FISTULA IS NOW NOT AN INCURABLE DISEASE CONDITION ; ETG AyurvedaScan bases treatment provides 100 % cure of Fistula ; भगन्दर अब लाइलाज बीमारी न समझी जाय ; ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित इलाज से भगन्दर की बीमारी शत प्रतिशत आरोग्य प्रदायक

FISTULA यानी भगन्दर के बारे मे आम धारणा यही है कि यह बीमारी लाइलाज है और इसका कोई दवाओं से इलाज अथवा औशधीय इलाज नही है , सिवाय आपरेशन कराने के / इस तरह की धारणा आम जन और लोगो के बीच व्याप्त है /

लेकिन ऐसा सोचना गलत है / भगन्दर और FISTULA  का इलाज आयुर्वेद और homoeoapthy  और यूनानी तथा योग और प्राकृतिक चिकित्सा मे सम्भव है और यह बीमारी एक बार ठीक हो जाने के बाद फिर नही पैदा होती है /

आधुनिक चिकित्सा एलोपैथी मे  FISTULA  या भगन्दर का इलाज सिवाय आपरेशन कराने के दूसरा कोई उपाय नही है / आपरेशन कराने के बाद कई मरीज ठीक हो जाते है लेकिन बहुत से ऐसे मरीज इलाज के लिये आये जिनको एक बार  आपरेशन क्राने के बाद उनको फिर दुबारा FISTULA  पैदा हो गया / बहुत से ऐसे अपनी चिकित्सा कराने के लिये आये जो 9 दफा यानी NINE TIMES SURGERY करा चुके थे फिर भी उनका FISTULA नही ठीक हुआ /

आयुर्वेद मे औषधीय उपचार के साथ साथ क्षार सूत्र चिकित्सा का उपयोग करते है / लेकिन बहुत से ऐसे मरीज चिकित्सा कराने के लिये हमारे रिसर्च मेन्द्र मे आये जो  देश के प्रतिष्टिथ  क्षार चिकित्सा केन्द्रो मे जाकर  क्षार सूत्र क्रा चुके थे और उसके बाद भी नही ठीक हुये /

ऐसे मरीजो का इलाज आयुर्वेद की नवीन आविष्कृत की गयी अत्याधुनिक तकनीक  ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और इसके supplementary tests  पर आधारित इलाज करने से अव्श्य आराम मिला और मरीज ठीक हुये है /

चिकित्सा के लिये आये लगभग सभी मरीज ठीक हुये है और लाइलाज कही जाने वाली बीमारी FISTULA  यानी भगन्दर का इलाज दवाओ के द्वारा सम्भव हो गया है /

K.P.C.A.R.C. and Dr D.B.Bajpai ties with BRIDGES HEALTHCARE FEDERATION, INDIA ; AGREES TO PROVIDE 30 % DISCOUNTS ON ALL AYURVEDA AND HOMOEOPATHIC AND OTHERS EXAMINATION AND CHECK-UPS

2014 , this year we have ties with BRIDGES HEALTH-CARE FEDERATION , INDIA FOR PROVIDING 30 % DISCOUNTS ON ALL EXAMINATION DONE AT our Research Center in AYUREVEDA & HOMOEOPATHIC MEDICAL SYSTEMS to their CARD HOLDERS AND MEMBERS.

ANY PERSON , who is desirous for our service, should have a CARD HOLDER of Bridges Health-care Federation.

The following services will be given 30 % discounts for the BHF Card Holders.

1- ETG AyurvedaScan examination
2- EHG HomoeopathyScan examination
3- Ayurveda Thermal Scanning
4- Ayurveda Blood examination
5- Ayurveda Urine Examination
6- Homoeopathy Blood examination
7- Ayurveda Consultation
8- Speciality AYURVEDA Remedies
9- Speciality Homoeopathic Remedies
10- General check-ups
11- Homoeopathic Consultation

Free Ayurvedic and / or Homoeopathic remedies Prescription will be given to the BHF Card Holder patient, who will opt total package.

Benefit holders should approach to BRIDGES HEALTHCARE FEDERATION, INDIA.

LEUCODERMA / VITILIGO / SAFED DAAG ; CURE OF A FEMALE CASE

A lady aged 45 years have been cured from LEUCODERMA / WHITE SPOTS/ SAFED DAAG by AYURVEDIC TREATMENT based on ETG AyurvedaScan findings and other innovative examination procedures like Ayurveda Blood Examination and Ayurveda Urine Examination and Ayurveda Thermal Scanning invented by our research center at KANPUR, UP, INDIA.

Photographic evidence shows the progress of cure, shooted time to time according to the need , here is shooted phorographs of begginning and end of the cure process.
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The above and many other photographs are taken time to time for evidencing the process of cure by Ayurvedic medications and management accordingly mentioned in Ayurvedic classics.
She was having white spots almost upper and lower extremeties, corners of lips, below nose and some other sites of body parts.

Below photograph is taken recently, which is showing the complete cure of the LEUCODERMA / WHITE SPOTs PROBLEMS, which she have yester years, now is totally cured by AYURVEDA treatment.
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LATEST Technology of Ayurveda ETG AyurvedaScan bases treatment always fruitful and result oriented in LEUCODERMA DISORDERS.

डायबिटीज ; रक्त शर्करा ; खून में व्याप्त सूगर ; ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित इलाज ; Diebeties ; Blood Sugar ; Glycosuria ; E.T.G. AyurvedaScan based treatment

विश्व डायबिटीज दिवस पर experts डाक्टर्स के विचार पढने और समझने के लिये मिले / बहुत कुछ अखबारों में भी छपा और इस बारे मे जागरुकता जाहिर करने के उद्देश्य से उत्साहित लोगों ने रैलियां भी निकाली और लोगों को डायबिटीज से कैसे बचा जाय , यह सम्झाने के साथ साथ कुछ ऐसे भी उपदेश देने से नही भूले जो हरेक के लिये हितकारी साबित हों /

लेकिन इसके ठीक उलट जहां विद्वान डाक्टर अपने ग्यान से देश के आम नागरिक को डायबिटीज के बारे मे ठीक ठीक और सही सही बात बताने में पीछे नही है वहीं बहुत से ऐसे चिकित्सक हैं जो डायबिटीज हो या न हो अथवा नही भी होती है तो भी रोगी को या व्यक्ति को इस तरह से मानसिक रूप से घबड़्वा देते है या डरा देते हैं जैसे उनको डायबिटीज न हो गयी हो कुछ ही सेकन्ड में प्राण लेवा बीमारी हो गयी हो /

ऐसे बहुत बड़ी सन्ख्या में मरीज मिले हैं जिनको डायबिटीज नही थी लेकिन उनको बता दिया गया कि उनको डायबिटीज है और उनको INSULIN भी लगनी शुरू कर दी गयी जिससे मरीज की हालत मरणासन्न हो जाती है / अब ऐसे चिकित्सक बन्धुओं को क्या कहा जाय , जो मरीजों के साथ इस तरह का व्यवहार करते हैं ?

कई मरीज मिले जिनको डाक्टरों द्वारा गलत जानकारी दी गयी / उनको भोजन करने के बाद PP Sugar के बारे मे बताया गया कि २०० मिलीग्राम सूगर लेवल में २० यूनिट सुबह और १५ यूनिट शाम को INSULIN लगाना चाहिये, इस तरह की सलाह दी गयी / मरीजों ने भी वही किया जो डाकटर ने बताया, जब हालत खराब हुयी तो नर्सिन्ग होम में भरती करा दिया / फिर जो हुआ वह सभी जानते हैं /

इस तरह की गलत सलाह से बहुत से रोगी गम्भीर बीमारियों के शिकार हो चुके हैं /
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दुनियां मे सबसे अधिक डाक्टरों के बीच में Practice of Medicine की दो किताबें प्रचिलित है, जिन्हें डाक्टरी की सर्वोच्च डिग्री के लिये पढना जरूरी होता है / यह दो किताबे हैं ;
१- Harrison’s INTERNAL MEDICINE और दूसरी
२- TEXT BOOK OF MEDICINE by Bee & Derm
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इन पुस्तकों की सबसे खास बात यह है कि जिस बीमारी के बारे में चर्चा की गयी है और उस बीमारी के बारे मे जानकारी दी गयी है , वह chapter या लेख उस बीमारी के बारे में जानकारी रखने वाले दुनियां के सर्वोच्च और सुपर एक्सपर्ट द्वारा लिखी गयी है / बात साफ है जब दुनिया का सबसे बेहतर डाक्टर बीमारी के बारे मे बता रहा है तो इसका मतलब है कि जितनी जानकारी दी जा रही , वह शत प्रतिशत सही होगी / अगर इसके अलावा कोई डाक्टर अपनी बनायी हुयी मनमानी theory बता रहा है तो इसे क्या कहा जायेगा ?
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TEXT BOOK OF MEDICINE के इस पेज में देखिये , जो डायबिटीज के बारे मे बताया गया एक शुरुआती विवरण है / इसे ध्यान से देखिये और पढिये / मै आपका ध्यान इस पेज के HISTORY वाले टाइटिल पर ले जाना चाहता हू /
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ऊपर के पेज मे जरा गौर से देखिये कि डायबिटीज के इतिहास HISTORY में क्या खास बात लिखी गयी है ?

यह हम सभी भारतीयों के लिये गर्व की बात है कि डायबिटीज बीमारी को दुनियां में सबसे पहले जानने और पहचानने के लिये और डायबिटीज बीमारी का सटीक इलाज और तदनुसार पथ्य परहेज , जीवन शैली आदि मैनेज करने और अन्य तरीके ढून्ढ लेने का सबसे पहला प्रयास हम भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सको का रहा है / इस HISTORY मे उल्लेख किया गया है कि चरक और सुश्रुत ने इस बीमारी की पहचान की /

भारतीय चिकित्सा विग्यान आयुर्वेद की रोग निदान ग्यान का मूल साहित्य “माधव निदान” मे ’प्रमेह’ के बारे में बहुत सी जानकरी दी गयी है , जो आजकल के प्राय: सभी चिकित्सा ग्रन्थों में जस का तस मिलती है / मूल रूप से बीमारी के cardinal symptoms या मूल लक्षण आयुर्वेद के चिकित्सा ग्रन्थो में मिल जाते है जो रोग निदान में सहायता करते हैं और खास diagnosis की तरफ इशारा करते हैं /
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प्रमेह यानी Diebetic syndromes के बारे मे भी इसी तरह से बहुत विस्तार से रोग की पहचान के लिये माधव निदान ग्रन्थ में विस्तार से बताया गया है / यह ठीक उसी तरह की वही observation की प्रक्रिया के results की तरह है जैसा कि evidence based phenomenon के बारे मे बताया जाता है / प्रमेह के बारे मे आयुर्वेद के चिन्तकों नें बहुत विश्लेषण के साथ प्रमेह के प्रकार और उनकी आयुर्वेद के दोष धातु के निदान को दृष्टि गत रखते हुये जिस प्रकार से वर्णन किया है , यह सब उनके प्रयोगात्मक ग्यान को उजागर करता है /
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प्रमेह यानी मधुमेह के रोग निदान के पश्चात जब रोग निर्धारण पक्का हो जाता है तो आयुर्वेद की चिकित्सा और तदनुसार पथ्य परहेज बताने और रोगी द्वारा पालन करने से Diabetes का रोग अवश्य ठीक होता है /
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हमारे रिसर्च केन्द्र में Diebetes के रोगियों का इलाज ETG AyurvedaScan आधारित रिपोर्ट द्वारा सफलता पूर्वक किया जाता है और लगातार किया जा रहा है / यहां Diebetes पर की गयी शोध के परिणामो को जब प्रकाशित किया गया तो चिकित्सक समाज में इस तरह की फाइन्डिन्ग्स को लेकर बहुत आलोचना की गयी और इस तरह की की गयी शोध की खिल्ली उड़ाई गयी /

KPCARC में की गयी शोध में निम्न मुख्य बातें बतायी गयी है , जो डायबिटीज के रोगियों में पायीं गयी ;
१- शोध मे बताया गया कि ” डायबिटीज” की बीमारी पैदा करने के लिये पैन्क्रियाज ही अकेले जिम्मेदार नही है /
२- शरीर के अन्य Organs, Diebetes पैदा करने के लिये भी जिम्मेदार है /
३- शोध मे बताया गया कि LIVER anomalies के कारण से भी Diebetes पैदा होती है /
४- शोध मे यह बताया गया कि बड़ी आन्त और छोटी आन्त की pathophysiology के कारण से भी डायबिटीज पैदा होती है /
५- शोध में बताया गया कि आयुर्वेद के मूल सिध्धान्त यथा त्रिदोष भेद के दो भेद पाचक पित्त और रन्जक पित्त की गड़्बड़ी से , जो दो अन्गो से मिलकर बने है यथा chole-pancreatic और Hepato -spleeno combination के रुप मे होते है और इन दोनों अन्गों की pathophysiology के कारण डायबिटीज पैदा होती है /
6- अन्य दूसरे कारणॊ का उल्लेख भी किया गया था /

डायबिटीज के बारे में केपीकार्क KPCARC KANPUR, INDIA द्वारा किये गये इस तरह के शोध कार्य पर तब सत्यता की मोहर लग गयी जब जापान के एक विश्वविद्यालय द्वारा यह रिसर्च परिणाम निकाले गये कि “डायबिटीज रोग के पैदा होने के लिये अकेले पैन्क्रियाज जिम्मेदार नही है , बल्कि काफी हद तक LIVER की प्रक्रिया भी डायबिटीज को पैदा करने के लिये जिम्मेदार होती है ” /

इसके कुछ समय बाद आस्ट्रेलिया के चिकित्सा वैग्यानिकों द्वारा किये गये शोध अध्ध्य्यन से निश्कर्ष निकाला गया कि डायबिटीज का रोग “बड़ी आन्त” की patho-physiology ्से भी पैदा होता है /

कई माह बाद ब्रिटिश चिकित्सा वैग्यानिकों ने शोध अध्ध्य्यन में बताया कि “छोटी आन्त” की patho-physiology से डायबिटीज रोग होता है /

हमे खुशी इस बात की हुयी कि हमारे द्वारा निकाले गये निष्कर्ष पर और विदेशी वैग्यानिकों द्वारा निकाले गये निष्कर्ष बिल्कुल सही निकले / अगर हम इस तरह के शोध कार्य अपने स्तर से करते तो हमें करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ते, जो हमारी हैसियत के बाहर की बात थी /

आयुर्वेद के ग्रन्थों में डायबिटीज की चिकित्सा के लिये हरबल फार्मूले दिये गये है , जो हजारों साल से उपयोग किये जा रहे है / आयुर्वेद का मशहूर ग्रन्थ “भैषज्य रत्नावली ” [AYURVEDIC THERAPEUTIC GEMS] मे ऐसे हजरों योग यानी औषधि के फार्मूले दिये गये है जिनको अपनाकर Diebeties की बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता है/
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डायबिटीज को आयुर्वेद में प्रमेह कहते है / आयुर्वेद ने प्रमेह की पहचान और उसके specific charecteristics को पहचान करके आयुर्वेद के सिध्धन्तों के आधार पर वर्गीकरण किया है और तदनुसार उसी वर्गीकरण के हिसाब से प्रमेह की बीमारी के लिये चिकित्सा व्यवस्था का निर्धारण किया है /
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ऐसे बहुत से आयुर्वेद के शास्त्रीय ग्रन्थ है जिनमे प्रमेह की चिकित्सा का बहुत सटीक और अचूक और कभी भी न फेल होने वाला और हमेशा उपयोग में आरोग्यकारी फल देने वाला विस्तार से वर्णन दिया ग्या है जिसे अपना कर Diebetis जैसी बीमारी पर जड़ मूल से काबू पाया जा सकता है /
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आयुर्वेद के चिकित्सा ग्रन्थों मे विस्तार से दिये गये management तथा जीवन शैली तथा आयुर्वेदिक औषधियों के उपयोग से सभी स्तर और सभी तरह की डायबिटीज के आरोग्य के बारे मे रोगियों को निर्देश दिये गये है जिन्हे अपनाकर कोई भी दायबिटिज का रोगी अपने को रोग मुक्त कर सकता है /

Testing of Distilled Water and Chlorinated Tap Water and Nimbadi Churna of Ayurveda ; Test are done by Ayurveda-Ayush Multi-purpose Testing Meter

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amt03The aim and objective of the test of the mentioned subjects are done for the primary evaluation of their hidden properties of nourishing and curing qualities and to establish the specific individual charecteristics of the items in view of Ayurveda Medical system.

Normal Urine parameters are taken for the comparison, but the original parameters of the individual items refelects some thing else and differs, and is not seems actual.

All the three test differs in their qualities.

De-ionised water shows Vata qualities in High, which could be due to its distillation. Sapta Dhatu Ras is Low, that could be assumed that Distill water is not for the use of general intake or for the drinking purposes. Rakta is showing high, which is might interpret that de-ionised water is useful in Injections, which is given by Intra Muscular or Intravenous root.

So is of the Chlorinated water, which is supplied by the Municipal corporation and is used in our daily tasks.

Nimbadi Churna parameters came high level in Rakta, kapha,Ras and Med, which seems to be very near to the use of this churna in the complaints mostly mentioned.

The test on the other remedies and food articles are going on and the results will be given accordingly. Test are done for the purpose of data collection and data evaluation. Opinion and comments given here, should not be taken final and should be understand at experimental level.

मोटा आदमी ; मोटापा और आयुर्वेदिक निदान चिकित्सा ; Fatty person ; Obesity ; Obese personality ; Ayurvedic Treatment

CONTACT ; Dr D.B.B.ajpai, Ayurvedic Diagnostician and Inventor & Chief ETG AyurvedaScan Investigator, KANPUR Mobile; 09336238994

CONTACT ; Dr D.B.B.ajpai, Ayurvedic Diagnostician and Inventor & Chief ETG AyurvedaScan Investigator, KANPUR Mobile; 09336238994


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आयुर्वेद के अनुसार शरीर का मोटापन और दुबलापन “रस” के कारण से होता है / जो लोग कफ कारक और क्षार रहित पदार्थ सेवन करते है ; एक भोजन के बिना पचे दूसरा भोजन कर लेते है, दिन रात सो कर या बैठ कर गुजारते हैं ; मेहनत नही करते और दिन में सोया करते हैं – ऐसे लोग मोटे हो जाते हैं /

लेकिन मोटापा होने के यही कारण नही गिनाये जा सकते, इसके अलावा भी और दूसरे कारण है,. जिनसे मॊटापा बढता है /

भारी भोजन, शीतल पदार्थ के खाने, तले भुने तेलीय या चर्बी युक्त भोजन के करने, मेहनत का काम न करने , स्त्री के साथ सम्भोग न करने , चिन्ता फिक्र न करने , पैत्रक स्वभाव के कारण , कुछ केमिकल युक्त दवाओं के खाने के विपरीत परिणामॊं तथा अन्य कारणों से मोटापा बढता है /

आयुर्वेद के मत से बहुत मोटा होना और बहुत दुबला पतला होना दोनों ही स्थितियों को अच्छा नही समझा जाता है / अभुत मोटे आदमी का जीवन जैसा कि कहा जाता है कि सम्पूर्ण नही होता है और उसे असमय मे ही बुढापे जैसी स्तिथि का समना करना होता है अथवा बुढापा घेर लेता है / आयुर्वेद कहता है कि मोटे आदमी के शारीरिक श्रोत रुक्ने लगते है / स्त्री के साथ सम्भोग करने मे तकलीफ होती है तथा कमजोरी, बदबू, पसीना, बहुत भूख और प्यास जैसे लक्षण हो जाते है /

शरीर की चर्बी बराबर बढती रहती है और इस प्रकार वात , पित्त तथा कफ के अनेक रोग पैदा करके असाध्य रोगों की नीव पडने का खतरा बन जाता है / मेद और मान्स के बढने से पेट, hips और mammery glands लटकने लग जाते है और चलते समय हिलते दुलते रहते हैं /

मॊटे आदमी या मेदस्वी व्यक्ति की केवल शारीरिक चर्बी ही बढती है / इस चर्बी के बढने के साथ साथ ही मान्स भी बढता है / लेकिन शरीर की दूसरी धातुयें नही बढती है / इसीलिये मोटे आदमी की आयु अधिकतर सम्पूर्ण १०० साल के लक्ष्य को नही प्राप्त होती है / शरीर की शिथिलिता, सुकुमारता, भारीपन आदि से मोटे व्यक्ति को बुढापा जल्दी घेरता है ऐसा देखा गया है /

शरीर के श्रोत अधिक वायु और चर्बी के कारण से रुकते हैं / उसे अधिक चर्बी होने के कारण स्त्री या पुरूष के साथ सम्भोग करने में तकलीफ होती है / कमजोरी , शरीर से निकलने वाली बदबू, पसीना , अधिक भूख और अधिक प्यास – ऐसे लक्षण होते हैओं / चर्बी अधिक बढ जाती है जिसके कारण त्रिदोष यानी वात पित्त कफ जैसे दोषॊं की तकलीफे हो जाती है और असाध्य रोगों को जन्म देती हैं /

मोटे आदमी को क्षुद्र श्वास, प्यास, क्षुधा, निद्रा, शरीर में बदबू, कन्ठ में घर घर शब्द निकलना , अन्गों में थकान आना जैसी व्याधियां घेर लेती हैं / मेद की अधिकता के कारण मोटा आदम,ई सभी कामों मे अशक्त रहता है / शुक्र मार्ग रुकने या कमजोर होने से बहुत थोड़ा सा ही मैथुन कर पाता है / कफ और मेद से शरीर के दूसरे स्रोत भी रुकते है जिससे अस्थि , मज्जा और शुक्र धातुओ का क्षरण होता है और यह धातुये बढ़ नही पाती हैं /

लिखने का यह तात्पर्य है कि बहुत मोटा आदमी रोग के मामले में बहुत sensitive होते हैं और उनको असमय ही ऐसे रोग घेर लेते हैं जिन्हे असाध्य रोग कहते है /

इसलिये प्रत्येक मनुष्य को ऐसे उपाय करते रहना चाहिये कि शरीर का गठन बीच की अवस्था का बना रहे अर्थात न तो अधिक मोटा हो और न अधिक दुबला पतला / चिकित्सक को चाहिये कि रोगी को “कर्षण” चिकित्सा द्वारा दुर्बल करने का उपाय करे / चरक का निर्देश है कि लन्घन और ब्रन्हण विधि को अपना कर मोटे रोगी का मोटापा दूर करने के लिये चिकित्सा करे /

आयुर्वेद शास्त्रों में मोटापा कम करने के लिये भुत से निर्देश दिये गये हैं / जिन्हे किसी योग्य आयुर्वेद चिकित्सक के सलाह के साथ उपयोग करना चाहिये / चरक सम्हिता मे बताया गया है कि मोटापा दूर करने के लिये वात नाशक, कफ मेद हारक अन्न पान , रूखे उबटन, गिलोय और भद्र मोथा का काढा, त्रिफले का काढा, छाछ, वाय विडन्ग, सोन्ठ, जवाखार, मधु, जौ, आमलों का चूर्ण, ऐसे सभी द्रव्य , मॊटापा का नाश करने के लिये हितकारी है /

जिन्हे मॊटापा नष्ट करना हो वह, जागरण, मैथुन, चिन्ता और परिश्रम करना शुरू करे और इसे धीरे धीरे बढायें /

आधुनिक चिकित्सा शास्त्र के अध्ध्यन के साथ आयुर्वेद के समन्वयन और ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन तकनीक की फाइन्डिन्ग्स ्की मदद से पता चला है कि कई लोगों को मोटापा शरीर की मान्सपेशियों में जल के अधिक retention के कारण होता है / इसे आयुर्वेद की नयी तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के निदान द्वारा आविष्कृत किया गया है जिसे हाईड्रोमस्कुलोसिस Hydro-musculosis अथवा सजल पेशी जन्य विकार का नाम दिया गया है /

Hydro-musculosis के सभी रोगी आयुर्वेद की चिकित्सा करने से शत प्रतिशत ठीक हो जाते है और उनके बढा हुआ वजन कई कई किलो कम हो जाते हैं /

मेद रोगी यदि ETG AyurvedaScan विधि का सहारा लेकर इलाज करते है तो त्रिआयामी निदान Three dimensional Diagnosis करके जब आयुर्वेद की चिकित्सा की जाती है तो अवश्य वजन घटता है /

पन्चकर्म से भी मेद रोग की चिकित्सा की जाती है / केवआयुर्वेद मे ही मेद रोग की चिकित्सा का सही और सटीक इलाज है /

Stellaria media ; Homoeopathic remedy for Rheumatism and neuro-musculo-skeletal related joints problems

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A vey effective Homoeopathic remedies for all nature of Rheumatism and joints related disease conditions belongings to any age and race.

STELLERIA MEDIA , which is known as “Cheekweed”, is used an external application for rheumatism as well as uses internally in lower decimal potencies through oral route.

The most indicative symdroms are stasis and congestion and sluggishness of all functions, which are mostaly aggravates in Morning and just after waking or just leaving the bed.

The main features of the remedy are mostly related to RHEUMATISM of all nature, given below in syndromes;

1- Chronic Rheumatism ;
Charecteristics of pain is sharp, shifting, darting pain with the stiffness of the joints. The affected parts are very sore to touch and very painful on movement

2- Gout disorder with enlarged and inflamed finger joints

3- Psoriasis

4- Cervical spiondylitis

5- Liver conditions engorged, swollen, stitching pain, sensitive to pressure. This is an invaluable remedy for Cirrhosis of Lever and Cancer of Liver of First and second stages.

Conclusively the medicine is useful in all musculo skeletal joints and muscles problems and Liver disorders prominently. There is no side effects of any kinds and totally safe.

If taken and used in mother tincture form , the remedy acts very fast and relieves problems sometimes instantly specially painful conditions.

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ETG AyurvedaScan ; how the system detects the entire body problems and how accurate Ayurvedic-AYUSH treatment is possible?; ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन सिस्टम किस तरह से सारे शरीर का परीक्षण करता है और कैसे आयुर्वेद-आयुष द्वारा सही और सटीक इलाज सम्भव करता है ?

आयुर्वेद की नयी निदान ग्यान की क्रान्तिकारी तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन द्वारा किस तरह से सारे शरीर का परीक्शण होकर किस तरह से सही और सटीक सभी बीमारियों का इलाज समभव हो जाता है , जिनके बारे मे धारणा है कि ऐसी बीमारियों का इस दुनियां में कोई इलाज नही है ?

सही बात यह है कि आयुर्वेद की इस क्रान्तिकारी तकनीक द्वारा सम्पूर्ण शरीर की तीन आयामी यानी 3 Dimentional अध्ध्य्यन किया जाता है / यह अध्ध्यन ठीक उसी तरह से है जिसे उदाहरण स्वरूप किसी पेड़ से तुलनात्मक रूप में कर सकते हैं / कैसे ?

यहां दिये गये स्केच चित्र के {A} भाग का अवलोकन कीजिये / इसमें दिये गये एक पेड़ को देखिये और उसका बेसिक structure समझिये / कोई भी पेड़ तीन मुख्य हिस्सों में बन्ट जाता है / ये हिस्से होते हैं [१] जड़ यानी root [२] तना यानी trunk और [३] ऊपर की शाखा यानी branches के साथ अन्य / यह एक पेड़ का मूल स्वरूप है , जो तीन हिस्सों में मुख्यतया बटा हुआ होता है / इस पेड़ की सारी जीवन कथा इन्ही तीन भागों मे समाहित है /

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अब इसी स्केच चित्र के दूसरे {B} भाग को देखिये और समझिये / यही वह मुख्य समझने वाला तत्व है जो ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन को विशिष्ट बनाता है / दरअसल आयुर्वेद के मौलिक सिध्धान्तों के निदान और शरीर के रोगों के निदान ग्यान को त्रिआयामी यानी Three Dimentional रूप यहीं बनता है / जब इस तकनीक के फाइनल रिजल्ट मिलते हैं तो इसमें तीन स्तर का निदान हो जाता है / इन तीन स्तरों मे पहला स्तर Manifestation / Symptoms / Unhealthy conditions का होता है यानी वह मुख्य तकलीफें या वह मुख्य पीड़ायें, जिनके इलाज के लिये मरीज डाक्टर के पास आता है / दूसरा स्तर उस pathway यानी रास्ते का होता है , जिससे होकर मुख्य तकलीफ या व्यथा या पीड़ा उस स्थान से चलती है जहां मुख्य तकलीफ की जड़ बुनियाद होती है / यानी तीसरा स्तर जहां pathophysiology या pathology पैदा होती है, उन Organs / Vital parts / Torso Organs में , जिनकी कार्य विकृति या विकृति के कारण मौजूदा तकलीफ होती है और जिस तकलीफ का इलाज मरीज डाक्टर के पास कराने के लिये आता है / यहा उल्लेखनीय होगा और कहना होगा कि त्रिआयामी यानी Three Dimentional Diagnosis की सुविधा ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के जरिये मिल जाती है /

यहां दिये गये स्केच चित्र के तीसरे भाग यानी {C} हिस्से को देखिये / यह वह महत्वपूर्ण चरण हैं जहां आयुर्वेद की दवाओं के multi-functional area का लोहा मानना पड़ता है / ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की फाइन्डिन्ग्स रिपोर्ट के तीन आयामी पहलू के अध्ध्य्यन के पश्चात यह विभाग सुविधा देता है कि ऐसी आयुर्वेदिक औषधियों का चुनाव किया जाये तो [१] पहला और [२] दूसरा और [३] तीसरा यानी तीनों चरण की बीमारियों को एक ही दवा या बहुल दवा और उसका अनुपान बीमारी को जड़ बुनियाद से आरोग्य प्रदान कर देने की क्षमता पैदा कर देता है / चाहे उस बीमारी का कोई भी नाम दिया गया हो, चाहे उस बीमारी का कितना भी डरावना नाम हो , चाहे उस बीमारी का कितना भी भयभीत करने वाला आकार प्रकार बता दिया गया हो या बीमारी को यह बता दिया गया हो कि इसका कोई इलाज नही है /

यह बात सब्को समझ लेना चाहिये कि कोई भी बीमारी होगी तो यह शरीर में ही पैदा होगी और इस बीमारी को शरीर के विकृत अन्ग ही पैदा करेन्गे / बीमारी कहीं बाहर से नही आयेगी , न ही इसे कोई implant कर सकता है / ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की इस तकनीक से तीन आयामी यानी पहला मुख्य बीमारी के लक्षण दूसरा इस बीमारी को लाने वाला या बनाकर लाने वाला रास्ता और तीसरा मुख्य बीमारी को पैदा करने वाला शरीर का अन्ग, आदि सभी बातों का पता चल जाता है / जिससे बीमारी कोई भी हो और उसका कोई भी नाम दिया गया हो , सभी आरोग्य होते है /

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Tribhuvan Kirti Ras ; an Ayurvedic classical remedy for Winter Season

Every year winter season comes and while its commencement, it brings many health problems with the persons almost every one of all ages. Those who are living in those areas, where almost all months of a year, winter or winter like atmosphere persists, they also feel problems from more cold.

In those countries, where atmosphere of winter is persists around the year, in this region the skin of the person becomes more harder than comparatively to person of the tropical region. The persons, who are living in a cold atmosphere, their skin quality is somehow changed comparatively to those who are living in tropical regions and where cold or winter persists only few days or few months.

Case studies with the help of ETG AyurvedaScan system reveals that traces recorded from European countries and Tropical regions patients are differs from elevation , which is due to hard and soft skin of the patient belongs to specific regions. Where cold season is very prominent the skin of the person are thick and deposition of fat layer in under skin persists.

Although the diagnosis of disorders are same, ayurvedic fundamentals evaluations are same and no differences seen in between the results except the hights and longitudinal appearence of traces, which is due to skin of the subjects undergone for the test.

However, this dose not matter. Here TRIBHUVAN KIRTI RAS is beneficial in the following ailing conditions;

1- Cures exposure of cold either from cold of winter or wetting in rain
2- Used in almost all kinds of FEVER of any origin, whatever they may be.
3- Lower down HIGH FEVER just like PARACETAMOL do in feverish conditions.
4- suppressed sweat comes out after use of this remedy
5-= Very fast acts in Just appeared fever
6- acts fast in Phlegm-cough-Fever conditions
7- Useful in Pneumonia and Pneumonia like syndromes
8- Influenza of any origin and anywhere
9- Useful in small pox and measles and like syndromes

Doses; One /two tablets should be taken four hourly with tea or warm water or Ginger Tulasi tea

Ayurveda have many remedies for winter ailing conditions, TRIBHUVAN KIRTI RAS is one of them. Those who desire they should use this safe remedy.

EPILEPSY : FITS : totally CURABLE by AYURVEDA Remedies based on the findings of ETG AyurvedaScan Report

The only and existing commercially available facility for scanning and examining whole body according to the principals of AYURVEDA, a well known SCANNING system called ETG AyurvedaScan, have great priveledge to cure the hazarduous disease condition EPILEPSY or FITS, in accordance based on the findings and report of EPILEPSY or CONVULSIVE FITS patient , is able to provide total cure and root out the condition and patient problem in toto.

EPILEPSY and FITS conditions are seems that they are incurable and when once start medications , the medications should be taken whole life, as it is understood today by the Modern Western medicine takers. In fact , it is a mockery among the physicians that they are not well aware of the other systems of practicing medicine, which have a plentiful solutions of these ? incurable problems and that is to be understood the incurable conditions.

The basic problem with the EPILEPSY patient , is related with the Temporal region and parietal region of the Brain parts physiology, sometimes FRONTAL Lobe of Brain could be involved in the production of convulsions. Tremors and twitching of muscles. The excited stages of these Brain  regions  produces convulsions. The reason of excitation of nerve cells of Brain or the areas mentioned , are not well established, but it is presumed that certain factors are responsible for producing the brain anomalies.

Some facts  came in our observation that  over reading, over studying, over mental work, irregular life style, watching in night, irregular sleeps, menstrual anomalies, uterus excitation, hormonal problems , suppressive anomalies, use of  Anti-biotics, anti-allergic drugs , narcotic drugs habits etc etc causes the EPILEPSY or FITS problems.

In Allopathic system of medicine hypnotic and tranquilizers and  anti-convulsive drugs are used to control the EPILEPSY episodes for regular use till life time. Some times after use of these medicine convulsions appears and not controlled by the proper settled doses earlier, then much stronger medications are used to control. The series is going on till the spawn of life.

Ayurveda’s New revolutionary technology “ETG AyurvedaScan” have privilege to treat EPILEPSY by root. A 100 page reports provides the detailed examination data  of the patient, which clues the path of the triggering convulsive effects through systems of body either mental to physical or physical to mental, that causes the exciting of brain faculties earlier mentioned.

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