COUGH ; HECTIC COUGH ; ALL KINDS OF COUGH ; सभी तरह की कफ और खान्सी ; आयुर्वेदिक आयुष इलाज द्वारा पूर्ण आरोग्य सम्भव


कफ्फेफडा 003

PRAVAL PANCHAMRAT ; A GREAT AYURVEDIC COMBINATION OF “CALCIUM” ; REMEDY AS WELL AS NUTRITION ; प्रवाल पन्चामृत ; आयुर्वेद की एक महान औषधि और खाद्य-पूरक “कैलसियम” का सर्वश्रेष्ठ विकल्प


प्रवाल पन्चा मृत आयुर्वेद की एक ऐसी औषधि है जिसका combination  कई ऐसे कैल्सियम आधारित तत्वो से मिलकर बना है जो कुदरती और प्रकृति मे पाये जाते है / इसमे प्रयोग किये जाने वाले सभी ingredients  समुद्र मे मिलते है और उन्ही का उपयोग औषधि  को बनाने के लिये  उपयोग क्ररते हैं /

जिन समुद्री उत्पाद को इस औषधि को बनाने के लिये उपयोग करते है ये निम्न है ;

१- मोती या मुक्ता या PEARLS

2- प्रवाल या मून्गा या CORAL

3- मुक्ता शुक्ति या PEARL’S SHELL

4-  कौडी या COWERY

5- शन्ख या SACRED CHANK

इन पान्चो द्र्व्यो की  आयुर्वेद के नियमानुसार अलग अलग भस्म बनायी जाती है / इसके बाद इन सभी द्रव्यो की भस्मो   को बराबर बराबर मात्रा मे लेकर इन सबको   गाय के दूध के साथ बराबर मात्रा लेकर खरल मे डालकर   घोटते   है और जब यह सब द्रव्य घोटते घोटते सूख जाते है तब इसे गजपुट मे रखकर फूकते है /  यह कई बार किया जाता है /  ऐसी प्रक्रिया कई बार करने के बाद इसे बीमारियो मे उपचार के लिये प्रयोग करते है /

समुद्री उत्पाद इस दवा मे शामिल होने के कारण इस औषधि मे कैल्सियम के साथ साथ अन्य बहुत तरह के मिनरल्स भी मिल जाते है /

1- मोती मे कैल्सियम कार्बोनेट 90  से  92 %प्रतिशत,  कारबनिक पदार्थ 4  से 6 % प्रतिशत तथा जल 2  से  4 % प्रतिशत तक उपस्तिथि होता है /

2- मुक्ता शुक्ति के अन्दर पाये जाने वाले contents / chemical composition  मोती की ही तरह के होते है लेकिन इसमे कुछ अन्य द्रव्य अधिक पाये जाते है /

3- प्रवाल मे कैल्सियम कार्बोनेट 86.9 %  प्रतिशत और मैगनेशियम कार्बोनेट 6.8 % प्रतिशत और कैल्सियम सल्फेट 1.27 % प्रतिशत और फेरस आक्साइड 1.72 % प्रतिशत और कार्बनिक पदार्थ 1. 35 % प्रतिशत और पानी 0.55 %  प्रतिशत और फास्पोरिक अम्ल और सिलिका  आदि 1.33 % प्रतिशत मौजूद होते हैं /

4- शन्ख के अन्दर केलसियम और फास्फोरस और लौह तत्व उपस्तिथि होते है /

५- कौड़ी यानी कपर्दिका के अन्दर कैल्सोयम फास्फेट और कल्सियम कार्बोनेट और फ्लोराइड और मैग्नीशियम फास्फेट और मैन्गनीज और सोडियम क्लोराइड जैसे तत्व पाये जाते है /

उपरोक्त सभी तत्वो का  बार बार और कई कई बार  भस्मीकरण हो जाने के बाद  इसके सभी तत्व आपस मे मिलकर सूच्छ्म से सूच्छ्म अति-महीन होकर NANO-PARTICLES  मे बदल जाते है / इस तरह से इन वस्तुओ का ATOMIC STRUCTURE  का बदलाव    NANO PARTICLES  मे बदलकर अति शक्तिशाली हो जाता है / इस तरह से यह एक अति महत्व्र पूर्ण औषधि बन जाती है /

EBOLA VIRUS ; “INDIANS SHOULD NOT HAVE PANIC WITH THIS DISEASE CONDITION’S CONSEQUENCES” ; “ईबोला वायरस से किसी भी भारतीय को घबराने की जरूरत नही है ” हमारे देश मे इस बीमारी के बचाव और इलाज के लिये भारतीय चिकित्सा विग्यान मे बहुत से साधन है


ईबोला वायरस से किसी भी भारतीय को डरने की जरूरत नही है / इतना ज्यादा प्रोपागन्डा इस बीमारी के बारे मे मीडीया मे फैलाया गया है जिससे देखकर और सुनकर देश वासियो मे डर का महौल बनना शुरू हो गया है /  जागरुकता होना बीमारी के बारे मे, यह एक जरूरी बात है ताकि लोग यह समझ सके और सतर्क रहे यह मकसद होना चाहिये /  लेकिन इसकी आड़ मे दहश्त का माहौल पैदा करना ठीक नही है /

मेरा मानना है जो मेरे  वायरस का इलाज  करने के बाद प्राप्त  चिकित्सकीय अनुभव पर आधारित है कि कोई भी  वायरस  या बैकटीरिया   उन्ही लोगो को अधिक प्रभावित करता है जिनके खून का pH  अम्लीय स्तर का  यानी ACIDIC REACTION  का  होता है / जिनके खून का pH का स्तर ALKALINE REACTION  का होता है , उनको कोई भी वायरस हो या बैक्टीरिया हो वह प्रभावित नही करता है /

अधिकतर दवाये chemicals  से बनी हुयी होती है / कोई भी केमिकल होगा उसके सेवन करने से Blood ACIDITY  बढती है , यह pH  कहा जाता है / मानव रक्त का pH  का स्तर 7.3 के आसपास होता है / इससे नीचे होने पर रक्त अलकालाइन कहा जाता है और इससे अधिक होने पर अम्लीय यानी एसीडिक समझा जाता है /

वायरस और बैक्टीरिया alkaline stage  होने पर    रक्त  मे  अधिक    नही पनपते है / शरीर मे  VIRAL   और    Bacterial invasion  होने पर  शरीर के अन्दर कई तरह के chemical changes  होने शुरु हो जाते है जिनसे खून खराब होता है और इस स्तिथि को TOXEAMIA  कहते है / जब टाक्सीमिया की स्तिथि बनती है तब रक्त  pH   ACIDIC होने लगता है / केमिकल युक्त दवाये चून्कि रक्त की pH  बढा देती है /  इसलिये वायरस या बैक्टीरिया इस बढे हुये  pH  के स्तर को सहन नही कर पाते और इसी कारण से उनकी growth  के लिये जिस स्तर का blood environment  चाहिये वह नही मिल पाता है /

वायरस को जब  ग्रोथ के लिये   स्तरीय growth promoting factors  नही मिल पाते है तब उनका every seconds multiplication का काम  बढना रुक्ने लगता   है / इस रोक के साथ ही वायरस के दवारा पैदा हुयी शारीरिक तकलीफे ठीक होना शुरू हो जाती है /

लेकिन जब वायरस या बैक्टीरिया  अपना स्वरूप बदल कर किसी नये रूप मे आकर शरीर पर आक्रमण करते है तो वे उस अम्लीय स्तर के अभ्यस्त हो जाते है यानी वे अधिक अम्लीय स्तर को बर्दाश्त कर जाते है और इसी कारण उनको मारने के लिये जितनी अन्टी बायोटिक की मात्रा की जरूरत होती है  उससे अधिक देने की जरूरत पड़ जाती है / इसे ही anti-biotic resistence  कहा जाता है /

दूसरी  तरफ जैसा कि मेरा अनुभव है और वायरस के रोगियो का इलाज करने के बाद प्राप्त अनुभव हुआ है उससे वायरस के मरीजो को जब alkaline food and drinks  खाने के लिये बताया गया तो आयुर्वेदिक और होम्योपैथी की द्वाओ का बहुत अच्छा असर हुआ और मरीज बहुत जल्द ठीक हुये / antibiotic and antipyeretic  दवाओ का बहुत कम उपयोग यानी न के बराबर करना पड़ा और वह भी कुछ खुराको मे ही /

आयुर्वेद की लगभग सभी दवाये herbal  होने के कारण यह ALKALINE NATURE  की होती है और इनके खाने से रक्त कभी भी acidic  नही होता बल्कि रक्त की pH सामन्य अवस्था मे ही बनी रहती है / आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान मे हर तरह के वायरल इन्फेक्शन और अन्य सभी इन्फ़ेक्शन की बहुत अच्छी दवये मौजूद है इसलिये किसी भी भारतीय को इस बीमारी के अटैक से घबराना नही चाहिये / हमारे यहा होम्योपैथी और यूनानी के अलावा अन्य चिकित्सा विग्यान मौजूद है जिनके अन्दर किसी भी प्रकार की प्राथमिक स्तर की बीमारी को ठीक करने के लिये इलाज मौजूद है /

रक्त की pH को ठीक रखने  के लिये ALKALINE FOOD और  Drinks  लेना चाहिये /

जिन देशो मे EBOLA  फैला हुआ है वहा के नागरिको के Blood  के pH  का स्तर ACIDIC  है क्योन्कि वे मान्स और मदिरा का सेवन करते है और शाकाहारी नही है / मान्स मदिरा खाने से रक्त का pH बहुत बढता है और इसी कारण से वायरस को शरीर मे फैलने का environment  मिल जाता है /

खान पान और जीवन शैली को अपनाने से EBOLA  VIRUS  से बचाव होगा / जब भी तकलीफ हो फौरन आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक या यूनानी दवाओ का सेवन करना शुरू कर देना चाहिये/

इसी ब्लाग मे कई ऐसे फार्मूले आयुर्वेद और होम्योपैथी के दिये गये है जो सभी तरह के वायरस के अवतार के इलाज के लिये कारगर है , इन फार्मूलो का उपयोग करने से हर तरह के वायरस से बचे रहेन्गे /

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“OPERATION” AND “SURGICAL INTERVENTION” HOBBY ; MOST PEOPLE’S SEEKS ALWAYS FOR “OPERATION” METHODS IN ALL DISEASE CONDITIONS ; “आपरेशन” कराने का शौक ; बहुत से ऐसे लोग है जो हर बीमारी के इलाज के लिये “आपरेशन” कराना सबसे बेहतर समझते है


टाइटिल पढकर चौकिये नही ? और चौकने की जरूरत भी नही है ? इस दुनिया मे ऐसे लोगो की कमी नही है जिन्हे शरीर की सभी और  हर होने वाली  बीमारी का इलाज आपरेशन यानी  SURGICAL INTERVENTIONS  द्वारा ही कराने  का शौक होता है / आप्रेशन कराने का शौक भी  दूसरे शौक की तरह से ही है /

दुनिया मे तरह तरह के लोग है जिनको किसी न किसी बात का शौक होता है , किसी को पतम्ग ऊड़ाने का शौक, किसी को सिगरेट पीने का शौक, किसी को मन्दिर जाने का शौक, किसी को ज्वेलरी का शौक, किसी को पेन्टिन्ग का शौक , किसी को पढने का शौक, किसी को बहस करने का शौक और किसी को कुछ और किसी को कुछ दूसरा शौक होता है / कोई बिरियानी का शौक रखता है कोई चाय पीने का शौक रखता है / इसी तरह से मुझे बहुत ऐसे मरीज मिले जिनको आप्रेशन कराने का शौक होता है /

इन मरीजो को ऐसे ही आपरेशन करने वाले डाक्टर भी मिल जाते है / कहावत है जहां चाह है वही राह है / आप्रेशन कराने  के लिये बेताब मरीज  मौजूद है तो उनके लिये आपरेशन करने वाले डाक्टर और सर्जन भी मौजूद है / क्यो न हो ? आपरेशन कराने के लिये सर्जन चाहिये वह मौजूद है , आप्रेशन थियेटर चाहिये वह भी मौजूद है , आप्रेशन के लिये infrastructure चाहिये वह भी मौजूद है , आप्रेशन कराने वाला मरीज चाहिये उनकी भी कमी नही है /

बीमारी के इलाज के लिये सर्जरी की जरूरत हो या न हो लेकिन मुझे कई सैकड़े ऐसे मरीज मिले है जिनको आपरेशन क्राने का शौक है और शौक था / आप्रेशन कराने का शौक था , से मतलब यह है कि ऐसे लोग अब इस दुनिया मे नही है और अपना कीमती जीवन गवांकर परलोक सिधार गये / जिन्हे आपरेशन कराने का शौक है उनमे से अभि बहुत से जिन्दा है लेकिन उनमे से कोई भी सही नही देखने मे आया सब्के सब या तो बिस्तरा पकडे  हुये लेटे लेटे हुये अपनी जिन्दगी गुजार रहे है  या फिर किसी की सहायता के मोहताज बनकर रह गये है /

नीचे कुछ उदाहरण ऐसे मरीजो के है जो मेरे प्रैक्टिस जीवन मे आये और उनको मैने मना किया था कि वे आपरेशन मत कराये लेकिन वे और उनके तीमार दार  माने नही और क्या हुआ ऐसे लोगो के साथ यह अनुभव मै आप लोगो के साथ शेयर कर रहा हूं /

१- मुझे एक महिला का केस याद आता है जिसकी उम्र २७ साल के आसपास की थी / उसके पेट मे right hypochondria  रीजन मे एक छोटी सी फुन्सी हुयी जो बाद मे बढकर लगभग १५ मिलीमीटर के गोलायी लिये हो गयी  थी /  यह फुन्सी दर्द कर रही थी जैसा कि फोड़ो मे होता है / महिला गां व की रहने वाली थी /  उन्ही के पड़ोस के एक सज्जन जो  कानपुर नगर महापालिका मे मुलाजिम थे और मेरे  मरीज थे , उन्होने इस महिला को इलाज के लिये बताया कि मेरे पास आ जाये / महिला इसी अवस्था मे मेरे पास आयी थी जब उसके दर्द होना शुरू हुआ था /  मैने उसका check up  किया और खून की जान्च तथा X-ray के लिये उसके तीमार दारो को कराने के लिये  कहा /

रिपोर्ट मे एक्स रे और रक्त की जान्च सामान्य निकली /

महिला को दो दिन की दवा दी गयी और दो दिन बाद दिखाने के लिये बताया गया / दो दिन बाद महिला आयी उसको आराम था दर्द थोड़ा कम हुआ था और सूजन भी नही बढी थी / उसको दो दिन की और दवा दी गयी और कहा गया कि तीसरे दिन आकर दिखा जाय /

तीसरे दिन उस महिला रोगी के  साथ  सात लोग और आ गये जो उसकी ससुराल तथा मायके पक्ष के लोग थे / बैठने के बाद उनमे से एक एक कर सवाल पूछने लगे / उनके इस तरह से सवाल पूछने और सवालो का मकसद और मिजाज सुनकर मुझे लगा कि मरीजा को छोड़्कर सभी लोग यह चाहते है कि मेरी दवा बन्द करके इसकी फुडिया का आपरेशन करा दिया जाये /  मरीजा आप्रेशन कराना नही चाहती थी लेकिन उसके रिश्तेदार उसको आपरेशन कराने के लिये जोर डाल रहे थे /  उसका एक रिश्तेदार गाली गलौज की भाषा इस्तेमाल करने लगा और मुझको गालिया सुनाने लगा /

अन्त मे मैने उनकी सारी बाते सुनकर और  उन सबका विचार जान कर दो बाते कही कि [१] अब यह सब आप पर निर्भर है कि आप क्या कराना चाहते है क्योन्कि मरीज आपका है / लेकिन मै यहां यही कहून्गा कि मै अब आप्के मरीज का इलाज नही करून्गा चाहे आप मुझे अब कितनी ही फीस क्यो न दें ? लेकिन इसके साथ यह भी कहून्गा कि इसका इलाज दवाओ से करियेगा और किसी भी दूसरे डाकटर को सलाह लेकर और दिखाकर करे, लेकिन करे दवाओ का इलाज [२] इसका आपरेशन मत कराइयेगा क्योन्कि यह आपके रोगी के हित मे नही होगा ? आपरेशन खतरनाक भी हो सकता है /

बात आयी गयी हो गयी / लगभग दो महीने बाद उसके पड़ोसी जिसने उस महिला को मेरे पास इलाज के लिये भेजा था अप्ने इलाज के सिल्सिले मे मेरे पास आये /  बातो  ही बातो मे उन्होने मुझे याद दिलाते हुये बताया कि जिस महिला को मेरे पास इलाज के लिये उन्होने भेजा था  उसकी मौत हो गयी है /  हुआ यह कि मेरे दवाखाने से बाहर निकलते ही उस महिला के तीमार दार उसे सीधे लेकर अस्पताल चले गये और उसी रात उसका आप्रेशन कर दिया गया / आप्रेशन करने के आठ घटे बाद ही उस महिला की मौत हो गयी /

यह सुनकर मुझे अफ्सोस बहुत हुआ और मन मे यह विचार भी हुआ कि “मैने बहुत ईमानदारी के साथ महिला के तीमार दारो को इलाज कराने की सलाह दी थी , क्या ईमान्दारी से सलाह देना भी एक बड़ा गुनाह है ?”

२- दूसरा केस एक पुरुष का है जिसे गरदन मे बहुत तेज दर्द होता था जिसकी वजह से वह बहुत परेशान था / मै और मेरे सहयोगी उसका इलाज कर रहे थे / दर्द कैसे श्रू हुआ और इसका मूल कारण क्या है, इसको जानने के लिये इसके रोग का पूरा इतिहास जानान जरूरी था / लिहाजा इस रोगी का रोग विवरण जानने के लिये सभी जरूरी बाते लिपि बध्ध की गयी /

सरा मामला समझ मे आया कि इसको रोग की शुरुआत कहां से हुयी ? हुआ यह कि इसके पडोस के एक परम घनिष्ठ मित्र के यहा शादी थी / इसलिये शादी के लिये इस शख्स ने बहुत दौड़ धूप की, कई किलो  सामान लादा , कई किलो सामान उठाया और लोडिन्ग और अप-लोडिन्ग की / दिन भर रात भर शादी की दौड धूप मे व्यस्त रहा जिसके कारण उसे आराम नही मिला /  इसी दरमियान उसे गरदन मे दर्द होने लगा / काम मे व्यस्त रहने के कारण वह नजदीक के  एलोपैथी के  डाकटर से दवा लेकर खाता रहा और शादी मे जितना भी काम हो रहा था उसको निउपटाता रहा /

शादी का कार्य क्रम पूरा हो जाने के बाद भी उसका दर्द नही ठीक हुआ और लगातार बना रहा / यह दर्द cervical region से पैदा होता था और पूरी गर्दन के पीछे के हिस्से से चल कर पूरे सिर और आन्ख तक पहुचता था / यह दर्द इतना तेज होता था और अचानक इतना तेज होता था कि मरीज दर्द के कारण बहुत जोर से चीख उठता था /

इसका एक भाई  होम्योपैथिक  मेडिकल कालेज कानपुर मे द्वितीय वर्ष का क्षात्र था / उसने अपने भाई को कानपुर बुला लिया / यहां आकर उसने कालेज के अस्पताल मे हम लोगो से समपर्क किया / इसे इन्डोर अस्पताल मे भरती कर लिया गया / अस्पताल प्रबन्धन ने इस केस को handle  करने के लिये मुझे लगाया /

मैने इस मरीज का रोग इतिहास पढकर कुछ बाते मरीज से पूछी और बाद मे अपने senior  Doctors से discussion  करके एक लाइन आफ ट्रीट्मेन्ट    निर्धारित   की /  इसे आराम करने की सलाह दी गयी    क्योन्कि यह विचार किया गया कि इसे over exertion  के कारण से मान्श्पेशियो का खिंचाव और इसके साथ पैदा हुयी neuro-musculo-skeletal anomalies  पैदा हुयी है जिनके कारण inflammatory  condition  और swelling  पैदा ह्यी और इसके reflection-diffusion  के कारण यह समस्या पैदा हुयी /

इसे nutritious  भोजन देने की सलाह दी गयी कि इसे क्या क्या खाना चाहिये जिससे इसे अधिक से अधिक बेहतर किस्म का कुदरती  न्यूट्रीशन   मिले / साथ साथ complete bed rest without any movement  की सलाह दी गयी /

इस मरीज को उसकी तकलीफ के हिसाब से  जो भी selected remedies   चुनी गयी , वे सभी दवाये internal use  के लिये दी गयी  /

लगभ्ग १० दिन के इलाज से मरीज पूरी तरह से ठीक हो गया / यह मेरे लिये बहुत  interesting case  था मैने इस केस मे बहुत मेहनत की / अस्पताल मे होने के कारण सभी तरह की सुविधाये थी जो मरीज को मुहैय्या करायी गयी / मरीज को हिदायत दी गयी कि वह इसी तरह से कुछ महीने तक अपनी जीवन चर्या और दवाये चलाता रहे और बीच बीच मे आकर consultation  करता रहे /

कई महीने बाद एक दिन यही मरीज फिर वापस आया और बताया कि उसे फिर से दर्द होना शुरू हुआ है, लेकिन यह उतना तेज नही है जितना पहले था /  इसका फिर दुबारा अस्पताल मे भर्ती करके इलाज किया गया / मरीज दुबारा स्वस्थ्य होकर वापस चला गया /

पान्च माह के लगभ्ग बीत जाने के बाद एक दिन मुझे इसके भाई ने कहा कि उसके भाई को फिर दर्द हुआ है / जहा यह रोगी रहता था वही के    किसी डाक्टर ने सलाह दी है कि इलाहाबाद शहर [कानपुर शहर  से २५० किलोमीटर दूर है ] मे  अस्पताल के अमुक डाक्टर ने कहा है कि गरदन का  आपरेशन कराने के बाद इसका दर्द  हमेशा के लिये  ठीक हो जायेगा /

क्षात्र ने पूछा कि आपकी क्या राय है ? मैने कहा कि इस तरह का आप्रेशन कराना खतरे से खाली नही है / इसे मत कराये यही अच्छा है , यह जान लेवा भी साबित हो सकता है     गयी

[अभि मैटर लोड करना बाकी है]