Tribhuvan Kirti Ras ; an Ayurvedic classical remedy for Winter Season


Every year winter season comes and while its commencement, it brings many health problems with the persons almost every one of all ages. Those who are living in those areas, where almost all months of a year, winter or winter like atmosphere persists, they also feel problems from more cold.

In those countries, where atmosphere of winter is persists around the year, in this region the skin of the person becomes more harder than comparatively to person of the tropical region. The persons, who are living in a cold atmosphere, their skin quality is somehow changed comparatively to those who are living in tropical regions and where cold or winter persists only few days or few months.

Case studies with the help of ETG AyurvedaScan system reveals that traces recorded from European countries and Tropical regions patients are differs from elevation , which is due to hard and soft skin of the patient belongs to specific regions. Where cold season is very prominent the skin of the person are thick and deposition of fat layer in under skin persists.

Although the diagnosis of disorders are same, ayurvedic fundamentals evaluations are same and no differences seen in between the results except the hights and longitudinal appearence of traces, which is due to skin of the subjects undergone for the test.

However, this dose not matter. Here TRIBHUVAN KIRTI RAS is beneficial in the following ailing conditions;

1- Cures exposure of cold either from cold of winter or wetting in rain
2- Used in almost all kinds of FEVER of any origin, whatever they may be.
3- Lower down HIGH FEVER just like PARACETAMOL do in feverish conditions.
4- suppressed sweat comes out after use of this remedy
5-= Very fast acts in Just appeared fever
6- acts fast in Phlegm-cough-Fever conditions
7- Useful in Pneumonia and Pneumonia like syndromes
8- Influenza of any origin and anywhere
9- Useful in small pox and measles and like syndromes

Doses; One /two tablets should be taken four hourly with tea or warm water or Ginger Tulasi tea

Ayurveda have many remedies for winter ailing conditions, TRIBHUVAN KIRTI RAS is one of them. Those who desire they should use this safe remedy.

मानसिक रोगी का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन का ट्रेस रिकार्ड ; Psychosomatic Disorders of a patient , studies of ETG AyurvedaScan Traces


लगभग ३०० किलोमीटर दूर से आये एक पुरूष रोगी का नीचे दिया गया ट्रेस रिकार्ड है, जो दिनान्क १८ अक्टूबर २०११ को अन्कित किया गया / मरीज ने अनुरोध किया कि उसे अपने घर वापस जाने के लिये कानपुर सेन्ट्रल स्टेशन से चार पान्च घन्टे बाद रेल गाड़ी मिलेगी , इसलिये वह चाहता है कि उसकी रिपोर्ट बनाकर दवा आदि की जैसी व्यवस्था हो सके , सीमित समय के अन्दर करके दे तो बहुत अच्छा होगा, ताकि वह वापसी की गाड़ी पकड़ कर अपने घर वापस जा सके /
मैने उसका अनुरोध मान लिया और कहा कि अर्जेन्ट रिपोर्ट बनवाने में उसे रूपये ४०० अतिरिक्त और अधिक लग जायेन्गे और लगभग तीन घन्टे के अन्दर रिपोर्ट मिल जायेगी /

मैने रोगी की यह बात सुनकर कहा कि पहले आप अपना तुरन्त ETG AyurvedaScan करायें और फिर बाद में जब रिपोर्ट बन जायेगी तब देखून्गा कि क्या क्या आपके शरीर के अन्दर बीमारियां निकली हैं / मैने इस रोगी का पहले ई०टी०जी० रिकार्ड किया फिर उसके बाद जितनी जल्दी हो सका step by step सारे procedure निपटा करके लगभग ३ घन्टे बाद उसकी रिपोर्ट बन पायी /

इस व्यक्ति के निम्न रोगों का निदान ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के अध्ध्यन के पश्चात निर्धारित हुआ/

१- रोगी को लेटने [on lying position] की स्तिथि में High Blood Pressure की tendency है जिसके कारण उसे रात में नीन्द न आने की तकलीफ है /
२- रोगी का रक्त का प्रवाह सिर की ओर अधिक है , ऐसा ट्रेस रिकार्ड ‘ई’ मे देखने में आया है / जब भी इस तरह की पाजिटिव ट्रेसेस होती है , यह मानसिक रोग यानी psychological disorders दर्शाती हैं /
३- ३- ‘ई’, ‘एफ’, ‘जी’ ट्रेसेस रिकार्ड देखने में पाजिटिव और निगेटिव डिफ्लेक्सन एक जैसे नेचर के हैं / ‘जी’ ट्रेस के ट्रेस अन्र्तराल को देखने से पता चलता है कि इस व्यक्ति को “डायबिटीज” की बीमारी है / लगभग २८० पीका की नाप से यह स्थापित हुआ कि, जिस समय इस व्यक्ति का ट्रेस रिकार्ड किया गया था, उस समय इस व्यक्ति के रक्त में रक्त शर्करा को इसी सीमा में उपास्तिथि होना चाहिये / इसी समय तुरन्त ही Glucometer से जान्च करने में पता चला कि व्यक्ति की रक्त शर्करा Blood sugar level 268 mg per dilution उपस्तिथि है /

४- इसे हाई ब्लड प्रेशर की तकलीफ है, ट्रेस ‘a’ को देखने से पता चला कि रोगी को ब्लड प्रेशर की बीमारी है /

इसे अन्य बीमारियां भी निकली, जो उसकी रिपोर्ट बनने के बाद बतायी गयी /

रोगी ने बाद मे सारी बात बतायी कि उसकी पत्नी पागल है और उसका पारिवारिक जीवन सुखी नहीं है / उसे खाना भी हॊटलों में जाकर खाना पड़ता है /

मैने उसे प्रेस्क्रिप्सन लिख कर आयुर्वेदिक दवाये खाने के लिये कहा और उससे कहा कि उसे शारीरिक बीमारी कम है और मानसिक अधिक / इसलिये मानसिक दबाव जितना ही कम से कम होगा , उसकी तकलीफ उतनी ही तेजी से ठीक होगी /

Similarly another one case of Psychosomatic disorders case came for the treatment on 18th October 2011. His ETG AyurvedaScan Trace rcords are  having  similar pattern as to earlier. Although he have some other PSYCHOLOGICAL PROBLEMS , which tends him sick, below is his trace records  to evaluate in view of AYURVEDIC TREATMENT.

ETG AyurvedaScan , which examines the whole body for purpose of AYURVEDIC TREATMENT and management , have major diagnostic value for physical ailments detection.

दान्तों तथा मसूढों और मुख के अन्दर के तमाम विकारों के लिये आयुर्वेद का दन्त मन्जन ; Ayurvedic Tooth Powder for Dental and Oral Problems


आयुर्वेद पूर्ण चिकित्सा विग्यान है / आदि काल से हमारे चिकित्सा पूर्वजों ने समाज को स्वस्थय बनाये रखने के लिये बहुत से नुस्खे लिपिबध्ध करके दिये है , जो आज भी उसी तरह से कारगर और प्रभावशाली है, जैसे उस समय थे /

दान्तों के रोगों के उपचार के लिये आयुर्वेद के शास्त्रीय ग्रन्थों में प्राय:
सभी आचार्यों ने जितना भी अनुभव और ग्यान प्राप्त किया था , उसका वर्णन बहुत सूच्छमता के साथ किया है /

चिकित्सा चन्द्रोदय़ चिकित्सा ग्रन्थ में दान्त के रोगों के लिये एक नुस्खा दिया गया गया है, जो दान्त की बहुत सी बीमारियों में बहुत प्रभाव शाली साबित हुआ है / यह बहुत सरल और सफल योग है /

योग मे निम्न काष्ठौशधियों का मिश्रण है /

मिश्रन; हरड़, बहेडा, आमला, सोन्ठ, काली मिर्च, छोटी पीपल, शोधित तुथ्थ, सेन्धा नमक, रूचक नमक, विड नमक, पतन्ग, माजूफल , ये सब द्रव्य बराबर बराबर मात्रा मे लेना चाहिये / इन सभी द्रव्यों को महीन कूट पीसकर पाउडर जैसा बना लेना चाहिये और बाद में मैदा छानने वाली चलनी से छान लेना चाहिये और किसी एयर टाइट डिब्बे में बन्द करके रख लेना चाहिए /

उपयोग के लिये किसी छोटे प्लास्टिक के डिब्बे या कान्च की शीशी में इस चूरन को रख लेना चाहिये /

एक ग्राम चुर्ण को लेकर दान्तों में मलना चाहिये / जो ब्रश से इस मन्जन को लेकर उपयोग करना चाहे वे ब्रश के साथ इसे दान्तों में मल सकते है / जिन्हें दान्तों मे दर्द हो, मसूढों मे दर्द हो, जिनके दान्त सेन्सिटिव हो गये हों, ठन्डा या गरम पानी लगता हो, या हवा या छूने से दर्द होता हो या दान्तों की अन्य कोई तकलीफ हो , उन सबमे यह दन्त मन्जन असर करक है /

मन्जन करते समय यदि इसमें एक बून्द “नीम का तेल” मिला लें और फिर मन्जन करें तो मुख रोग के लिये यह एक उत्कृष्ठ औषधि हो जाती है /

जिनके दान्त कमजोर हो गये हैं , मसूढॊ के विकर हों, पायरिया से पीडित हों , दान्त हिलने लगे हों और जड़ से कमजोर हो रहे हों, उनको यह मन्जन अवश्य उपयोग में लेना चाहिये /

नीम के तेल को इस मन्जन में मिला लेने से यह मन्जन दान्तों के सभी प्रकार के infection को दूर कर देता है, दान्तों में लगे हुये कीड़ों को यह नष्ट कर देता है /

इस मन्जन को ब्रश से न लगाकर यदि उन्गलियों से मन्जन करते है तो अधिक फायदा करता है और शीघ्र लाभकारी है /

A FEMALE case of HYPER-THYROIDISM with other gyneacological disorders एक महिला रोगी की हाइपेर-थायरायड के साथ साथ अन्य गायनोकोलाजिकल बीमारी की समस्या



यह केस एक ३५ साल की महिला का है , जिसको Hyper Thyroidism की शिकायत कई साल से थी / मरीजा ने दिनान्क २६.०६.२०१० को परामर्श किया था /

महिला को निम्न शिकायते थी, जिनके लिये वह परामर्श के लिये आयी थी /

१- अनियमित मासिक धर्म
२- मासिक होने से १० दिन पहले से मानसिक तनाव , अत्यधिक गुस्सा, झगड़ालू प्रवृति
३- मासिक के समय अत्यधिक रक्त श्राव, जिसके कारण रोगिणी बहुत कमजोर हो जाती थी
४- रोगिणी के स्तनॊं में सूजन और गान्ठे पड़ जाती है
५- पेट में सूजन

रोगिणी एलोपैथी का बहुत इलाज करा चुकी थी, उसको एलोपैथी के इलाज से कोई आराम नही मिला / मैने उसको सलाह दी कि अगर वह आयुर्वेदिक इलाज कराना चाहिती है तो वह एक ई०टी० जी० आयुर्वेदस्कैन का परीक्षण करा ले तो उसके सारे शरीर की बीमारियों के बारे मे पता चल जायेगा / दूसरा ऐसा कोई सरल तरीका नहीं है, जिससे उसकी बीमारी के बारे मे पता लगाया जा सके /

रोगिणी ने अपना ई०टी०जी० परीक्षण कराया, जिसकी फाइन्डिन्ग्स निम्न प्रकार से थी /

[अ] त्रिदोष;

कफ १३७.५२
पित्त ६८.७६
वात ५८.१५

[ब] सप्त धातु ;

मान्स १०२.०३
मेद ८१.००

[स] शरीर मे व्याप्त तकलीफॊं का अन्कलन

Mammery Glands 134.00
Lumber spine 122.22
Urinary Bladder 112.50
Mental/emotional/intellect 110.00
Sinusitis 110.00
Thyroid Pathophysiology 106.67
Uterus anomalies 88.50
Pelvic inflammatory disease 88.50
Renal anomalies 80.00
Menstrual anomalies 46.67

[द] रोग निदान ;

Bowel’s pathophysiology
Cervical spondylitis with Lymphadenitis
Epigastritis
Hormonal anomaly
Inflammatory and irritable bowel syndromes
Large intestines anomalies
Lumber pain
Mammary glands anomalies
Nervous temperaments
Tachycardia

इस रोगुणी को बताया गया कि उसे उक्त बीमारियां है / यह देखकर वह घबरा गयी कि इतनी बीमारियां एक साथ हो गयीं है / मैने उसको बताया कि ई०टी०जी० सिस्टम चूंकि सारे शरीर का स्कैन करता है इसलिये जो भी बीमारी या कार्य विकृति होती वह यह सब बता देता है / आयुर्वेद में सम्पूर्ण शरीर की चिकित्सा करने का विधान है, इसलिये जो भी फाइन्डिन्ग्स है उन सबका इलाज एक साथ होगा और आपको सारी तकलीफॊं में एक साथ आराम मिलेगा /

यह सुनकर मरीजा आश्वस्त हो गयी और उसको निम्न चिकित्सा व्यवस्था दी गयी /

अ- कान्चनार गुग्गुल १ गोली ; गले की गान्ठ के लिये
रज: प्रवर्तिनी वटी १ गोली ; मासिक धर्म की अनियमितता के लिये
ब्राम्ही वटी १ गोली ; नरवस्नेस और धड़कन के लिये
पुष्य्यानुग चूर्ण २ ग्राम के साथ दिन में दो बार सादे पानी से

ब- दश्मूलारिष्ट १० मिलीलीटर
कुमारीआसव १० मिलीलीटर
भोजन करने के बाद दोनों समय

मरीजा को १२० दिन दवा सेवन करायी गयी / दवा सेवनोपरान्त वह पूर्ण स्वस्थय है और उसे मासिक सम्बन्धी कोई तकलीफ नहीं है / उसकी थायरायड भी अब सामान्य कार्य कर रही है /

विटामिन की गोलियां खाने से कोई फायदा नहीं


यह हम नहीं कह रहे है, यह कह रहे है ब्रिटॆन के चिकित्सा शोध कर्ता / प्रकाशित खबर को पढ ले , आपको जानकारी हो जायेगी /

हम पहले भी कई बार कह चुके है कि विटामिन के अधिक उपयोग से शरीर मे “हाइपर विटमिनोसिस” की स्तिथि पैदा हो जाती है, जिसके परिणाम स्वरूप बहुत सी ऐसी बॊमारियां हो जाती है, जो बाद में असाध्य रोगॊ की श्रेणी में शुमार होने लगता है /

External Application on LEUCODERMA WHITE PATCHES triggers more violent effects and boosts metastasis of WHITE PATCHES in other parts of body


External Application on LEUCODERMA WHITE PATCHES triggers more violent effects and boosts metastasis of WHITE PATCHES in other parts of body

Our observational study shows that external applications like anti-vitiligo creams and oils for use in the treatment of the LEUCODERMA / VITILIGO, which are instructed by phyrician to apply on the white patches, causes suppressive effects and as a result, the metastasis of the hypomelinosis migrates to the other parts of the body, where the expression of the white patches becomes more prominent and strong.

Many cases treated by the other physician, using external application, patient history reveals the fact that external application causes suppression and more white patches grown in other parts within few hours to few days time rapidly.

After invention of ELECTRO TRIDOSHA GRAPHY ; ETG AyurvedaScan technology, treatment of the bodily disorders are totlly dependent on the findings of the ETG report. The development of the idea of the treatment bases on the ETG findings was successful, when AYURVEDIC MEDICINES were selected on the ground of the measured intesnsity of the Organs / parts of the body including AYURVEDIC FUNDAMENTALS.

In many LEUCODERMA cases, we have not used any external application of any kind and the treatment procedure was lend on the report and findings of the ELECTRO TRIDOSHA GRAPHY ; ETG AyurvedaScan totally. The Internal medicine were given according to the obtained pathophysiological measured intensity of the VISCERAS and other parts. These medicines were AYURVEDIC classical preparation over all.

Our study concludes that when internal organs beomes slowly and gradually normal in their own physiological activities, the pathophysiology of the organs normalizes, and as a result , pigmentation channel becomes free from any inhibition and hurdles and thus abnormal function of the skin becomes normal. This way again melenin pigments the skin with the normal functioning.

In my opinion, while treating LEUCODERMA, no external application should be used, either in any form of Oil or in cream.

LEUCODERMA CURE of a Medical Student [Allopathy] ; ETG AyurvedaScan report based AYURVEDIC Treatment relieved her other complaints including VITILIGO


 
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An Allopathy Medical student consulted me for her LEUCODERMA problem on 6th February 2011. I recorded her ETG AyurvedaScan and the treatment was given her on the basis of the findings of the ETG report. The same day a Photo of the one part of the VITILIGO was taken by me for record purposes. The following PHOTO shows the anomaly.

She was having white patches on both the Lower Extremeties and some smaller ones on her back , Torso and her genital parts etc etc

See, observe and compare the PHOTOS taken after a few months period.

This Photo was taken on 6th February 2011 on her first visite to clinic. This is the Right Lower Extremity -  Right Leg white patches

This Photo was taken on 6th February 2011 on her first visite to clinic. This is the Right Lower Extremity - Right Leg white patches

COMPARE PHOTO RIGHT LEG White PATCHES from below PHOTO;

This Photo was taken on  29th May 2011 on her follow-up visite to clinic. This is the  RIGHT  Lower Extremity -  Leg white patches, see the changes in color of white patches

This Photo was taken on 29th May 2011 on her follow-up visite to clinic. This is the RIGHT Lower Extremity - Leg white patches, see the changes in color of white patches

 LEFT LEG Comparison ;

This Photo was taken on 6th February 2011 on her first visite to clinic. This is the  Left  Lower Extremity -  LEFT Leg white patches

This Photo was taken on 6th February 2011 on her first visite to clinic. This is the Left Lower Extremity - LEFT Leg white patches

This Photo was taken on 29th MAY 2011 on her follow-up visite to clinic. This is the  LEFT  Lower Extremity -  Leg white patches, see and compare the changes in colour of white patches

This Photo was taken on 29th MAY 2011 on her follow-up visite to clinic. This is the LEFT Lower Extremity - Leg white patches, see and compare the changes in colour of white patches

 
CONCLUSION; Leucoderma and all disease conditions can be well treated with expertise way, if the AYURVEDIC Treatment is taken after ETG AyurvedaScan findings. Cure can be asured af all the bodily ailments, whatever they may be lebelled or nomenclature.
 
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