आयुर्वेद : आयुषमन : AYUSHMEN

ELECTRO-TRIDOSHA-GRAPHY इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी : तकनीक के उदाहरण रिपोर्ट Takanik ke udaharan report

आयुष स्कैन AYUSH Scan

 

21 वीं सदी का आयुष जगत का स्वदेशी वैज्ञानिक आविष्कार

 

इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफ, ई०टी०जी० Electro Tridosha Graph, E.T.G.

 

डा० देश बन्धु बाजपेयी

आविष्कारक : इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफ तकनीक

कुनमुन ई०टी०जी० रिसर्च इन्स्टीट्यूट,

67-70,   भूसाटोली रोड, बर्तन बाज़ार,

कानपुर – २०८००१, उ०प्र०

 

 

भारतीय चिकित्सा विज्ञान , जिसे आयुर्वेद भी कहते हैं, लगभग अनुमानित ५००० पान्च हज़ार वर्ष प्राचीन चिकित्सा विज्ञान है। सम्पूर्ण आयुर्वेद “त्रिदोष सिद्धान्त” , “सप्त धातुयें” , “मल”, “ओज”, “अग्नि”, “प्रकृति” आदि यानी दोष, दूष्य, मल आदि के दर्शन-विज्ञान तथा मौलिक सिद्धान्त पर आधारित और व्यवस्तिथ है । प्रकृति कौन सी है, कैसी है ? त्रिदोषों की शरीर में मौजूदगी का क्या आंकलन है ? क्या स्तर है ? यह ज्ञान करने के लिये अभी तक परम्परा गत तौर तरीकों में केवल नाड़ी परीक्षण ही एक मात्र उपाय है । नाड़ी परीक्षण द्वारा त्रिदोषों के विषय में प्राप्त जानकारी अकेले आयुर्वेद के चिकित्सकों के नाड़ी ज्ञान पर आधारित होता है । इस नारी परीक्षण की प्रक्रिया और नाडी  परीक्षण के परिणामों को केवल मष्तिष्क द्वारा ही अनुभव किया जा सकता है, लेकिन भौतिक रूप से देखा नहीं जा सकता है ।

 

 

चित्र में डा० डी०बी० बाजपेयी ई०टी०जी० मशीन द्वारा रिकार्ड की गयी ट्रेस को दिखाते हुये । इलेक्ट्रो त्रिदोष

ग्राफ तकनीक में [अ] ई०टी०जी० मशीन [ब] ई०टी०जी० साफ्ट्वेयर [स] डेस्क टाप या लैपटांप कम्प्यूटर

[द] प्रिन्टर [य] अन्य जरूरी सामान की आवश्यकता होती है ।

 

 

आयुर्वेद चिकित्सक त्रिदोषों , त्रिदोषों के प्रत्येक के पांच पांच भेद, सप्त धातुयें, त्रिदोषों से प्रभावित सप्त धातुयें, मल, ओज, अग्नि, प्रकृति आदि को मानसिक रूप से स्वयम किस स्तर पर स्वीकार करते हैं अथवा किस प्रकार अपने विवेक का उपयोग करके दोष, दूष्य, मल आदि का निर्धारण करते हैं और इन सब बिन्दुओं को किस प्रकार से  और कैसे व्यक्त किया जायेगा ? यह सब भौतिक रूप में साक्ष्य या सबूत के रूप में सम्भव नहीं है । जैसे कि आजकल वर्तमान में इवीडेंस बेस्ड मेडिसिन Evidence Based Medicine  की बात की जाती है ।  ऊदाहरण के लिये एक्स रे चित्र, सी०टी० स्कैन, एम० आर० आई० स्कैन, ई०सी०जी०, पैथोलाजी इत्यादि तकनीकें रोगों के निदान के लिये साक्ष्य अथवा सबूत के लिये प्रत्यक्षदर्शी हैं ।

 

        

 

ई०टी०जी० मशीन द्वारा रिकार्ड किये गये ट्रेस, आधुनिक चिकित्सा के दृष्टि कोण से रोग निदान,

आयुर्वेद के दृष्टिकोण से रोग निदान और दोष आदि निदान  दर्शाये गये है

 

सम्भवत: ऐसा पहली बार, आयुर्वेद के ५००० वर्षों के इतिहास में,  हुआ है कि इलेक्ट्रो कार्डिओ ग्राफ मशीन [ ई०सी०जी० मशीन]  में कुछ परिवर्तन करके इसकी सहायता लेकर “इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफ ई०टी०जी० ” तकनीक का आविष्कार किया गया है । इस तकनीक के साथ विकसित किये गये साफ्ट वेयर, लैप्टोप कम्प्यूटर और प्रिन्टर की मदद से नाड़ी परीक्षण के समस्त ज्ञान को कागज की पट्टी पर अन्कित करके तथा उसके पश्चात प्राप्त ट्रेस रिकार्ड को evaluate करके  और साफ्ट वेयर की सहायता लेकर नाड़ी परीक्षण का समस्त ज्ञान साक्ष्य और सबूत के रूप में प्रस्तुत करने का सफल प्रयास किया गया है ।

 

 

 

चित्र में  डा० डी० बी० बाजपेयी दाहिनें वात स्थान की ट्रेस रिकार्ड करते हुये

 

ऐसा विश्वास किया जाता है कि इस तकनीक से आयुर्वेद यानी भारतीय चिकित्सा विज्ञान की वैज्ञानिकता सिद्ध होगी, वैज्ञानिक द्रष्टिकोण की उन्नति होगी और आयुर्वेद चिकित्सा, आयुर्वेद दर्शन, मौलिक सिद्धन्त आदि में अनुसन्धान के नये द्वार, अनुसन्धान के नये विषय, नये आयाम और नव वैज्ञानिक द्रष्टिकोण की बृद्धि होगी ।

 

अब इस साधन का सहारा लेकर वर्तमान काल में त्रिदोषों, त्रिदोषों के प्रत्येक के पांच, पांच भेद, सप्त धातुयें और मल यानी दोष , दूष्य, मल का  निर्धारण मानव शरीर में कितनी मात्रा में विद्यमान है और इनमें सामान्य और असामान्य स्तर पर किस प्रकार का है, यह सब कागज पट्टी पर रिकार्ड होकर नेत्रों के सामने साक्ष्य स्वरूप में भौतिक द्रष्टि कोण से ई०टी०जी० तकनीक द्वारा प्रस्तुत किये जा सकते हैं ।

 

 

 

 

 

ई०टी०जी० मशीन के साथ प्रयोग में किये जाने वाले अन्य सामान

 

 

मानव शरीर पर आयुर्वेदिक औषधियों के प्रभाव कैसे होते हैं, कहां कहां इन औषधियॊं के असर होता है , इसका अध्धयन, किसी भी रोगी कि चिकित्सा प्रारम्भ करने से पहले और चिकित्सा पूरी हो चुकने के बाद शरीर में आरोग्य प्राप्त करने कि स्तिथि,  चिकित्सा आरम्भ करने के पहले और चिकित्सा के बीच बीच में आरोग्य प्राप्त की जांच करने हेतु मानीटरिंग, वातादि सात दोषों की स्तिथियां, इन वातादि दोषों के प्रत्येक के  पांच पांच भेद यानी कुल १५ भेद, सात धातुयें, तीन मल यथा पुरीष, मूत्र और स्वेद का “स्टेटस  क्वान्टीफाई” Status Quantify करने के साथ साथ शरीर में व्याप्त बीमारियों के निदान, पन्चकर्म शुरू करने के पहले और पन्चकर्म चिकित्सा समाप्ति के बाद, शरीर को कितना लाभ मिला या हानि हुयी, इस सबका विवरण आंकलन और बेहोश हो चुके मरीज या ऐसे मरीज या रोगी , जो अपनी तकलीफ या दशा बताने की स्तिथी मे न हों,  इस तकनीक द्वारा यह निदान हो जाता है कि रोगी का कौन सा अंग नष्ट हो रहा है या उसे क्या बीमारियां हो गयी हैं ? इस तकनीक द्वारा ऐसे मरीजों की चिकित्सा करने वाले चिकित्सक को एक ऐसी सुविधा मिल जाती है, जिससे ऐसी स्तिथि वाले मरीजों का उपचार हो सके ।

 

अब आयुष चिकित्सा के क्षेत्र में एक ऐसी वैज्ञानिक तकनीक और परीक्षण विधि का आधार है, जिसको लेकर आधुनिक काल की इस उच्च तकनीक के बल पर आयुष चिकित्सा विज्ञान एक नये अनुसन्धान के क्षेत्र में प्रवेश करेगा , जहां आयुर्वेद की विभिन्न शाखाओं में अनुसन्धान करने के लिये असीम और असीम सम्भावनायें हैं तथा भविष्य में आयुर्वेद के लिये अन्गिनित क्षेत्र हैं । जिसे आयुर्वेद के इतिहास में कभी भी अनुसन्धानित नहीं किया गया होगा ।

 

इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी तकनीक को केन्द्रीय आयुर्वेद एवं सिद्ध अनुसन्धान परिषद, आयुष विभाग,

स्वास्थय एवं परिवार कल्याण मन्त्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली द्वारा दिया गया मान्यता पत्र

यह एक ऐसी हाई टेक्नोलाजी है, जो शरीर को पन्द्रह सेक्टरों में बांटकर, इन बंटे हुये प्रत्येक हिस्से का इलेक्ट्रिकल स्कैन करती है, जिससे अध्द्ययन के पश्चात उस हिस्से के सामान्य अथवा असामान्य होने की जानकारी प्राप्त हो जाती है । 

 

सस्ती , सुलभ, प्रत्येक चिकित्सक के दवाखानों में उपलब्ध दोष-निदान-परीक्षण ज्ञान की इस तकनीक “इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी ” द्वारा आयुर्वेद विज्ञान, सर्व सधारण, रुग्ण मानवता, विश्व के सभी मानव और सम्पूर्ण मानव जाति को लाभ एवम प्रतिष्ठा प्राप्त होगी, ऐसा मेरा ई०टी०जी० तकनीक के प्रति विश्वास है ।

 

               

                                                        

इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी तकनीक की परीक्षण रिपोर्ट की प्रतिलिपि । यह परीक्षण फरवरी २००७ में,

केन्द्रीय आयुर्वेद अनुसन्धान संस्थान,  केन्द्रीय आयुर्वेद एवं सिद्ध अनुसन्धान परिषद, आयुष विभाग, स्वास्थय एवं परिवार कल्याण मन्त्रालय, भारत सरकार, पन्जाबी बाग, नई दिल्ली द्वारा निदेशक डा० टी० भिक्षापती तथा असिस्टेंट निदेशक डा० भारती की देखरेख में किया गया था ।

 

 

 

तकनीक की उपयोगिता : 

 

१- यह तकनीक पूरे शरीर का इलेक्ट्रिकल स्कैन Electrical Scan यानी विद्युतीय परिक्षण करती है, अत: यह पता चल जाता है कि मानव शरीर का कौन सा अन्ग रुग्ण है । आयुष चिकित्सकों को रोग निदान के साथ ही मौलिक सिध्धान्तों का भी पता चल जाता है । मरीज की कई पेज की विस्तृत रिपोर्ट होती है, जिस पर आधारित होकर यदि आयुर्वेदिक चिकित्सक शुध्ध आयुर्वेद का सहारा लेकर चिकित्सा कार्य करता है तो कठिन, कष्ट साध्य, असाध्य, जिन्दगी के साथ लग गये रोगों की चिकित्सा करने में अवश्य सफ़लता मिलती है । विस्तॄत रिपोर्ट से चिकित्सक को किसी प्रकार का भटकाव नहीं होता और चिकित्सा का लक्ष्य सामने होता है

 

२-  अक्सर ही देखा गया है कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के परीक्षणों से रोग का निदान नहीं हो पाता है । रोगी रक्त की जांच, एक्स रे, अल्ट्रा साउंड, एम०आर०आई० स्कैन आदि करा लेता है, लेकिन सभी परीक्षण जांच कराने के बाद नार्मल या सामन्य आते है । चिकित्सक निर्णय नहीं कर पाते कि रोगी को क्या बीमारी है ? इस तकनीक से रोगी के शरीर की जान्च करके बीमारियों का सटीक पता लगा सकते हैं ।

 

३- आयुष चिकित्सकों के लिये मानव शरीर में दवाओं के प्रभाव शरीर में किन किन स्थानों में होते हैं , किन दोषों को शान्त करती है, किन किन दोषों पर प्रभावी है, सप्त धातुओं पर कितना असर होता है  और कौन से मल पर कितना असर पड़्ता है, यह सब ज्ञात करने के लिये और उक्त विषयों  पर ई०टी०जी० तकनीक की सहायता लेकर शोध कार्य करने की अनन्त सम्भावनायें  हैं ।

 

४- आजकल विदेशों में आयुर्वेद की भस्म युक्त औषधियों के विरोध में इस बात का प्रचार जोर शोर से हो रहा है कि आयुर्वेदिक भस्म या भस्म युक्त दवायें खाने से गुर्दा, यकृत आदि वाइटल पार्ट्स Vital parts खराब हो जाते हैं और पित्त अथवा गुर्दे की पथरी बनकर , गुर्दा और यकृत बेकार हो जाते हैं । ई०टी०जी० तकनीक से विदेशियों द्वारा किये जा रहे कु-प्रचार की वास्तविकता की जांच सफलता पूर्वक कर सकते हैं । इससे यह भी ज्ञात कर सकते है कि आयुर्वेदिक भस्में शरीर में कहां कहां असर डालती है । इसका परीक्षण और शोध कार्य करके वास्तविकता ज्ञात कर सकते हैं ।

 

५- असाध्य रोगियों, कष्ट साध्य रोगियों, पूरे जीवन चलने वाले रोगों में , रोग के कैसे हालात हैं ? इसकी मानीटरिन्ग करके रोगी कि स्वास्थय रक्षा और स्वास्थ्य दशा में लाने के प्रयास इस तकनीक द्वारा कर सकते हैं ।

 

६- यद्यपि यह तकनीक आयुर्वेद के चिकित्सकों के उपयोग के लिये विशेष तौर पर है, लेकिन यह तकनीक सभी चिकित्सा प्रणालियों के चिकित्सकों के उपयोग के लिये भी है । आयुर्वेद के चिकित्सकों के लिये इसलिये खास है, क्योंकि यह तकनीक आयुर्वेद के मौलिक सिद्धान्तों का Status Quantify करती है, लेकिन इसके साथ साथ यह तकनीक शरीर में व्याप्त सभी रोगों क निदान Diagnosis of Diseases भी करती है । इसलिये यह तकनीक सभी चिकित्सकों के लिये उपयोगी साबित हो गयी है , जो रोग निदान यानी disease diagnosis भी चाहते है ।

 

प्रत्येक चिकित्सक निदान की इस तकनीक को अपने दवाखाने , नर्सिंग होम, अस्पताल अथवा मरीज के घर में जाकर प्रयोग में ला सकते हैं । आयुर्वेदीय वैज्ञानिक साक्ष्य आधारित निदान ज्ञान की यह तकनीक बहुत सुगम, बहुत सरल तथा नाना प्रकार के झन्झटों से मुक्त है । 

 

विशेष : यह तकनीक भारत सरकार द्वारा मन्यता प्राप्त है । इसे केन्द्रीय आयुर्वेद एवं सिद्ध अनुसन्धान परिषद, Central Council for Research in Ayurveda and Siddha, आयुष विभाग, Department of AYUSH, स्वास्थय एवं परिवार कल्याण मन्त्रालय, Ministry of Health and Family Welfare, भारत सरकार, Government of India, नई दिल्ली New Delhi द्वारा बहुत कड़ाई के साथ परीक्षित की जा चुकी है ।

 

 

 

 

प्रमाण पत्र : आयुष मेडिकल एसोसिएशन A.M.A. द्वारा दिनान्क १५ और १६ नवम्बर २००८ को चित्रकूट, उ०प्र० मे सन्गठन का राष्ट्रीय सम्मेलन आहुत किया गया था । डा० डी०बी० बाजपेयी ने इस सम्मेलन में ई०टी०जी० पर अपना शोध पत्र पढा था ।

 

 

 

 

पत्र पत्रिकाओं में इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी से सम्बन्धित लेख तथा समाचार छपते रहते हैं । कुछ पत्र तथा पत्रिकाओं में छपे लेखों की कापी यहां प्रस्तुत है ।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

जर्मन सरकार के प्रतिनिधि मन्डल के सदस्यों डा० होर्त्ज प्रत्स्यून्टेक, ब्रेन और स्पाइनल सर्जन, डायरेक्टर, डिपार्ट्मेन्ट आफ न्य़ूरो सर्जरी, रूहर युनीवर्सिटी, बोचुम, जर्मनी और डा० किरन नाइक, डायरेक्टर, यूरोपियन इन्स्टीट्यूट आफ आयुर्वेदा रिसर्च, बर्लिन , जर्मनी  को विस्तार से ई०टी०जी० तकनीक को समझाते हुये डा० डी०बी० बाजपेयी

 

 

 

 

 

 

डा० होर्त्ज प्रत्स्यून्टेक, ब्रेन सर्जन, डायरेक्टर, डिपार्ट्मेन्ट आफ न्य़ूरो सर्जरी, रूहर युनीवर्सिटी, बोचुम, जर्मनी का ई० टी० जी० रिकार्ड करते हुये डा० डी०बी० बाजपेयी

 

स्थान; केन्द्रीय आयुर्वेद एवम सिद्ध अनुसन्धान परिषद, अनुसन्धान भवन, आयुष विभाग, स्वास्थ्य एवम परिवार कल्याण मन्त्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली

 

दिनान्क : 18 मार्च 2009  

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

म्यानमार [बर्मा] सरकार की स्वास्थय मन्त्री श्रीमती डा० सू  को ई०टी०जी० ट्रेस रिकार्ड को दिखाते हुये और ई०टी०जी० तकनीक को समझाते हुये डा० देश बन्धु बाजपेयी

 

स्थान ; केन्द्रीय आयुर्वेद अनुसन्धान सन्सथान, [CRIA] ,आयुष विभाग, स्वास्थय एवम परिवार कल्याण मन्त्रालय, भारत सरकार, पन्जाबी बाग, नई दिल्ली

 

दिनान्क : 22 फरवरी, 2007

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Ayurvedic whole Body Scan

 

The Ultimate Ayurvedic Fundamentals & Diagnosis Solution

 

Electro Tridosha Graphy  E.T.G. Technology

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Dr. Desh Bandhu Bajpai

BMS [Lucknow], Ayurvedacharya [Delhi], MICR [Mumbai]

Diplom-Homoeo [Germany] , M.D. [Medicine]

CRC [Cardio-vascular], Ph.D. [Karya Vikrati ; Physiology]

 

Director & Chief ETG Investigator

Electro Tridosha Graphy ; Extra Mural Research Project,

Central Council for Research in Ayurveda & Siddha,

Department of AYUSH -Ayurveda

Ministry of Health & Familywelfare,

New Delh

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Ayurveda ke naye avishkar ELECTROTRIDOSHA GRAPHY  ke udaharan report aap sabake liye prastust kiye ja rahe hain, jisase sabho ko is nayi takanik ke bare mein janakari prapta ho jaye, hamar prayas rahega ki aapko saral bhasa mein Ayurveda ki is nidan gyaan ki takanik ko vistar se samjhayein tatha batayein ki yah kis prakar se Ayurveda ki chikitsa mein karagar aur sahayak hai

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CASE NO: 1

Yah ek mahila ki reports hai, jise pichchle 2 varshon se Khansi ki takalief thi, yah Kanpur Shahar se 60 kilometer ki doori se ayi thi, isaka ilaj Luchnow, Sitapur, Unnao, Kanpur, Barabanki itaydi jagahon ke shreshtha Doctors dwara kiya gaya, lekin ise koi aaram nahin mili, mere paas isake ek rishtedar lekar aaye, sabhi doctors ne is mahila ka ilaj Khansi aur TB ka samajhakar kiya tatha usi ki dawayein mahila dwara khayi gayin thi

Mahila ke rishtedar ne pahale kiye gaye Xray, Ultrasound, Khoon ki janch ityadi tatha dawaon ke prescription mujhako dikhaye, sabhi janche Normal thi aur kisi mein bhi koi abnormal baat nahin thi

 

Yah rishte dar pahle bhi apni takalief ke liye ETG prikshan kara chuka tha aur vah is takanik ke dwara diagnose ki gayi bimarion par adharit hokar ilaj kara kar rog mukta ho chuka tha, isake kahane par maine Mahila ka ETG prikshshan kiya

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Yah ETG prikshshan Report ka pahala page hai, isamein marijon se sambandhit tatha parikshshan karane wale doctor aur sansathan ki janakri di gayi hai

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Yah ETG report ka doosara page hai, isamein sharir ke sabhi ango mein payi jane wali mukhya aur pramukh bimarion ka nidan likha jata hai , jo recorded traces mein payin jati hain, aap dekhenge ki report mein kin kin bimarion ko bataya gaya hai, yah report sabhi chikitsa vidhiyon ke chikitsakon ke liye hai, aur iase sabhi p[hayad utha sakatey hain

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Yah report ka teesara page hai, isamein bataya gaya hai ki Ayurveda ke  Dosha, Dhatuyein, Mal aadi kis awastha mein hain aur ve kitani matra mein sharir mein maujud hain

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ETG ke trace record par hi sara daromdar hai, isaliye recorded trace ka bahut mahatva hai, niche sare sharir ki recording ke traces dikhaye gaye hain , ye trace record kul milakar 21 se adhik hite hain

 

Is trace record mein jo mukhya baat hai, vah yah ki is mahila ke “TP” Trace mein recorded line downward chali gayi hain, isamein timings ko dekhiye, recorded trace pattern , batat hai ki, ise “Gullet, Esophegial, laryngial  inflamation” hai, jisaki vajah se yah thos ahar nahin kha sakati aur isake khansi  isi vajah se paida ho rahi hai, doosari baat ise tachycardia hai aur left ventrical mein stress condition hai

Yah diagnosis pichchle 2 varshon se koi Doctor  nahin  kar paya, is mahila ko aisi aisi khatarnak dawayein di gayi hain, jisaki bimari ise thi hi nahin, ye dawayein agar koi swasth vyakti kha le to vah maranasann halat mein pahunch jaye

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CASE NO: 2

 

 

 

1 Response to "ELECTRO-TRIDOSHA-GRAPHY इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी : तकनीक के उदाहरण रिपोर्ट Takanik ke udaharan report"

आदरणीय गुरूदेव,मैं इस मुद्दे पर बाबा रामदेव को सवाल के कटघरे में लेने जा रहा हूं, बहुत हो गया मुखौटाधारियों का नाटक…. आप ये देखिये कि मैं मुंबई में आयुष मंत्रालय द्वारा प्रोत्साहन के लिये करोड़ॊ रुपया व्यय करा जाता है लेकिन वहां पर किसी को भी ई.टी.जी. के बारे में न तो जानकारी थी जबकि जरूरत सबको है इस यंत्र व तकनीक की….. अब तो लोगों ने इस पोस्ट श्रंखला पर एक भी टिप्पणी तक लिखना बंद कर दिया है। मैं जल्द ही आपके पास आउंगा और आपको मुंबई ले आउंगा। आपका आशीर्वाद हम सबको बल देता है। ईश्वर आपको स्वस्थ व दीर्घायु करे।

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इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी : ई०टी०जी० का विश्व का पहला परीक्षण केन्द्र ::: ई०टी०जी० सेण्टर, E-52, खपरा मोहाल, खलील क्वार्ट्स कम्पाउन्ड, कैन्ट, कानपुर contact: 09336238994 :::आयुर्वेद की पहली और अकेली ; सम्पुर्ण शरीर का आयुर्वेदिक विधि विधान पूर्वक मौलिक सिद्धान्तों के निदान के अलावा सारे शरीर में व्याप्त रोगों के निदान का ज्ञान कराने वाली तकनीक का परीक्षण केन्द्र समस्त जनता, वैद्यों, आयुर्वेद के चिकित्सकों के लिये कानपुर शहर में स्थापित किया जा चुका है । यहां रोजाना सुबह ९ बजे से दिन २ बजे तक ई०टी०जी० परीक्षण किये जाते हैं । कोई भी रोगी व्यक्ति या अन्य लोग, जो भी परीक्षण कराना चाहते है, वे किसी भी दिन आकर अपना परीक्षण करा सकते हैं ।

World’s first Electro Tridosha Graphy Scanning Center : E.T.G. center, E-52, Khalil Quarters Compound, Khapara Mohal, Cantt,KANPUR 208001 :Contact: 9336238994 : 09:00 AM to 02:00 PM daily

Word’s First Electro Tridosha Graphy E.T.G. Technology Research Center::::: Kunmun ETG Research Center, 67-70, BhusaToli Road, KANPUR-208001, UP::::Contcat for ETG Examination ::Evening 06 PM to 09 PM daily::::Contcat in Person/ appointment by phone:::0512 2367773

ई०टी०जी० परीक्षण तकनीक का दूसरा केन्द्र :………. कुनमुन ई०टी०जी० रिसर्च इन्स्टीट्यूट, 67/70, भूसाटोली रोड, बर्तन बाज़ार, कानपुर 208001, उत्तर प्रदेश, भारत

आयुर्वेद का सबसे नया आविष्कार : इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी : ELECTRO-TRIDOSHA-GRAPHY {ETG}- New invention in Ayurveda

In Medical science, all examinations, scans are from the Allopathic medical science sides, for example Xray, Ultrasound, MRI, CT Scan, Microscopic examination etc. ELECTRO-TRIDOSHA-GRAPHY [E.T.G.] is the first and only scan of Ayurveda & the ultimate Ayurvedic diagnosis solutions' technique. Readers can get more information in the websites, mentioned below or search details in the blog. आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान का नया आविष्कार - इलेक॒ट्रो त्रिदोष ग्राफी, ई०टी० जी०, तकनीक से [१] आयुर्वेद के मॊलिक सिध्धान्त तथा [२] शरीर के रोग निदान , इन दोनो के विषय में Data sheet डाटा रिपोर्ट के स्वरुप में प्राप्त कर सकते है । वैद्यों और आयुर्वेदिक चिकित्सकों को इस विधि से प्राप्त डाटा पर आधारित होकर मरीज की चिकित्सा करने पर अवश्य लाभ होता है । इस तकनीक के बारे में अधिक जानकारी इसी वेब ब्लोग पर या अन्य स्वतन्त्र web blog पर देख सकते है ।

आपका स्वागत है : कृपया अपने विचार अवश्य लिखें

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Electro-Homoeo-Graphy {E.H.G.} : Homoeopathy mein naya Avishkar

EHG , vartaman samay mein Homoeopathy vigyan ke liye yah naya avishkar, ETG technology se nikal kar aaya hai. Is takanik se Homoeopathy ke teen siddhant "Psora, Sycosis, Syphilis" ka manav sharir mein vyapt star ko napa ja sakata hai, isake alava "Vital Force" ka star aur "sensitivity" ka star bhi naap sakatey hain. Is takanik se Homoeopathy ki dawaon ka chunav bhi kar sakatey hai, rog nidan bhi kar sakatey hai, jyada jankari ke liye upar darshayi gayi, web sites par jakar vivaran dekha sakatey hain

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Aapane Likha, bahut khusi huyi आपने लिखा, बहुत प्रसन्नता हुयी

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