
ऐसा कहना और ऐसा विपरीत प्रचार करना इस विश्व के लोगों के लिये घातक होगा कि कैन्सर जैसी बीमारी का एलोपैथी के अलावा और किसी चिकित्सा विग्यान में इलाज नही है / “और किसी चिकित्सा विग्यान ” से मतलब आयुर्वेद और होम्य्पैथी और यूनानी चिकित्सा विग्यान से है /
आयुर्वेद की निदान ग्यान और रोग की पकड़ और रोग की जड़ तक मालूम कर लेने वाली आयुर्वेद की क्रान्तिकारी तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की बदौलत अब यह समभव हो गया है कि शरीर के अन्दर की विकृतियां यानी कार्य विकृति और अन्ग विकृति यानी pathophysiology और pathology किस स्तर की है और कहां कहां है, इनका pathway किस तरफ से मुख्य तकलीफ की तरफ गया है अथवा जा रहा है आदि आदि महीन बातों का पता चल जाता है ,जब इस findings को लेकर और इस पर आधारित होकर इलाज करते है तो मर्ज चाहे जो भी हो और चाहे जैसा हो, ये सब अवश्य ठीक होते हैं चाहे वह कैन्सर ही क्यों न हो या वह कोई भी तकलीफ हो जिसका बड़ा लम्बा चौड़ा नाम दिया गया हो और यह सुनकर जो लोगों को भयभीत और दहशत से भर देता हो /
लगभग ३० साल पहले तक जब कैन्सर की बीमारी का कोई इलाज नही था, न आज की तरह सर्जरी का विकास हुआ था तो लोग कैन्सर का इलाज होम्योपैथी और आयुर्वेद के चिकित्सकों द्वारा कराते थे / उस समय भी कुछ किसम के कैन्सर की चिकित्सा में रोगी को आन्सिक या अर्ध आन्शिक या पूर्ण आन्सिक अथवा पूर्ण लाक्षणिक आराम मिल जाता था / आज के हालात यह है कि सरजरी कराने के बाद भी कैन्सर उसी तरह फिर पैदा हो जाता है बल्कि उससे अधिक उग्र अवस्था मे फैलता है जिसे रोक पाना मुश्किल होता है /
दुर्भाग्य की बात यह है कि कैन्सर के लिये की गयी सर्जरी या केमोथेरपी या रेडियेशन या अन्य नये तरीकों के after effects या post anomalies या post problems के प्रभाव या complications पर अध्ध्यन नही किये गये और न कोई रिसर्च / जो भी अध्ध्यन है वे सब पुराने पड़ चुके है / सभी वही लकीर के फकीर की स्तिथि का इलाज कर रहे है ं /
आधुनिक चिकित्सा विग्यान का ग्यान कैन्सर के इलाज को लेकर बहुत बढ गया है / अब समय आ गया है कि इसे नये विचारों के साथ नये innovation के साथ आजमाया जाये ताकि पीड़ित मानवता की सही मायने में सेवा की जा सके और सही तथा सुरक्षित सेवा उपलब्ध कराई जा सके /





















