Special offer from KANAK POLYTHERAPY CLINIC & RESEARCH CENTER, KANPUR , INDIA for DIAGNOSIS AND TREATMENT of LONG LASTING / CHRONIC / INCURABLE / UNDIAGNOSED Disease conditions ; कष्ट साध्य रोगों / असाध्य बीमारियों / लाइलाज रोगों / जीवन पर्यन्त चलने वाले रोगों के इलाज के लिये कनक पालीथेरेपी क्लीनिक एवम रिसर्च सेन्टर, कानपुर, भारत द्वारा प्रस्तुत विशेष सुविधा

AYURVEDA URINOMETER machine, the first and only Urine Examination Technology developed by inventer and AYUSH Scientist Dr. Desh Bandhu Bajpai in AYURVEDA to Quantify the Status of Ayurvedic Principles and Disease Diagnosis and contents of the Urine , similar on the lines of AYURVEDA PATHOLOGY mentioned in Ayurvedic classical by AYURVEDA

AYURVEDA URINOMETER machine, the first and only Urine Examination Technology developed by inventer and AYUSH Scientist Dr. Desh Bandhu Bajpai in AYURVEDA to Quantify the Status of Ayurvedic Principles and Disease Diagnosis and contents of the Urine , similar on the lines of AYURVEDA PATHOLOGY mentioned in Ayurvedic classical by AYURVEDA

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Patient Examination machines and devices

Patient Examination machines and devices

ETG AyurvedaScan Machine

ETG AyurvedaScan Machine


PHOTO SHOWING HERE THE "AYUSH HEAMOMETER" DEVICE WITH LABORATORY  MADE BLOOD REACTED STRIPE-PIECE AND SPECIALLY MADE STRIPES

PHOTO SHOWING HERE THE “AYUSH HEAMOMETER” DEVICE WITH LABORATORY MADE BLOOD REACTED STRIPE-PIECE AND SPECIALLY MADE STRIPES

हमारे सन्सथान कनक पालीथेरेपी सेन्टर एवम रिसर्च सेन्टर द्वारा पिछले ४५ सालों से कश्ट साध्य और असाध्य और जीवन पर्यन्त चलने वाले लाइलाज रोगों का इलाज सफलता पूरवक किया जा रहा है / हमारे सन्सथान में आयुर्वेद / होम्योपैथी / यूनानी / प्राकृतिक चिकित्सा के साथ अन्य बिना औषधि  की चिकित्सा विधियों का उपयोग यथा आकूपन्कचर, फीजियोथेरापी तथा अन्य चिकित्सा सहायता के साथ सफलता पूर्वक किया जा रहा है /

 

हम असाध्य / दुर्गम / कष्ट साध्य रोगों का इलाज , चाहे कोई भी बीमारी हो या उस बीमारी का कोई भी नाम क्यों न हो चाहे वह कैन्सर हो, गुर्दा फेल्योर हो, पैरालाइसिस हो, ट्यूमर हो , या कोई अन्य,  जो रोगी हमारी क्ळीनिक में आकर इलाज कराना चाहते है, उनके लिये हम निम्न प्रकार से चिकित्सा मार्ग अपनाते है ;

 

पहला कदम ; First Step –  सबसे पहले हम रोगी का ई०टी०जी० अयुर्वेदास्कैन E.T.G. AyurvedaScan करते है /

दूसरा स्टेप ; [Second step] ; [2] ETG AyurvedaScan की रिपोर्ट तथा findings मिल जाने के बाद यह decide करना बहुत आवश्यक होता है कि Conclusion में क्या क्या और कौन कौन सी बीमारियां या शारीरिक बदलाव शरीर के किन किन अन्गों में पाये गये है /

यानी चिकित्सा कार्य के लिये यह जान लेना बहुत जरूरी होता है कि शारीरिक Pathophysiology  और Pathology मरीज की किस और कितने स्तर की है /

तीसरा स्टेप ; [ Third step] ; [3] ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की रिपोर्ट में एक साथ बहुत सी बीमारियां या बीमारियों के लक्षण अन्कित होते है / ऐसा इसलिये होता है क्योंकि ई०टी०जी० तकनीक द्वारा सारे शरीर का विद्युतीय परिक्षण होता है और शरीर का Electrical Bahaviour  किस तरह का है और कौन कौन से अन्दरूनी अन्ग कितना कमजोर या शक्तिशाली इलेक्ट्रिकल सिगनल अपनी स्वस्थ्य अथवा अस्वस्थ अवस्था को बताते हुये छोड़्ते है, जिसे ETG machine द्वारा अन्कित कर लिया जाता है और फिर कम्प्य़ूटर साफ्ट वेयर की मदद से शरीर के किये गये Scan  के हिस्से की सामान्य अथवा असामान्य अवस्था का पता लग जाता है /

चौथा स्टेप; शरीर के लगभग सभी महत्वपूर्ण अन्गों की अवस्था का आन्कलन किया जाता है और यह देखा जाता है कि शरीर के अन्गो की “कार्य विकृति” यानी  Pathophysiology (पैथोफीजियोलाजी) और “विकृति” यानी  Pathology (पैथोलाजी) की शरीर में स्तिथि कैसी है ? हमने इसके लिये पान्च प्रकार के पैरामीटर  निर्धारित किये है जिन्हे evaluate करके पता करते हैं कि ये किस श्रेणी के है / [अ] सामान्य पैरामीटर से अधिक कम [ब] सामान्य पैरामीटर से  कम [स] सामान्य अवस्था [द] पैरामीटर की limit  में आन्कलन (द) सामान्य पैरामीटर की limit  से अधिक (य) सामान्य पैरामीटर की limit  से बहुत अधिक /

 इस तरह से मरीज की तकलीफ का evaluation  करते है /  

 पान्चवां स्टेप ; Step Fifth ; प्राप्त डाटा से मरीज की तकलीफ का conclusion यानी निष्कर्ष निकालते है कि इसे क्या क्या और कौन कौन सी बीमारियां हैं ?

छ्ठा स्टेप; Step Sixth ; आयुर्वेद का मानना है कि मानव शरीर एक ईकाई है अत: इस ईकाई का इलाज करना चाहिये / इसलिये ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की फाइन्डिन्ग्स में जितनी तकलीफें दर्शाई जाती है , उन सबका इलाज एक साथ करते है, यानी सम्पूर्ण शरीर की व्याधियों का इलाज एक साथ करने का प्रावधान होता है और अलग अलग अन्गों की विकृतियों को उनकी Intensity  के हिसाब से औषधियों की मात्रा का चुनाव करके मरीजॊ को दिया जाता है /

सातवां स्टेप ; Seventh Step ;  एक निश्चित अवधि के लिये दवाओं का सेवन मरीजों को करते है / ऐसा उनकी हालत और रोग की उपस्तिथि को देखकर और evaluate करके निर्धारित करते है , उदाहरण के लिये एक घन्टे से लेकर १२ घन्टे तक / या कुछ दिन से लेकर एक सप्ताह यानी सात दिन तक / या पन्द्रह दिन / या एक माह , दवा देने के पश्चात मरीज की हालत का फालोअप लेते है और उसकी हालत और मर्ज की intensity को चेक करके दुबारा दवाये दी जाती है /

इस तरह से इलाज का सिल्सिला चलता रहता है , जब तक कि आरोग्य प्राप्त नहीं हो जाता /

लेकिन यह चिकित्सा विधि उन रोगियों के लिये है जो कानपुर स्तिथि  हमारी क्ळीनिक में आकर अपना इलाज कराना चाहते है / ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की सुविधा केवल हमारे यहां ही उपलब्ध है /

10 thoughts on “Special offer from KANAK POLYTHERAPY CLINIC & RESEARCH CENTER, KANPUR , INDIA for DIAGNOSIS AND TREATMENT of LONG LASTING / CHRONIC / INCURABLE / UNDIAGNOSED Disease conditions ; कष्ट साध्य रोगों / असाध्य बीमारियों / लाइलाज रोगों / जीवन पर्यन्त चलने वाले रोगों के इलाज के लिये कनक पालीथेरेपी क्लीनिक एवम रिसर्च सेन्टर, कानपुर, भारत द्वारा प्रस्तुत विशेष सुविधा

  1. कृपया एच आई वी एड्स संक्रमण की उपचार व दवा मार्गदर्शन देवे

    ………..उत्तर………..एच० आइ० वी० और ऐड्स तथा हिपेटाइटिस बी और सी तथा अन्य ला-इलाज बीमारियां जिनका निदान हुआ हो अथवा न हुआ हो, ऐसी सभी बीमारियों का इलाज ई०टी०जी०आयुर्वेदास्कैन की जान्च करने के बाद यदि किया जाता है तो वे अवश्य ठीक होती है या उनमें आराम मिलता है या शारीरिक कष्ट अवश्य समाप्त होते है अथवा कम हो जाते है / इसका कारण मै कई बार अपने इसी ब्लाग में बता चुका हूं / बेहतर है आप इन्ही ब्लाग पोस्ट में अवलोकन करे /

  2. kripya allergic Rhinitis ya non- allergic rhinitis mein ETG AyurvedaScan ka adhiktam kharcha kitna ho sakta batayein ? aur kab tak yeh bimarei thik ho jayegi…mujhe doctors ne kaha hai ki allergy is not curable but it can be controlled.. kripya margdashan karein

  3. एच० आइ० वी० और ऐड्स निगेटिव्ह होता है !!! आपने ऐसे उदाहरण देखे है! …. है तो आपके ब्लाग में रिपोटर देखणे मील सकते है!

    ……….उत्तर……….एलोपैथी के रक्त परिक्षण के बाद ही कई मरीज मेरे यहां HIV / AIDS के आये हैं/

    HIV तथा AIDS के बारे मे जहां तक मै समझता हू, उसको बताने का प्रयास कर रहा हूं /

    जिस समय AIDS बीमारी के बारे मे पता चला , उस समय चिकित्सा वैग्यानिकों ने कहा कि AIDS एक प्रकार की ऐसी बीमारी है जो जीवाणुओं से समब्नध नही रखती अर्थात यह एक non-infectious disorder है / यह धारणा कई साल तक चिकित्सा वैग्यानिकों के बीच में बनी रही / कुछ साल पहले चिकित्सा वैग्यानिको के AIDS के एक अन्तर्रास्ट्रीय सम्मेलन में कई शोध करताओं ने कहा कि AIDS एक तरह की infectious disease भी है / इस तरह के शोध को लेकर चिकित्सा वैग्यानिकों में आपस में ही तलवारें खिच गयी / सब अपने अपने मन्तव्य पर अडे़ रहे /

    आखिर में infectious disease वाले disorder को HIV नाम दे दिया गया /

    इस तरह एक ही बीमारी को दो धड़ों में बान्ट दिया गया / HIV चून्कि इन्फेक्शन की बीमारी है, इसलिये इसका टेस्ट करते है और इसके निर्धारित parameters का अध्ध्य्यन करते है, जिससे यह पता लगे कि infection normal level अथवा abnormal level या कितनी intensity level का है /

    हमारे यहां ETG AyurvedaScan तथा आयुर्वेद का रक्त और आयुर्वेद का मूत्र परीक्षण रिपोर्ट आधारित HIV और AIDS के रोगियों का इलाज किया जा रहा है, आयुर्वेद की चिकित्सा से बहुत अच्छे परिणाम मिले है / HIV और AIDS के रोगी अपने रोग की जान्च एलोपैथी की पध्ध्यति से ही करते है और लगभग सभी की जान्च सामान्य लेवल की ही आयीं हैं /

    सभी मरीज अपनी identity छुपाते है और सार्वजनिक तौर पर बीमारी का खुलासा नही करते हैं , इसी कारण से इस Blog मे सिवाय technical जानकारी के अलावा और अधिक जानकारी देने की स्तिथि बहुत सीमित है , इसीलिये आप सबको limited जानकारी ही उपलब्ध होती है /

    • सभी मरीज अपनी identity छुपाते है और सार्वजनिक तौर पर बीमारी का खुलासा नही करते हैं , इसी कारण से मरीज ढोंगी बाबा ओ के जाल मे फसते है !
      लेकीन जो पहिले फस चुके है ओ विश्वास (भरोसा) केसे करे! कयु की हमारे जयसो ने भरोसा कर के बहूत कुछ खो दिया ! जयसे शारीक रुपसे एक आख , आर्थिक रुपसे और भरोसा! आपने ओ कहावत तो सुनी होगी दुधकाजला साच भी फुक कर पिता है !

      ………..उत्तर………..आपके द्वारा व्यक्त किये गये विचारों के बारे मे कोई टिप्प्णी नही करना चाहता / यह बीमार व्यक्ति की इच्छा पर निर्भर करता है कि वह क्या करे ? किसी डाक्टर के पास जाये अथवा किसी बाबा या झाड़ फून्क वाले के पास जाये /

      भरोसा उसी पर करना चाहिये जो भरोसा करने वाला हो, भरोसे के काबिल हो / भरोसा करने के लिये risk तो लेना ही पड़ेगा / गलत आदमी पर विश्वास करेन्गे तो बहुत कुछ खोना पड़्ता है / गलत इलाज करायेन्गे तो शारीरिक कष्ट भोगना पड़ेगा / मैने पिछले ५० से अधिक सालों की medical practice मे हजारों उदाहरण देखे है, उनकी बीमारी के बारे मे ईमान्दारी के साथ सही सही बताया गया, आदि से लेकर अन्त तक , लेकिन सही बात अगर ऐसे लोगों को बताता हू तो उन्को सही बात हजम नही होती और वे वही करते है और फिर धोखा खाते है /

      बहुत बड़ी सन्ख्या में लोगों को सम्झाया कि आप ऐसा न करे लेकिन वे नही माने और आज यह सभी बात न मानने वाले लोग दुनिया छोड़्कर चले गये / ऐसे कुछ उदाहरणों का जिक्र आपको कई ब्लाग पोस्ट में मिलेगा /

      वर्तमान में अधिकान्श डाकटर commercial हो गये है और उनके लिये सिर्फ पैसा ही पैदा करना उद्देश्य हो गया है / इस समय सही डाक्टर की सलाह अगर किसी को मिल जाये तो उस व्यक्ति को स्वयम को बहुत भाग्यशाली समझना चाहिये/

  4. mere father ko pichle ek saal se neck cancer hai…
    unko abtk 22/7/14 tk 15 chemothrepy & 35 days radiothrepy ho chuka hai…
    aaram abhi tk nhi mila…
    khane m bahut jyada dikkat ho rhi hi…

    Hame aapka pta net search k jariye mila…
    padkr ummid jagi toh ….
    aapse samprk kiya….

    Ab aap ye bataye ki CANCER ka ilaj yadi Auyrved m karwaye toh… kitna improvement hoga…. kya ye root se end ho sakta hi.. .kitne % tak patient thik hokar apne routine m wapas aa sakta hai…..Isme lagbg kitna kharcha aata hi…. hamlog toh ab aash chord chuke theye bt aapka sandesh pdkr phir Aatmviswash jaga hi…

    Kripya Mera Marg Darsan Karen….

    ………..reply………..Chemotherapy hone ke baad aur radiation hone ke baad sharIr ki VITAL FORCE ya OAJ samapt ho jata hai aur isi karan se koi bhi ayurvedic ya homoeopathic dava sharir me action ya prabhav nahi kar pati hai

    Ayurvedic ya ayush ilaj tabhi karagar hota hai ya effective hota hai jab chemotherapy na ki gayi ho ya radiation therapy na ki gayi ho

    mere vichar se ab ap vahi treatment kare aur usi doctor ka ilaj kare jo apake pita ji ka ilaj kar rahe hai

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