मानसिक रोगी का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन का ट्रेस रिकार्ड ; Psychosomatic Disorders of a patient , studies of ETG AyurvedaScan Traces

लगभग ३०० किलोमीटर दूर से आये एक पुरूष रोगी का नीचे दिया गया ट्रेस रिकार्ड है, जो दिनान्क १८ अक्टूबर २०११ को अन्कित किया गया / मरीज ने अनुरोध किया कि उसे अपने घर वापस जाने के लिये कानपुर सेन्ट्रल स्टेशन से चार पान्च घन्टे बाद रेल गाड़ी मिलेगी , इसलिये वह चाहता है कि उसकी रिपोर्ट बनाकर दवा आदि की जैसी व्यवस्था हो सके , सीमित समय के अन्दर करके दे तो बहुत अच्छा होगा, ताकि वह वापसी की गाड़ी पकड़ कर अपने घर वापस जा सके /
मैने उसका अनुरोध मान लिया और कहा कि अर्जेन्ट रिपोर्ट बनवाने में उसे रूपये ४०० अतिरिक्त और अधिक लग जायेन्गे और लगभग तीन घन्टे के अन्दर रिपोर्ट मिल जायेगी /

मैने रोगी की यह बात सुनकर कहा कि पहले आप अपना तुरन्त ETG AyurvedaScan करायें और फिर बाद में जब रिपोर्ट बन जायेगी तब देखून्गा कि क्या क्या आपके शरीर के अन्दर बीमारियां निकली हैं / मैने इस रोगी का पहले ई०टी०जी० रिकार्ड किया फिर उसके बाद जितनी जल्दी हो सका step by step सारे procedure निपटा करके लगभग ३ घन्टे बाद उसकी रिपोर्ट बन पायी /

इस व्यक्ति के निम्न रोगों का निदान ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के अध्ध्यन के पश्चात निर्धारित हुआ/

१- रोगी को लेटने [on lying position] की स्तिथि में High Blood Pressure की tendency है जिसके कारण उसे रात में नीन्द न आने की तकलीफ है /
२- रोगी का रक्त का प्रवाह सिर की ओर अधिक है , ऐसा ट्रेस रिकार्ड ‘ई’ मे देखने में आया है / जब भी इस तरह की पाजिटिव ट्रेसेस होती है , यह मानसिक रोग यानी psychological disorders दर्शाती हैं /
३- ३- ‘ई’, ‘एफ’, ‘जी’ ट्रेसेस रिकार्ड देखने में पाजिटिव और निगेटिव डिफ्लेक्सन एक जैसे नेचर के हैं / ‘जी’ ट्रेस के ट्रेस अन्र्तराल को देखने से पता चलता है कि इस व्यक्ति को “डायबिटीज” की बीमारी है / लगभग २८० पीका की नाप से यह स्थापित हुआ कि, जिस समय इस व्यक्ति का ट्रेस रिकार्ड किया गया था, उस समय इस व्यक्ति के रक्त में रक्त शर्करा को इसी सीमा में उपास्तिथि होना चाहिये / इसी समय तुरन्त ही Glucometer से जान्च करने में पता चला कि व्यक्ति की रक्त शर्करा Blood sugar level 268 mg per dilution उपस्तिथि है /

४- इसे हाई ब्लड प्रेशर की तकलीफ है, ट्रेस ‘a’ को देखने से पता चला कि रोगी को ब्लड प्रेशर की बीमारी है /

इसे अन्य बीमारियां भी निकली, जो उसकी रिपोर्ट बनने के बाद बतायी गयी /

रोगी ने बाद मे सारी बात बतायी कि उसकी पत्नी पागल है और उसका पारिवारिक जीवन सुखी नहीं है / उसे खाना भी हॊटलों में जाकर खाना पड़ता है /

मैने उसे प्रेस्क्रिप्सन लिख कर आयुर्वेदिक दवाये खाने के लिये कहा और उससे कहा कि उसे शारीरिक बीमारी कम है और मानसिक अधिक / इसलिये मानसिक दबाव जितना ही कम से कम होगा , उसकी तकलीफ उतनी ही तेजी से ठीक होगी /

Similarly another one case of Psychosomatic disorders case came for the treatment on 18th October 2011. His ETG AyurvedaScan Trace rcords are  having  similar pattern as to earlier. Although he have some other PSYCHOLOGICAL PROBLEMS , which tends him sick, below is his trace records  to evaluate in view of AYURVEDIC TREATMENT.

ETG AyurvedaScan , which examines the whole body for purpose of AYURVEDIC TREATMENT and management , have major diagnostic value for physical ailments detection.

External Application on LEUCODERMA WHITE PATCHES triggers more violent effects and boosts metastasis of WHITE PATCHES in other parts of body

External Application on LEUCODERMA WHITE PATCHES triggers more violent effects and boosts metastasis of WHITE PATCHES in other parts of body

Our observational study shows that external applications like anti-vitiligo creams and oils for use in the treatment of the LEUCODERMA / VITILIGO, which are instructed by phyrician to apply on the white patches, causes suppressive effects and as a result, the metastasis of the hypomelinosis migrates to the other parts of the body, where the expression of the white patches becomes more prominent and strong.

Many cases treated by the other physician, using external application, patient history reveals the fact that external application causes suppression and more white patches grown in other parts within few hours to few days time rapidly.

After invention of ELECTRO TRIDOSHA GRAPHY ; ETG AyurvedaScan technology, treatment of the bodily disorders are totlly dependent on the findings of the ETG report. The development of the idea of the treatment bases on the ETG findings was successful, when AYURVEDIC MEDICINES were selected on the ground of the measured intesnsity of the Organs / parts of the body including AYURVEDIC FUNDAMENTALS.

In many LEUCODERMA cases, we have not used any external application of any kind and the treatment procedure was lend on the report and findings of the ELECTRO TRIDOSHA GRAPHY ; ETG AyurvedaScan totally. The Internal medicine were given according to the obtained pathophysiological measured intensity of the VISCERAS and other parts. These medicines were AYURVEDIC classical preparation over all.

Our study concludes that when internal organs beomes slowly and gradually normal in their own physiological activities, the pathophysiology of the organs normalizes, and as a result , pigmentation channel becomes free from any inhibition and hurdles and thus abnormal function of the skin becomes normal. This way again melenin pigments the skin with the normal functioning.

In my opinion, while treating LEUCODERMA, no external application should be used, either in any form of Oil or in cream.

जब ब्लड प्रेसर की दवा खाते रहने के बाद भी ब्लड प्रेसर समान्य न हो तब क्या करे…………

बहुत से ऐसे मरीजों को देखा है जिनको एलोपैथी की ब्लड प्रेसर की दवा खाने के बाद भी उनका ब्लड प्रेसर सामान्य नहीं होता, जबकि उनकी सभी तरह की आधुनिक जान्च कर ली गयीं और सब कुछ समान्य निकला या सामान्य निकलता है /

मैने ऐसे मरीजों को काफी समय तक Monitor किया है, बिना कोई अतिरिक्त दवा के / वे जो भी Allopathy की दवा खा रहे थे, मैने उनको वही दवा , जिस Doctor ने prescribe की थी, Doctor की सलाह लेकर लगातार लेने की सलाह दी / लेकिन इस सबके बाव्जूद उनका Blood Pressure कम नहीं हुआ /

ऐसे बहुत से लोग हैं जिनको इस तरह की परेशानी बनी रहती है, उनको मै कुछ सुझाव दे रहा हू, जिन पर अमल करने से फायदा हो सकता है /

आयोडीन जैसे नमक और सादा समुद्री नमक खाना बन्द कर दें और इसकी जगह सेन्धा नमक का प्रयोग करना शुरू कर दें / घर के सभी लोग सेन्धा नमक खाने से बहुत सी आये दिन की बीमारियों से निजात पा जायेन्गे / सेन्धा नमक खने से Blood Pressure कम होने लगता है /
अपना पेट साफ रखे / परन्तु इसके लिये कोई विरेचक चूर्ण या दस्त साफ़ लाने वाला प्दार्थ न ले / ज्यादा कब्ज की हालत में अमल्तास को पानी में भिगोकर खाने के पहले सेवन करें / अमल्तास की मात्रा कितनी लेनी है , बेह्तर है , अपने नजदीक के किसी वैद्य या हकीम से पूछ लें / हलका विरेचन के लिये त्रिफला चूर्ण का प्रयोग कर सकते है /
सुबह का नश्ता बन्द कर दें और केवल एक गिलास फलों का रस या सादा दूध सेवन करें /
दोपहर में हल्का भोजन लें और अपनी भूख से कम खायें /
अचार, दाल मोठ, नमकीन सब बन्द कर दें / जब भुख लगे तब फल या फलों का रस लें /
जिनका ब्लड प्रेसर बढा हुआ रहता है उनका इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफ परीक्षण में कई तरह की कार्य विकृतियां मिलती है, जिनमें Hydro Musculosis, Epigastritis, swelling bowels pathophysiology इत्यादि बातें शामिल होती है / इन कारणॊं का इलाज कर देने से बढा हुआ blood pressure कम होने लगता है /
जब allopathy दवा खाने के बाद भी blood pressure कम नही होता तो चिकित्सक दवा की मात्रा बढा देते है / ऐसा करना ठीक नहीं होता / इससे अछ्छा है कि allopathy दवा खाने के साथ साथ यदि आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक दवा खाये तो अधिक फायदा उठा सकते है / अपने नजदीक के किसी वैद्य या होम्योपैथिक चिकित्सक से सम्पर्क करें /
मान्सिक तनाव से दूर रहें और कोशिश करें कि मन को शान्त रखें / आपकी किसी समस्या का हल नही हो रहा है तो उस समस्या के हल के लिये प्रयास करे और सब कुछ ईश्वर के ऊपर छोड दें / यह बात हमेशा ध्यान में रखें कि सब कुछ और बहुत कुछ हम नही कर सकते / मन में इस बात का विश्वास करें और हमेशा POSITIVE THINKING को दिशा दें /

अपने सभी कार्य नियमित करें / कम से कम ७ घन्टा आराम करेम / मश्तिष्क यदि ज्यादा काम करने से थक जाये तो बीच बीच में थोड़ी थोड़ॊ देर के लिये आराम दे /

इन सब उपायों को करने से blood pressure अवश्य सामान्य होगा, इसका विश्वास करें / जब ऐसे उपाय करने से सैकड़ॊ लोगो के blood pressure सामान्य हो गये है तो उन सबका भि सामन्य होगा , जो यह सलाह अपनायेन्गे /

इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी ई०टी०जी० मशीन का निर्माण कार्य आज दिनान्क २६ सितम्बर २००९ शुभ दिन शनिवार “दुर्गा अष्टमी” के दिन से शुरू : Fabrication of Electro Tridosha Graphy E.T.G. Machine begins from today dated 26 September 2009 on the pious day of “Durga Ashtami”

ईश्वर की कृपा, भगवान धनवन्तरि देव के आशिर्वाद और माता दुर्गा भवानी की अनुकम्पा से आज दिनान्क २६ सितम्बर २००९ को कई वर्षों से लम्बित आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान के लिये नवीन आविष्कृत रोगों के निदान ग्यान और आयुर्वेद के मौलिक सिद्धान्तों को साक्ष्य स्वरूप प्रस्तुत करने वाली तकनीक इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी ई०टी०जी० मशीन का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है ।

इसके निर्माण कार्य में लगे हुये हार्डवेयर और साफ़्ट वेयर इन्जीनियरों ने बताया है कि वे इस मशीन का निर्माण एक निश्चित समय सीमा के अन्दर कर देंगें ।

इस मशीन में २१ से अधिक लीड की रेकार्डिंग एक साथ होगी और रिकार्डिंग के साथ ही तत्काल रिपोर्ट मिल जायेगी जिसमे कुछ मिनटॊं का समय लगेगा ।

हमारा प्रयास रहेगा कि इस मशीन को अत्याधुनिक तकनीक से लैस किया जाये । हलाकि इसके साथ एक लैप्टाप कम्प्यूटर तथा एक प्रिन्टर की आवश्यकता होगी । मशीन और साफ्ट वेयर इनके साथ ही यू०एस०बी० पोर्ट से जोड़े जायेंगे । मशीन से जुड़े सेन्सर रोगियों के शरीर में निर्धारित स्थानों पर चिपकाये जायेंगे ।

जैसा कि सभी जानते हैं कि अभी तक इस परीक्षण के लिये हृदय रोग की जान्च के लिये प्रयोग की जाने वाली इलेक्ट्रो कार्डियो ग्राफी ई०सी०जी० मशीन के केवल रिकार्डर का उपयोग आयुर्वेद के इस स्कैन ई०टी०जी० के लिये किया जाता है । इस रिकार्ड किये गये ट्रेस को बाद में कम्प्य़ूटर की मदद से मैनुअली तरीके से रिपोर्ट बनायी जाती थी जिसमें लगभग २ घन्टे लग जाते थे । प्रस्तावित मशीन केवल कुछ मिनटॊ में यह काम पूरी कर देगी ।

एक्यूट मायेलायड ल्यूकीमिया: Acute Myeloid Leuceamia ; छह माह कप्रेग्नेन्ट महिला का ई०टी०जी० रिकार्ड और रिपोर्ट : E.T.G. Record of Six month’s Pregnent Lady with their complications

यह एक बीस साल की प्रेग्नेन्ट महिला का ई०टी०जी० ट्रेस रिकार्ड है । इसे देखिये और समझिये कि ई०टी०जी० किस प्रकार आयुर्वेद के शोध कार्यों में और समान्य चिकित्सा अभ्यास में फल दायी सिद्ध हो चुका है ।

इस  महिला के परिवार के जिम्मेदार व्यक्ति हमारे कैण्ट केन्द्र में पूर्व में किये गये इलाज और परीक्षण रिपोर्ट लेकर आये और हकीम शरीफ अन्सारी को कन्सल्ट किया । परीक्षण रिपोर्ट में खून की जान्च प्रमुख थी ।

खून की जान्च रिपोर्ट निम्न प्रकारहै :

Total Leucocyte counts : 43, 400  तेंतालिस हज़ार [Normal: 4000 -11000/cmm]

Heamoglobin 04.8 mg% [Normal 12- 16 mg/dl]

Sodium ,Pottassium  , Calcium Level  ये सब सामान्य से नीचे

अल्ट्रा साउन्ड परीक्षण से पता चला की रोगिनी के  छह माह की प्रेगनेन्सी है

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रोगिणी ने कानपुर और लखनऊ शहर  के सभी बड़े चिकित्सा सन्सथानों मे जाकर दिखाया, सभी एलोपैथी के चिकित्सकों ने कहा किने कहा कि इस बीमारी की अवस्था का हमारे पास कोई इलाज नहीं है ।

 

रोगिणी की कोई रिश्तेदार हकीम शरीफ के पास इलाज करा चुकी थी , इसलिये रोगिणी कन्सल्टेशन के लिये हकीम सहब के पास आयी थी ।

 

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हम इस रोगिणी की चिकित्सा कर रहे है  । इसे आयुर्वेदिक दवायें दे रहे हैं ।

समय समय पर इस रोगिणी की हालत के बारे में , इसी ब्लाग के माध्यम से , जानकारी देने का प्रयास किया जायेगा ।

Updated case report: [Dated 30 August 2009]

इस रोगिणी को सात दिन की आयुर्वेदिक दवा दी गयी थी । रोगिणी के पिता ने एक हफ्ता दवा खाने के बाद के परिणामों को बताते हुये कहा कि ” अब रोगिणी की हालत पहले से बेहतर है और उसके स्वास्थय में सुधार हुआ है” ।

रोगिणी के पिता एक हफ्ते की और दवा लेकर चले गये हैं ।

Updated report: 05.09.2009

Patient visited our center with cheerful smile. We examined her and asked several questions regarding her health condition.

She expressed her views about her health . We were satisfied about her health condition after examination. We asked her father to go for Blood examination DLC and TLC etc.

Patient belongs to Country side area and a remote district away from Kanpur.

Her General condition is much better , when we saw her earlier.Now she is running in her Eight month pregnency duration.

Update on 15 September 2009 ;;;

A pathological ivestigation done on the 09 September 2009.

 

The report copy is presented here. Anybody can see in the report that patient’s heamoglobin increased 2 percent and TLC becomes normal range.

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इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी ई०टी०जी० की विकास यात्रा का चतुर्थ वृतांत: Fourth developmental stage of ETG Tek

सन २००५ में ई०टी०जी० तकनीक में उसी प्रकार से सभी प्रयास किये जा रहे थे, जितना सम्भव हो सकता था । जैसा कि पहले कहा जा चुका है कि इस तकनीक के बारे में वैद्य समाज को सूचना देने के लिये पत्र तथा अखबारों का सहारा लिया गया था ।

जुलाई सन २००५ में मुझे आयुर्वेद-आयुष विभाग, स्वास्थय एवं परिवार कल्याण मन्त्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली द्वारा पत्र से सूचित किया गया कि ETG technology से सम्बन्धित कार्य, निदेशक, केन्द्रीय आयुर्वेद एवं सिद्ध अनुसन्धान परिषद, अनुसन्धान भवन, जनक पुरी, नई दिल्ली द्वारा सम्पन्न कराये जायेंगे, यदि इसे ठीक समझा गया तो ।

सितम्बर सन २००५ में Director, Central Council for Research in Ayurveda and Siddha, CCRAS द्वारा भेजा गया पत्र मिला, जिसमें अक्टूबर २००५ में मुझे कौन्सिल में आकर तकनीक का विस्तृत “वैज्ञानिक Presentation और सम्पूर्ण details ” देने के लिये अनुरोध किया गया था । मुझे कानपुर से दिल्ली आने जाने का 2nd Sleepar class का रेलवे टिकट का पैसा भी दिया गया ।

अक्टूबर २००५ में, मैं अपने ETG tek से सभी सम्बन्धित Documents, CD Presentation लेकर CCRAS, New Delhi गया तथा वहां कमेटी रूम में प्रोजेक्टर की सहायता से प्रेजेन्टेशन प्रस्तुत किया । यह Presentation एक Technical experts की टीम के सामने प्रस्तुत किया गया था । यहां भी इस तकनीक से समबन्धित तरह तरह के सवाल पूछे गये, जिनका मैने उत्तर दिया ।

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Picture shows : Changes done by Dr. Desh Bandhu Bajpai, according to the need of Ayurveda Medical science

पहली बार जब आयुष विभाग में मैने प्रेजेन्टेशन दिया था, उससे यह प्रेजेन्टेशन ज्यादा बेहतर था । क्योंकि मैने बहुत मेहनत के साथ इस तकनीक के सारे पहलुओं को वैज्ञानिक दृस्टिकोण के साथ प्रस्तुत करने की चेष्टा की थी । यहां जिन विषयों पर चर्चा की गयी थी, वे विषय Cardiology, Human Physiology, Human Anatomy, Physics, Maganetism, Electronics आदि आदि से सम्बन्धित थे ।

मैने Technical experts को बताया कि ECG machine एक “गैल्वेनिक रिकार्डर” है । शरीर के अन्दर के अन्ग जिस तरह की और जिस intensity level की Electro maganetic emissions होती है, उसे इन्टेन्सिटी के लेवल के हिसाब से यह रेकार्ड कर लेता है, जिसे ट्रेस रिकार्ड कहते हैं । इस प्रक्रिया में Electro Physiology, Action potencial, Ion potencial, Membrane Potential, Electrolytes आदि आदि का समावेश होता है । प्राप्त किये गये Trace record को जांचा जाता है और विशेष प्रकार से develop किये गये software में फीड करके आयुर्वेद के मौलिक सिद्धान्तों का आन्कलन किया जाता है । बाद में शरीर में व्याप्त रोगों की “रोग निदान” की प्रक्रिया की जाती है, जिसमें सेक्टर के हिसाब से Trace examine करते हैं । इस तकनीक में केवल ECG machine का उपयोग बहुत से परिवर्तन के साथ किया गया है और केवल मात्र इसका Galvenic Recorder ही इस्तेमाल करते हैं ।