब ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और इसके सप्लीमेन्टरी परीक्षण आधारित आयुर्वेदिक इलाज के परिणामो का एक ऐसा साक्ष्य है जिसे किसी भी कीमत पर नकारा नही जा स्कता है /

हम्ने हमेशा कहा है कि LEUCODERMA / VITILIGO / WHITE SPOTसफेद दाग या ल्यूकोडेर्मा अब लाइलाज नही रहा है / इसका सटीक और अचूक इलाज आयुर्वेद की नई आविश्कार की गयी तकनीक E.T.G. AYURVEDASCAN TECHNOLOGY  पर आधारित होकर किया जता है तो यह अवश्य ठीक होता है /

हमारे रिसर्च केन्द्र मे सफेद दाग के जितने  भी मारीज ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित इलाज कराने के लिये आये है वे सभी के सभी शत प्रतिशत ठीक हुये है / 

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EPILEPSY WITH IMPOTENCY ; A CASE OF 25 YEARS OLD YOUNG PERSON ; मिर्गी रोग के साथ नपुन्सकता ; २५ साल के नवयुवक के एक केस का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित अध्ध्य्यन


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२५ साल के एक नवयुवक का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित परीक्शण किया गया जिसे मिर्गी के साथ नपुन्सकता की बीमारी थी /

नीचे दिया गया ट्रेस रिकार्ड ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की ट्रेसेज का है जो मरीज के सिर और शरीर के दूसरे हिस्से से लेकर रिकार्ड की गयी है और यह मरीज का रिकार्ड horizontal position  मे rest  की स्तिथि मे  लेकर किया गया है /

इस रिकार्ड मे दिमाग के पान्चो हिस्सो का elecrical diffussion level record किया गया है /

इस रिकार्ड मे Temporal region  और Frontal region सामान्य से अधिक और Parietal region  सामान्य से कम प्राप्त हुआ है /

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नीचे का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की ट्रेसेज का रिकार्ड मरीज को TREAD Machine ट्रीड मशीन पर दौड़ाकर रिकार्ड किया गया है / जिन स्थानो पर पहले  HORIZONTAL POSITION  पर रिकार्ड किया गया है , उन्ही उन्ही स्थानो पर vertical position running condition  पर नीचे का ट्रेस रिकार्ड लिया गया है / दोनो मे फर्क देखा जाना चाहिये/

Disease Diagnosis  के हिसाब से यह आवश्य्क भी है कि बदली हुयी शारीरिक अवस्थाओ मे बीमारियो और शरीर के कार्य कलापो मे क्या क्या परिवरतन आते है और इन परिवर्तनो  के अध्ध्य्यन के बाद  किस तरह के निष्कर्ष निकाले जाने चाहिये , आयुर्वेदिक आयुश इलाज के लिये यह जानना बहुत जरूरी है /

दौडाकर किये जाने के बाद वात और पित्त दोष का उभर कर सामने आना यह बताता है कि इस मरीज को पित्तज-वातज मिश्रित विकृति है / 

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नीचे का ट्रेस EPIGASTRIUM REGION  का है जिसे आराम की स्तिथि मे horizontal position  मे लिया गया है / इस रोगी के इफीगैस्ट्रियम मे सूजन है और बाहर से हलका धचका देने पर बहुत painful  है / 

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नीचे का ट्रेस EPIGASTRIUM REGION क है जो tread machine  मे दौड़ाकर रिकार्ड किया गया है / दौड़ाकर जब ई०टी०जी० रिकार्ड किया जाता है तो visceras  की hide anomalies  उभर कर स्पष्ट रूप से सामने आ जाती है / सूजन का स्पष्ट मुजाहरा इन ट्रेसेस मे दिखाई दे रहा है /

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.नीचे के त्रेस शरीर के उन स्थानो से रिकार्ड किये जाते है जहा से यह पता चल सके कि शरीर का circulation पैरो की तरफ है या सिर की तरफ / .

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दौडाकर किये गये etg ayurvedascan  ट्रेस का स्वरूप देखिये/ मानसिक रोगो और मन्सिक टेन्शन करने वाले रोगियो मे इसी तरह के ट्रेस मिलते है जिनसे निदान होता है कि उनको किस तरह की और किस nature  की तकलीफ अथवा रोग है /

इस तरह कॊ diagnosis से आयुर्वेद की औषधियो का चयन बहुत सुगम और सटीक और अचूक होता है जो कभी भी नही फेल होता है /

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नीचे की रिकार्ड की गयी ट्रेस E.T.G. AYURVEDASCAN CONTINUOUS TRACE RECORDER द्वारा प्राप्त की गयी है /

दिमाग और सिर तथा TORSO ORGANS  के चुने गये हिस्सो का रिकार्ड किया गया ताकि पता चल सके कि रोगी की किस तरह की बीमारी developए  हो रही है /

यह पहला ट्रेस रिकार्ड है जो पहले के शुरुआती ३० सेकन्ड का है /

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रोगी को बिस्तर पर लिटाकर लगभग चार घटे के लगातार रिकार्ड करने के बाद सबसे अन्त का रिकार्ड नीचे दिया गया है /

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ऊपर के रिकार्ड और बाद के रिकार्ड के चार घन्टे के अन्तराल के ट्रेसेस का अध्ध्य्यन करने के बाद पता चला कि इस रोगी के मश्तिष्क के दोनो हिस्सो के बीच के साथ होने वाले signal diffussion और signal recieveing  के बीच मे fraction of seconds  का अन्तर आता है जिसे electrical इम्बलन्चेस के कारण होता है ऐसा मानते हैं /

इसके अलावा TORSO ORGANS  की anomalies भी सामने आयी है /

जब सभी आन्कड़ो का  विस्तार पूर्वक विष्लेषण करने के बाद निष्कर्ष निकाला जाता है कि मरीज के अन्दर किस तरह की anomalies  और disorders  मौजूद है तब उस आधार पर इलाज करने से रोगी अवश्य ठीक होते है चाहे उनको कैसी भी और किसी भी तरह की बीमारी क्यो न हो ???

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ABOUT “AYURVEDA” , EXCEPT FEW ASIAN COUNTRIES, MOST OF THE GLOBAL NATIONS AND POPULATION DO NOT KNOW EVEN LEAST WELL ABOUT INDIAN AYURVEDA MEDICAL SYSTEM


I have treated and presently I am treating almost patient from FIVE CONTINENTS i.e. from ASIA from AFRICA, from AUSTRALIA from AMERICA , from EUROPE.

In between these visitor patient, most of the Non Resident Indians and their NATIVE FRIENDS of that corresponding countries, where they live, come for the ETG AyurvedaScan examination and for supplementary tests.

It came in notice that except few Asian countries , outside of the boundaries of these few nations, no body knows about the AYURVEDA MEDICAL SYSTEM , which is practiced at large level in INDIA. Most of the natives are not well aware of the facts that Allopathy claims no treatment for many  disorders  and disease conditions , factually can be well treated by Ayurvedic treatment. The citizens of these country do not know about Ayurveda, while their NRI friends , when told about Ayurveda Cure , they feel a solution of their problems.

Almost in these countries , Allopathy is practiced and their is no alternative therapy present in these countries , by which any individual can shift for treatment , if he is not satisfied by the Allopathic treatment. Even then Homoeopathy is not practiced in these countries. Their is no question of practice of Unani and Sidhdha system of medicine , as they donot know even least about these therapies.

Like other human beings, who are not satisfied with the Allopathic treatment, available in their country, everyone seeks to like an alternative way of the therapies for shifting to a better solution of their problem’s solution, AYURVEDA could be a choice for them.

This is the reason for their visits to India for an AYURVEDIC sOLUTION of their problems.

AYURVEDA  is a complete health / medical system covering the whole aspects of the human disorders, whatever they may be.

In this regard, I want to convey to the entire population of the GLOBE that if they are not satisfied with the ALLOPATHY treatment for their disorders, they should go for the Ayurvedic treatment and in this therapy their problem’s solution is present.

Everyone should try Ayurveda ones before going to any surgical interventions, because most of the disorders are covered and cured by the AYURVEDA-AYUSH treatment.

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HOMOEOPATHIC FUNDAMENTALS EVALUATION ; A CASE OF MENTAL PATIENT ; SUFFERING FROM MENTAL STRESS WITHOUT ANY REASON


A 32 year old man from MUMBAI came to KANPUR for his mental problem.

He was not in a position to narrate his complaints fully.

He was examined by me continuous for two consecutive days to explore his complete problem what he feels?

His ETG AyurvedaScan FIVE TESTS including AYUSH BLOOD and AYUSH URINE examination were done along with other test related with his problem.

Here we take only HOMOEOPATHIC FUNDAMENTAL DIAGNOSIS done by E.H.G. HOMOEOPATHYSCAN and Homoeopathy BLOOD EXAMINATION.

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See Blood report and compare with the TREAD MACHINE  results. Similarity is mostly seen in the findings of Electrical scan and Blood examination  and  Tread machine scan.

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Examination by TREAD MACHINE E.H.G. HOMOEOPATHYSCAN gave the root problem which was related and originated by PSORA and SYCOSIS. The patient SYPHILIS level was within normal limit.

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Patient is PSORIC  with Sycosis effects. Blood examination is also confirms the PSORA and Sycosis effects and TREAD machine examination is also shows the organs affected reflecting the view of PSORA and Sycosis.

In our research center we are investigating  much more about the exploration and possibilities of the evaluation of HAHNEMANNIAN PRINCIPALS  in most scientific ways for entire Homoeopathic fraternity.

AVASCULAR NECROSIS ; A CASE EXAMINED IN VIEW OF ETG AYURVEDASCAN DIFFERENT DISCIPLINES ; एवैस्कुलर नेक्रोसिस के एक मरीज का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के तीन विभिन्न परीक्षणो का आ्न्कलन निष्कर्ष


AVASCULAR NECROSIS एवैस्कुलर नेक्रोसिस के एक रोगी का परीक्षण आयुर्वेद की आविष्कार की गयी नवीनतम हाई टेक्नोलाजी ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के चारो तरीको से की गयी है /

यहां तीन आयुर्वेदा स्कैन की विधियो के रिकार्ड दिये जा रहे है / मैनुअल रिकार्ड की कापी न होने के कारण यह यहां नही दे पा रहे है / यदयपि मैनुअल रिकार्ड आयुर्वेद के निदान ग्यान मे महत्व्पूर्ण भूमिका निभाता है /

ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन जब horizontal position मे रिकार्ड परीक्षित किये जाते है उसका रिकार्ड नीचे दिया गया है /

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ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन जब tread machine पर दौडाकर किये जाते है तो शरीर की excited stage का आन्कलन प्राप्त होता है / यह इसलिये क्योन्कि शरीर की position Vertical stage मे हो जाती है और gravitational force के साथ जब ट्रेस रिकार्ड किये जाते है तो शरीर की गतिविधिया बहुत सक्रिय होती है /

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ई०टी०जी० आयुर्व्बेदास्कैन कन्टीनुअस ट्रेस रिकार्ड शरीर के selected parts का परीक्षण करते है जिससे यह पता चलता है कि अति सक्रिय अवस्था मे और आराम relax होते रहने की अवस्था मे क्या और किस तरह के शारीरिक परिवर्तन होते है और इन्हे कैसे दूर किया जा सकता है /

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आयुर्वेद – आयुष चिकित्सा पध्य्यति मे प्राय: उन सभी अवस्थाओ का इलाज मौजूद है जब ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की findings पर आधारित होकर इलाज करते है / आयुर्वेद मे उन आरोग्यकारी सभी pathophysiological और pathological conditions का इलाज मौजूद है जिनको दूसरे चिकित्सा विग्यान के डाक्टर लाइलाज बता देते है /

हमारे सन्स्थान से AVASCULAR NECROSIS के मरीज इलाज कराकर सामान्य जीवन बिता रहे है जिनको hip replacement की सलाह दी गयी थी /

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सफेद दाग के रोग से ठीक हो चुकी एक बच्ची का फोटो-साक्ष्य आधारित प्रस्तुति; A CURED CASE OF “LEUCODERMA / VITILIGO / SAFED DAAG” BY AYURVEDA TREATMENT BASED ON E.T.G. AYURVEDASCAN FINDINGS


सात साल की एक बच्ची को सफेद दाग चेहरे पर एक साल से ज्यादा समय हो चुका था तब पहले हुये थे /

एलोपैथी का इलाज करने पर यह दाग ठीक नही हुये बल्कि बढते चले गये /

दो महीने पहले यह बच्ची अपने माता पिता के साथ इलाज के लिये आयी हुयी थी /

इसका ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन तथा खून की जान्च करके आयुर्वेदिक इलाज किया गया /

प्रस्तुत है इलाज करने से पहले का फोटॊ ;

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यह बच्ची का उस समय का फोटो है जब वह इलाज के लिये आयी थी / इसको परहेज और खान पान के बारे मे बता दिया गया था /

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दो माह से अधिक के समय के आयुर्वेदिक इलाज से यह लड़की अब पूर्ण रूप से मुक्त हो गयी है और अब इसके शरीर मे कही भी सफेद दाग नही है /

आज दिनान्क ०३ अगस्त २०१४ को इस लड़की के माता पिता follow-up  के लिये आये थे , अच्ची के ठीक हो जाने के कारण अब इसकी  आयुर्वेदिक  दवाओ की खूराक कम कर दी गयी है /

मैने हमेशा कहा है कि सफेद दाग का इलाज अगर ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और इसके सप्लीमेन्टरी परीक्षण के आधारित  होकर करते है तो सफेद दाग अवश्य ठीक होते है /

कौन कहता है कि सफेद दाग ठीक नही हो सकते है ?

सफेद दाग अवश्य ठीक होते है यदि ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और आयुर्वेद के अन्य सप्लीमेन्टरी परीक्शण पर आधारित आयुर्वेद -आयुष चिकित्सा द्वारा इलाज किया जाये / जैसा कि हम हमेशा कहते है /

सफेद दाग के रोगी की ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन डाटा आधारित व्याख्या ; ANALYSIS OF A VITILIGO / LEUCODERMA PATIENT IN VIEW OF AYURVEDA FUNDAMENTALS WITH DIAGNOSIS AND MANAGEMENT AND TREATMENT DATA BASED ON E.T.G. AYURVEDASCAN FINDINGS


सफेद दाग के एक रोगी का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन डाटा की व्याख्या की जा रही है , जिसके आधार पर सम्पूर्ण वैग्यानिक आधार आश्रित आयुर्वेदिक औषधियो का चुनाव और पथ्य परहेज के लिये रोगी को बताया गया / डाटा देखने और अध्ध्य्यन करने पर पता चलता है कि उसके शरीर के किन अन्गो मे विकृति हुयी और इसके परिणाम स्वरूप उसको सफेद दाग की स्तिथि पैदा हुयी /

इस मरीज की original report  की कापी यहा दी जा रही है /

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मरीज कई सालो से सफेव्द दाग की बीमारी से परेशान था / इसने काफी इलाज कराया पर कोई फायदा नही हुआ / उल्टे इसकी तकलीफ  बढती चली गयी / मरीज ने कई साल एलोपैथी का इलाज कराया उससे जब नही ठीक हुआ तो फिर होम्योपैथी का इलाज कई साल तक कराता रहा जब होम्योपैथी से कॊइ आराम नही मिला तो फिर आयुर्वेद का इलाज कराता रहा , लेकिन इसे आराम मिलने की बजाय इसकी तकलीफ दिनो दिन बढती चली गयी /

मरीज मूल रूप से दक्षिण भारत SOUTH INDIA  का रहने वाला है  और वही इसका निवास स्थान है / कानपुर मे इसकी  ससुराल है यानी इसकी पत्नी कानपुर की है लेकिन है south indian /

कानपुर के रिश्ते दारो को किसी सफेद दाग के मेरे द्वारा ठीक हो चुके पूर्व मरीज ने बताया कि मै सफेद दाग के मरीजो का इलाज करता हूं इस पर मरीज के रिश्तेदारो ने मुझसे सम्पर्क साधा और परीक्शण के लिये समय appointment मान्गा /

रिपोर्ट फाइनल बन जाने के बाद सार  रूप मे पता चला कि इसका PIGMENTATION  LEVEL   सामान्य ९१ से १०५ ई०वी० निर्धारित लेवल से ४० प्रतिशत कम है / इसके साथ इसके cumulative LIVER -PANCREAS – SPLEEN  की pathophysiology बहुत अधिक स्तर की मौजूद है /

मरीज की छॊटी आन्त और बड़ी आन्त का आन्कड़ा भी बढा हुआ निकला /

सबसे बड़ी बात यह कि इस मरीज का PULSE RATE  कम निकला /

इसके अलावा और भी बह्त सी anomalies  निकली है /

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SKIN DATA  से प्ता चलता है कि यह सामान्य से बहुत अधिक है इसका मतलब यह है कि त्वचा की सामान्य physiology अव्यवस्तिथि है और त्वचा से समबन्धित सभी channels  सामान्य कार्य नही कर रहे है /

पित्त दोष के पान्च भेदो मे से एक भेद भ्राजक पित्त है जो सारे शरीर को  एक रन्ग मे  बनाये रखता है /  रूप रन्ग sensations आदि का अनुभव भ्राजक पित्त कराता है / भ्राजक पित्त का प्राप्त डाटा लेवल ३९ ई०वी० है यह सामन्य बताये गये लेवल से काफी कम है /

रोगी को पसीना बहुत आता है / पसीना अधिक आने का मतलब यह है कि शरीर की मेटाबालिक प्रक्रिया मे कही गड़बडी है और इससे electrolytic imbalances अधिक बढते है /

शरीर के electrolytes  की अनियमितता से बहुत से ailments  पैदा हो जाते है / जैसे sodium की कमी से चक्कर आने लगना और दिल की धड़कन के gap  मे कमी या अधिक होना यानी rhythmic effects या पोत्तस्सिउम सल्त का कम ज्यादा होने से PULSE RATE का घत्ना अथवा बढना / पसीना ज्यादा अयेगा तो इस तरह की दिक्कते बढती है /

भ्राजक पित्त की कमी की वजह से त्वचा के नीचे अधिक गर्मी भर जाती है जिसको release  करने के लिये त्वचा को अपने रोम कूप को अधिक विस्तारित करने की जरूरत होती है ताकि शरीर की गरमी न अधिक हो और न कम हो /

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मरीज की आन्तो का आन्कलन देखिये / यह सामान्य से अधिक है / LIVER   और PANCREAS और SPLEEN  और SMAAL INTESTINES तथा LARGE INTESTINES  के अलावा आयुर्वेद के मौलिक सध्धान्त यथा अपान वायु और रन्जक पित्त का डाटा  देखिये / अपान वायु कितनी कम लेवल की है और रन्जक पित्त कितने हाई लेवल का है /

कम स्तर की अपान वायु अगर अधिक स्तर के रन्जक पित्त के आन्कड़े के साथ हो तो ऐसा देखा गया है कि मरीज को गुदा से सम्बन्धित बीमारी अवश्य होती है / यह ववासीर तथा गुदा पाक अथवा  गुदा का बाहर निकला इस तीन अवस्थाओ मे मिलता है / लेकिन बड़ी आन्त के तीन हिस्से यथा ASCENDING COLON य़ा TRANSVERSE COLON य़ा DECENDING COLON / SIGMOID COLON / RECTUM इनका आन्कड़ा अगर अधिक या सामन्य से कम हो तो बवासीर PILES / HEMORRHOIDS   रोगी को अवश्य होती है /

रोगी से पूछने पर मरीज ने बताया कि उसे १० पन्द्रह साल से बवासीर की तकलीफ है / इसने बबासीर के इलाज के लिये सभी तरह की दवाओ के हथकन्डे उपयोग किये लेकिन इसकी बवासीर नही दूर हुयी /

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ऊपर के डाटा शीट मे ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन तकनीक के  द्वारा प्राप्त आन्कड़ा से short out  करने के बाद जब डाटा  narrow down  किये जाते है तो असली तस्वीर मरीज की बीमारी के बारे मे समझ मे आती है कि शरीर के किस अन्ग मे और कहां और किस  किस अन्ग मे किस intensity level  की तकलीफ उपस्तिथि है /

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ऊपर की डाटा शीट मे आयुर्वेद के मौलिक सिध्धान्तो का अधिक तम लेवल से लेकर कम से कम लेवल तक का डाटा दिया हुआ है / रन्जक पित्त का डाटा सबसे ऊपर है और अपान वायु का सबसे नीचे है /

इसी तरह शुक्र कफ  सप्त धातु सबसे ऊपर के लेवल पर है और रस धातु सबसे नीचे लेवल पर है / इसका तात्पर्य यह है कि रस धातु की गड़बडी है जो ANABOLIC  >>>>>>>> METABOLIC प्रक्रिया को सुचारु रूप से नही सम्पादित कर पा रही है /

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उपरोक्त डाटा शीट से gastro intestinal system और  integumentary system  के बारे मे प्राप्त आनकड़ो को बताता है / दोनो आन्कड़ो को एक साथ analysis  करके मरीज की बीमारी की picture  बहुत कुछ साफ और स्पष्ट होने लगी है कि इसे किस तरह की combined integrated problems of body systems  की पैदा हो रही है /

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अब आइये देखा जाय कि इस मरीज के शरीर के अन्दर आयुर्वेदिक मौलिक सिध्धान्त किस intensity level  के   मौजूद है /

त्रिदोष  उपस्तिथि का लेवल वात सामन्य लेवल की और पित्त सामान्य से अधिक स्तर का और कफ सामान्य से कम लेवल का पाया गया है /

अपान और व्यान वायु के भेद सामान्य से बहुत कम पाये गये है /

रन्जक पित्त सामान्य से अधिक और भ्राजक पित्त भेद सामान्य से कम प्राप्त हुये है /

श्लेष्मन कफ सामान्य से अधिक और रसन कफ सामान्य से कम प्राप्त हुआ है /

 

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समपूर्ण सप्त धातुओ का आनकलन करने पर पता चलता है कि मान्स धातु सामान्य से बहुत अधिक है /

सप्त धातु अगर वात से प्रभावित है तो रस धातु सामान्य से बहुत कम है और पित्त से प्रभावित रस  धातु भी सामान्य से अभुत कम है तथा  कफ दोष से प्रभावित सप्त धातु सामान्य से बहुत अधिक है /

इस रोगी को पेट मे गैस बहुत बनती है यह शिकायत उसने बतायी है जिसका वह कई साल से इलाज कर रहा है लेकिन पेट की गैस मे उसको कोई आराम नही मिला/

 

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अब श्रोतो दुष्टि का विवेचन करते है

मरीज के कई श्रोतों मे  anomalies  प्राप्त हुयी है /

रस वह श्रोत सामान्य से अधिक है / यह श्रोत हृदय  और धमनियो के श्रोत पर अधिकार करता है / इस व्यक्ति का BLOOD PRESSURE  सामान्य से कम है और इसका PULSE RATE   सामान्य से कम है /

मान्स वह श्रोत के मूल मे स्नायु और त्वचा है / यह बाहर से ही देखने मे पता चल जाता है कि इसे त्वचा का रोग है / इसके कमर से नीचे की मान्स पेशियो खिचती है जिससे यह ठीक से चल नही पाता , यह muscula0-ligamntous-skeletal anomalies  मौजूद होने का सन्केत है / पूर्वोक्त डाटा शीट के अवलोकन से यह स्पष्ट होता है कि यह सही है /

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इस मरीज का पाचन बहुत खराब है जो कई साल से है / यह बहुत भयानक पेट गैस बनने की शिकायत से परेशान है / पेट की .गैस का इलाज बहुत किया गया लेकिन कोई सफलता नही मिली / इस रोगी के अन्न वह श्रोत तथा पुरीष वह श्रोत तथा स्वेद वह श्रोत सामान्य से अधिक है, इसलिये यह बिन्दु स्थापित हुआ कि यह तीन श्रोत सामान्य कार्य अवस्था मे नही है /

इसकी पुष्टि अन्य डाटा शीट को देखने से confirm  हो जाती है /

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उक्त डाटा शीट के अवलोकन से यह पता चलता है कि पित्त दोष stronger  अवस्था मे है और यह २++ स्तर का है जब्कि कफ दोष weak स्तर का है और १- [एक माइनस] स्तर का है /

जबकि वायु दोष सामान्य स्तर का है /

इसका मतलब यह हुआ कि वायु दोष तो सामान्य है लेकिन पित्त कुपित अवस्था मे है और इस वजह से पित्त ने कफ को कमजोर बना दिया / यह imbalance  दोष की स्तिथि है /

इस तरह के combinations  की चर्चा आयुर्वेद के शास्त्रोक्त ग्रन्थ “माधव निदान”  मे की गयी है /  वाग भट्ट ने भी अपने ग्रन्थ मे भी ऐसे  combinations  की निदानात्मक चर्चा की है /

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महर्षी चरक ने रचित  ग्रन्थ चरक सम्हिता मे त्रिदोषो के सन्निपातज दोषो के ६३ के लगभग combinations  बताये है / इस combinations  का विस्तार से वर्णन चरक सम्हिता मे ही ्देखने चाहिये /

यहा ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन तकनीक से मरीज का डाटा लेकर जिस तरह का सन्निपातज  combination  बना है , उसे ही प्रस्तुत किया जा रहा है /

इस  combination  मे वात और पित्त १- और १- [एक माइनस] अवस्था मे है और पित्त  २++ अवस्था मे है / इससे पता चलता है कि रोगी को पित्त दोष को बढाने मे शारीरिक वायु का कम्जोर अवस्था मे हो जाना है /

जब शरीर मे वायु कमजोर होगी तो दोष का imbalance होना लाजिमी है / यही रोग की अवस्था है /

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रोगी के हाथो के अलावा अन्य कुछ स्थानो पर सफेद दाग है जिनका चित्र future reference  के लिये रख लिया गया है /

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CONCLUSION  ;  निष्कर्ष

ऊपर दिये गये सभी प्राप्त आन्कड़ो से इस मरीज के सभी आयामो से देखने के बाद जिस तरह का निदान CHIEF COMPLAINTS   मे वर्णित किया गया है उसकी पुष्टि होती है /

पित्त दोष की प्रधानता

वायु दोष का कम होना

पित्त भेद और वायु के भेदो का न्यूनाधिक होना

रोग निदान मे यकृत तथा पैन्क्रियाज और spleen  की pathophysiology का उपस्तिथि होना

छोटी आन्त और बड़ी आन्त  की pathophysiology  का मौजूद होना

Anabolic >>>>>>metabolic functional anomalies  के कारण blood chemical chemistry का imbalance  होना

इन सभी imbalances  से जब ionic changes  होते है तो शरीर की सामान्य electrical diffusion मे बाधा आती है और cellular metabolism  की प्रक्रिया सामान्य से असामान्य अवस्था की ओर बढती है/

यह अवस्था LYMPHATIC SYSTEM के लिये मुफीद साबित होती है और melanin का सारे शरीर मे कम होने का  cellular massage जहा तहा पहुचाने का काम lymph glands  के जरिये होने लगता है / जहां जहां शरीर के हिस्से मे ऐसा सन्देश पहुन्चता है , वहीं वही सफेद  दाग / white spots / leucoderma / vitiligo  SPOTS पैदा होने शुरू हो जाते है /

सफेद दाग के बारे मे मेरा जितना अध्ध्य्यन है मैने इसे बहुत ही सूच्छ्म रूप मे देने का प्रयास किया है / यह मेरा अपना विचार है और स्व-अध्ध्य्यन पर आधारित है / यह स्व अध्ध्य्यन ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के सभी जान्चो के निष्कर्ष और आयुर्वेद के रक्त परीक्शन तथा आयुर्वेद के मूत्र परिक्षण पर आधारित  है /

चिकित्सा के लिये जिस बिन्दु का सबसे पहले सन्ग्यान लिया गया वह “पित्त” दोष है क्योन्कि पित्त दोष के कुपित होने के कारण ही यह तकलीफ हो रही है /

पित्त दोष की शान्ति और अन्य दूसरी तकलीफो के लिये आयुर्वेदिक दवाओ का चयन युक्ति पूर्वक किया गया /

मरीज को आयुर्वेदिक दवाओ का PRESCRIPTION   दे दिया गया है और उसको क्या खाना है और कया नही करना है यह सब भी बता दिया गया है /

दवाओ के सार्वजनिक दुरुप्योग को रोकने के लिये PRESCRIBE  की गयी पर्चे की दवाओ को काट कर छिपा दिया गया है /

मरीज को १२० दिन दवा खाने के लिये कहा गया है , उसे परहेज भी बता दिया गया है और जीवन शैली किस तरह की अपनानी चाहिये उसका management भी  बता दिया गया है /

LEUCODERMA  एक बहुत sensitive  रोग है. यह बहुत तेजी से बढता है / आधुनिक चिकित्सा मे इस बीमारी का  कोई इलाज नही है /

लेकिन ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित आयुर्वेद्क और आयुष इलाज करने से leucoderma सफेद दाग   की बीमारी अवश्य ठीक होती है /

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नेउरोलोगिचल पैन 009

 

आयुर्वेद के महान ग्रन्थ “चरक सम्हिता” मे महर्षि चरक द्वारा सूत्र स्थान मे “सप्त दशो अध्ध्य्याय” मे वर्णित “”शिरसीय अध्ध्याय”” व्याख्या और इसका ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन तकनीक द्वारा साक्ष्य आधारित प्रस्तुति ; AN EVIDENCE BASED PRESENTATION OF “AYURVEDIC FUNDAMENTALS” MENTIONED IN “”CHARAK SAMAHITA”” BY MAHARSHI CHARAK


आयुर्वेद के महान ग्रन्थ “चरक सम्हिता” मे महर्षि चरक ने सूत्र स्थान मे “सप्त दशो अध्ध्य्याय” मे शिरसीय अध्ध्याय व्याख्या की है /

सूत्र / श्लोक ४० और ४१ मे सन्निपात दोष के कितने combinations बन सकते है इसका वर्णन किया गया है /

आयुर्वेद की आधुनिक तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के द्वारा महर्षि चरक द्वारा बताये गये इन combinations का STATUS QUANTIFY करने का प्रयास किया गया है /

यह एक मरीज का रिकार्ड है जिसे PACE MAKER लगा हुआ है और इसका कई बार रीढ की हड्डी का SPINAL CORD operation किया जा चुका है / जिस रीध की हड्डी की तकलीफ को आराम दिलाने के लिये आपरेशन किये गये , मरीज की वह तकलीफ तो ठीक नही हुयी उलटे कमर से नीचे का हिस्सा सुन्न हो गया / मरीज दो मिनट से अधिक चल नही सकता / मरीज सरकारी कर्मचारी है / अपने काम के लिये उसे रिक्शे से आना जाना पड़्ता है / इसने बहुत इलाज कराया है और पन्चकर्म का भी इलाज कराया लेकिन इसे कोई आराम नही मिला /

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इस मरीज का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और अन्य परीक्षणो से इसकी बीमारी का सटीक निदान किया गया और इसे बाज़ार से उपयोग करने के लिये आयुर्वेदिक दवाओ का prescription दिया गया /

आप सभी सुधी पाठक गण हमारे रिसर्च सेन्टर द्वारा आयुर्वेद आधार भूत सिध्धान्त AYURVEDIC BASIC FUNDAMENTALS के status quantify किये गये है / हमार रिसर्च सन्स्थान  द्वारा किये गये आयुर्वेद के इस कार्य का अवलोकन करे /

हमारे विचार से आयुर्वेद की इस सुपर हाई तकनीक द्वारा प्राप्त डाटा से रोगी की प्रभाव कारी चिकित्सा के लिये रोग निदान करके औषधियो का चयन बहुत सटीक साबित होता है , क्योन्कि कई तरह के intensity level presence का आन्कड़ा मिल जाने से चिकित्सा के कार्य मे बहुत सरलता होती है और रोगी के management set-up  करने का फायदा होता है जिससे यह निर्धारित कर सकते है कि मरीज को किस तरह की औषधियां और management की जरूरत है /

आयुर्वेद की इस आधुनिक तकनीक द्वारा हम बहुत गर्व के साथ कह सकते है कि हमारे आयुर्वेद के ग्रन्थों मे हमारे देश के महर्षियो ने जो कुछ भी लिखा है वह सर्वथा सत्य है और  इस सत्य और तथ्य  को विग्यान की कसौटी पर रखक्रर सिध्ध भी कर सकते है /

हमारा सन्स्थान आयुर्वेद के उन और गूढ बातो को साक्ष्य आधारित अमली जामा पहनाने के लिये प्रतिबध्द्ध है जो हमारे आयुर्वेद के ग्रन्थो मे दिये गये है /

“RACHITIS” ; DISEASES OF CHILDRENS ; “सूखा रोग” : बच्चो का रोग


RACHITIS यानी सूखा रोग ; आयुर्वेद मे इसे “सुखन्डी” रोग के नाम से जाना जाता है / वास्तविकता यह है कि आयुर्वेद अथवा होम्योपैथी अथवा यूनानी क इलाज करने से यह बीमारी शत प्रतिशत ठीक होती है / यह आयुर्वेद और आयुष चिकित्सा का गारन्टीड इलाज कहा जा सकता है /

मेरे पास जितने भी सूखा रोग अथवा RACHITIS के रोगी बच्चे चिकित्सा कराने के लिये आये है वे सब के सब शत प्रतिशत ठीक हुये है /

[ABHI MATTER LOAD KARANA  BAKI HAI ]