K.P.C.A.R.C. and Dr D.B.Bajpai ties with BRIDGES HEALTHCARE FEDERATION, INDIA ; AGREES TO PROVIDE 30 % DISCOUNTS ON ALL AYURVEDA AND HOMOEOPATHIC AND OTHERS EXAMINATION AND CHECK-UPS

2014 , this year we have ties with BRIDGES HEALTH-CARE FEDERATION , INDIA FOR PROVIDING 30 % DISCOUNTS ON ALL EXAMINATION DONE AT our Research Center in AYUREVEDA & HOMOEOPATHIC MEDICAL SYSTEMS to their CARD HOLDERS AND MEMBERS.

ANY PERSON , who is desirous for our service, should have a CARD HOLDER of Bridges Health-care Federation.

The following services will be given 30 % discounts for the BHF Card Holders.

1- ETG AyurvedaScan examination
2- EHG HomoeopathyScan examination
3- Ayurveda Thermal Scanning
4- Ayurveda Blood examination
5- Ayurveda Urine Examination
6- Homoeopathy Blood examination
7- Ayurveda Consultation
8- Speciality AYURVEDA Remedies
9- Speciality Homoeopathic Remedies
10- General check-ups
11- Homoeopathic Consultation

Free Ayurvedic and / or Homoeopathic remedies Prescription will be given to the BHF Card Holder patient, who will opt total package.

Benefit holders should approach to BRIDGES HEALTHCARE FEDERATION, INDIA.

LEUCODERMA / VITILIGO / SAFED DAAG ; CURE OF A FEMALE CASE

A lady aged 45 years have been cured from LEUCODERMA / WHITE SPOTS/ SAFED DAAG by AYURVEDIC TREATMENT based on ETG AyurvedaScan findings and other innovative examination procedures like Ayurveda Blood Examination and Ayurveda Urine Examination and Ayurveda Thermal Scanning invented by our research center at KANPUR, UP, INDIA.

Photographic evidence shows the progress of cure, shooted time to time according to the need , here is shooted phorographs of begginning and end of the cure process.
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The above and many other photographs are taken time to time for evidencing the process of cure by Ayurvedic medications and management accordingly mentioned in Ayurvedic classics.
She was having white spots almost upper and lower extremeties, corners of lips, below nose and some other sites of body parts.

Below photograph is taken recently, which is showing the complete cure of the LEUCODERMA / WHITE SPOTs PROBLEMS, which she have yester years, now is totally cured by AYURVEDA treatment.
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LATEST Technology of Ayurveda ETG AyurvedaScan bases treatment always fruitful and result oriented in LEUCODERMA DISORDERS.

डायबिटीज ; रक्त शर्करा ; खून में व्याप्त सूगर ; ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित इलाज ; Diebeties ; Blood Sugar ; Glycosuria ; E.T.G. AyurvedaScan based treatment

विश्व डायबिटीज दिवस पर experts डाक्टर्स के विचार पढने और समझने के लिये मिले / बहुत कुछ अखबारों में भी छपा और इस बारे मे जागरुकता जाहिर करने के उद्देश्य से उत्साहित लोगों ने रैलियां भी निकाली और लोगों को डायबिटीज से कैसे बचा जाय , यह सम्झाने के साथ साथ कुछ ऐसे भी उपदेश देने से नही भूले जो हरेक के लिये हितकारी साबित हों /

लेकिन इसके ठीक उलट जहां विद्वान डाक्टर अपने ग्यान से देश के आम नागरिक को डायबिटीज के बारे मे ठीक ठीक और सही सही बात बताने में पीछे नही है वहीं बहुत से ऐसे चिकित्सक हैं जो डायबिटीज हो या न हो अथवा नही भी होती है तो भी रोगी को या व्यक्ति को इस तरह से मानसिक रूप से घबड़्वा देते है या डरा देते हैं जैसे उनको डायबिटीज न हो गयी हो कुछ ही सेकन्ड में प्राण लेवा बीमारी हो गयी हो /

ऐसे बहुत बड़ी सन्ख्या में मरीज मिले हैं जिनको डायबिटीज नही थी लेकिन उनको बता दिया गया कि उनको डायबिटीज है और उनको INSULIN भी लगनी शुरू कर दी गयी जिससे मरीज की हालत मरणासन्न हो जाती है / अब ऐसे चिकित्सक बन्धुओं को क्या कहा जाय , जो मरीजों के साथ इस तरह का व्यवहार करते हैं ?

कई मरीज मिले जिनको डाक्टरों द्वारा गलत जानकारी दी गयी / उनको भोजन करने के बाद PP Sugar के बारे मे बताया गया कि २०० मिलीग्राम सूगर लेवल में २० यूनिट सुबह और १५ यूनिट शाम को INSULIN लगाना चाहिये, इस तरह की सलाह दी गयी / मरीजों ने भी वही किया जो डाकटर ने बताया, जब हालत खराब हुयी तो नर्सिन्ग होम में भरती करा दिया / फिर जो हुआ वह सभी जानते हैं /

इस तरह की गलत सलाह से बहुत से रोगी गम्भीर बीमारियों के शिकार हो चुके हैं /
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दुनियां मे सबसे अधिक डाक्टरों के बीच में Practice of Medicine की दो किताबें प्रचिलित है, जिन्हें डाक्टरी की सर्वोच्च डिग्री के लिये पढना जरूरी होता है / यह दो किताबे हैं ;
१- Harrison’s INTERNAL MEDICINE और दूसरी
२- TEXT BOOK OF MEDICINE by Bee & Derm
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इन पुस्तकों की सबसे खास बात यह है कि जिस बीमारी के बारे में चर्चा की गयी है और उस बीमारी के बारे मे जानकारी दी गयी है , वह chapter या लेख उस बीमारी के बारे में जानकारी रखने वाले दुनियां के सर्वोच्च और सुपर एक्सपर्ट द्वारा लिखी गयी है / बात साफ है जब दुनिया का सबसे बेहतर डाक्टर बीमारी के बारे मे बता रहा है तो इसका मतलब है कि जितनी जानकारी दी जा रही , वह शत प्रतिशत सही होगी / अगर इसके अलावा कोई डाक्टर अपनी बनायी हुयी मनमानी theory बता रहा है तो इसे क्या कहा जायेगा ?
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TEXT BOOK OF MEDICINE के इस पेज में देखिये , जो डायबिटीज के बारे मे बताया गया एक शुरुआती विवरण है / इसे ध्यान से देखिये और पढिये / मै आपका ध्यान इस पेज के HISTORY वाले टाइटिल पर ले जाना चाहता हू /
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ऊपर के पेज मे जरा गौर से देखिये कि डायबिटीज के इतिहास HISTORY में क्या खास बात लिखी गयी है ?

यह हम सभी भारतीयों के लिये गर्व की बात है कि डायबिटीज बीमारी को दुनियां में सबसे पहले जानने और पहचानने के लिये और डायबिटीज बीमारी का सटीक इलाज और तदनुसार पथ्य परहेज , जीवन शैली आदि मैनेज करने और अन्य तरीके ढून्ढ लेने का सबसे पहला प्रयास हम भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सको का रहा है / इस HISTORY मे उल्लेख किया गया है कि चरक और सुश्रुत ने इस बीमारी की पहचान की /

भारतीय चिकित्सा विग्यान आयुर्वेद की रोग निदान ग्यान का मूल साहित्य “माधव निदान” मे ’प्रमेह’ के बारे में बहुत सी जानकरी दी गयी है , जो आजकल के प्राय: सभी चिकित्सा ग्रन्थों में जस का तस मिलती है / मूल रूप से बीमारी के cardinal symptoms या मूल लक्षण आयुर्वेद के चिकित्सा ग्रन्थो में मिल जाते है जो रोग निदान में सहायता करते हैं और खास diagnosis की तरफ इशारा करते हैं /
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प्रमेह यानी Diebetic syndromes के बारे मे भी इसी तरह से बहुत विस्तार से रोग की पहचान के लिये माधव निदान ग्रन्थ में विस्तार से बताया गया है / यह ठीक उसी तरह की वही observation की प्रक्रिया के results की तरह है जैसा कि evidence based phenomenon के बारे मे बताया जाता है / प्रमेह के बारे मे आयुर्वेद के चिन्तकों नें बहुत विश्लेषण के साथ प्रमेह के प्रकार और उनकी आयुर्वेद के दोष धातु के निदान को दृष्टि गत रखते हुये जिस प्रकार से वर्णन किया है , यह सब उनके प्रयोगात्मक ग्यान को उजागर करता है /
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प्रमेह यानी मधुमेह के रोग निदान के पश्चात जब रोग निर्धारण पक्का हो जाता है तो आयुर्वेद की चिकित्सा और तदनुसार पथ्य परहेज बताने और रोगी द्वारा पालन करने से Diabetes का रोग अवश्य ठीक होता है /
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हमारे रिसर्च केन्द्र में Diebetes के रोगियों का इलाज ETG AyurvedaScan आधारित रिपोर्ट द्वारा सफलता पूर्वक किया जाता है और लगातार किया जा रहा है / यहां Diebetes पर की गयी शोध के परिणामो को जब प्रकाशित किया गया तो चिकित्सक समाज में इस तरह की फाइन्डिन्ग्स को लेकर बहुत आलोचना की गयी और इस तरह की की गयी शोध की खिल्ली उड़ाई गयी /

KPCARC में की गयी शोध में निम्न मुख्य बातें बतायी गयी है , जो डायबिटीज के रोगियों में पायीं गयी ;
१- शोध मे बताया गया कि ” डायबिटीज” की बीमारी पैदा करने के लिये पैन्क्रियाज ही अकेले जिम्मेदार नही है /
२- शरीर के अन्य Organs, Diebetes पैदा करने के लिये भी जिम्मेदार है /
३- शोध मे बताया गया कि LIVER anomalies के कारण से भी Diebetes पैदा होती है /
४- शोध मे यह बताया गया कि बड़ी आन्त और छोटी आन्त की pathophysiology के कारण से भी डायबिटीज पैदा होती है /
५- शोध में बताया गया कि आयुर्वेद के मूल सिध्धान्त यथा त्रिदोष भेद के दो भेद पाचक पित्त और रन्जक पित्त की गड़्बड़ी से , जो दो अन्गो से मिलकर बने है यथा chole-pancreatic और Hepato -spleeno combination के रुप मे होते है और इन दोनों अन्गों की pathophysiology के कारण डायबिटीज पैदा होती है /
6- अन्य दूसरे कारणॊ का उल्लेख भी किया गया था /

डायबिटीज के बारे में केपीकार्क KPCARC KANPUR, INDIA द्वारा किये गये इस तरह के शोध कार्य पर तब सत्यता की मोहर लग गयी जब जापान के एक विश्वविद्यालय द्वारा यह रिसर्च परिणाम निकाले गये कि “डायबिटीज रोग के पैदा होने के लिये अकेले पैन्क्रियाज जिम्मेदार नही है , बल्कि काफी हद तक LIVER की प्रक्रिया भी डायबिटीज को पैदा करने के लिये जिम्मेदार होती है ” /

इसके कुछ समय बाद आस्ट्रेलिया के चिकित्सा वैग्यानिकों द्वारा किये गये शोध अध्ध्य्यन से निश्कर्ष निकाला गया कि डायबिटीज का रोग “बड़ी आन्त” की patho-physiology ्से भी पैदा होता है /

कई माह बाद ब्रिटिश चिकित्सा वैग्यानिकों ने शोध अध्ध्य्यन में बताया कि “छोटी आन्त” की patho-physiology से डायबिटीज रोग होता है /

हमे खुशी इस बात की हुयी कि हमारे द्वारा निकाले गये निष्कर्ष पर और विदेशी वैग्यानिकों द्वारा निकाले गये निष्कर्ष बिल्कुल सही निकले / अगर हम इस तरह के शोध कार्य अपने स्तर से करते तो हमें करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ते, जो हमारी हैसियत के बाहर की बात थी /

आयुर्वेद के ग्रन्थों में डायबिटीज की चिकित्सा के लिये हरबल फार्मूले दिये गये है , जो हजारों साल से उपयोग किये जा रहे है / आयुर्वेद का मशहूर ग्रन्थ “भैषज्य रत्नावली ” [AYURVEDIC THERAPEUTIC GEMS] मे ऐसे हजरों योग यानी औषधि के फार्मूले दिये गये है जिनको अपनाकर Diebeties की बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता है/
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डायबिटीज को आयुर्वेद में प्रमेह कहते है / आयुर्वेद ने प्रमेह की पहचान और उसके specific charecteristics को पहचान करके आयुर्वेद के सिध्धन्तों के आधार पर वर्गीकरण किया है और तदनुसार उसी वर्गीकरण के हिसाब से प्रमेह की बीमारी के लिये चिकित्सा व्यवस्था का निर्धारण किया है /
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ऐसे बहुत से आयुर्वेद के शास्त्रीय ग्रन्थ है जिनमे प्रमेह की चिकित्सा का बहुत सटीक और अचूक और कभी भी न फेल होने वाला और हमेशा उपयोग में आरोग्यकारी फल देने वाला विस्तार से वर्णन दिया ग्या है जिसे अपना कर Diebetis जैसी बीमारी पर जड़ मूल से काबू पाया जा सकता है /
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आयुर्वेद के चिकित्सा ग्रन्थों मे विस्तार से दिये गये management तथा जीवन शैली तथा आयुर्वेदिक औषधियों के उपयोग से सभी स्तर और सभी तरह की डायबिटीज के आरोग्य के बारे मे रोगियों को निर्देश दिये गये है जिन्हे अपनाकर कोई भी दायबिटिज का रोगी अपने को रोग मुक्त कर सकता है /

Stellaria media ; Homoeopathic remedy for Rheumatism and neuro-musculo-skeletal related joints problems

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A vey effective Homoeopathic remedies for all nature of Rheumatism and joints related disease conditions belongings to any age and race.

STELLERIA MEDIA , which is known as “Cheekweed”, is used an external application for rheumatism as well as uses internally in lower decimal potencies through oral route.

The most indicative symdroms are stasis and congestion and sluggishness of all functions, which are mostaly aggravates in Morning and just after waking or just leaving the bed.

The main features of the remedy are mostly related to RHEUMATISM of all nature, given below in syndromes;

1- Chronic Rheumatism ;
Charecteristics of pain is sharp, shifting, darting pain with the stiffness of the joints. The affected parts are very sore to touch and very painful on movement

2- Gout disorder with enlarged and inflamed finger joints

3- Psoriasis

4- Cervical spiondylitis

5- Liver conditions engorged, swollen, stitching pain, sensitive to pressure. This is an invaluable remedy for Cirrhosis of Lever and Cancer of Liver of First and second stages.

Conclusively the medicine is useful in all musculo skeletal joints and muscles problems and Liver disorders prominently. There is no side effects of any kinds and totally safe.

If taken and used in mother tincture form , the remedy acts very fast and relieves problems sometimes instantly specially painful conditions.

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Tribhuvan Kirti Ras ; an Ayurvedic classical remedy for Winter Season

Every year winter season comes and while its commencement, it brings many health problems with the persons almost every one of all ages. Those who are living in those areas, where almost all months of a year, winter or winter like atmosphere persists, they also feel problems from more cold.

In those countries, where atmosphere of winter is persists around the year, in this region the skin of the person becomes more harder than comparatively to person of the tropical region. The persons, who are living in a cold atmosphere, their skin quality is somehow changed comparatively to those who are living in tropical regions and where cold or winter persists only few days or few months.

Case studies with the help of ETG AyurvedaScan system reveals that traces recorded from European countries and Tropical regions patients are differs from elevation , which is due to hard and soft skin of the patient belongs to specific regions. Where cold season is very prominent the skin of the person are thick and deposition of fat layer in under skin persists.

Although the diagnosis of disorders are same, ayurvedic fundamentals evaluations are same and no differences seen in between the results except the hights and longitudinal appearence of traces, which is due to skin of the subjects undergone for the test.

However, this dose not matter. Here TRIBHUVAN KIRTI RAS is beneficial in the following ailing conditions;

1- Cures exposure of cold either from cold of winter or wetting in rain
2- Used in almost all kinds of FEVER of any origin, whatever they may be.
3- Lower down HIGH FEVER just like PARACETAMOL do in feverish conditions.
4- suppressed sweat comes out after use of this remedy
5-= Very fast acts in Just appeared fever
6- acts fast in Phlegm-cough-Fever conditions
7- Useful in Pneumonia and Pneumonia like syndromes
8- Influenza of any origin and anywhere
9- Useful in small pox and measles and like syndromes

Doses; One /two tablets should be taken four hourly with tea or warm water or Ginger Tulasi tea

Ayurveda have many remedies for winter ailing conditions, TRIBHUVAN KIRTI RAS is one of them. Those who desire they should use this safe remedy.

EPILEPSY : FITS : totally CURABLE by AYURVEDA Remedies based on the findings of ETG AyurvedaScan Report

The only and existing commercially available facility for scanning and examining whole body according to the principals of AYURVEDA, a well known SCANNING system called ETG AyurvedaScan, have great priveledge to cure the hazarduous disease condition EPILEPSY or FITS, in accordance based on the findings and report of EPILEPSY or CONVULSIVE FITS patient , is able to provide total cure and root out the condition and patient problem in toto.

EPILEPSY and FITS conditions are seems that they are incurable and when once start medications , the medications should be taken whole life, as it is understood today by the Modern Western medicine takers. In fact , it is a mockery among the physicians that they are not well aware of the other systems of practicing medicine, which have a plentiful solutions of these ? incurable problems and that is to be understood the incurable conditions.

The basic problem with the EPILEPSY patient , is related with the Temporal region and parietal region of the Brain parts physiology, sometimes FRONTAL Lobe of Brain could be involved in the production of convulsions. Tremors and twitching of muscles. The excited stages of these Brain  regions  produces convulsions. The reason of excitation of nerve cells of Brain or the areas mentioned , are not well established, but it is presumed that certain factors are responsible for producing the brain anomalies.

Some facts  came in our observation that  over reading, over studying, over mental work, irregular life style, watching in night, irregular sleeps, menstrual anomalies, uterus excitation, hormonal problems , suppressive anomalies, use of  Anti-biotics, anti-allergic drugs , narcotic drugs habits etc etc causes the EPILEPSY or FITS problems.

In Allopathic system of medicine hypnotic and tranquilizers and  anti-convulsive drugs are used to control the EPILEPSY episodes for regular use till life time. Some times after use of these medicine convulsions appears and not controlled by the proper settled doses earlier, then much stronger medications are used to control. The series is going on till the spawn of life.

Ayurveda’s New revolutionary technology “ETG AyurvedaScan” have privilege to treat EPILEPSY by root. A 100 page reports provides the detailed examination data  of the patient, which clues the path of the triggering convulsive effects through systems of body either mental to physical or physical to mental, that causes the exciting of brain faculties earlier mentioned.

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मानसिक रोगी का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन का ट्रेस रिकार्ड ; Psychosomatic Disorders of a patient , studies of ETG AyurvedaScan Traces

लगभग ३०० किलोमीटर दूर से आये एक पुरूष रोगी का नीचे दिया गया ट्रेस रिकार्ड है, जो दिनान्क १८ अक्टूबर २०११ को अन्कित किया गया / मरीज ने अनुरोध किया कि उसे अपने घर वापस जाने के लिये कानपुर सेन्ट्रल स्टेशन से चार पान्च घन्टे बाद रेल गाड़ी मिलेगी , इसलिये वह चाहता है कि उसकी रिपोर्ट बनाकर दवा आदि की जैसी व्यवस्था हो सके , सीमित समय के अन्दर करके दे तो बहुत अच्छा होगा, ताकि वह वापसी की गाड़ी पकड़ कर अपने घर वापस जा सके /
मैने उसका अनुरोध मान लिया और कहा कि अर्जेन्ट रिपोर्ट बनवाने में उसे रूपये ४०० अतिरिक्त और अधिक लग जायेन्गे और लगभग तीन घन्टे के अन्दर रिपोर्ट मिल जायेगी /

मैने रोगी की यह बात सुनकर कहा कि पहले आप अपना तुरन्त ETG AyurvedaScan करायें और फिर बाद में जब रिपोर्ट बन जायेगी तब देखून्गा कि क्या क्या आपके शरीर के अन्दर बीमारियां निकली हैं / मैने इस रोगी का पहले ई०टी०जी० रिकार्ड किया फिर उसके बाद जितनी जल्दी हो सका step by step सारे procedure निपटा करके लगभग ३ घन्टे बाद उसकी रिपोर्ट बन पायी /

इस व्यक्ति के निम्न रोगों का निदान ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के अध्ध्यन के पश्चात निर्धारित हुआ/

१- रोगी को लेटने [on lying position] की स्तिथि में High Blood Pressure की tendency है जिसके कारण उसे रात में नीन्द न आने की तकलीफ है /
२- रोगी का रक्त का प्रवाह सिर की ओर अधिक है , ऐसा ट्रेस रिकार्ड ‘ई’ मे देखने में आया है / जब भी इस तरह की पाजिटिव ट्रेसेस होती है , यह मानसिक रोग यानी psychological disorders दर्शाती हैं /
३- ३- ‘ई’, ‘एफ’, ‘जी’ ट्रेसेस रिकार्ड देखने में पाजिटिव और निगेटिव डिफ्लेक्सन एक जैसे नेचर के हैं / ‘जी’ ट्रेस के ट्रेस अन्र्तराल को देखने से पता चलता है कि इस व्यक्ति को “डायबिटीज” की बीमारी है / लगभग २८० पीका की नाप से यह स्थापित हुआ कि, जिस समय इस व्यक्ति का ट्रेस रिकार्ड किया गया था, उस समय इस व्यक्ति के रक्त में रक्त शर्करा को इसी सीमा में उपास्तिथि होना चाहिये / इसी समय तुरन्त ही Glucometer से जान्च करने में पता चला कि व्यक्ति की रक्त शर्करा Blood sugar level 268 mg per dilution उपस्तिथि है /

४- इसे हाई ब्लड प्रेशर की तकलीफ है, ट्रेस ‘a’ को देखने से पता चला कि रोगी को ब्लड प्रेशर की बीमारी है /

इसे अन्य बीमारियां भी निकली, जो उसकी रिपोर्ट बनने के बाद बतायी गयी /

रोगी ने बाद मे सारी बात बतायी कि उसकी पत्नी पागल है और उसका पारिवारिक जीवन सुखी नहीं है / उसे खाना भी हॊटलों में जाकर खाना पड़ता है /

मैने उसे प्रेस्क्रिप्सन लिख कर आयुर्वेदिक दवाये खाने के लिये कहा और उससे कहा कि उसे शारीरिक बीमारी कम है और मानसिक अधिक / इसलिये मानसिक दबाव जितना ही कम से कम होगा , उसकी तकलीफ उतनी ही तेजी से ठीक होगी /

Similarly another one case of Psychosomatic disorders case came for the treatment on 18th October 2011. His ETG AyurvedaScan Trace rcords are  having  similar pattern as to earlier. Although he have some other PSYCHOLOGICAL PROBLEMS , which tends him sick, below is his trace records  to evaluate in view of AYURVEDIC TREATMENT.

ETG AyurvedaScan , which examines the whole body for purpose of AYURVEDIC TREATMENT and management , have major diagnostic value for physical ailments detection.

दान्तों तथा मसूढों और मुख के अन्दर के तमाम विकारों के लिये आयुर्वेद का दन्त मन्जन ; Ayurvedic Tooth Powder for Dental and Oral Problems

आयुर्वेद पूर्ण चिकित्सा विग्यान है / आदि काल से हमारे चिकित्सा पूर्वजों ने समाज को स्वस्थय बनाये रखने के लिये बहुत से नुस्खे लिपिबध्ध करके दिये है , जो आज भी उसी तरह से कारगर और प्रभावशाली है, जैसे उस समय थे /

दान्तों के रोगों के उपचार के लिये आयुर्वेद के शास्त्रीय ग्रन्थों में प्राय:
सभी आचार्यों ने जितना भी अनुभव और ग्यान प्राप्त किया था , उसका वर्णन बहुत सूच्छमता के साथ किया है /

चिकित्सा चन्द्रोदय़ चिकित्सा ग्रन्थ में दान्त के रोगों के लिये एक नुस्खा दिया गया गया है, जो दान्त की बहुत सी बीमारियों में बहुत प्रभाव शाली साबित हुआ है / यह बहुत सरल और सफल योग है /

योग मे निम्न काष्ठौशधियों का मिश्रण है /

मिश्रन; हरड़, बहेडा, आमला, सोन्ठ, काली मिर्च, छोटी पीपल, शोधित तुथ्थ, सेन्धा नमक, रूचक नमक, विड नमक, पतन्ग, माजूफल , ये सब द्रव्य बराबर बराबर मात्रा मे लेना चाहिये / इन सभी द्रव्यों को महीन कूट पीसकर पाउडर जैसा बना लेना चाहिये और बाद में मैदा छानने वाली चलनी से छान लेना चाहिये और किसी एयर टाइट डिब्बे में बन्द करके रख लेना चाहिए /

उपयोग के लिये किसी छोटे प्लास्टिक के डिब्बे या कान्च की शीशी में इस चूरन को रख लेना चाहिये /

एक ग्राम चुर्ण को लेकर दान्तों में मलना चाहिये / जो ब्रश से इस मन्जन को लेकर उपयोग करना चाहे वे ब्रश के साथ इसे दान्तों में मल सकते है / जिन्हें दान्तों मे दर्द हो, मसूढों मे दर्द हो, जिनके दान्त सेन्सिटिव हो गये हों, ठन्डा या गरम पानी लगता हो, या हवा या छूने से दर्द होता हो या दान्तों की अन्य कोई तकलीफ हो , उन सबमे यह दन्त मन्जन असर करक है /

मन्जन करते समय यदि इसमें एक बून्द “नीम का तेल” मिला लें और फिर मन्जन करें तो मुख रोग के लिये यह एक उत्कृष्ठ औषधि हो जाती है /

जिनके दान्त कमजोर हो गये हैं , मसूढॊ के विकर हों, पायरिया से पीडित हों , दान्त हिलने लगे हों और जड़ से कमजोर हो रहे हों, उनको यह मन्जन अवश्य उपयोग में लेना चाहिये /

नीम के तेल को इस मन्जन में मिला लेने से यह मन्जन दान्तों के सभी प्रकार के infection को दूर कर देता है, दान्तों में लगे हुये कीड़ों को यह नष्ट कर देता है /

इस मन्जन को ब्रश से न लगाकर यदि उन्गलियों से मन्जन करते है तो अधिक फायदा करता है और शीघ्र लाभकारी है /

सफेद दाग बढने और न ठीक होने का कारण ; जीवन शैली में बदलाव , प्रतिकूल खान-पान और कुछ Allopathic दवायें ; LEUCODERMA & Life-style and some Remedies

बहुत से आयुर्वेदिक वैद्य और आयुर्वेदिक चिकित्सक अक्सर पूछते रहते हैं कि सफ़ेद दाग Leucoderma के रोगियों का रोग अचानक ही बहुत तेजी से बढने लगता है , जबकि वे दवा दे रहे होते है और अच्छे से अच्छा इलाज कर रहे होते हैं , उनके रोगी ठीक भी हो रहे होते है फिर ऐसा क्यॊं होता है कि सफेद दाग ठीक होने के बजाय बढते चले जाते है? इस तरह की रोग-बढने से रोकने के सारे उपाय कम नहीं होते, जिससे मरीज और चिकित्सक दोनो के सामने बहुत विचित्र स्तिथि पैदा हो जाती है ?

यद्यपि यह स्तिथि मेरे सामने पिछले २० सालों से कभी नहीं आयी / मैने इस सवाल पर और ऐसी स्तिथि के लिये जिम्मेदार कारणो का पता करने का प्रयास किया है /

पहला कारण मेरी समझ में यह आया है कि लियूकोडर्मा के मरीज स्वस्थय वृत्त के नियमों का पालन नहीं करते है, जिससे उनको पाचन सन्स्थान से सम्बन्धित कार्य- विकृति बनी रहती है / ऐसे रोगी अपचन, एसीडिटी, Irritable Bowel syndromes, Inflammatroy condition of bowels, constipation, irregular bowels आदि आदि से ग्रसित होते हैं / Digestive system से सम्बन्धित यह तकलीफें दूषित खान पान से पैदा होती हैं / कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे है जो सफेद दाग बढाने में सबसे आगे है / जैसे चाऊमिन, सिरका या Vinegar या सिरका युक्त खाद्य पदार्थ, non-veg foods, अत्यधिक मसाला और चर्बी युक्त खाद्य पदार्थ जैसे चाट, समोसा आदि आदि / इन और इन जैसे खाद्य पदार्थ खाने से सफेद दाग बढते है / ऐसे खाद्य पदार्थ Digestive system के लिये बहुत सेन्सिटिव होते है और यह एक तरह से sudden painless allergical reaction like action पैदा करते है जिससे त्वचा की melenine अचानक घटकर सफेद दाग को और अधिक बढाने का काम करती है /

बहुत से रोगियों के रोग-इतिहास chronological case-history को देखने और समझने के बाद यह बात दृस्टिगत हुयी हैं कि जीवन शैली के कारण और दूषित खानपान के कारण सफ़ेत दाग अधिक तेजी से विकसित हुये और उनके रोकने के सभी प्रयास फ़ेल हो गये / किसी किसी रोगी ने बताया कि उनके सफ़ेद दाग हर मिनट में बढते चले गये / किसी ने बताया कि उनके सफ़ेद दाग एक दो दिन में ही इतने बढ गये जो उनकी उम्मीद से परे थे / ऐसा तभी होता है जब शरीर का सिस्टम बहुत सम्वेदन शील हो जाये और अक तरफा कार्य करने लगे /

कई रोगियों के रोग इतिहास को देखने के बाद यह बात भी पता चली कि एलोपैथिक चिकित्सा विग्यान की कुछ दवायें सेवन करने के बाद शरीर में कुछ ऐसे परिवर्तन हुये , जिनके कारण सफ़ेत दाग अधिक तेजी से विकसित हुये और दागो को बढने से रोकने के सभी प्रयास फ़ेल हो गये /

इसी कारण से रोगियों कॊ हिदायत दी जाती है कि उन्हे चाहे कैसे भी acute problem हों या sudden ailments हो जायें , वे एलोपैथी की कुछ दवायें न लें तो बेहतर होगा / देखा गया है कि एलोपैथी की दवा खाने के बाद सफेद दाग किसी किसी रोगी के बहुत बढ जाते हैं फिर किसी तरह से ठीक नहीं होते है या ठीक होने में बहुत ज्यादा समय लग जाता है / इसलिये यदि तकलीफ हो तो फिर आयुर्वेदिक दवायें लें या प्राकृतिक उपचार लेना चाहिये /

Leucoderma के इलाज में बहुत सावधानी बरतनी होती है, यह बहुत sensitive disease condition है, इसलिये पथ्य परहेज , जीवन शैली में बदलाव, खान पान में परहेज और दूसरी हिदायतो को यदि follow किया जाये तो आरोग्य शीघ्र प्राप्त होता है /

हृदय रोगों के मरीजों के लिये एक आयुर्वेद तथा दूसरा होम्योपैथी का दिल को मजबूत करने वाला टानिक

दिल की बीमारी के मरीज बनना अच्छी बात नहीं है / आदि काल से हृदय रोग होते रहे है, आज के महौल में हो रहे है और आगे भी होते रहेन्गे / यह सिल्सिला चलता रहेगा /

मानसिक तनाव इस बीमारी का एक कारण सभी चिकित्सक बताते है / “तनाव” तो हमेशा और हर युग और हर समय में रहा है / ऐसा कौन सा समय सुरक्षित कहा जा सकता है जब मनुष्य के व्यक्तिगत जीवन और सामाजिक परिवेश में तनाव न रहा हो / चाहे वह राजा महाराजाओं का समय रहा हो या कोई अन्य समह और काल / मानसिक तनाव के बहुत से कारण होते है / किसी एक कारण को फिक्स नहीं किया जा सकता कि तनाव का यही एक मुख्य कारण है /

यह कहा जाता है कि जीवन शैली के बदलाव के कारण ह्रूदय रोग पनपते है, यह आज की बात नहीं है / प्राचीन काल में राज दरबारों में, धनी मानी लोगों के यहां, वैवाहिक तथा अन्य समारोहों में शाम को सजी हुयी महफिलें देर रात तक चलती रहती थीं और उसी अनुसार लोगों की दिन चर्या होती थी / यही सिलसिला आज भी जस का तस चल रहा है लेकिन उनका स्वरूप बदल गया है /

Cut section of HEART with their identity

Cut section of HEART with their identity

यह सही है कि हृदय रोगों के निदान ग्यान में Diagnosis के लिये आज हमारे पास् बहुत से मशीनी साधन उपलब्ध है जो पहले नहीं थे / लेकिन इतना सब होते हुये हृदय रोग जस के तस है बल्कि उनकी सन्ख्या बढती चली जा रही है / यह विचारणीय विषय है कि इसका क्या कारण हो सकता है ?

अधिकतर हृदय रोग उन लोगों को होने की सम्भावना रहती है, जिनके परिवार में पिता को यह रोग होता है / यह genetic tendency होती है, इसलिये heart disorders होने की सम्भावना सबसे अधिक इसी group को होती है / लेकिन इसमें अपवाद है, ऐसा सभी के साथ नही होता, अगर mother side से arthritis या skin disorders जैसी कोई metabolic disorders की problem हो जाये तो फिर ह्रूदय रोग की सम्भावना जब तक अनुकूल परिस्तिथियां न बने तब तक नहीं होता है /

एक और कारण हृदय रोग का है जिसे high blood pressure अथवा low blood pressure कहते हैं / अकेले ब्लड प्रेशर की तकलीफ हो तो यह warning signal समझना चाहिये , लेकिन यदि यह Diabeties के साथ हो जाय तो और भी खतरनाक है / डायबेटीज से ब्लड प्रेसर control करने में दिक्कत आती है / हलान्कि यह भी जरूरी नहीं कि जिसे Blood pressure हो उसे डायबेटीज जरूर होगी या जिसे डायबेटीज हो उसे ब्लड प्रेसर जरूर होगा / ऐसा होता नही है और जहां तक मेरा अनुभव है कि यह ratio केवल 40 प्रतिशत [अनुमानित] रोगियों में देखने में आता है / इसलिये ऐसे रोगियों को हृदय रोग से बचने के लिये विशेष ध्यान देना चाहिये /

आयुर्वेद मे बहुत सी औषधियां हृदय रोग के उपचार के लिये उपस्तिथि हैं उनका उप्योग किसी सिद्ध हस्त वैद्य की देख रेख में करना चाहिये / आयुर्वेद में “अर्जुन” की छाल [Latin; Terminalia Arjuna] का गोदुग्ध-नीर मिश्रित क्षीर-पाक तथा अन्य औषधीय द्रव्यों के साथ मिलित क्वाथ अथवा काढा सेवन करने से हृदय रोग की सम्भावना से बचत होती है /

इसी प्रकार होम्योपैथी की दवा Crateagus Oxycantha Q के सेवन से हृदय रोग में आश्चर्य जनक फायदा होता है / यह हृदय के लिये टानिक का कार्य करती है /

जिन्हे हृदय रोग हो वे इसे अन्य दवाओं के साथ [ as a supplementary remedy ] ले सकते है / यह safe बनौषधियां है और इनका कोई side effect नही होता है /

अच्छा होगा ऊपर बताई गयी दवा सेवन करने से पहले अपने नजदीक के किसी आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक चिकित्सक से इन औषधियों के बारे मे अधिक जानकारी प्राप्त कर लें /