A CASE OF H.I.V. POSITIVE WITH TUBERCULER INFECTION ; एच० आई०वी० के साथ टी०बी० से इन्फेक्टेड मरीज का केस


कुछ दिन पहले एच०आई०वी० से infected एक मरीज का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और इसके तत्सम्बन्धित परीक्षण किये गये /

मरीज की उम्र देखकर मुझे बहुत आश्चर्य हुआ क्योन्कि उसकी उमर के वल २१ साल की है / रोगी के रोग इतिहास को जानने की इछ्छा हुयी और मैने उत्सुकतावश उससे सारी तकलीफ बताने के लिये कहा / रोगी के साथ उसके गार्जियन भी थे /

मुझे यह मालूम करना था कि इतनी छोटी अवस्था मे इस नवयुवक को क्यो H.I.V. जैसा सन्क्रमण हुआ है /

जैसा मुझे बताया गया कि इस रोगी का ROAD accident हुआ था / इस दुर्घटना के बाद उसे अस्पताल मे भरती कराया गया था जहां इस रोगी को कुछ लोगो का रक्त चढाया गया था / इन्ही रक्त दाताओ मे कोई भी व्यक्ति एच०आई०वी० से इन्फेक्टेड होगा इसीलिये जब इस  रोगी को रक्त चढाया गया तो इसके भी HIV Infection  पैदा हो गया /

कुछ दिनो तक तो इसको जो तकलीफे हुयी उससे इलाज कर रहे डाक्टर यह समझ ही नही पाये कि इसे बीमारी क्या हो रही है ?

जब प्रदेश के एक चिकित्सा सन्स्थान मे इस रोगी को दिखाया गया तो सारी जान्च करने के बाद पाया गया कि इसे HIV Infection है /

कुछ दिनो तक HIV  का इलाज करने के बाद इस रोगी का खून जब फिर टेस्ट किया गया तो पता चला कि इसे टी०बी० यानी ट्यूबर्कुलोसिस का भी infection  साथ साथ है /

कई साल तक इलाज करने के बाद भी इस रोगी को जब कोई माकूल इलाज नही मिला और इसकी तकलीफे नही ठीक हुयी तब इसको किसी  हमारे यहा से इलाज करा चुके रोगी ने इलाज के लिये हमारे केन्द्र मे जाने की सलाह दी /

मैने इसका ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और अन्य तत्सम्बन्धित टेस्ट किये और जड़ मूल की diagnosis  करके इस केस की अनालाइसिस की गयी /

नीचे दिये गये ट्रेस रिकार्ड मे आयुर्वेद के मौलिक सिध्धन्न्त यथा वात और पित्त और कफ दोष का शरीर मे कितनी उपस्तिथि है इसको जानने के लिये शरीर मे निश्चित किये गये points  की mapping के स्थान का रिकार्ड किया गया है / ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी मशीन के जरिये लिये गये ट्रेस रिकार्ड HORIZONTAL POSITION य़ा SUPINE POSITION मे ही किये जाते है /

इस मरीज का यह रिकार्ड ऊपर बतायी गयी शारीरिक स्तिथि मे की गयी है / ट्रेस रिकार्ड मे OBSERVATION से पता चला है कि ;

[१] रोगी को त्रिदोषज यानी सन्निपातिक यानी वात और पित्त और कफ तीनो दोषो का मिश्रित AETIOLOGY  मौजूद है /

[२] वात स्थान और पित्त स्थान और कफ स्थान की रिकार्डिन्ग pattern सीधी straight line मे  न होकर अर्ध चन्द्राकार और गोलाकर ZIG ZAG PATTERN   मे है /

यह तभी होता है जब electrical diffusion रुक रुक कर आता है और यह एक जैसा नही होता है / ELECTRICAL DIFFUSION अगर रुक रुक कर आते है और रिकार्ड होते है तो यह एक तरक की शारीरिक anomaly  होती है , इसके कई मायने आयुर्वेदिक सिधधान्तो के हिसाब से interpret  किये जाते है /

यह तय किया गया कि इस रोगी को त्रिदोषज व्याधि है /   HIV001

मरीज की व्याधि का और अधिक और pin point सुस्पष्ट निदान ग्यान का अध्ध्य्यन करने के लिये  इस मरीज का TREAD MACHINE E.T.G. AYURVEDASCAN  परीक्षण किया गया /

TREAD MACHINE  मे दौडाकर परीक्षण करने से मरीज का शरीर VERTICAL POSITION   मे होता है / इससे शरीर के सारे viscera फैलते है और उनमे रक्त सन्चार अधिक बढता है / ELECTRICAL DIFFUSION की गति बढती है जिससे शरीर के अन्गो की वास्तविक कार्य क्षमता pathophysiology और pathology जो HIDDEN STAGES   मे होती है , वह सब उभर कर सामने आ जाती है /

नीचे उन्ही सब स्थानो का रिकार्ड किया गया है जो ऊपर के स्थानो मे रिकार्ड करके प्राप्त किया गया है / नीचे के रिकार्ड का पाठक अवलोकन करे /

[१] वात स्थान का रिकार्ड देखने पर पता चलता है कि यहां की रिकार्ड की गयी ट्रेसेस शरीर की गर्मी से बाधित है और अन्दरूनी accumulated heat जितनी normal condition  मे  exhaust  होना चाहिये , ऐसा नही हो पा रहा है /

[२] Electrical diffusion  की स्तिथि उसी तरह की है लेकिन इसका लेवेल अधिक है जैसा कि horizontal position  मे है /

[३] पित्त और कफ स्थान के रिकार्ड देखने से पता चलता है कि इस रोगी को LIVER & PANCREAS & SPLEEN   इन तीनों की CUMULATIVE problem  है / यह कितना कितना और किस स्तर का है यह measurement  के बाद ही पता चलता है /

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LUMBER REGION  से लिये गये रिकार्ड से पता चलता है कि बड़ी आन्त और छोटी आन्त दोनो की कार्य विकृति उपस्तिथि है और उनमे IRRITABLE BOWEL SYNDROMES तथा  INFLAMMATORY CONDITION OF BOWELS  उपस्तिथि है /

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अन्दरूनी गले और दोनो फेफड़ो का परीक्षण करने के बाद पता चला है कि इसके फेफड़ो मे विकृति है / फेफ्ड़ो की विकृति को जान्चने के लिये चार से अधिक स्थानो का मुख्य रूप से परीक्षण करते है / इसके अलावा रक्त का परीक्षण करके पता करते है कि शारीरिक क्षय की स्तिथि कैसी है और chemical chemistry  किस तरह की है /

रोगी का पहले ही परीक्षण हो चुका था और उसकी diagnosis establish  की जा चुकी थी /

लेकिन आयुर्वेदिक चिकित्सा के लिये इस तरह के परीक्षण की एक सीमित सहायता निदान के लिये मिलती है /

सन्निपातिक अथवा त्रिदोषज रोग  के लिये वात क्षीण और पित्त अति बृद्द और कफ अति क्षीण    अवस्था का मरीज के अन्दर उपस्तिथि मिला है / इस तरह  के COMBINATION   से यह मदद मिलती है कि किस तरह की औषधियो का चयन और कैसा management  मरीज का होना चाहिये /

पित्त की अति ब्रध्धि को शान्त करने के लिये उपयुक्त औषधियो का चयन किया गया है और रोगी को आयुर्वेदिक दवाओ को खाने के लिये prescription  दिया गया है /

H.I.V. और TUBERCULOSIS   से ग्रसित इस रोगी को आयुर्वेद की चिकित्सा करने से अराम मिला है /

यह establish  करने का आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान को एक evidence base  मिला है कि एच०आई०वी० के रोगी का इलाज  “सन्निपातिक” या “त्रिदोषज” आधार पर करना चाहिये / इससे एच०आई०वी० रोगी की  चिकित्सा और इलाज करने मे अवश्य सफलता मिलती है /

FISTULA IS NOW NOT AN INCURABLE DISEASE CONDITION ; ETG AyurvedaScan bases treatment provides 100 % cure of Fistula ; भगन्दर अब लाइलाज बीमारी न समझी जाय ; ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित इलाज से भगन्दर की बीमारी शत प्रतिशत आरोग्य प्रदायक


FISTULA यानी भगन्दर के बारे मे आम धारणा यही है कि यह बीमारी लाइलाज है और इसका कोई दवाओं से इलाज अथवा औशधीय इलाज नही है , सिवाय आपरेशन कराने के / इस तरह की धारणा आम जन और लोगो के बीच व्याप्त है /

लेकिन ऐसा सोचना गलत है / भगन्दर और FISTULA  का इलाज आयुर्वेद और homoeoapthy  और यूनानी तथा योग और प्राकृतिक चिकित्सा मे सम्भव है और यह बीमारी एक बार ठीक हो जाने के बाद फिर नही पैदा होती है /

आधुनिक चिकित्सा एलोपैथी मे  FISTULA  या भगन्दर का इलाज सिवाय आपरेशन कराने के दूसरा कोई उपाय नही है / आपरेशन कराने के बाद कई मरीज ठीक हो जाते है लेकिन बहुत से ऐसे मरीज इलाज के लिये आये जिनको एक बार  आपरेशन क्राने के बाद उनको फिर दुबारा FISTULA  पैदा हो गया / बहुत से ऐसे अपनी चिकित्सा कराने के लिये आये जो 9 दफा यानी NINE TIMES SURGERY करा चुके थे फिर भी उनका FISTULA नही ठीक हुआ /

आयुर्वेद मे औषधीय उपचार के साथ साथ क्षार सूत्र चिकित्सा का उपयोग करते है / लेकिन बहुत से ऐसे मरीज चिकित्सा कराने के लिये हमारे रिसर्च मेन्द्र मे आये जो  देश के प्रतिष्टिथ  क्षार चिकित्सा केन्द्रो मे जाकर  क्षार सूत्र क्रा चुके थे और उसके बाद भी नही ठीक हुये /

ऐसे मरीजो का इलाज आयुर्वेद की नवीन आविष्कृत की गयी अत्याधुनिक तकनीक  ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और इसके supplementary tests  पर आधारित इलाज करने से अव्श्य आराम मिला और मरीज ठीक हुये है /

चिकित्सा के लिये आये लगभग सभी मरीज ठीक हुये है और लाइलाज कही जाने वाली बीमारी FISTULA  यानी भगन्दर का इलाज दवाओ के द्वारा सम्भव हो गया है /

K.P.C.A.R.C. and Dr D.B.Bajpai ties with BRIDGES HEALTHCARE FEDERATION, INDIA ; AGREES TO PROVIDE 30 % DISCOUNTS ON ALL AYURVEDA AND HOMOEOPATHIC AND OTHERS EXAMINATION AND CHECK-UPS


2014 , this year we have ties with BRIDGES HEALTH-CARE FEDERATION , INDIA FOR PROVIDING 30 % DISCOUNTS ON ALL EXAMINATION DONE AT our Research Center in AYUREVEDA & HOMOEOPATHIC MEDICAL SYSTEMS to their CARD HOLDERS AND MEMBERS.

ANY PERSON , who is desirous for our service, should have a CARD HOLDER of Bridges Health-care Federation.

The following services will be given 30 % discounts for the BHF Card Holders.

1- ETG AyurvedaScan examination
2- EHG HomoeopathyScan examination
3- Ayurveda Thermal Scanning
4- Ayurveda Blood examination
5- Ayurveda Urine Examination
6- Homoeopathy Blood examination
7- Ayurveda Consultation
8- Speciality AYURVEDA Remedies
9- Speciality Homoeopathic Remedies
10- General check-ups
11- Homoeopathic Consultation

Free Ayurvedic and / or Homoeopathic remedies Prescription will be given to the BHF Card Holder patient, who will opt total package.

Benefit holders should approach to BRIDGES HEALTHCARE FEDERATION, INDIA.

LEUCODERMA / VITILIGO / SAFED DAAG ; CURE OF A FEMALE CASE


A lady aged 45 years have been cured from LEUCODERMA / WHITE SPOTS/ SAFED DAAG by AYURVEDIC TREATMENT based on ETG AyurvedaScan findings and other innovative examination procedures like Ayurveda Blood Examination and Ayurveda Urine Examination and Ayurveda Thermal Scanning invented by our research center at KANPUR, UP, INDIA.

Photographic evidence shows the progress of cure, shooted time to time according to the need , here is shooted phorographs of begginning and end of the cure process.
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The above and many other photographs are taken time to time for evidencing the process of cure by Ayurvedic medications and management accordingly mentioned in Ayurvedic classics.
She was having white spots almost upper and lower extremeties, corners of lips, below nose and some other sites of body parts.

Below photograph is taken recently, which is showing the complete cure of the LEUCODERMA / WHITE SPOTs PROBLEMS, which she have yester years, now is totally cured by AYURVEDA treatment.
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LATEST Technology of Ayurveda ETG AyurvedaScan bases treatment always fruitful and result oriented in LEUCODERMA DISORDERS.

डायबिटीज ; रक्त शर्करा ; खून में व्याप्त सूगर ; ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित इलाज ; Diebeties ; Blood Sugar ; Glycosuria ; E.T.G. AyurvedaScan based treatment


विश्व डायबिटीज दिवस पर experts डाक्टर्स के विचार पढने और समझने के लिये मिले / बहुत कुछ अखबारों में भी छपा और इस बारे मे जागरुकता जाहिर करने के उद्देश्य से उत्साहित लोगों ने रैलियां भी निकाली और लोगों को डायबिटीज से कैसे बचा जाय , यह सम्झाने के साथ साथ कुछ ऐसे भी उपदेश देने से नही भूले जो हरेक के लिये हितकारी साबित हों /

लेकिन इसके ठीक उलट जहां विद्वान डाक्टर अपने ग्यान से देश के आम नागरिक को डायबिटीज के बारे मे ठीक ठीक और सही सही बात बताने में पीछे नही है वहीं बहुत से ऐसे चिकित्सक हैं जो डायबिटीज हो या न हो अथवा नही भी होती है तो भी रोगी को या व्यक्ति को इस तरह से मानसिक रूप से घबड़्वा देते है या डरा देते हैं जैसे उनको डायबिटीज न हो गयी हो कुछ ही सेकन्ड में प्राण लेवा बीमारी हो गयी हो /

ऐसे बहुत बड़ी सन्ख्या में मरीज मिले हैं जिनको डायबिटीज नही थी लेकिन उनको बता दिया गया कि उनको डायबिटीज है और उनको INSULIN भी लगनी शुरू कर दी गयी जिससे मरीज की हालत मरणासन्न हो जाती है / अब ऐसे चिकित्सक बन्धुओं को क्या कहा जाय , जो मरीजों के साथ इस तरह का व्यवहार करते हैं ?

कई मरीज मिले जिनको डाक्टरों द्वारा गलत जानकारी दी गयी / उनको भोजन करने के बाद PP Sugar के बारे मे बताया गया कि २०० मिलीग्राम सूगर लेवल में २० यूनिट सुबह और १५ यूनिट शाम को INSULIN लगाना चाहिये, इस तरह की सलाह दी गयी / मरीजों ने भी वही किया जो डाकटर ने बताया, जब हालत खराब हुयी तो नर्सिन्ग होम में भरती करा दिया / फिर जो हुआ वह सभी जानते हैं /

इस तरह की गलत सलाह से बहुत से रोगी गम्भीर बीमारियों के शिकार हो चुके हैं /
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दुनियां मे सबसे अधिक डाक्टरों के बीच में Practice of Medicine की दो किताबें प्रचिलित है, जिन्हें डाक्टरी की सर्वोच्च डिग्री के लिये पढना जरूरी होता है / यह दो किताबे हैं ;
१- Harrison’s INTERNAL MEDICINE और दूसरी
२- TEXT BOOK OF MEDICINE by Bee & Derm
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इन पुस्तकों की सबसे खास बात यह है कि जिस बीमारी के बारे में चर्चा की गयी है और उस बीमारी के बारे मे जानकारी दी गयी है , वह chapter या लेख उस बीमारी के बारे में जानकारी रखने वाले दुनियां के सर्वोच्च और सुपर एक्सपर्ट द्वारा लिखी गयी है / बात साफ है जब दुनिया का सबसे बेहतर डाक्टर बीमारी के बारे मे बता रहा है तो इसका मतलब है कि जितनी जानकारी दी जा रही , वह शत प्रतिशत सही होगी / अगर इसके अलावा कोई डाक्टर अपनी बनायी हुयी मनमानी theory बता रहा है तो इसे क्या कहा जायेगा ?
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TEXT BOOK OF MEDICINE के इस पेज में देखिये , जो डायबिटीज के बारे मे बताया गया एक शुरुआती विवरण है / इसे ध्यान से देखिये और पढिये / मै आपका ध्यान इस पेज के HISTORY वाले टाइटिल पर ले जाना चाहता हू /
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ऊपर के पेज मे जरा गौर से देखिये कि डायबिटीज के इतिहास HISTORY में क्या खास बात लिखी गयी है ?

यह हम सभी भारतीयों के लिये गर्व की बात है कि डायबिटीज बीमारी को दुनियां में सबसे पहले जानने और पहचानने के लिये और डायबिटीज बीमारी का सटीक इलाज और तदनुसार पथ्य परहेज , जीवन शैली आदि मैनेज करने और अन्य तरीके ढून्ढ लेने का सबसे पहला प्रयास हम भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सको का रहा है / इस HISTORY मे उल्लेख किया गया है कि चरक और सुश्रुत ने इस बीमारी की पहचान की /

भारतीय चिकित्सा विग्यान आयुर्वेद की रोग निदान ग्यान का मूल साहित्य “माधव निदान” मे ’प्रमेह’ के बारे में बहुत सी जानकरी दी गयी है , जो आजकल के प्राय: सभी चिकित्सा ग्रन्थों में जस का तस मिलती है / मूल रूप से बीमारी के cardinal symptoms या मूल लक्षण आयुर्वेद के चिकित्सा ग्रन्थो में मिल जाते है जो रोग निदान में सहायता करते हैं और खास diagnosis की तरफ इशारा करते हैं /
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प्रमेह यानी Diebetic syndromes के बारे मे भी इसी तरह से बहुत विस्तार से रोग की पहचान के लिये माधव निदान ग्रन्थ में विस्तार से बताया गया है / यह ठीक उसी तरह की वही observation की प्रक्रिया के results की तरह है जैसा कि evidence based phenomenon के बारे मे बताया जाता है / प्रमेह के बारे मे आयुर्वेद के चिन्तकों नें बहुत विश्लेषण के साथ प्रमेह के प्रकार और उनकी आयुर्वेद के दोष धातु के निदान को दृष्टि गत रखते हुये जिस प्रकार से वर्णन किया है , यह सब उनके प्रयोगात्मक ग्यान को उजागर करता है /
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प्रमेह यानी मधुमेह के रोग निदान के पश्चात जब रोग निर्धारण पक्का हो जाता है तो आयुर्वेद की चिकित्सा और तदनुसार पथ्य परहेज बताने और रोगी द्वारा पालन करने से Diabetes का रोग अवश्य ठीक होता है /
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हमारे रिसर्च केन्द्र में Diebetes के रोगियों का इलाज ETG AyurvedaScan आधारित रिपोर्ट द्वारा सफलता पूर्वक किया जाता है और लगातार किया जा रहा है / यहां Diebetes पर की गयी शोध के परिणामो को जब प्रकाशित किया गया तो चिकित्सक समाज में इस तरह की फाइन्डिन्ग्स को लेकर बहुत आलोचना की गयी और इस तरह की की गयी शोध की खिल्ली उड़ाई गयी /

KPCARC में की गयी शोध में निम्न मुख्य बातें बतायी गयी है , जो डायबिटीज के रोगियों में पायीं गयी ;
१- शोध मे बताया गया कि ” डायबिटीज” की बीमारी पैदा करने के लिये पैन्क्रियाज ही अकेले जिम्मेदार नही है /
२- शरीर के अन्य Organs, Diebetes पैदा करने के लिये भी जिम्मेदार है /
३- शोध मे बताया गया कि LIVER anomalies के कारण से भी Diebetes पैदा होती है /
४- शोध मे यह बताया गया कि बड़ी आन्त और छोटी आन्त की pathophysiology के कारण से भी डायबिटीज पैदा होती है /
५- शोध में बताया गया कि आयुर्वेद के मूल सिध्धान्त यथा त्रिदोष भेद के दो भेद पाचक पित्त और रन्जक पित्त की गड़्बड़ी से , जो दो अन्गो से मिलकर बने है यथा chole-pancreatic और Hepato -spleeno combination के रुप मे होते है और इन दोनों अन्गों की pathophysiology के कारण डायबिटीज पैदा होती है /
6- अन्य दूसरे कारणॊ का उल्लेख भी किया गया था /

डायबिटीज के बारे में केपीकार्क KPCARC KANPUR, INDIA द्वारा किये गये इस तरह के शोध कार्य पर तब सत्यता की मोहर लग गयी जब जापान के एक विश्वविद्यालय द्वारा यह रिसर्च परिणाम निकाले गये कि “डायबिटीज रोग के पैदा होने के लिये अकेले पैन्क्रियाज जिम्मेदार नही है , बल्कि काफी हद तक LIVER की प्रक्रिया भी डायबिटीज को पैदा करने के लिये जिम्मेदार होती है ” /

इसके कुछ समय बाद आस्ट्रेलिया के चिकित्सा वैग्यानिकों द्वारा किये गये शोध अध्ध्य्यन से निश्कर्ष निकाला गया कि डायबिटीज का रोग “बड़ी आन्त” की patho-physiology ्से भी पैदा होता है /

कई माह बाद ब्रिटिश चिकित्सा वैग्यानिकों ने शोध अध्ध्य्यन में बताया कि “छोटी आन्त” की patho-physiology से डायबिटीज रोग होता है /

हमे खुशी इस बात की हुयी कि हमारे द्वारा निकाले गये निष्कर्ष पर और विदेशी वैग्यानिकों द्वारा निकाले गये निष्कर्ष बिल्कुल सही निकले / अगर हम इस तरह के शोध कार्य अपने स्तर से करते तो हमें करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ते, जो हमारी हैसियत के बाहर की बात थी /

आयुर्वेद के ग्रन्थों में डायबिटीज की चिकित्सा के लिये हरबल फार्मूले दिये गये है , जो हजारों साल से उपयोग किये जा रहे है / आयुर्वेद का मशहूर ग्रन्थ “भैषज्य रत्नावली ” [AYURVEDIC THERAPEUTIC GEMS] मे ऐसे हजरों योग यानी औषधि के फार्मूले दिये गये है जिनको अपनाकर Diebeties की बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता है/
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डायबिटीज को आयुर्वेद में प्रमेह कहते है / आयुर्वेद ने प्रमेह की पहचान और उसके specific charecteristics को पहचान करके आयुर्वेद के सिध्धन्तों के आधार पर वर्गीकरण किया है और तदनुसार उसी वर्गीकरण के हिसाब से प्रमेह की बीमारी के लिये चिकित्सा व्यवस्था का निर्धारण किया है /
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ऐसे बहुत से आयुर्वेद के शास्त्रीय ग्रन्थ है जिनमे प्रमेह की चिकित्सा का बहुत सटीक और अचूक और कभी भी न फेल होने वाला और हमेशा उपयोग में आरोग्यकारी फल देने वाला विस्तार से वर्णन दिया ग्या है जिसे अपना कर Diebetis जैसी बीमारी पर जड़ मूल से काबू पाया जा सकता है /
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आयुर्वेद के चिकित्सा ग्रन्थों मे विस्तार से दिये गये management तथा जीवन शैली तथा आयुर्वेदिक औषधियों के उपयोग से सभी स्तर और सभी तरह की डायबिटीज के आरोग्य के बारे मे रोगियों को निर्देश दिये गये है जिन्हे अपनाकर कोई भी दायबिटिज का रोगी अपने को रोग मुक्त कर सकता है /

Testing of Distilled Water and Chlorinated Tap Water and Nimbadi Churna of Ayurveda ; Test are done by Ayurveda-Ayush Multi-purpose Testing Meter


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amt03The aim and objective of the test of the mentioned subjects are done for the primary evaluation of their hidden properties of nourishing and curing qualities and to establish the specific individual charecteristics of the items in view of Ayurveda Medical system.

Normal Urine parameters are taken for the comparison, but the original parameters of the individual items refelects some thing else and differs, and is not seems actual.

All the three test differs in their qualities.

De-ionised water shows Vata qualities in High, which could be due to its distillation. Sapta Dhatu Ras is Low, that could be assumed that Distill water is not for the use of general intake or for the drinking purposes. Rakta is showing high, which is might interpret that de-ionised water is useful in Injections, which is given by Intra Muscular or Intravenous root.

So is of the Chlorinated water, which is supplied by the Municipal corporation and is used in our daily tasks.

Nimbadi Churna parameters came high level in Rakta, kapha,Ras and Med, which seems to be very near to the use of this churna in the complaints mostly mentioned.

The test on the other remedies and food articles are going on and the results will be given accordingly. Test are done for the purpose of data collection and data evaluation. Opinion and comments given here, should not be taken final and should be understand at experimental level.

Homoeopathy Whole body scanning now available at our research center ; E.H.G. HomoeopathyScan in report forms, with Human body systemwise evaluation and Do and don’ts and Repertorial analysis etc


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Last Page of the EHG HomoeopathyScan Report

Electro Homoeo Graphy ; EHG HomoeopathyScan examination is now available commercially at our research center.

The report is consists of 12 pages , which includes the diagnosis and intesity of the presence of Homoeopathic principles and disease presence.

A repertorial analysis is also provided with the suggestive medicine and potency of the remedy.

A systemwise human body evaluation is provided to help the homoeopathic physician, which part is affected and in how much intensity.

Besides this patient’s condition measurement are provided like Blood pressure, Spo2, Pulse, temperature and many more physical, Blood and Urine etc. examinations including Ayush Heamo Meter and Ayush Universal Analyser meter results to confirm and establish the correct diagnosis of disorders and disease conditions for confirmation of correct choice of remedy in most and hi-tek scientific way.

EHG Homoeopathy Scan is prooved itself a new tool for the Homoeopathic evidence based practice, which is a mechanical system and a foolproof device for Homoeopaths to practice Homoeopathy in most scientific way.