Electro tridosha graphy technology, which is also called ETG AyurvedaScan system is the only and single scanning system of AYURVEDA MEDICAL SCIENCE available commercially in this entire globe at our RESEARCH CENTER at KANPUR, INDIA.
ETG AyurvedaScan scans whole body by ETG machine. The Data is transferred to Computer software and thus computer generated REPORT is produced.
The report consists of the followings;
1- Quantifies the satatus of the AYURVEDIC PRINCIPALS i.e. Prakruti, Tridosha, Tridosha Bhed, Sapt Dhatu, Mal, Agni etc.
2- Diagnose the disorders of the whole body and measures the intensity of the VITAL ORGANS and systems with their fitness/ sickness in view of PATHOPHYSIOLOGY or PATHOLOGY.
On the ground of the findings of the ETG AyurvedaScan a patient is treated with accuracy and confident by Ayurvedic medicines.
The development of this system is totally based on the principles of AYURVED and have no any link or relation to Modern western medicine/ Allopathy.

The trace record of a patient from Ahamedabad shows abnormal electric behaviour after BY PASS SURGERY. Note the Negative and Positive defelection of the waves recorded.
ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन ETG AyurvedaScan तकनीक द्वारा प्राप्त आन्कड़ो पर आधारित कष्ट साध्य रोगियों का निदान ग्यान और चिकित्सा
किसी भी कष्ट साध्य रोगी की चिकित्सा के लिये वैद्य के लिये दो बातें बहुत आवश्यक होती है / पहला – आयुर्वेद के मौलिक सिध्धन्तों का रोगी के अन्दर मौजूद होने की इन्टेन्सिटी का अन्कलन और दूसरा – उसके शरीर के अन्गों में व्याप्त कार्य विकृति [pathophysiology] या विकृति [pathology] का आन्कलन और निदान ग्यान /
देखा जाय तो यह दोनो कार्य बहुत आसान नहीं है, लेकिन आधुनिक आयुर्वेद की तकनीक “इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी ; ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन Electro Tridosha Graphy ; ETG AyurvedaScan ” की मदद से और इस तकनीक का सहारा लेकर कष्ट साध्य रोगों की चिकित्सा बहुत सफल, सटीक और अचूक होती है /
इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी , जिसे ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के नाम से भी जानते है, इसके माध्यम से सारे शरीर का विद्युतीय परीक्षण ई०टी०जी० मशीन के द्वारा शरीर के विभिन्न स्थानो से इलेक्ट्रोड के माध्यम से कागज की पट्टी पर रिकार्ड करते है / यह रिकार्डिन्ग का सिध्धान्त ठीक उसी तरह है जिस प्रकार ई०सी०जी०, ई०ई०जी०, ई०एम०जी०, ई०ओ०जी० आदि परीक्षण करते है / एलोपैथी द्वारा विकसित किये गये इन विद्युतीय परीक्षणो और ई०टी०जी० परिक्षण में बुनियादी फर्क है / ई०टी०जी० तकनीक का विकास और बुनियाद आयुर्वेद के सिद्ध्धान्तों पर आधारित है और आयुर्वेद के मूल सिध्धान्तों को लेकर इसका विकास किया गया है / इस तकनीक और सिस्टम में ई०टी०जी० मशीन, ई०टी०जी० कम्प्यूटर साफ्ट्वेयर, कम्प्य़ूटर या लैप्टाप, प्रिन्टर और इसकैनर के अलावा अन्य सामग्रियों की आवश्यकता होती है / इसकी रिपोर्ट दस से अधिक पेजों की होती है /
ई०टी०जी० रिपोर्ट में [१] रोगी की प्रकृति का आंकलन [२] त्रिदोष का आन्कलन [३] त्रिदोष भेद का आंकलन [४] सप्त धातु का अन्कलन [५] दोष आधारित सप्त धातु का अन्कलन [६]तीन मलों का आन्कलन [७] ओज आन्कलन [८] अग्नि आन्कलन इत्यादि बातों की नाप जोख और शरीर में उपस्तिथि की मात्रा ई०वी० प्रतिशत मे बताता है /
इसी रिपोर्ट के दूसरे हिस्से में शरीर के अन्गों की [१] कार्य विकृति Pathophysiology और [२] विकृति Pathology दोनों का आन्कलन बताता है /
इस प्रकार से प्राप्त डाटा का उपयोग कष्ट साध्य बीमारियों में सफ़लता पूर्वक करते है / ईस रिपोर्ट के डाटा के जरिये यह ग्यात हो जाता है रोगी के शरीर में कहां कहां और किस तरह की बीमारी पनप रही है या पनप चुकी है और इसे किस औषधि या विधान द्वारा दूर किया जा सकता है /
यह इस तकनीक का एक सकारात्मक पहलू है कि जब सब डाटा आ जाता है तो मरीज के लिये औषधियों का चुनाव बहुत स्पष्ट हो जाता है और जो भी औषधियां चुनी जाती है , वे अवश्य फायदा करती है / पिछले २२ सालों से हम कष्ट साध्य रोगियों का इसी विधा से इलाज कर रहे है /
नीचे दो मरीजों के विवरण के साथ उनकी की गयी चिकित्सा का उदाहरण पाठकों के लिये प्रस्तुत किया जा रहा है /
पहला केस ; रक्त की प्लेट्लेट्स का अत्यधिक कम हो जाने की बीमारी
यह केस एक एलोपैथी के ६० साल की उम्र के चिकित्सक का है, जिनको साढे चार साल पहले अगस्त, सन २००६ में “वाइरल डेन्गू बुखार” हुआ था / इनका कई माह तक एलोपैथी का इलाज चला, जिससे डेन्गू बुखार तो चला गया लेकिन जोड़ो और मान्स्पेशियों का दर्द तथा दूसरी शिकायतें बनी रही /
रक्त की जान्च करने पर पता चला कि इनके रक्त की प्लेट्लेट्स १५ हजार और हीमोग्लोबिन ६ मिलीग्राम प्रतिशत तक पहुन्च गया है / इस हालत में इनको रक्त चढवाना पड़ा और चिकित्सकों ने इनको ४० मिलीग्राम स्टेरायड प्रतिदिन लेते रहने के लिये कहा / लगभग चार साल से रक्त चढवाने और Steroid खाने का सिल्सिला चल रहा था / SGPGI, Lucknow मे तीन माह भर्ती रह कर इलाज करवाया लेकिन हालात में कोई सुधार नहीं हुआ /
किसी मरीज ने इन डाक्टर साहब को आयुर्वेद की नई आविष्कृत की गयी तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के बारे मे बताया / दिनान्क ०६ अक्टूबर २०१० को यह चिकित्सक महोदय मेरे पास consultation के लिये आये / मैने उनसे कहा कि आपको एक ई०टी०जी० परीक्षण करना पड़ेगा तभी पता चल पायेगा कि आपके शरीर के अन्दर क्या गड़्बड़ी है /
उनका परीक्षण इसी दिन किया गया जिसमें निम्न फाइन्डिन्ग्स आयीं /
[१] त्रिदोष ; [समस्त पैरामीटर्स की सामान्य वैल्यू 95 e.v. से लेकर 99 e.v. तक]
कफ १३४.३१ ई०वी० प्रतिशत
पित्त १११.०९ ” ”
वात ६३.५६ ” ”
[२] त्रिदोष भेद ; [समस्त पैरामीटर्स की सामान्य वैल्यू 95 e.v. से लेकर 99 e.v. तक]
{सभी मान ई०वी० में e.v. means ETG value}
भ्राजक पित्त १४५.८७
लोचक पित्त १०४.८६
पाचक पित्त ८५.५५
साधक पित्त ८३.९४
अवलम्बन कफ ७८.०५
रन्जक पित्त ७६.१९
रसन कफ ७१.४४
उदान वात ६९.५९
श्लेष्मन कफ ६४.१७
व्यान वात ५९.२२
समान वात ४०.१५
[समस्त पैरामीटर्स की सामान्य वैल्यू 95 e.v. से लेकर 99 e.v. तक
[3] सप्त धातुये ; [समस्त पैरामीटर्स की सामान्य वैल्यू 95 e.v. से लेकर 99 e.v. तक]
मेद १२२.१३
मान्स १२०.९३
रस ११४.८०
शुक्र १११.१३
मज्जा १०८.३४
रक्त १०५.८२
अस्थि १०४.५३
[४] शरीर में व्याप्त कार्य विकृति Pathophysiology और विकृति Pathology की उपस्तिथि की स्तिथियां [समस्त पैरामीटर्स की सामान्य वैल्यू 95 e.v. से लेकर 99 e.v. तक]
Autonomic Nervous system 157.14
Thoracic region/spine/cage 140.00
Body Fat 122.13
Liver/Pancrease/spleen 117.50
Metabolism 114.00
Blood Anomalies 105.80
Skin ailments 106.00
Thyroid pathophysiology 61.67
Spleen pathophysiology 60.00
Thymus pathophysiology 57.14
Liver pathophysiology 54.00
Epigastrium pathophysio 46.00
Abdomen/Intestines/colon 44.00
Prostate pathophysio 37.21
Intestines pathophysiology 35.56
[5] रोग निदान / Diagnosis of disease conditions
a- Blood anomaly
b- Bowel’s pathophysiology
c- Colon Inflammatory condition with swelling and hardness
d- Dull mental behaviour
e- Enlarged Liver with poor function
f- Hormonal anomalies
g- Pancreatic pathophysiology
h- Renal anomalies
i- Spleenomegaly ? Hepatospleenomegaly
j- Swelling in whole body
ई०टी० जी० आधारित रोग निर्धारण और औषधियों का चयन
रोगी जब परामर्श और चिकित्सा व्यवस्था के लिये आया तो ई०टी०जी० रिपोर्ट के आधार पर निष्कर्श निकाला गया कि इस रोगी को “कफ़ज पित्तज” व्याधि है / त्रिदोष भेद में यही बात सामने आयी /
सप्त धातुयें भी सामान्य से अधिक की ओर अपना झुकाव दर्शा रहीं है / इसका अर्थ यह निकला कि इस रोगी का मेटाबालिज्म की प्रक्रिया अधिक की ओर और तेज है / यह मरीज की Pathological condition को इन्गित कर रहा है /
इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी की पुरी रिपोर्ट का अध्ध्यन करने के पश्चात conclusion में तीन बातें समझ में आयी/
१- मरीज की आन्तों में सूजन है यानी Bowel’s Pathophysiology है /
२- यकृत और प्लीहा दोनों का बढा होना
३- रक्त की दुष्टि यानी Blood Anomaly
उक्त निष्कर्ष को ध्यान में रखते हुये इस मरीज को निम्न औषधियां prescribe की गयी /
अ- कुटज घन वटी १ गोली ; आन्तों की सूजन और विकृति के लिये
आरोग्य वर्धिनी वटी १ गोली ; यकृत प्लीहा के विकार के लिये
गन्धक रसायन १ गोली ; रक्त दुष्टि के लिये
सभी गोलियां एक साथ सुबह और शाम दिन में दो बार सादे पानी से खाने के लिये निर्देशित किया गया /
ब- सारिवद्यासव २५ मिलीलीटर बराबर पानी मिलाकर दोपहर और रात भोजन करने के बाद ; सप्त धातुओं की पुष्टि के लिये
रोगी से कहा गया कि वह इन सब दवाओं को लगातार ९० दिन तक सेवन करे , बाद मे प्रामर्श करे /
दिनान्क ०६ जनवरी २०११ को मरीज दिखाने आया / उसके सारे शरीर की सूजन एक्दम ठीक थी / मरीज रोजाना ४० मिलीग्राम steroid खाता था, वह अब उसने खाना बन्द कर दिया है , क्योंकि उसको steroid खाने की अब जरूरत नही लगी / उसका platelets count १५ हजार से बढ कर ८० हजार हो गया है, सामन्य तया शरीर में platelets की सन्ख्या रक्त में १ लाख पचास हजार से लेकर ४ लाख तक होती है / उसे बार बार हर पन्द्रह दिनों में रक्त चढवाना पड़्ता था, वह दो महीने से नही करना पड़ा / जो अन्य तकलीफें थी जैसे शरीर में फुन्सियां निकलना और शरीर में काले चकत्ते पड़ना, वह सब ठीक है /
चिकित्सक महोदय से मैने कहा कि आप अभि यही दवा खाते रहिये और मार्च २०११ में एक दूसरा ई०टी०जी० परीक्शण करा ले, उसके बाद जो भी फाइन्डिन्ग्स आयेंगी , तदनुसार दवा परिवर्तन कर दिया जायेगा /
दूसरा केस; Hyper Thyroidism
यह केस एक ३५ साल की महिला का है , जिसको Hyper Thyroidism की शिकायत कई साल से थी / मरीजा ने दिनान्क २६.०६.२०१० को परामर्श किया था /
महिला को निम्न शिकायते थी, जिनके लिये वह परामर्श के लिये आयी थी /
१- अनियमित मासिक धर्म
२- मासिक होने से १० दिन पहले से मानसिक तनाव , अत्यधिक गुस्सा, झगड़ालू प्रवृति
३- मासिक के समय अत्यधिक रक्त श्राव, जिसके कारण रोगिणी बहुत कमजोर हो जाती थी
४- रोगिणी के स्तनॊं में सूजन और गान्ठे पड़ जाती है
५- पेट में सूजन
रोगिणी एलोपैथी का बहुत इलाज करा चुकी थी, उसको एलोपैथी के इलाज से कोई आराम नही मिला / मैने उसको सलाह दी कि अगर वह आयुर्वेदिक इलाज कराना चाहिती है तो वह एक ई०टी० जी० आयुर्वेदस्कैन का परीक्षण करा ले तो उसके सारे शरीर की बीमारियों के बारे मे पता चल जायेगा / दूसरा ऐसा कोई सरल तरीका नहीं है, जिससे उसकी बीमारी के बारे मे पता लगाया जा सके /
रोगिणी ने अपना ई०टी०जी० परीक्षण कराया, जिसकी फाइन्डिन्ग्स निम्न प्रकार से थी /
[अ] त्रिदोष;
कफ १३७.५२
पित्त ६८.७६
वात ५८.१५
[ब] सप्त धातु ;
मान्स १०२.०३
मेद ८१.००
[स] शरीर मे व्याप्त तकलीफॊं का अन्कलन
Mammery Glands 134.00
Lumber spine 122.22
Urinary Bladder 112.50
Mental/emotional/intellect 110.00
Sinusitis 110.00
Thyroid Pathophysiology 106.67
Uterus anomalies 88.50
Pelvic inflammatory disease 88.50
Renal anomalies 80.00
Menstrual anomalies 46.67
[द] रोग निदान ;
Bowel’s pathophysiology
Cervical spondylitis with Lymphadenitis
Epigastritis
Hormonal anomaly
Inflammatory and irritable bowel syndromes
Large intestines anomalies
Lumber pain
Mammary glands anomalies
Nervous temperaments
Tachycardia
इस रोगुणी को बताया गया कि उसे उक्त बीमारियां है / यह देखकर वह घबरा गयी कि इतनी बीमारियां एक साथ हो गयीं है / मैने उसको बताया कि ई०टी०जी० सिस्टम चूंकि सारे शरीर का स्कैन करता है इसलिये जो भी बीमारी या कार्य विकृति होती वह यह सब बता देता है / आयुर्वेद में सम्पूर्ण शरीर की चिकित्सा करने का विधान है, इसलिये जो भी फाइन्डिन्ग्स है उन सबका इलाज एक साथ होगा और आपको सारी तकलीफॊं में एक साथ आराम मिलेगा /
यह सुनकर मरीजा आश्वस्त हो गयी और उसको निम्न चिकित्सा व्यवस्था दी गयी /
अ- कान्चनार गुग्गुल १ गोली ; गले की गान्ठ के लिये
रज: प्रवर्तिनी वटी १ गोली ; मासिक धर्म की अनियमितता के लिये
ब्राम्ही वटी १ गोली ; नरवस्नेस और धड़कन के लिये
पुष्य्यानुग चूर्ण २ ग्राम के साथ दिन में दो बार सादे पानी से
ब- दश्मूलारिष्ट १० मिलीलीटर
कुमारीआसव १० मिलीलीटर
भोजन करने के बाद दोनों समय
मरीजा को १२० दिन दवा सेवन करायी गयी / दवा सेवनोपरान्त वह पूर्ण स्वस्थय है और उसे मासिक सम्बन्धी कोई तकलीफ नहीं है / उसकी थायरायड भी अब सामान्य कार्य कर रही है /
निष्कर्ष;
आयुर्वेद की इस अत्याधुनिक मशीन आधारित निदान ग्यान की तकनीक इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी ; ई०टी० जी० आयुर्वेदास्कैन से हजारों मरीजो का इलाज करने के पश्चात यह स्थापित हो चुका है कि इस तकनीक से सभी मरीजों का इलाज सफलता पूर्वक किया जा सकता है / चाहे उनको कोई भी बीमारी हो /
इस तकनीक का परीक्षण कई बार आयुष विभाग, स्वास्थय एवम परिवार कल्याण मत्रालय , नई दिल्ली द्वारा किया जा चुका है / केन्द्रीय आयुर्वेद अनुसन्धान सन्स्थान, रोड न० ६६, पन्जाबी बाग, नई दिल्ली में ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की पाइलट स्टडी सन २००७ में की जा चुकी है /









आदरणीय गुरूदेव,मैं इस मुद्दे पर बाबा रामदेव को सवाल के कटघरे में लेने जा रहा हूं, बहुत हो गया मुखौटाधारियों का नाटक…. आप ये देखिये कि मैं मुंबई में आयुष मंत्रालय द्वारा प्रोत्साहन के लिये करोड़ॊ रुपया व्यय करा जाता है लेकिन वहां पर किसी को भी ई.टी.जी. के बारे में न तो जानकारी थी जबकि जरूरत सबको है इस यंत्र व तकनीक की….. अब तो लोगों ने इस पोस्ट श्रंखला पर एक भी टिप्पणी तक लिखना बंद कर दिया है। मैं जल्द ही आपके पास आउंगा और आपको मुंबई ले आउंगा। आपका आशीर्वाद हम सबको बल देता है। ईश्वर आपको स्वस्थ व दीर्घायु करे।
Amazing Information.
Must be propagated amongst Ayurveda fraternity
First time in the world!! Pride of India!! In India nobody is allowed do research successfully unless politicians of Western world say YES.Congratulations!!!!
good job this should be popular. this is great invention.
FATHER OF ETG.
dear sir,
please inform me in detail about etg.is avialable in market ?
………..reply………..Too much have been written in this blog about ETG AyurvedaScan examination system, please find the relevent post and read them carefully.
ETG AyurvedaScan examination Service is available at our research center at Kanpur . Here any body can come and examin himself against due payment and fees, which is established and revised time to time accordingly.
It,s good news but share krna jruri h