LEUCODERMA / VITILIGO / SAFED DAAG ; CURE OF A FEMALE CASE


A lady aged 45 years have been cured from LEUCODERMA / WHITE SPOTS/ SAFED DAAG by AYURVEDIC TREATMENT based on ETG AyurvedaScan findings and other innovative examination procedures like Ayurveda Blood Examination and Ayurveda Urine Examination and Ayurveda Thermal Scanning invented by our research center at KANPUR, UP, INDIA.

Photographic evidence shows the progress of cure, shooted time to time according to the need , here is shooted phorographs of begginning and end of the cure process.
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The above and many other photographs are taken time to time for evidencing the process of cure by Ayurvedic medications and management accordingly mentioned in Ayurvedic classics.
She was having white spots almost upper and lower extremeties, corners of lips, below nose and some other sites of body parts.

Below photograph is taken recently, which is showing the complete cure of the LEUCODERMA / WHITE SPOTs PROBLEMS, which she have yester years, now is totally cured by AYURVEDA treatment.
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LATEST Technology of Ayurveda ETG AyurvedaScan bases treatment always fruitful and result oriented in LEUCODERMA DISORDERS.

सफेद दाग बढने और न ठीक होने का कारण ; जीवन शैली में बदलाव , प्रतिकूल खान-पान और कुछ Allopathic दवायें ; LEUCODERMA & Life-style and some Remedies


बहुत से आयुर्वेदिक वैद्य और आयुर्वेदिक चिकित्सक अक्सर पूछते रहते हैं कि सफ़ेद दाग Leucoderma के रोगियों का रोग अचानक ही बहुत तेजी से बढने लगता है , जबकि वे दवा दे रहे होते है और अच्छे से अच्छा इलाज कर रहे होते हैं , उनके रोगी ठीक भी हो रहे होते है फिर ऐसा क्यॊं होता है कि सफेद दाग ठीक होने के बजाय बढते चले जाते है? इस तरह की रोग-बढने से रोकने के सारे उपाय कम नहीं होते, जिससे मरीज और चिकित्सक दोनो के सामने बहुत विचित्र स्तिथि पैदा हो जाती है ?

यद्यपि यह स्तिथि मेरे सामने पिछले २० सालों से कभी नहीं आयी / मैने इस सवाल पर और ऐसी स्तिथि के लिये जिम्मेदार कारणो का पता करने का प्रयास किया है /

पहला कारण मेरी समझ में यह आया है कि लियूकोडर्मा के मरीज स्वस्थय वृत्त के नियमों का पालन नहीं करते है, जिससे उनको पाचन सन्स्थान से सम्बन्धित कार्य- विकृति बनी रहती है / ऐसे रोगी अपचन, एसीडिटी, Irritable Bowel syndromes, Inflammatroy condition of bowels, constipation, irregular bowels आदि आदि से ग्रसित होते हैं / Digestive system से सम्बन्धित यह तकलीफें दूषित खान पान से पैदा होती हैं / कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे है जो सफेद दाग बढाने में सबसे आगे है / जैसे चाऊमिन, सिरका या Vinegar या सिरका युक्त खाद्य पदार्थ, non-veg foods, अत्यधिक मसाला और चर्बी युक्त खाद्य पदार्थ जैसे चाट, समोसा आदि आदि / इन और इन जैसे खाद्य पदार्थ खाने से सफेद दाग बढते है / ऐसे खाद्य पदार्थ Digestive system के लिये बहुत सेन्सिटिव होते है और यह एक तरह से sudden painless allergical reaction like action पैदा करते है जिससे त्वचा की melenine अचानक घटकर सफेद दाग को और अधिक बढाने का काम करती है /

बहुत से रोगियों के रोग-इतिहास chronological case-history को देखने और समझने के बाद यह बात दृस्टिगत हुयी हैं कि जीवन शैली के कारण और दूषित खानपान के कारण सफ़ेत दाग अधिक तेजी से विकसित हुये और उनके रोकने के सभी प्रयास फ़ेल हो गये / किसी किसी रोगी ने बताया कि उनके सफ़ेद दाग हर मिनट में बढते चले गये / किसी ने बताया कि उनके सफ़ेद दाग एक दो दिन में ही इतने बढ गये जो उनकी उम्मीद से परे थे / ऐसा तभी होता है जब शरीर का सिस्टम बहुत सम्वेदन शील हो जाये और अक तरफा कार्य करने लगे /

कई रोगियों के रोग इतिहास को देखने के बाद यह बात भी पता चली कि एलोपैथिक चिकित्सा विग्यान की कुछ दवायें सेवन करने के बाद शरीर में कुछ ऐसे परिवर्तन हुये , जिनके कारण सफ़ेत दाग अधिक तेजी से विकसित हुये और दागो को बढने से रोकने के सभी प्रयास फ़ेल हो गये /

इसी कारण से रोगियों कॊ हिदायत दी जाती है कि उन्हे चाहे कैसे भी acute problem हों या sudden ailments हो जायें , वे एलोपैथी की कुछ दवायें न लें तो बेहतर होगा / देखा गया है कि एलोपैथी की दवा खाने के बाद सफेद दाग किसी किसी रोगी के बहुत बढ जाते हैं फिर किसी तरह से ठीक नहीं होते है या ठीक होने में बहुत ज्यादा समय लग जाता है / इसलिये यदि तकलीफ हो तो फिर आयुर्वेदिक दवायें लें या प्राकृतिक उपचार लेना चाहिये /

Leucoderma के इलाज में बहुत सावधानी बरतनी होती है, यह बहुत sensitive disease condition है, इसलिये पथ्य परहेज , जीवन शैली में बदलाव, खान पान में परहेज और दूसरी हिदायतो को यदि follow किया जाये तो आरोग्य शीघ्र प्राप्त होता है /

सफ़ेद दाग LEUCODERMA बीमारी में बाहर से लगाने वाली दवायें यानी external aaplication से सफ़ेद दाग शरीर में ज्यादा तेजी से फैलने की tendency


सफ़ेद दाग की चिकित्सा करने वाले प्राय: सभी चिकित्सक , मरीज को सफ़ेद दागों के ऊपर औषधियुक्त तेल अथवा औषधियुक्त क्रीम लगाने के लिये देते हैं / यह तेल या क्रीम लगभग सभी चिकित्सा चिधियों में प्रचलित है / मरीज भी जैसा चिकित्सक बताते है , उसी तरह से तेल या क्रीम का उपयोग करता है / कुछ तेल लगाकर धूप में घन्टॊं बैठने के लिये कहते है, कुछ मालिश की तरह से तेल को रगड़ रगड़ कर लगाते है / जैसा चिकित्सक बताता है , वैसा ही मरीज करता है /


पिछले ४५ वर्षॊं से अधिक हो चुके हैं, मै सफेद दाग का इलाज सफ़लता पूर्वक करता चला आ रहा हूं, लेकिन मैने कभी भी किसी भी मरीज को external application की औषधि नहीं दी है /

मेरा External applications यानी त्वचा या सफ़ेद दागों पर बाहर से दवा न देने के पीछे का कारण यह है कि
इससे “Supprressive Disorders” पैदा हो जाते हैं /

इसलिये मेरा अनुभव यह है कि Leucoderma के मरीजों को कभी भी बाहर की दवा यानी external application का उपयोग नहीं करना चाहिये /

सफेद दाग, लियुकोडर्मा ; ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्षण तकनीक आधारित इलाज से सफ़ेद दाग ठीक होने तथा सम्बन्धित आरोग्य प्राप्ति अवश्यम्भावी ; LEUCODERMA is curable now


        

सफ़ेद दाग , जिसे अभी तक सभी लोगों द्वारा यही समझा जाता है कि इसका कोई इलाज नहीं है, लोग बाग समझते हैं कि एक बार यह रोग लग गया तो मरते दम तक नहीं ठीक होता है, चाहे जितना इलाज किया जाये /

लेकिन अब सभी लोगों को यह भ्रम दूर कर लेना चाहिये / इस बीमारी का इलाज अब असम्भव नहीं रह गया है, इस बीमारी का इलाज अब सम्भव है / यह बात हम दावे के साथ इसलिये कह रहे है कि ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन तकनीक द्वारा प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर प्राप्त डाटा को लेकर जब सफ़ेद दाग के रोगियों का इलाज किया गया तो उनको शत प्रतिशत आराम मिला और कई साल बीतने के बाद भी उनको दुबारा यह तकलीफ नही हुयी /

आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान एक मात्र अब ऐसा चिकित्सा विग्यान हो गया है , जिसके पास सफ़ेद दाग या लियुकोडर्मा , White spots, Leucoderma का इलाज है, सटीक और अचूक इलाज है और रोग की तख्सीस करने की हासिल तकनीक है /

नीचे एक सफ़ेद दाग , लियुकोडेर्मा के रोगी के चित्र दिये गये है , जिसे देखिये और समझिये और दूसरों को बताइये कि White spots, Leucoderma का इलाज आयुर्वेद मे है /

लेकिन एक बात यहां मै बता देना चाहता हूं कि यह सब इलाज की विधि ETG AyurvedaScan की रिपोर्ट के आधार पर ही सम्भव हैं / अगर इलाज ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित नहीं होगा , तो आरोग्य प्राप्ति सम्भव नहीं होगी / जैसा कि पहले कहा जा चुका है कि आयुर्वेदग्यों या वैद्यों या आयुर्वेद के प्रैक्टीशनरों द्वारा अन्दाजा लगाकर या कयास लगाकर या कल्पना करके या बिना परीक्षण के इलाज करायेन्गे तो सफ़ेद दाग के इलाज मे सफ़लता कतई नहीं मिलेगी, उलटे सफ़ेद दाग और ज्यादा बढ जाने या फ़ैल जाने का खतरा बरकरार रहेगा /

हमने यहां ETG AyurvedaScan की रिपोर्ट पर आधारित चिकित्सा व्यवस्था द्वारा दिये गये आरोग्य की बात की है , जो सटीक और अचूक चिकित्सा व्यवस्था देती है /

यहां उदाहरण के लिये एक मरीज के कुछ फोटोग्राफ्स दिये जा रहे है, जिसे लियूकोडर्मा , सफेद दाग Leucoderma, White Spots  की बीमारी हो गयी है और जो एलोपैथी तथा होम्योपैथी तथा अन्य चिकित्सा पध्यतियों का इलाज करा करके कोई लाभ न प्राप्त कर सकी / अन्त में इस रोगिणी का इलाज ETG AyurvedaScan  करके जब प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर किया गया , तब इसको आराम मिला / इस रोगिणी के होठों तथा पैरों के अन्गूठों के सफ़ेद दाग तीन माह के इलाज से ठीक हो गये / यह रोगिणी जुलाई २०१० में इलाज के लिये आई थी /

                                                        जुलाई २०१० मे लिया गया चित्र ;

                                            २३ जनवरी २०११ में लिया गया चित्र ;

सभी चित्रों मे सफेद दाग का तुलनात्मक विचार करिये और देखिये / हमारी कोशिश रहेगी कि समय समय पर पूर्ण आरोग्य के चित्र आप तक भविष्य में इस रोगी के मुहय्या करते रहे /

जुलाई २०१० मे लिया गया चित्र ;

जुलाई २०१० मे लिया गया चित्र ;

 

                                          [ Photo taken on 21st MAY 2011 ; See and observe the  pimentation in  white areas ; compare photo from previous PHOTO. ]

        

LEUCODERMA / VITILIGO/ WHITE SPOTS/ SAFED DAAG/SHWET KUSTHA; A case of Female Girl, sucssessfully treated, basing on the findings of Electro Tridosha Graphy ETG AyurvedaScan


 
 
 
 
 
Leucodermal Patches at the beginning of Treatment

Leucodermal Patches at the beginning of Treatment

 
 
 
Leucoderma Patche after  45 days treatment

Leucoderma Patche after 45 days treatment

“][See and observe the recorded trace pattern of the Girl. The trace pattern is showing the unstable lines going every time up and down. All trace patterns are  similar according to their intensity presence in body and organs pathophysiological and pathological conditions]

 

On 04th  April 2010, A Girl aged 07  [Seven] years, belonging to District Unnao, 27 Kilometers away from Kanpur vsited clinic with her parents for Leucoderma /  Safed Daag / Vitiligo / Shwet Kustha on her whole body. I observed her condition and founded that from face to Lower extremeties, she is having smaller to bigger sizes white patches, in head, in torso, in lower extremeties.

 

She was treated earlier by many experts of the Allopathy, Ayurveda, Homoeopathy, Acupressurist, Herbalist and many more. She was given internal and external medications for uses.  Upto some extent the applied medicine responses, but as a reaction , the white patches shifted to another location of body.

 

In Unnao, one Accupressurist, who was treating the girl, when failed , he suggested her parents to consult another physician. Parent asked for the doctor to whom they should consult, because all the well known doctors were consulted earlier from Lucknow, Barabanki, Kanpur , Unnao and other places.  They asked Accupressurist  to suggest them any  physician, who could help them.

 

The Accupressurist opened the Internet and founded my address. He suggested to parents to consult me.

 

Meanwhile the parent came to my clinic after an appointment on o4.o4.2010 at evening at 6.30 pm.

 

I told the parent that my way of treatment is differ to others. First I go for an Electro Tridosha Graphy; ETG AyurvedaScan examination and then after I will handle the case.

 

They agreed and I recorded the ETG of that Girl and asked them to come day after tomorrow.

 

                                                   ETG Report’s DATA

 

As you all know that ETG AyurvedaScan provides data in several parts.  Here the reader will see the data sheet in segregational stages.

 

PART- One

 

Status of TRIDOSHA & TRIDOSHA BHED

 

[All Normal  parameters are 95 to 99 e.v.]

 

164.37 Saman Vata

153.71 Shleshaman Kaphha

139.29 Rasan Kaphha

119.38 Bhrajak Pitta

116.43 Snehan Kaphha

112.00 Ranjak Pitta

102.50 Udaan Vata

101.25 Sadhak Pitta

100.71 Kledan Kaphha

100.00 Pran Vata

93.52 Kaphha Dosha

92.62 Avalamban Kaphha

90.67 Apaan Vata

84.38 Pachak Pitta

82.27 Lochak Pitta

80.56 Vyaan Vata

68.14 Pitta Dosha

60.84 Vata Dosha

 

 

PART- TWO

 

Status of Sapta Dhatu including Tridosha Affected Sapta Dhatu

 

[Normal  ; 95 e.v to 99 e.v.]

 

157.86 Ras Kaphha

138.67 Mans Pitta

133.67 Ras Dhatu

124.38 Ras Pitta

122.86 Asthi Pitta

122.67 Mans Dhatu

121.52 Maans Kaphha

121.33 Mans Vata

119.29 Asthi Kaphha

118.38 Asthi Dhatu

116.56 Majja Pitta

115.60 Asthi Vata

112.50 Majja Kaphha

112.17 Majja Dhatu

110.00 Majja Vata

109.58 Ras VAta

102.10 Med Kaphha

100.52 Shukra Kaphha

95.87 Rakta Kaphha

95.10 Shukra Dhatu

91.48 Med Dhatu

91.20 Rakta Dhatu

90.91 Shukra Vata

89.36 Shukra Pitta

88.89 Rakta Vata

86.40 Med Pitta

81.56 Med Vata

80.89 Rakta Pitta

 

PART- Three

 

Heart Beat  68 per minute

Heamoglobin  11.80 mg%

Calcium  11.84 mg

Vital Force 52 [Normal; 48 e.v.]

Health condition 58.94 [Normal; 90 e.v. to 105 e.v.]

 

PART- Four

 

MALA

 

84.34    Purish

87.81    Mutra

94.0        Swed

 

 

PART-FIVE

 

Main Complaint; ETG Report’s provide two ways diagnosis of diseases [a] by observing the recorded trace pattern by ETG machine  and [b] by computer calculated evolutionised Data of different parts of body.

 

  • Appetite weak
  • Blood anomaly
  • Bowel’s pathophysiology
  • Colon Ascending inflammation, swelling and hardness
  • Epigastritis
  • Electrolytic Imbalances
  • ENT anomalies
  • Irregular interval inbetween ‘a’ and ‘o’ waves
  • Poor function of Liver and Gall Bladder

PART-Six

 

Upper Ten and Lower Ten , main evaluated computer generated  complaints [ from Higher to Lower  and Lower to higher numerically]

 

Higher to Lower

 

360.00 Thoracic pine

274.07 Coccygial spine

242.22 Lumber spine

238.57 Cervical spine

235.71 Autonomic nervous system

208.89 Sacral spine

161.67 Thyroid pathophysiology

150.00 Tracheal/ internal throat anomaly

150.00 Spleen

133.67 Metabolism

 

 

Lower to higher

 

92.50    Liver/pancreas/gall bladder

92.50 Hormonal anomalies

91.48  Body Fat

91.20  Skin ailments

91.20  Blood anomalies

90.67  Stool evacuation

88.22  Urine evacuation

80.00 Gall Bladder anomaly

60.00 Irritable Bowel syndromes/Inflammatory condtion of Bowels

60.00 Renal anomalies

 

 

 

DISCUSSION;

 

Seeing the whole ETG report, it was concluded that she is suffering mainly from

  • Irritable Bowel syndromes
  • Inflammatory condition of Bowels
  • Bowel’s pathophysiology
  • Liver disoders
  • Blood anomaly
  • Digestiv disorders / weak appetite

 

         Regarding Ayurvedic fundamentals, it was observed that Kaphha dosha is within normal limit and Pitta Dosha is higher than Vata Dosha although both are in very lower limit. Thus the problem was concluded Pittaj-vataj.

 

On the other side, the Pitta Bheda “Bhrajak & Ranjak” are in higher limit, while Saman Vayu is in Highest Limit. About Sapta Dhatu,” Mans pitta, Ras pitta, & Asthi Pitta” are in higher level, comparatively “Med Pitta & Rakta Pitta” are in Lower level.

 

So it is concluded that PITTA is dominating in this patient along with Vata. Therefore much attention should be paid to Pitta treatment.

 

TREATMENT / MANAGEMENT of the Case;

 

At the start 0n 06.04.2010, following medicines were prescribed;

 

1-       Shuddha gandhak, Chop Chinyadi churna to be taken Morning and evening

2-       Arogya Vardhini Vati with Triphala Churna

3-       No external application was given

 

This Prescription improves her condition well. Her Bowel’s pathophysiology corrected and she went for stool evacuation daily instead of every 4rth day. Her white patches become less in surroundings.

 

Similar medicines are repeating because her condition is improving well.

 

 I suggested her parents, her father is in Uttar Pradesh Police Service, for taking photographs of her Leucodermal patches, but they did not ready for it.

 

However they agreed for photography of a very small patch for observing the improvement. They promise me for photography of the patches in their next visit.

 

For management of the case, I advised her to take light meals and avoid sour food.

 

No external application was allowed in form of paste or oil or in decoction forms.

 

The patient is improving well and her progress of regaining health is satisfactory.

 

 

CONCLUSION;

 

This is another case , which is treating on base of the report of Electro Tridosha Graphy ETG AyurvedaScan system findings.

 

As earlier it is said about this scanning system that it quantifies the status of Ayurveda principals and diagnosis of the diseases, it fulfills the requirement of an Ayurvedicians to treat the patient scientifically, rationally and in an evidence based manner.

 

This case proves the efficiency of the ETG AyurvedaScan system in case of LEUCODERMA treatment .