A CURED CASE OF “OSTEO-ARTHRITIS” BY AYURVEDA TREATMENT ; PATIENT WAS ADVISED FOR KNEE JOINT REPLACEMENT ; “घुटना प्रत्यारोपड़” के लिये एडवाइस किये गये ओस्टियो-आर्थ्राइटिस रोगी का आयुर्वेदिक उपचार से पूर्ण आरोग्य ;


आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान मे आर्थ्राराइटिस के रोग का बहुत सटीक और उत्तम किस्म का इलाज सम्भव पहले भी था आदि काल से था और अब आयुर्वेद के परीक्षण पर आधारित तकनीको के अमल मे लाने से यह अधिक सटीक और fool proof  हो गया है /

एक महिला ४७ साल उम्र , जिसको ओस्टियो आर्थ्राइटिस की तकलीफ थी , उसको घूटना प्रत्यारोपड़ KNEE JOINT REPLACEMENT के लिये कहा गया / लेकिन इस महिला के पास पैसा होते हुये भी उसने घुटना प्रत्यारोपड़ नही करवाया , इसका कारण जो भी रहा हो / क्योन्कि उसने जब देखा कि घुटना का प्रत्यारोपड़ किये गये लोगो को किस तरह की हालत होती है उसे देखकर रोगिनी ने knee joint replacement  का इरादा बदल दिया /

यह बीमारी हड्डियो के जोड़ो से सम्बन्धित होती है और इसमे हड्डी के joints  मे बदलाव पैदा होते है /

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ऊपर जिस माडल को दिखाया गया है , यह माडल सारे शरीर की हड्डियो के जोड़ों को दर्शाता है / इस माडल के जरिये साधारण मनुष्य भी समझ सकता है कि मानव शरीर की बनावट मे joints का क्या महत्व है /

किसी ने इस महिला को आयुर्वेद की चिकित्सा कराने के लिये कहा / इस महिला ने यह ढून्ढना शुरू किया कि कौन सा आयुर्वेद का चिकित्सक उसकी सहायता कर सकता है / किसी जानकार ने इस महिला को बताया कि आप कानपुर के डा० बाजपेयी से समपर्क करे और उनके पास इलाज के लिये जाये/ उसने अपने कानपुर के एक रिश्तेदार को मेरे पास भेजा और मेरे बारे मे पता किया / मैने उसको अपनी सारी तकनीक और इसकी विधि तथा उपचार के बारे मे जानकारी दी /

दिनान्क २८ सितम्बर २०१२ को यह महिला गोरखपुर से अपने को दिखाने के लिये हमारी क्लीनिक मे आयी / इसका ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्शन के अलावा अन्य परीक्शनो को किया किया गया /

मरीज की हालत ऐसी नही थी कि वह जरा सा भी चल सके / इसको चार पान्च लोग हाथो से टान्ग कर मेरे दवाखाने मे लाये थे / मरीज एक कदम भी नही चल पा रहा था / उसके घुटने इतने सूजे हुये थे कि जरा सा भी movement नही हो पा रहा था / मरीज ठीक से कह्डा भी नही हो पा रहा था / उसकी हालत बहुत खराब थी /

 

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MUSCULO-SKELETAL SYSTEM  की अवस्था देखकर और SPINE  से समबन्धित डाटा से पता चला कि इसको क्या problems  है /

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महिला की रिपोर्ट , जिसमे उसके सारे शरीर के परीक्षण मे जिस तरह की anomalies प्राप्त हुयी उसे बताया गया है /

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उक्त डाटा से पता चलता है कि शरीर के कुछ अन्गो मे किस तरह की pathophysiology और pathology विद्यमान है /

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आयुर्वेद विग्यान के मौलिक सिध्धन्तो क क्या मरीज के शरीर मे उपस्तिथि निली है उसकी कितनी intensity  है यह बताया गया है / यह बहुत महत्व पूर्ण है क्योन्कि इसी पर अधाइर्त होकर मरीज का इलाज किया जाता है , मरीज को किस तरह की दवाओ की जरूरत है , उसके क्या दोष है जिन्हे ठीक करने पर मरीज को रोग से छूटकारा मिलेगा और इसी डाटा पर आधारित होता है कि उसे किस तरह की जीवन शैली और क्या खान पान adopt  करना चाहिये  /

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मरीज के ETG AyurvedScan  की रिकार्ड की गयी प्रति ट्रेसेस /

मरीज के अन्य परीक्षण किये गये और यह पता करने का प्रयास किया गया कि मरीज की किस तरफ की मान्श्पेशियो कमजोर है या उनमे किस तरह की कार्य विकृति पैदा हो रही है / ताकि उस तरफ की मान्शपेशियो की कार्य विकृति को दूर करने का प्रयास विशेष तौर पर किया जा सके /

इसके अलावा मरीज का आयुर्वेदिक रक्त परीक्षण किया गया ताकि पता चले कि उसके  रक्त मे क्या विकृतिया पैदा हो रही हैं /

मरीज को निम्न दवाये दी गयीं , यह मरीज का पहला prescription  है जो नीचे दिया गया है / कुछ prescribed औषधियो को सावधानी और दुरुपयोग को रोकने के लिये कुछ दवाओं को काट दिया गया है ताकि अनावश्यक रूप से सार्वजनिक तौर पर दवाये mass level  पर आयुर्वेदिक दवाओ क दुरुप्योग रोका जा सके/ यह इसलिये आवश्यक है क्योकि आयुर्वेद की औषधियो का prescription  और दवाओं का चयन तथा पथ्य परहेज सभी कुछ आयुर्वेद के सिध्धान्तो पर आधारित है / जैसा कि सभी को ग्यात होना चाहिये कि हर व्यक्ति की प्र्कृति और दोष की  intensity  अलग अलग level  की होती है और इसमे ’GENERALISATION’   का कोई महत्व नही होता जैसा कि आधुनिक चिकित्सा विग्यान मे है उदाहरण के लिये दर्द चाहे जैसा हो pain killers  खाने से अवश्य कम होगा / लेकिन आयुर्वेद मे ऐसा कम ही है / यहां root cause  पर ही ज्यादा ध्यान दिया जाता है / ROOT PROBLEM  का इलाज करने से दर्द की समस्या फौरी तौर पर ठीक होती है / आयुर्वेद मे अधिकान्श दर्द “दशमूल काढा” का सेवन करने से ठीक होते है / यह आयुर्वेद के महर्षियो ने ऐसा दध औषधियो का मिष्रण तैयार किया है जो शरीर के अधिकान्श MUSCULAR, MUSKULO-SKELETAL , NEURO-MUSCULAR , NEUROLOGICAL और इसी तरह के सभी दर्द की स्तिथियो को आरोग्य करता है / यह अनुपान के रूप मे भी उपयोगी है / यानी वात विकार या पित्त विकार या कफ विकार नाशक औषधियो के साथ अगर इस्का प्रयोग करते है तो यह इन औशढधियो के गुणो को और अधिक आरोग्य कारी बना देता है /

दिनान्क 29 SEPETEMBER 2012 को इस मरीज को दवा खाने के लिये बताया गया / इसके लिये निम्न पर्चा दिया गया /

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मरीज ५ अथवा ६ माह के अन्तराल से follow-up  के लिये आता रहा / उसकी हालत मे सुधार आता चला गया /

आज दिनान्क २० जुलायी २०१४ को मरीज ने बताया कि अब वह अपने पैरो के बल पर बिना क्सि सहायता के लम्बी दूरी तक पैदक चलता फिरता है और वह अब ९५ प्रतिशत तक ठीक है /वह अपना सभी काम कर रही है / मरीज बहुत प्रसन्न है कि मेरे इलाज से उस्को अपना  घुटना रिप्लेस नही कराना पड़ा  है /

मैने उसको सलाह दी कि वह अभी ६ माह तक नीचे लिखी द्वा और सेवन करे इसके बाद चाहे तो वह दवा धीरेधीरे बन्द कर  सकती है /

इस मरीजा को नीचे लिखी दवा prescribe  की गयी /

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दवाओ का दुरुप्योग रोकने के लिये prescription मे लिखी गयी दवाओ को काट दिया गया है /

मैने हमेशा बताया  है कि ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन तकनीक पर आधारित इलाज करने से सभी तरह की बीमारिया अवश्य ठीक होती है चाहे वे कैसी भी हो और उनका कोई भी नाम क्यो न देद इया गया और चाहे उनका नाम कितना भी बड़ा हो और बीमारी का नाम सुनने मे चाहे कितनी भी भयानक लगती हो , अगर आयुर्वेद की नवीन तकनीक पर आधारित इलाज करते है तो अवश्य आराम मिलती है रोग ठीक होते है और आरोग्य प्राप्त होता है /

आयुर्वेद के हिसाब से यह रोग वात कफ अथवा वात पित्त अथवा कफ पित्त दो दोष अथवा वत पित्त कफ तीनो दोषो के साम्मिलित के प्रभाव से होता है / इस महिला को जन्म समय की प्रकृति का डाटा मे “कफ” दोष कम निकला है / इस महिला का जान्च के समय भी कफ दोष कम निकला है / अत: प्रधानता “कफ दोष” की मौजूदगी रही है  जो इसके जन्म समय से लेकर व्याधि के समय तक एक जैसी ही  intensity level  की आयी है /  जब जान्च की गयी तो इसका पित्त normal निकला है जबकि इसके जन्म के समय मे  पित्त सामान्य नही था / इस प्रकार से दोषो का imbalance  बना जिससे पित्त और कफ मिलक्रर विकृति पैदा करते रहे /

सप्त धातुओ का आन्कलन करने पर पता चला कि इसे अस्थि धातु आधिक नप करआयी है / पित्त का चरित्र गत लक्षण और कफ का चरित्र गत लक्षन तथा आस्थि  धातु की विकृति ने स्पष्ट कर दिया कि मरीजा को किस तरह का आयुर्वेदिक उपचार देना चाहिये/ इसके साथ शरीर के सभी सिस्टम्स का आन्कलन करने के बाद पता चला कि इस मरीजा को शरीरिक रूप से क्या कया व्याधिया हो गयी है /

आयुर्वेद चिकित्सा की यही खूबसूरती है कि जब सब तरफ से मरीज की समस्या का अन्कलन करके इलाज करते है तो अव्श्य और sure  आरोग्य मिलता है /

चिकित्सा विग्यान की सभी पधध्यतियो मे LIMITATIONS  अवश्य होते है / आयुर्वेद मे भी लिमीटेशन्स है /

हिस्टीरिया और पागलपन के सम्मिलित अटैक के रोगी का प्रसन्ग ; A CASE OF FEMALE PATIENT IN COMBINATION OF MANIA AND HYTERIA DISORDERS ; TREATED SUCCESSFULLY BY AYURVEDA


साधारण तौर पर हिस्टीरिया के मरीज अथवा मिर्गी के मरीज एकल यानी एक ही  तकलीफ से पीडा भोगने वाले होते है यानी उनको मिर्गी के दौरे पड़्ते है लेकिन इसके अलावा उनको कोई दूसरी बहुत major किस्म की तकलीफ नही होती है सिवाय कुछ anomalies  के और कुछ hidden disorders के /

लेकिन कुछ ऐसे भी मरीज मिले जिनको पागल पन की बीमारी के साथ साथ मिर्गी के दौरे पड़ने लगे और उनको कुछ दूसरे किस्म की अन्य बीमारिया जो hidden  stages  मे थी उनसे भी यदा कदा परेशानी होने लगी /

जिस महिला का जिक्र यहां किया जा रहा है उसकी उम्र इस समय ३० साल है और इसे hysteria  का दौरा ८ साल की उमर से पड़ रहा था / यह महिला कान्पुर से लगभग ६० किलोमीटर की दूरी पर स्तिथि एक ग्रामीण क्षेत्र की निवासी है / इसकी शादी ६ साल पहले हो चुक्ली है और इसके एक तीन साल का male child  है / इसकी ससुराल वालो ने इसे मा बा के पास भेज दिया और कहा कि जब तक यह ठीक नही होगी तब तक इसे अपने यहां नही रखेन्गे/ इस कारण से यह महिला अपने पिता के घर मे ही रहती है और वही इसका इलाज करा रहे है / इसके पिता एक किसान है और गांव मे कृषि कार्य करते है /

इस महिला को मेरे पास इलाज कराने के लिये इसके एक रिश्तेदार जो अपने बच्चे का मिर्गी का इलाज कराचुके है और उनका बच्चा मिर्गी रोग से अब बिल्कुल मुक्त हो चुका है और उसको अब किसी किस्म की मिर्गी के झ्हटके नही आते है उनके किसी रिश्तेदार ने जब देखा कि मिर्गी ठीक हो गयी है तो उसने यह उदाहरण देखकर इस महिला के पिता से बताया कि कानपुर के डा० बाजपेयी से इलाज क्रराइये /

मेरे यहा आने से पहले इसस महिला का इलाज अन्ग्रेजी allopathic  दवाओ द्वारा किया जा रहा था , लेकि द्वाये खाने के बाद भी इसकी हालत बिगड़ती चली जारही थी और दौरे दिन मे कई कई बार  पड़्ते पड़्ते  एक या दो घन्टे तक बेहोश हो जाती थी तथा दौरे रुकने का नाम नही ले रहे थे/

इसके सथ साथ पागल पन का दौरा भी पड़्ता था जिससे गांव के पड़ोसी और आस्पास के लोग भी हालत देखकर भयभीत होने लगे /

दिनान्क २ अप्रेल २०१४ को इस महिला के सभी ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और इसके supplementary exmination and test  परीक्षण किये गये और निष्कर्ष स्वरूप क्या कया और किस तरह की बीमारियां है उनका इलाज किया जाना चाहिये उस हिसाब से उसे आयुर्वेदिक दवा बाज़ार से लेकर  सेवन करने  के लिये बताया गया / यह निर्देश दिया गया कि १२० दिन दवा का सेवन करके दुबारा review करा ले और दवा और परहेज का परिवर्तन करा ले /

यह महिला आज दिनाक १३.०७.२०१४ को follow-up review के लिये आयी / कुछ जान्च करने के बाद यह पाया गया कि इसे लगभग ४० प्रतिशत आराम होना चाहिये /

महिला और उसके पिता से जब पूछा कि उसे कितना आराम है , जब से वह मेरा इलाज कर रही है तो उसने कहा कि मुझे ३० % प्रतिशत आराम है / मैने एलोपैथी की दवा जो मुझे रोजाना छह गोलिया दिन भर मे लेनी होती थी अब घटकर एक गोली पर आ गयी है / पागल्पन का दौरा और बेहोशी अब नही होती है / मै अब अपने को सामान्य समझती हू , लेकिन मुझे hysteria के झटके लगने का डर बना रहता है / इसके अलावा जो अन्य तकलीफे है वे अब कम हो गयी है और अब इतना परेशान नही करती है /

इस महिला की ससुराल वाले भी मुझसे मिलने मई २०१४ को आये थे / वे भी बता रहे थे कि कुछ आराम है / ससुराल के लोगो ने मुझसे पूछा कि “यह तो लाइलाज बीमारी है , यह सारी जिन्दगी नही ठीक होती है ” /मैने उनको बताया कि अगर मिर्गी या हिस्टीरिया का या पागल्पन का इलाज ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन तकनीक से करते है तो यह बीमारी अवश्य ठीक होती है / बाद मे उनको भी स्कैनरऔर मशीनो और उपचार की पध्यति से परिचय कराया जिससे वे बहुत प्रभावित हुये /

मैने लड़्की के ससुराल वालो को आश्वस्त किया कि यह महिला पनी बीमारी से छुटकारा अवश्य पा लेगी /

आज दिनाक १३.०७.२०१४ को इस महिला का दिमाग के सभी हिस्सो का etgasctreaa पेइक्शन किया गया / जिसमे निम्न anomalies का observation किया गया /

सभी पाठक इसका अलोकन करे /

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महिला के दिमाग की लगातार ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की रिकार्डिन्ग ६४ मिनट करने के बाद पता चला कि इस महिला के  Brain neurons Electrical diffusion  सामान्य से अचानक कुच देर मे होते है जिससे महिला के सोचने का तारतम्य एक जैसा नही हो पाता है /  ६४ मिनट की रिकार्डिन्ग मे ऐसा कई बार  रिकार्ड हुआ है / यह स्तिथि बहुत धीमे लेवल की थी बहुत LOW INTENSITY LEVEL का मिला /

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जब यही स्तिथि बार बार होने लगती है और neurons  की  pathophysiology  का intensity level  अह्दिक से अधिकतम की ओर बढता है तो extreme level  पर आते ही दिमाग का दौरा या मिर्गी का दौरा या हिस्टीरिया का दौरा पड़ जाता है /

ऐसा हमारा अध्य्यन  मिर्गी रोग और इसी तरह की दिमाग की बीमारियो के बारे मे अभी तक establish हुआ है / यह स्तिथि तभी बनेगी जब वात के साथ कफ की स्तिथि  व्यक्ति की प्रकृति के साथ उसी लेवल पर मेल खाती है जिस लेवल पर व्यक्ति की प्रकृति  जन्म के समय निर्धारित हो चुकी है /

हमारे सन्स्थान KPCARC KANPUR द्वारा इस  प्रकार की दिमागी बीमारियो पर शोध कार्य का विकास लगातार जारी है /

“श्रोतो – दुष्टी” ; आयुर्वेद के सिध्धान्त का भी आन्कलन ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन तकनीक द्वारा सम्भव हो गया है ; “BODY CHANNEL SYSTEM” ; ESTABLISHED BY CHARAK’S AYURVEDA FUNADMENTAL HAVE BEEN QUANTIFIED NOW BY E.T.G. AYURVEDASCAN SYSTEM


…………और अब आयुर्वेद के महान आचार्य महर्षि चरक द्वारा स्थापित आयुर्वेद के सिध्धान्त “श्रोतो-दुष्टि ” का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन तकनीक द्वारा आन्कलन करना सम्भव हो गया है / अब वर्तमान मे किसी भी मरीज या रोगी का श्रोत यानी channels का STATUS QUANTIFY किया जा सकता है / किसी भी मरीज काश्रोत-दुष्टि का स्तर अब नापा जा सकता है और इसके आधार पर यह establish  किया जा सकता है कि रोगी के किन किन अन्गो और प्रतयन्गो मे बिकृति है /

आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान के लिये यह एक बहुत अच्छी उपलब्धि हासिल की जा चुकी है और इसे और अधिक विकसित करने के लिये प्रयास किये जा रहे है / मरीज के विकृति श्रोतो को पहचान कर उसी अनुकूल आयुर्वेदिक दवाओ का उपयोग करने से रोगियो को कम समय मे रोग मुक्ति मिलने की सम्भावनाये बढ गयी हैं / यह उन रोगो के लिये चिकित्सा मे सहायता करेगा जिन्के बारे मे पता ही नही चलता कि बीमारी शरीर मे कहा कहां पर है ????

इसकी रिपोर्ट का एक उदाहरण नीचे दिया जा रहा है / आप सभी पाठक गण इसका evaluation  करे /

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हमारा मानना है कि आयुर्वेद के सिध्धान्तो को जिन्हे हमारे विद्वान महर्षियो ने अपनी practical skill  की कसौटी पर बार बार हाजारो बार और अन् गिनत बार परखा है जान्चा है और फिर उसके बाद हम स्बके लिये धरोहर स्वरूप दे गये ताकि मानव जाति  का कल्याण हो, इस भावना के साथ हमारे पूर्वजो ने अथक परिश्रम करके हमारे लिये आयुर्वेद की यह महान धरोहर सौपी है और इसे मानव जाति के लिये छोड़ा है /

हमारा आप सबका इस धरती पर रहने वाले सारे मानव समूह का फर्ज बनता है कि हम इस कीमती धरोहर को आगे बढाये और इसे अधिक से अधिक  evidence based  बनाने का प्रयास करे / हमारा सन्स्थान इसी भावना को ध्यान मे रखते हुये शोध कार्यो मे सन्लग्न है और यही कर रहा है /

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“STEROID” EFFECTS ON BODY ; A CASE OF LADY , SUFFERING FROM “SCLERODERMA” TAKING REGULAR STEROIDS MASSIVE DOSES ; DEVELOPED MANY PHYSICAL PROBLEMS


A lady aged 51 years is taking regularly since 8 years , “STEROIDS” prescribed by the Physicians of well known hospital for her SCLERODERMA,  a kind of SKIN DISORDER, in which the skin becomes indurated in chronic condition..

She developed many physical problems after taking STEROIDS, but after complaining to the treating physician about her troubles, physician asked that “we have only this medicine for you, which you have to take regularly”.

The lady patient  belongs to KAVAL Town of UP.  When she felt more and unbearable problem , she asked to everyone who was in her touch, asking any physician, who could suggest any physician, who can well manage her case.

The patient belongs to a city , which is away 350 kilometers  from KANPUR. My one lady patient, who was suffering from LEUCODERMA / vitiligo,  now totally cured from LEUCODERMA, suggested  me for treatment  by the sister of this patient, who is working in that city, with this lady visitor.

She was told about my way of Ayurvedic treatment and management to this lady.

I recorded her E.T.G. AyurvedaScan traces along with the E.T.G.AyurvedaScan Continuous Trace Record.

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The traces recorded shows the depressed   lines not well elevated, and the gaps are wider than the normal level. Comments are given with the trace records , indicated by the arrows.

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See and observe and compare the records, at the start of the traces recording.

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Compare the traces above mention minutely and in zoom state. Anomalies are presenting in wider range.

The Lady patient was treating for her skin problem since 8 years back.

Presently she is suffering from DIGESTIVE DISORDERS, VOMITTING, MUSCULO-SKELETAL ANOMALIES AMD HORMONAL PROBLEMS. These problems are diagnosed by the ETG AyurvedaScan  examination.

She is taking AYURVEDIC and HOMOEOPATHIC MEDICINE simultaneously with relief.

Below is photo of the recording session of a patient for readers info. LOWER ABDOMEN of the patient and FOREHEAD area is being examined for his trouble, which is SOMATO=PSYCHIC  nature.

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The regular  trace recording on COMPUTER through the recording device After recording the traces are analyzed and finally established the observations.

 

 

Homoeopathic and Ayurvedic students visited our OUT-DOOR HOSPITAL in June 2014.


On 16th June 2014, Students and Professor from HOMOEOPATHIC MEDICAL COLLEGE AND AYURVEDIC MEDICAL COLLEGE , for understanding and observing the E.T.G. AyurvedaScan and E,H.G. HomoeopathyScan for their knowledge.

Dr. D.B.Bajpai described in limited sphere about the ETG AyurvedaSCan technology and EHG HomoeopathyScan to the Students and practically shows the AYURVEDA BLOOD EXAMINATION and AYURVEDA URINE EXAMINATION practically before the students.

A case of MENTAL DISORDER was checking at the time of Student’s visit by E.T.G. AyurvedaScan Continuous Trace recording devices . The Photographs are taken at the time of the student’s visit are given below ;

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Dr. Om Veer Singh , Professor in Ayurvedic Medical College, FATEHGARH, FARRUKHABAD, U.P. is observing the ETG AyurvedaScan Continuous Trace record. Dr. D.B. Bajpai is describing the  recorded traces interpretations with the progress of the traces records.

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.Dr. D.B.Bajpai is discussing with the students and Professor Dr Om Vir Singh  about the technical aspects of the newly invented FOUR E.T.G. AYURVEDASCAN TECHNOLOGIES   with their uses in Ayurveda Diagnosis and Disease diagnosis and management .

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A MENTAL DISORDER CASe is being examined for long time say FOUR HOURS to understand the activities of Brain by ETGACTExamination device.

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A HOMOEOPATHIC GRADUATE is trying to understand the technology in vented by Dr DBBajpai.

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E.T.G. AyurvedaScan is now being popularized among the students of the various disciplines of the medical sciences. Dr DBBajpai is giving a very limited description of the technology.

 

MUSCULAR ATROPHY ; MUSCULAR DYSTROPHY ; AYURVEDA AYUSH TREATMENTसभी प्रकार की मस्कुलर डिस्ट्रोफी और सभी प्रकार की मस्कुलर एट्रोफी का अचूक और सटीक आयुर्वेदिक आयुष इलाज


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सिर के गिरते और झड़्ते हुये बालों के लिये तथा सिर के गन्जेपन को रोकने के लिये “केशोत्तम उपचार” ; KESHOTTAM TREATMENT FOR FALLING OF HAIRS and prevention of BALDNESS


40 साल से अधिक हो गये है , जब हमारे सन्स्थान और क्लीणिक मे सिर के गिरते हुये बालो और गन्जापन का इलाज बहुत सफलता के साथ किया जाता रहा है / हमने इस गन्जेपन को रोकने और गिरते बालो को रोकने की दिशा मे बहुत काम किया और गिरते बालो को रोकने और गन्जापन दूर करने तक का अचूक और सटीक और मुकम्मल इलाज का रास्ता सफलता पूर्वक विगत वर्षो मे खोज निकाला गया है /

यह एक चार उपयोगी हरबल काम्बिनेशन का किट है जिसमे चार तरह की अति उपयोगी बालों को गिरने से रोकने और Dandruff और सिर की त्वचा की किसी भी anomalies को दूर करने और बालो के इन्फ़ेक्शन को दूर करने तथा बालो की ग्रोथ को बढाने का कार्य करके बालो के रोगो को दूर करने का मुकम्मल और अचूक और सटीक इलाज करता है /

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पिछले १५ सालो से हमारे यहा ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन तकनीक के अलावा दूसरी अन्य आयुर्वेद की HI-TECHNOLOGY के विकास करने की दिशा मे काम करने के कारण बालो से सम्बन्धित सभी प्रकार की गतिविधिया धीरे धीरे कम होती गयी है /

हमने बालो के इलाज मे जिस तरह की हरबल काम्बिनेशन का development किया है उसके लिये हमारे यहां आने वाले actual users को यह KIT उपलब्ध करयी जाती है / हमारे पुराने मरीज जो अपने गिरते बालो का इलाज केसोत्तम किट का उपयोग करके करा चुके है , वे बराबर अपने उपयोग के लिये और अपने परिवार के दूसरे नाते रिश्तेदारों और मित्रो के लिये केसोत्तम किट मान्गते रहते है /

इस किट के उपयोग से गिरते बालो की समस्या का स्थायी समाधान होता है /

गिरते बालो की समस्या के निदान के लिये पूरा किट उपयोग करना चाहिये तभी बालो के गिरने से स्थायी समाधान होता है /

यह किट केवक ACTUAL USERS के लिये है और इसे प्राप्त करने के लिये केवक और केवक हमारे रिसर्च केन्द्र मे आना होगा तभी यह किट मूल्य अथवा किट की कीमत देकर प्राप्त कर पायेन्गे / किट को प्राप्त करने के लिये यातो खुद आये अथवा किसी के माध्यम से मन्गा सकते है / हमारे यहा से किट को भेजने की कोई व्यवस्था नही है और न यह सार्वजनिक बिक्री के लिये उपलब्ध है /

Doctor’ day ; 1st July 2014 ; डाक्टर्स दिवस ०१ जुलायी २०१४ ; What is opinion of FIVE CONTINENTS VISITING PATIENTS ?


हमारे रिसर्च सन्स्थान “कनक पालीथेरपी क्लीनिक एवम रिसर्च सेन्टर , कानपुर भारत” मे प्रति वर्ष विदेशी मूल के भारतीय इलाज के लिये आते है / इन विदेशी मरीजो के साथ साथ उनके कुछ विदेशी मित्र जो उसी देश के मूल नागरिक है , वे भी रोग के इलाज और परामर्श के लिये आते है /

मै अक्सर उनसे कई सवाल पूछता रहता हू और यह जानने की कोशिश करता हू कि उन लोगो को आयुर्वेद या होम्योपैथिक या यूनानी या प्राकृतिक चिकित्सा द्वारा इलाज करने की क्या जरूरत पड़ गयी ? जिससे उनको यहां भारत आना पड़ा ???

इन विदेशी रोगियो के उत्तर सुनकर मुझे इस बात का गर्व का अनुभव हुआ कि भारत देश चिकित्सा सुविधा के मामले मे अभी भी विश्व मे सबसे आगे है , जहां affordable तथा economically durable इलाज की सुविधाये उपलब्ध है /

अमेरिका से आये एक मरीज ने बताया कि सफेद दाग VITILIGO या LEUCODERMA का इलाज वहां के डाक्टर यह कहकर नही करते है कि यह कोई बीमारी ही नही है और जब बीमारी ही नही है तो इलाज किस बात का ?

अफ्रीका से आये कई मरीजो ने बताया कि वहां बहुत बड़ी सन्ख्या मे डायबिटीज के मरीज है, दवाये खाने के बाद भी डायबिटीज कन्ट्रोल नही होती है /

आस्ट्रलिया से आये मरीजो ने बताया कि पेट और आन्तो से सम्बन्धित बीमारियो का कोई माकूल और effective इलाज नही है /

यूरोप से आये मरीजो ने बताया कि लीवर अथवा यकृत से सम्बन्धित बीमारियो का इलाज उनके यहां कोई बहुत अच्छे किस्म का नही है /

एशिया के देशो से आये मरीजो ने बताया कि एलोपैथी के अलावा वहां के डाक्टर दूसरा और कोई इलाज करने की विधि जानते तक नही है /

कुछ अन्य बाते भी सामने आयी , जिनमे निम्न बाते प्रमुखता से उभर कर सामने आयी है ;

[1] मरीजो ने बताया कि इन देशो के डाक्टरों को एलोपैथी की चिकित्सा व्यवस्था के अलावा विश्व के कई देशो मे प्रैक्टिस किये जा रहे चिकित्सा विधियों के बारे मे कोई भी जानकारी नही होती है /

[२] बीमारी मे क्या खाना चाहिये और क्या नही इसके बारे मे चिकित्सको को कुछ पता ही नही होता कि वे खाने के लिये मरीज को क्या बतायें ? इसमे भ्रम बना रहता है /

[३] बहुत सी ऐसी बीमारियां होती है जो दवाओ से ठीक  हो जाती है लेकिन चिकित्सक ऐसी बीमारियो के इलाज के लिये आपरेशन कर देते है / आपरेशन कराने के बाद भी  बार बार फिर से बीमारी उभर आती है और फिउर दुबारा तिबारा और अधिक बार आपरेशन कराने की नौबत आ जाती है जो कभी कभी जान लेवा साबित हो जाती है /

[४] मरीजो के भारत मे रहने वाले रिश्तेदार विदेशो मे रहने वाले अपने  रिश्तेदारो को बताते है कि आयुर्वेद या होम्योपैथी या यूनानी या प्राकृतिक चिकित्सा करने से जिन बीमारियो को लाइलाज बता दिया जाता है उनका इलाज भारत मे आयुष चिकित्सा विधियो मे सम्भव है /

चिकित्सको का प्रमुख उद्देश्य यह होना चाहिये कि उनके पास जितने भी मरीज चिकित्सा कराने के लिये आते है , ये सभी मरीज डाक्टर के पास इस लिये आते है कि मरीज यह विश्वास करते है कि उनका रोग उनकी बीमारी  को डाकटर साहब जरूर ठीक करेन्गे / यह trust मरीज को एक उम्मीद दिलाता है कि वह एक सुरक्षित हाथो मे है जो बिना नुकसान पहुचाये उसकी तकलीफ का इलाज करेगा /

यह भरोसा मरीज बहुत उम्मीद लेकर डाक्टर के पास आता है / चिकित्सको को भी यह नही भूलना चाहिये कि मरीज का भरोसा ही उनकी प्रक्टिस का आधार है /

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डा० विधान चन्द्र राय – Dr, B,C, Roy -जो पश्चिम बन्गाल राज्य की सरकार के मुख्य मन्त्री थे, का जन्म १ जुलायी को हुआ था / अन्ग्रेजो के जमाने मे और जब  ब्रिटीश इन्डिया मे राजाओ का शासन था , तब डा० विधान चन्द्र राय  उस जमाने के एक जाने माने और प्रसिध्ध एलोपैथी के चिकित्सक थे / बहुत कम लोगो को मालूम है कि डा० बी०सी० राय को  एलोपैथी की चिकित्सा के साथ साथ आयुर्वद और होम्योपैथी चिकित्सा का भी अच्छा ग्यान था / पन्डित मोती लाल नेहरू से उनके बहुत अच्छे सम्बन्ध थे / डा० बी०सी० राय बहुत ही साधारण व्यक्तित्व वाले थे और मुख्यतया कलकत्ता मे गरीबो और मज्लूमो की सेवा मे सन्लग्न रहते थे / उनका कहना था कि अच्छा डाक्टर वह नही होता जो महन्गी से महन्गी दवाये देकर मरीज को ठीक करता है, अच्छा डाक्टर वही होता है जो सस्ती से सस्ती दवाओ को देकर कठिन से कठिन रोगो को दूर करता है /

सारे भारत देश मे इसी कारण से १ जुलाई को डाक्टर्स डे मनाते है ताकि सभी चिकित्सक बन्धुओ को याद रहे कि उनका काम पीडित मानवता की सेवा करना है  और पैसा कमाना ही ध्येय नही है /

E.T.G. AYURVEDASCAN ; NOW IN FOUR SEPARATE LINES ; ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन अब चार अलग अलग हिस्सों में रोग निदान विशेष्ग्यता के साथ


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आयुर्वेद की पहली और अकेली आयुर्वेद के मौलिक सिध्धन्तो को मानव शरीर के अन्दर ग्यात करने के लिये तथा शरीर के अन्दर के रोगो को पहचानने के लिये लगभग ३३ साल पहले आविष्कृत किया गया था /

जिस समय आयुर्वेद की इस तकनीक का आरम्भ हुआ और आविष्कार हुआ उस समय से लेकर आज तक यह निदान ग्यान की तकनीक चार तरह के परीक्षणो मे बदल चुकी है /

आवश्यकता के अनुसार और जरूरत के अनुसार रोग निदान और शारीरिक परीक्षणो की जरूरत के अनुसार इन सब तकनीओ का विकास और आविष्कार किया गया ताकि बेहतर से बेहतर आयुर्वेदिक  इलाज की सुविधा मुहैया मरीजो को उपलब्ध करायी जा सके /

ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन तकनीक चार हिस्सॊ मे बान्ट दी गयी है , यह किसलिये जरूरी हुआ इसका सन्क्षि[प्त विवेचन निम्नानुसार है /

१- E.T.G. AyurvedaScan ; 33 साल पहले इसका अविष्कार किया गया था , जो अब तक इसी माडल पर चल रहा है /

यह तरीका मैनुअल है और इसके बहुत से मेरिट है / आज कल इस तरह की मशीनो का उत्पादन बन्द हो चुका है और लगभग २० साल से मनुअल मशीनो का मिलना ठप है / दरअसल यह stylus टाइप की मशीने हैं / आज कल इस तरह की मशीन बाज़ार मे नही मिलती है /

मैनुअल और स्टाइलस टाइप की मशीनो की उपयोगिता आयुर्वेद के ई०टी०जी० परीक्शन के लिये बहुत उपयोगी है / इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि जब आयुर्वेद के हिसाब से शरीर की मैपिन्ग करते है और इस मैपिन के हिसाब से ट्रेस रिकार्ड किये जाते है , वह रिकार्ड किये गये traces   बहुत ही original किस्म के होते है / क्योकि इसमे किसी तरह की editing  नही होती है /

मनुअल मशीन से इच्छानुसार और मरीज की आवश्यकता के अनुसार ट्रेस रोकार्ड करके उस हिस्से की जान्च करके और ट्रेस रिकार्ड का अध्ध्य्यन करके पता किया जा स्कता है कि मरीज की क्या दिक्कते है और किस तरह की दिक्कते है / इस तरह से सटीक और अचूक इलाज की व्यवस्था की जा सकती है /

इसमे unlimited trace record की facility होने के कारन यह बहु उपयोगी मशीन हो जाती है /

आज भी मै इस मशीन से ट्रेस रिकार्ड करके मरीज के रोग निदान की भूमिका के लिये इसका उसी तरह उपयोग करता हू जैसा कि मै पिछले ३३ साल से करता चला आ रहा हू /

Dr DBBajpai is working with the ETG AyurvedaScan machine

Dr DBBajpai is working with the ETG AyurvedaScan machine

इसकी अलग से एक रिपोर्ट Trace records का अध्ध्यन करके मरीज को बनाकर दी जाती है / यह ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन का पहला Test का हिस्सा है /

[२] FULLY AUTOMATIC E.T.G. AYURVEDASCAN  RECORDER ;

आमतौर पर इस मशीन द्वारा horizontal posture मे मरीज को लिटाकर परीक्षण करते है /

मशीन और इसका software  रिकार्ड किये गये traces  को computer  मे पहुचा देता है जो बाद मे रिपोर्ट बनाने के काम आता है /

ETG AyurvedaScan Machine

ETG AyurvedaScan Machine

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[३] TREAD MACHINE E.T.G. AYURVEDASCAN

TREAD MACHINE  आयुर्वेदास्कैन की जरूरत तब पड़्ती है जब मरीज के horizontal position मे किये गये परीक्षण से ज्यादा जानकारी को मालूम करने की आवश्यकता होती है / बहुत सी बाते horizontal posture   मे स्पष्ट नही हो पाती है इसलिये शरीर की अधिक जान्च के लिये  इस टेस्ट की आव्श्यकता होती  है /

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यह परीक्षण TREAD MACHINE  पर मरीज को दौडाकर किया जाता है / दौड़ाने पर शरीर vertical position  पर आ जाता है और शरीर के सारे अन्ग फैल करके दौडाने से उतपन्न गरमी और रक्त सन्चार के अधिक होने और इससे पैदा electrical diffusion जब शरीर के VISCERA   और मान्स पेशियों मे पहुन्चता है तब इन अन्गो की वास्तविक कार्य क्षमता का पता चलता है जो diagnosis  मे बहुत सहायता देती है /

[४] E.T.G. AYURVEDASCAN CONTINUOUS TRACE RECORDING ;

बहुत से मरीजो मे जैसे मिर्गी और दिमागी बीमारियो के रोगी / हृदय और फेफड़ो के रोगी / ग्रभाशय से सम्बन्धित बीमारियां / psychological  बीमारियो , रीध की हद्दियों , हद्दियो के जोड़ो और शरीर की उन सभी तकलीफो के लिये लगातार मानीटरिन्ग के लिये जिनके बारे मे पता नही होता कि वे कब और किस समय पैदा हो जाये या उन painless  प्राब्लम्स के लिये आवश्यक हो जाता है जिसमे अन्दर ही अन्दर शरीर के बीमारी पनपती जाती है और ऊपर से पता ही नही चलता कि शरीर के न्दर क्या परिवर्तन हो रहे है , इस तरह की  तकलीफो मे मरीज को पता ही नही चलता और  पता नही होता कि वे कब पैदा हो  जाये, इसके लिये यह टेस्ट किया जाता है /

मरीज की कन्टीन्यु मानीटरिन्ग के लिये रोगी को लिटा दिया जाता है और उसकी तकलीफ के अनुसार उन सभी स्थानो पर इलेक्ट्रोड लगा दिये जाते है , जहा और जिस शरीर के हिस्से की monitoring  करनी होती है / मरीज जहां बताता है कि उसे कहां कहा और किस जगह तकलीफ है उस सभी हिस्सो का इस विधि से परीक्षण किया जाता है /

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ऊपर दिते गये चित्र मे मरीज को लिटाकर और उसके शरीर के जिस हिस्से की मानीटरिन्ग लम्बे कई घन्टे तक करनी होती है , उन हिस्सो मे इलेक्ट्रोड्स लगाकर लगातार मानीटर करते है /  जो मरीज लेटकर इस परीक्षण को करने मे सक्षम नही होते है उनको कुर्सी मे  comfortable position  मे बैठाकर जान्च करते है / सही बीमारी का  निदान और  उसके सही उपचार के लिये इस तरह की मानीटरिन्ग करना मरीज के हित मे बहुत आवश्यक होता है /

परीक्षण की यह विधि  मानसिक रोगियों और उन्माद के रोगियो और depression के रोगियों तथा सभी तरह के भय और चिन्ता और दिमाग की बीमारियो के लिये बहुत उपयोगी सिध्ध हुआ है / Emotional  मरीजो मे क्यो इस तरह के उद्वेग पैदा होते है इसका कारण जानने मे यह परीक्षण मदद करता है /

जब बीमारी के मूल कारण का पता चल जाता है तो इस स्तिथि के इलाज के लिये आयुर्वेद मे बड़ी सन्खया मे औषधिया चिकित्सा कार्य के लिये उपलब्ध है जिनके उपयोग से मान्सिक बीमारी चाहे जैसी हो अवश्य ठीक होती हैं /

यह मानीटरिन्ग कम से कम एक घन्टे से लेकर चार घन्टे तक अवश्य  की जाती है / इसके बाद अगर जरूरत पड़ती है तो २४ घन्टे या अधिक तक भी परीक्षण करने का प्रयास किया जाता है /

Huge Data  बाद मे analyze  किया जाता है और फिर निष्कर्ष conclusion निकाले जाते है /

इस प्रकार से ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन तकनीक अब चार भागो मे आवश्यकताबुसार मरीजो की सेवार्थ उपयोग की जा रही है /

यह सारी आयुर्वेदिक रोग निदान की सुविधायें  अभी हमारे रिसर्च केन्द्र मे मरीजो के लिये उपलब्ध है /

 

होम्योपैथिक दवा ; मूलेन आयल ; कान के सभी रोगों की अचूक और सटीक दवा ; MULLEIN OIL ; THE HOMOEOPATHIC REMEDIY FOR ALL “EAR” DISORDERS ; THE MOST SAFEST NATURAL REMEDY


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होम्योपैथिक चिकित्सा विग्यान मे ऐसी बहुत सी दवाओ की भरमार और बहुतायत है जो कठिन से कठिन और लाइलाज बीमारी के इलाज के लिये परम उपयोगी है /

लेकिन समस्या यह है कि इतनी प्रभावकारी चिकित्सा विग्यान के होते हुये भी लोग और देश के जन मानस को जानकारी के अभाव मे पता ही नही है कि जिन बीमारियो को जिसे वे समझते है कि कोई इलाज नही है, ऐसी इन सभी बीमारियों का इलाज मौजूद है और सटीक और अचूक इलाज अपने ही देश मे उपलब्ध है /

होम्योपैथी की MULLEIN OIL एक ऐसी दवा है जिसे “कान” या “INTERNAL EAR ” से सम्बन्धित बीमारियो मे उपयोग करते है /

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मूलेन आयल MULLEIN OIL कान के रोगो मे उपयोग करने वाली एक होम्योपैथी चिकित्सा की दवा का नाम है और इसी नाम से बज़ार मे होम्योपैथिक स्टोरर्स मे मिलती है /

यह होम्योपैथिक दवा VERBASCUM नाम के यूरोप महाद्वीप मे पैदा होने वाले एक पेड़ से पैदा होने वाले फूलों से बनाते है / Verbascum के flowers को जैतून के तेल के साथ पर्त दर पर्त मे रखते है और एक निश्चित ताप मान मे कई हफ्तों तक रखते है / जब फूलो का सारा अर्क जैतून के तेल मे उतर आता है तब इसे seeve करके सिरक्शित रख लेते है /

इस दवा के बनाने की विधि GERMAN HOMOEOPATHIC PHARAMACOPEA तथा AMERICAN HOMOEOPATHIC PHARMACOPEA तथा HOMOEOPATHIC PHARMACOPEA OF INDIA [H.P.I. published by Manager of Publication, Government of India, New Delhi] विश्व के कई देशों की सरकारो द्वारा प्रकाशित pharamacopeas के निर्देशानुसार बनाया जाता है /

भारत मे सभी होम्योपैथिक दवायें HPI के निर्देशानुसार बनायी जाती है /

The following is the page-copy of the  AMERICAN HOMOEOPATHIC PHARMACOPEA  published by Boerick and Taffel Homoepathic Pharmacy, U.S.A. for the preparation of MULLEIN OIL.

mullein oil

MULLEIN OIL ESSENTIA is very powerful than comparatively MULLEIN OIL prepared with Olive Oil. Unfortunately Mullein Oil essentia is not available and almost no phramacy prepare it due to heavy cost in production. Prepared Olive Oil Mullein in  condence for should be used and this preparation is also very effective in all nature of the EAR disorders, whatever they may be.

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My Father Late Doctor Shitala Sahai Bajpai, Vaidya Bhshan , M.D.H. [died 1977] was using this remedy in plenty in almost every Ear disorders and disease conditions like, pain, discharges, swelling, glands, neuragic pain , Ulcers, abscess , suppuration, Infection of all kinds i.e. Infection, Viral . Parasitic and Fungal etc etc  cases with great success and wonderful results.

I am using this oil in plenty in every Ear Problem patient with great success. In some cases of TEETH NEURALGIA , in which the tooth-ache was shifted to Internal Ear cured by this remedy.

The remedy is safe for all ages.

One drop is sufficient for Infants and children. More younger may use two to six drops accordingly. More drops are not harmful in any way and is a very safe remedy.

Mullein oil should be used as fresh as it is available and should be kept with tight cap and save from airation.

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मूलेन आयल को कान के सभी तरह के रोगो मे बहुत विश्वास के साथ उपयोग किया जा सकता है / यह हर उम्र के लिये उपयोगी अहि और पूर्ण तया सुरक्षित कुदरती होम्योपैथिक दवा है /