हमारे सन्सथान कनक पालीथेरेपी सेन्टर एवम रिसर्च सेन्टर द्वारा पिछले ४५ सालों से कश्ट साध्य और असाध्य और जीवन पर्यन्त चलने वाले लाइलाज रोगों का इलाज सफलता पूरवक किया जा रहा है / हमारे सन्सथान में आयुर्वेद / होम्योपैथी / यूनानी / प्राकृतिक चिकित्सा के साथ अन्य बिना औषधि की चिकित्सा विधियों का उपयोग यथा आकूपन्कचर, फीजियोथेरापी तथा अन्य चिकित्सा सहायता के साथ सफलता पूर्वक किया जा रहा है /
हम असाध्य / दुर्गम / कष्ट साध्य रोगों का इलाज , चाहे कोई भी बीमारी हो या उस बीमारी का कोई भी नाम क्यों न हो चाहे वह कैन्सर हो, गुर्दा फेल्योर हो, पैरालाइसिस हो, ट्यूमर हो , या कोई अन्य, जो रोगी हमारी क्ळीनिक में आकर इलाज कराना चाहते है, उनके लिये हम निम्न प्रकार से चिकित्सा मार्ग अपनाते है ;
पहला कदम ; First Step – सबसे पहले हम रोगी का ई०टी०जी० अयुर्वेदास्कैन E.T.G. AyurvedaScan करते है /
दूसरा स्टेप ; [Second step] ; [2] ETG AyurvedaScan की रिपोर्ट तथा findings मिल जाने के बाद यह decide करना बहुत आवश्यक होता है कि Conclusion में क्या क्या और कौन कौन सी बीमारियां या शारीरिक बदलाव शरीर के किन किन अन्गों में पाये गये है /
यानी चिकित्सा कार्य के लिये यह जान लेना बहुत जरूरी होता है कि शारीरिक Pathophysiology और Pathology मरीज की किस और कितने स्तर की है /
तीसरा स्टेप ; [ Third step] ; [3] ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की रिपोर्ट में एक साथ बहुत सी बीमारियां या बीमारियों के लक्षण अन्कित होते है / ऐसा इसलिये होता है क्योंकि ई०टी०जी० तकनीक द्वारा सारे शरीर का विद्युतीय परिक्षण होता है और शरीर का Electrical Bahaviour किस तरह का है और कौन कौन से अन्दरूनी अन्ग कितना कमजोर या शक्तिशाली इलेक्ट्रिकल सिगनल अपनी स्वस्थ्य अथवा अस्वस्थ अवस्था को बताते हुये छोड़्ते है, जिसे ETG machine द्वारा अन्कित कर लिया जाता है और फिर कम्प्य़ूटर साफ्ट वेयर की मदद से शरीर के किये गये Scan के हिस्से की सामान्य अथवा असामान्य अवस्था का पता लग जाता है /
चौथा स्टेप; शरीर के लगभग सभी महत्वपूर्ण अन्गों की अवस्था का आन्कलन किया जाता है और यह देखा जाता है कि शरीर के अन्गो की “कार्य विकृति” यानी Pathophysiology (पैथोफीजियोलाजी) और “विकृति” यानी Pathology (पैथोलाजी) की शरीर में स्तिथि कैसी है ? हमने इसके लिये पान्च प्रकार के पैरामीटर निर्धारित किये है जिन्हे evaluate करके पता करते हैं कि ये किस श्रेणी के है / [अ] सामान्य पैरामीटर से अधिक कम [ब] सामान्य पैरामीटर से कम [स] सामान्य अवस्था [द] पैरामीटर की limit में आन्कलन (द) सामान्य पैरामीटर की limit से अधिक (य) सामान्य पैरामीटर की limit से बहुत अधिक /
इस तरह से मरीज की तकलीफ का evaluation करते है /
पान्चवां स्टेप ; Step Fifth ; प्राप्त डाटा से मरीज की तकलीफ का conclusion यानी निष्कर्ष निकालते है कि इसे क्या क्या और कौन कौन सी बीमारियां हैं ?
छ्ठा स्टेप; Step Sixth ; आयुर्वेद का मानना है कि मानव शरीर एक ईकाई है अत: इस ईकाई का इलाज करना चाहिये / इसलिये ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की फाइन्डिन्ग्स में जितनी तकलीफें दर्शाई जाती है , उन सबका इलाज एक साथ करते है, यानी सम्पूर्ण शरीर की व्याधियों का इलाज एक साथ करने का प्रावधान होता है और अलग अलग अन्गों की विकृतियों को उनकी Intensity के हिसाब से औषधियों की मात्रा का चुनाव करके मरीजॊ को दिया जाता है /
सातवां स्टेप ; Seventh Step ; एक निश्चित अवधि के लिये दवाओं का सेवन मरीजों को करते है / ऐसा उनकी हालत और रोग की उपस्तिथि को देखकर और evaluate करके निर्धारित करते है , उदाहरण के लिये एक घन्टे से लेकर १२ घन्टे तक / या कुछ दिन से लेकर एक सप्ताह यानी सात दिन तक / या पन्द्रह दिन / या एक माह , दवा देने के पश्चात मरीज की हालत का फालोअप लेते है और उसकी हालत और मर्ज की intensity को चेक करके दुबारा दवाये दी जाती है /
इस तरह से इलाज का सिल्सिला चलता रहता है , जब तक कि आरोग्य प्राप्त नहीं हो जाता /
लेकिन यह चिकित्सा विधि उन रोगियों के लिये है जो कानपुर स्तिथि हमारी क्ळीनिक में आकर अपना इलाज कराना चाहते है / ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की सुविधा केवल हमारे यहां ही उपलब्ध है /




ma asthima se padith hu mare age 34 year,s han kripya elaje batya
………..reply………..apana ek ETG AyurvedaScan parikshan karakar yadi ayurvedic / homoeopathic ilaj karayenge to asthama thik ho jayegaa
कृपया एच आई वी एड्स संक्रमण की उपचार व दवा मार्गदर्शन देवे
………..उत्तर………..एच० आइ० वी० और ऐड्स तथा हिपेटाइटिस बी और सी तथा अन्य ला-इलाज बीमारियां जिनका निदान हुआ हो अथवा न हुआ हो, ऐसी सभी बीमारियों का इलाज ई०टी०जी०आयुर्वेदास्कैन की जान्च करने के बाद यदि किया जाता है तो वे अवश्य ठीक होती है या उनमें आराम मिलता है या शारीरिक कष्ट अवश्य समाप्त होते है अथवा कम हो जाते है / इसका कारण मै कई बार अपने इसी ब्लाग में बता चुका हूं / बेहतर है आप इन्ही ब्लाग पोस्ट में अवलोकन करे /