स्कूल जाने वाले बच्चो मे कन्धे और पीठ और सीने यानी चेस्ट केज और कमर मे दर्द की शिकायत और रीड की हड्डियो मे पैदा हो रही बीमारियां


मुझे शहर और देहात दोनो क्षेत्रो मे मरीजो को देखने का अवसर रोजाना और अक्सर मिलता रहता है /

कई बार स्कूल जाने वाले बच्चे अपने मा बाप से शिकायत करते है कि उनको सिर मे दर्द रहता है या उनके कन्धे दर्द करते है या उनकी गर्दन और पीठ दर्द करती है या उनकी कमर दर्द करती है या उनके दोनो पैर दरद करते है /

पहले जब इस तरह की शिकायते बच्चो के माता पिता करते थे तो मै इन सब्को नजर अन्दाज करता था और इसे बहुत ही मामूली किसम की आये दिन की तकलीफो से जोड़ दिया करता था / मेरा अनुमान था कि बच्चे परिवार मे आये दिन अपने माता पिता को गठिया वात या पीठ का दर्द या कमर का दर्द या कन्धे का दर्द या हाथ का दर्द की शिकायते सुनते रहते है इसलिये बच्चो के नाजुक स्वभाव के कारण और मा बाप से सहानुभुति रखने के कारण ऐसा कहते होन्गे /

यह भी हो सकता है कि उनको गले की लैरिन्गो फैरिन्गियल ट्रकियल अथवा ई०एन०टी० की बीमारी हो इसलिये इन तकलीफो का किसी तरह का रिफ्लेक्शन हो और फिर इस तरह के सिन्ड्रोम्स आ गये हो /

लगभग एक साल पहले एक दिन मेरी पोती ने जो दस साल की है उसने मुझसे शिकायत की उसे सीने मे दर्द होता है / उस समय बरसात का सीजन चल रहा था मैने विचार किया कि यह दर्द बर्साती हवाओ से हो सकता है या फिर यह सब ए०सी० मे सोते है या ठन्डे पानी से स्नान करते है इस कारण से मस्कुलर स्पास्म जैसी शिकाय्त हो सकती है क्योन्कि पोती की जान्च करने के बाद मुझे कुछ भी एब्नार्मल नही मिला /

मै प्रत्येक इतवार सोनिया गान्धी के चुनाव क्षेत्र मे यानी जनपद राय बरेली मे कस्बा भोज पुर मे स्तिथि “भारत रत्न राजीव गान्धी स्मारक आयुर्वेद शोध सन्स्थान , भोज पुर, पूरे पान्डे रोड, रायबरेली , उ०प्र० ” मे मरीजो को देखने और उनकी जान्च और उनके आयुर्वेदिक और आयुष इलाज के लिये यहा आता जाता रहता हू /

ज्यादातर मै अपनी कार से ही वहा मेरा आना जाना होता है जिसमे मै अपनी कुछ गिनी चुनी मशीने और मानीटर लेकर जाता हू जो पोर्टेबुल है और बैटरी से चल जाती है क्योन्कि वहा पावर सप्लाई की बहुत समस्या है / वहा सब मशीने लेकर जाना सम्भव नही होता इसलिये जरूरी मशीनो को ले जाता हू / क्योन्कि कार मे लाद कर ले जाने मे मुझे कुछ भी असुविधा नही होती है /

लेकिन जब मै कार से नही जाता और मुझे बस से जाना होता है तो मै अपने बैक पैक मे १० से लेकर १५ किलो तक की मशीने पीठ मे लाद कर ले जाता हू /वहा पहुचने मे पैदल और बस और मोटर साइकिल का लम्बा सफर तय करना होता है जिसमे कई घन्टे लग जाते है / आने जाने मे पूरा दिन बर्बाद हो जाता है और लगभग १७५ किलोमीटर का सफर तय करना होता है / इलेक्ट्रानिक मशीने बहुत नाजुक होती है इसलिये मै बस मे या पैदल या मोटर साइकिल मे उनको अपनी गोद मे या कन्धे मे लटकाये रहता हू /

रात मे जब मै सोने लगता तो मेरे कन्धे और गर्दन और पीठ और सीने मे दर्द होना शुरू हो जाता और सारा हिस्सा अकड़ जाता / पहले मै यह समझा कि मुझे स्पान्डिलाइटिस की पुरानी तकलीफ है और मै ए०सी० मे सोता हू , कम्प्य़ूटर मे भी झुक कर काम करता हू इसलिये ऐसा होगा /

कुछ हफ्ते मुझे बार बार रायबरेली जाना पड़ा / इससे मेरी तकलीफ और बढ गयी / अब मै चिन्तन करने लगा कि मुझे ऐसी तकलीफ क्यो और कैसे बढी है और इसका कारण क्या है / मैने वाच करना शुरु किया और जल्द ही पता चल गया कि यह सब मेरा मशीने से भरे १० या १५ किलो बैक पैक के लादने के कारण है /

मैने बैक पैक लादना छोड़ दिया और एक करमचारी रख लिया जो सब सामान ले जाने लगा / मेरी तकलीफ धीरे धीरे ही सही , ठीक होने लगी /

मेरी पोती ने फिर शिकायत की कि उसे कन्धे और सीने मे दर्द होता है / मै समझ गया कि जितना इस्का वजन नही है उससे ज्यादा तो यह सामन उठाती है और लेकर आती जाती है / यह दर्द उसी के कारण है / मैने बहू और लड़्के से कहा कि इसका बस्ता हल्का करो तभी इस समस्या से निजात मिलेगी /

मेरा लड़्का बच्चो को कार से ले जाता है और ले आता है बच्चो के बैक पैक को अधिक देर तक कन्धे मे न लादने से उनकी यह समस्या दूर हुयी है /

मेरे पास इस तरह की शिकायत लेकर आने वाले बच्चे और उनके माता पिता को मै हिदायत करता हू कि यह सब बस्ते के वजन के कारण है जो बच्चो के नाजुक कन्धे सहन नही कर पाते है और इस तरह की आगे चलकर भविष्य मे गम्भीर बीमारियो को आमत्रण देते है /

बड़ी तेजी से बढ रही रीढ की हड्डियो की बीमारियो का यह एक बड़ा कारण हो सकता है / आज कल न्य़ूरोलाजिकल बीमारिया भी बहुत बढ रही है यह रीढ की हड्डी के कम्प्रेशन से भी हो जाती है / मैने बहुत से मरीजो को देखा है जिनकी बीमारी की वजह रीढ से समबन्धित थी / उनके केस को कई पोस्ट मे जिक्र किया है /

यह सोचने का काम समाज और सरकार का है कि इस तरह से बच्चो को किताब का बस्ता लादकर उनको बीमार बना देना कहां तक उचित होगा ?

A CASE OF H.I.V. PATIENT’S IMPROVEMENT BY AYURVEDA AND HOMOEOPATHIC AND UNANI COMBINATION TREATMENT


Among path of cure of H.I.V. AFFECTED PATIENT ,treated by our RESEARCH CENTER by Ayurvedic and Homoeopathic and Unani combination treatment and duly diagnosed by the latest invented AYURVEDA AYUSH hi-technology ETG AyurvedaScan and its advance versions.

Following presented report done by the Lady patient, affected by her Husband , to see the improvement in her condition. Report  shows her improved condition which was worse earlier and before comming to our treatment  than before.

Symptomatically and syndromatically she gained weight and her general physical condition is much  better now, after our treatment.

Her report is given below; We are hiding her identity due to obvious reasons.

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We have said earlier that HIV patient stage one and stage two can be well managed by AYUSH therapies treatment.

 

 

 

LEUCODERMA CASES ; WHO ARE TREATING BY OUR CONCERNS ; READERS CAN CONTACT DIRECTLY TO THESE NUMBERS AND CAN TALK TO PATIENT DIRECTLY


We thanks to our LEUCODERMA patients, who have undergone our treatment and cured and partially cured and improved by our treatment, now pleased to answer the queries asked by the Blog readers.

1- Mobile number 09717759899, Rajesh
One of his family member is being treated by us, who is suffering from LEUCODERMA, is now improving by our treatment, readers can ask directly to Mr. RAJESH mobile number 09717759899 about our activities and individual method of treatment.

2- Mobile number 09452528904 , ANIL
Mr Anil is himself suffering from LEUCODERMA from childhood, he is under my treatment at present.
Blog readers can ask and enquire about our method of individual treatment and other queries which they wish to ask.

Thanks to our both patients, who prepared himself for this queries job. Generally my experience is very bad about those that cured patients, who do not wish to share the cure experiences to others. Cured patient generally did not share the cure to others even to their relatives and want to hide all about. This is the reason, we can not share the cures of those isease conditions for which there is no treatment in Allopathy but they got cured by Ayurveda and Homoeopathy and Unani combination treatment.

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VIRAL / DENGUE / FEVER WHICH IS NOT UNDER CONTROL CAN BE TREATED AYURVEDICALLY AND AYUSH THERAPIES TREATMENT AND MANAGEMENT


DENGUEFEVER001आयुर्वेदिक अथवा होम्योपैथिक अथवा यूनानी दवाओ के काम्बीनेशन इलाज से सभी तरह के वायरल बुखार कुछ दिनो मे पूरी तरह से ठीक हो जाते है / 

बुखार जैसे ही आना शुरू हो या पता लगे कि वायरल बुखार हो गया है तुरन्त आयुष का इलाज शुरू कर देना चाहिये / 

फौरन इलाज करने से यह बुखार दो या तीन दिन मे पूरी तरह से ठीक हो जाता है / 

ज्यादा पुराना बुखार होने पर इलाज करे लेकिन किसी आयुर्वेदिक अस्पताल के चिकित्सक की सलाह लेकर / 

तुरन्त आये बुखार शत प्रतिशत ठीक होते है और किसी भी प्रकार की अनहोनी नही होती है / 

 

HEPATITIS C ; KNOW ABOUT THE DISEASE CONDITION ; AYURVEDA IS ANSWER OF THIS DISEASE CONDITION TREATMENT AND MANAGEMENT BOTH


HEPATITIS C is a disease condition which is dreaded by many by exaggeration about the myths of disease syndromes.

But in fact this is a treatable condition and Ayurveda of course have answer of the treatment and management of this condition.

Health plus magazine have published an article which have complete and sufficient information about Hepatitis C.

Readers are requested to read the complete article given below;

HEPATITIS C

HEPATITIS C 001

HEPATITIS C 002

HEPATITIS C 003

HEPATITIS C 004

HEPATITIS C 005

HEPATITIS C 006

GOING THROUGH THE ABOVE MENTIONED  syndromes and comments, since centuries Ayurveda have treated these disorders successfully. AYURVEDA and Homoeopathy and Unani  therapies have a number of hundreds and thousands remedies including Single and multiple combination of medicament. AYURVEDA life style and dietary management suggests what to do and what to not do, this helps for quick recovery of the ailments.

ETG AyurvedaScan and its supplementary related examination and test are evaluates the fundamentals including diagnosis of disorders  and internal problems. Selection of remedies are thus bases and a total cure  / relieve is promised.

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ADENO CARCINOMA CAN BE TREATED AND MANAGED BY AYURVEDA AND AYUSH TREATMENT AND MANAGEMENT , IF IN STAGE ONE AND TWO


ADENO carcinoma can be managed and treated by Ayurveda and Ayush combination remedial treatment and management.

We have treated successfully some cases of Adeno carcinima on the line of the basis of ETG AyurvedaScan findings and other related examinations.

We are producing here case history of two cases which was diagnosed ADENO CARCINOMA by Allopathic doctors after MRI scan and other examinations.
One case was treated by Chemotherapy and radiation therapy but after one year the problem cropped up again. This time patient decided for Ayurveda Treatment and for that came to me for the treatment.

In these patients, the diagnosis of disease nature was diagnosed by Allopathic physicians. Later on after few months when they did not got any relief and their complaints were aggravating, they consulted me.
I will give here two cases in which

[1] Patient One is 54 years old lady suffered from Adeno Carcinoma and before coming to me for treatment, she was treated by Allopathic remedies and Chemotherapy and Radiation therapies respectively. She got relief after the treatment but after one year she suffered again with the same condition as she was before the treatment and in much worse stage, which she was priory had and repeatedly syndromes again, for that she was treated.

She came in this condition to me before six years. She showed all the treatment files which she have and narrated her complaints.

I suggested her to go for ETG AyurvedaScan and its supplementary tests including Ayurveda Blood Test and Ayurveda Urine Tests etc etc. After receiving all the data and studying all the reports, an Ayurveda-Homoeopathic-Unani combination remedies treatment was suggested and an open prescription was given to patient.

 After Six months Ayurveda Ayush combination treatment , patient almost felt that she is cured from her ailments, what she have and was very cheerful because she was having no sign of physical or mental  problems of any kind.

I suggested her to continue remedies in Toto but she left to take any kind of remedies without asking to me or without my consent. She took almost two years treatment of AYURVEDA AND AYUSH  and then she stopped it without my consent and without my knowledge.

After passing three years, she again felt some problem having swelling in her leg. Allopathic physician gave her treatment of FILARIA. The condition of patient was worsening day by day and at last she again consulted me before two months last week of MAY 2016.

I went through the ETG AyurvedaScan examination and supplementary tests were done again. She was given a fresh prescription of AYURVEDIC AND HOMOEOPATHIC AND UNANI REMEDIES in combination.

Now she is feeling well have no pain and fever. Her swelling is reduced and AYURVEDA AYUSH treatment is continuing since two months.

Patient belongs to near by District and I advised her to come for consultation after every 10 to 15 days for more close watch.

ANYBODY WHO DESIRE TO CONFIRM AND WANT TO KNOW MORE DIRECTLY FROM PATIENT, CAN ASK  TO  PATIENT  OR PATIENT’S RELATIVE  MANISH ON PHONE NUMBER  07607857989, WITH MY REFERENCE.

Patient is following the instructions. I warned her that any negligence could be harmful for her and she must be very careful about her health condition.

[2] Second patient is an 40 yrs old young from Haryana, having diagnosed ADENO CARCINOMA before six months.

ADENO CARCINOMA lesion was near to ANO-RECTAL site. Patient was suffering from very sever 24 hrs pain in his around Anus with swelling. He could not pass the stool and due to swelling could not slept well. Allopathic treatment was given to him without any satisfactory results.

My one earlier patient, who have taken my treatment two years before and is cured from his ailments, suddenly met to one of the relative of this patient. He recommended me for the Ayurveda and Ayush treatment and introduced our way of the treatment methods which is adopting and followed at our research center.

In June 2014 , this patient came to me and showed me all the reports and examination done earlier including biopsy and PET Scan, which established the diagnosis. He was suffering from earlier mentioned crucial problems and was in great agony. Severe and tearing  Pain, passing of stool in difficulty, sitting posture impossible, Fever and loss of Appetite with other physical problems was with him. In this condition patient came to me. I suggested for ETG AyurvedaScan and related tests and examination.

After getting all the data and reports, the problem concluded in four directions;

1-     Root cause of the present problem and to recognize the basis causing factors

2-     Pathway of the metastasis from where the present complaints are arising

3-     Main complaints for which patient came for the treatment

4-     Extensions of the main complaints / associated syndromes

5- AYURVEDIC FUNDAMENTALS and Homoeopathic principles along with Unani fundamentals were recognized and scrutinized accordingly.

This was done in view of selection of Ayurvedic and Homoeopathic and Unani drugs.

After seeing and scrutinizing every angle of disease concept, Ayurvedic and Homoeopathic and Unani remedies were prescribed. Patient was instructed to use the remedies for 40 days and come again for the review and change of medications. In Cancer patient , my experience is that review of the case and changes in remedies should be done as early as possible.

After40 days use of medications, patient pain and narrowness feelings was gone. His fever became normal and sometime up to 98.4 to 99 F. His other agonizing problems minimized and he is taking good sleep. He is 40 percent relieved in his complaints. He will come again to me for review after 40 days, on telephonic talks , he says that he is in comfort and he feels mild pain some day in around Anus and Rectum for half an hour , otherwise he is feeling well. All the medicine prescribed are prescribed on the individual patient findings and not in general as prescribed in General to all patients.

ETG AyurvedaScan findings based special treat ment is very individual to patient solely and no two patient’s treatment ar similar in any way. There is difference in prescription due to individual Ayurveda Fundamental findings base.

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A CASE OF “ANKYLOSING SPONDYLITIS” MALE 18 YRS ; DIAGNOSTICAL EVALUATIONS IN VIEW OF AYURVEDA


AN 18 YRS OLD MALE youngster consulted me on 12 July 2016 for his sufferings diagnosed ANKYLOSING SPONDYLITIS with various physical problems, which he have .
Below is given the diagnostically views of Allopathy and Ayurvedic ETG AyurvedaScan bases conclusions of the patient problem. See the comparisons.
Since last few years he was suffering by SPINAL COLUMN anomalies, for which he was taking Allopathic treatment without any result.
Near about six weeks before he examined himself in AIIMS New Delhi and the report is given below.
See the report.

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Below is given the diagnostically views of Allopathy and Ayurvedic ETG AyurvedaScan bases conclusions of the patient problem. See the comparisons.

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Patient could not got any relief from Allopathic remedies and his problems were aggravated , therefore he decided to switch treatment AYURVEDA AYUSH.
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ANKYLOSING SPONDYLITIS1 003ANKYLOSING SPONDYLITIS1 004ANKYLOSING SPONDYLITIS1 005

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[matter to be loaded soon]

तेजी से बढने वाले रोग ; DISEASES SEEN IN FASTER WAY


पिछले कई सालो से मे मुझे बहुत से ऐसे रोग देखने मे मिले है जिन्हे पहले यानी आज से ३० या चालीस साल पहले बहुत रेयर श्रेणी मे माना जाता था / मेडिकल कालेज मे पढायी जाने वाली प्रैक्टिस आफ मेडिसिन की पुस्तको मे प्राइस अथवा डेविडसन अथवा हैरिसन की किताबे सभी छात्र पढते थे / अभी का पता नही कि किस तरह की पुस्तके पढायी जाती है लेकिन १९७१ और १९७२ मे जब मै फाइनल साल मे था तब यही किताबे पढने के लिये हमारे कोर्स मे थी /

क्लासिकल तौर पर देखा जाय तो इन्ही पुसतको मे उन सभी बीमारियो का जिक्र किया गया है जो उन दिनो मे देखने मे आती थी / लेकिन आज का हाल यह है कि जैसा इन किताबो मे लिखा गया है उस तरह की true picture वाले रोगी देखने मे नही आते है /

क्लासिकल टायफायड,
क्लासिकल मलेरिया,
टिटनेस,
टिटेनी,
कालेरा,
हाइड्रोसील,
लिम्फ एडीनाइटिस,
ल्य़ूकोरिया,
स्त्रियो के गुप्त रोग,
पाली आर्थराइटिस,
कोल्ड और कोराइजा,

सिफिलिस,

गोनोरिया,

टी०बी० ट्यूबर कुलर इनफेक्शन

एक बहुत लम्बी लिस्ट है बीमारियो की जो उस समय देखने मे आती थी लेकिन अब बहुत कम देखने को मिलती है /

अब कुछ बीमारिया बहुत बड़ी सन्ख्या मे देखने मे आती है जो पहले बहुत कम थी / ये बीमारिया नीचे लिखी हुयी है /

कैन्सर,
ब्लड प्रेशर,
डायबिटीज,
मानसिक रोग,

एच०आई०वी०

 

ऐसे ऐसे नाम वाले रोग अब सामने आने लगे है जिनका कभी नाम नही सुना गया होगा / ऐसा अब लोग और आम जन कहने लगे है /

यह सही है और इसका कारण यह है कि पिछले ३० सालो मे मेडिकल साइन्स का बहुत बड़ा हिस्सा हाई टेक्नोलाजी की मेडिकल इन्जीनियरिन्ग से जुड गया है / रोगो के निदान मे हुयी टेक्नोलाजी की क्रान्ति से जहा अल्ट्रा साउन्ड, सी०टी० स्कैन, एम०आर०आई० स्कैन, ई०सी०जी०, पेट स्कैन, ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आदि आदि के अलावा रक्त और अन्य जान्चो के आधार पर नये किस्म की बीमारियो का फाइन्ड आउट करना और उनका पता चलने से एनाटामिकल और फीजियोलाजिकल और पैथोलाजिकल आधारित बीमारियो का नाम करण करने से ऐसा हुआ है / इसी कारण यह धारणा बनना स्वाभाविक है कि जैसा लोग कहते है कि रोजाना नी नई बीमारिया पैदा हो रही है उसका कारण मूल रूप से इन्ही निदान करने वाले यन्त्रो की रिपोर्ट पर आधारित होने लगा है और अब यह एक तरह का ट्रेन्ड बन गया है /

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HIGH CREATININE LEVEL TOUCHING NORMAL LEVEL AFTER FIVE MONTHS OF AYURVEDA AND AYUSH TREATMENT


PATIENT FROM CHCHATTISGARH is being treated by AYURVEDA and AYUSH THEREPIES combination remedies at our research center before five months for manu complaints he have including high level of SERUM CREATININE and is still under our treatment.

His pathological findings and examination results are given below.

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Before treatment his creatinine level was reached upto 2.9 mg/dl, after above report. But combination treatment of his complaints, which he have and should not be disclosed by us as our patient secrets should not be given to others, which is our policy, we are unable to say more about this patient.

All physicians should keep secracy of patient complaints and should not be share by others, this is our commitment.

 

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After Five months of AYURVEDIC and HOMOEOPATHIC  and  UNANI and dietary management and life style according to Ayurveda is suggested to this patient.

The results are before you.

In fact ETG AyurvedaScan Data  bases examination results  provides four dimensional diagnosis  and disease picture of patient. This is an actually combination of Modern medicine Diagnosis based on the pathophysiological and pathology and AYURVEDA BASIC PRINCIPLES  and Homoeopathy basic principles and Unani Basic principles and Nature-cure principles. When these all is combined into one , the patient complaints and disease diagnosis precipitates and what is wrong with the patient and what should be treated in patient that is cropped up.

The ETG AyurvedaScan diagnosis provides FOUR Dimensional diagnosis and is ;

1- The Basic root problem which is generating the  number three problem

2- Route of the problem which is going to number three

3- Complaints for which patient came for treatment to Doctor / Physician.

4- Extension of the number three complaints to other organs of the body / symptomatically expressions

 

This we study for trying  to find  the all four problem’s conclusions and for that to purpose of treatment  we select the AYUSH remedies in combination for treatment purposes.

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WHAT SAY OTHERS ABOUT YOGA ? योग के बारे मे कुछ अन्य विचार


जब मै म्य़ूनिख शहर, जरमनी मे सन १९७३ मे होम्योपैथी पढने के लिये गया था, उन दिनो वहा पर एक स्थान मे कोई जर्मन नवयुवक था जो वहा के लोगो को योग की ट्रेनिन्ग दे रहा था / शायद ही कोई वहा योग के बारे मे उन दिनो जान्ता हो ऐसा मैने सुना नही था / यह अवश्य था कि कुछ जागरुक जरमन लोग भारत के बारे मे जाने को उत्सुक होते थे / मै अपने साथ आयुर्वेद की दवाये ले गया था क्योन्कि तकलीफ होने पर मै अधिकतर आयुर्वेदिक दवाये ही खाता हू / मेरे साथ पढने वाले जरमन डाक्टर जो सभी के सभी एम०डी० थे, वे जानना चाहते थे को आयुर्वेद है क्या ? मै उनको बताता था कि वास्तविक आयुर्वेद क्या है और उनको लेक्चर जरमन भाषा मे ही देता था / साथ मे पढने वाले डाक्टरो की उत्सुकता आयुर्वेद के प्रति कुछ अधिक तब हुयी जब मैने उनको बताया कि जिन बीमारियो के इलाज के लिये आप इतने परेशान है वे आयुर्वेदिक दवाओ द्वारा ठीक किये जा सकते है / इस पर वे सब मेरा मुह ताकने लगते थे / और आश्चर्य से पूछते थे कि “क्या सच बोल रहे है ?”

एक दिन मुझे योग के ट्रेनिन्ग देने वाले जरमन युवक ने अपने केन्द्र मे मुझे बुलाया / मै वहां गया, मैने उनको मयूरासन और धनुरासन करके दिखाया / मैने और भी दूसरे आसन उनको बताये / उपस्थित सभी लोग बहुत खुश हुये / उनमे से एक लड़्की ने मुझसे पूछा कि आप एक बार योग का आसन सामने की तरफ झुक कर करते है और दूसरी बार पीछे की तरफ झुक कर करते है / मैने कई बार ऐसा करते आप्को देखा है / इसका क्या मतलब हुआ /

मैने उसको उत्तर मे कहा कि इससे रीढ की हड्डी और मान्श्पेशियो का बैलेन्स बराबर बना रहेगा / और आप्के शरीर को कोई कष्ट नही होगा / अगर आप सामने झुकने वाले योग के आसन बार बार करेन्गे तो आप्को आन्तरिक अन्गो मे तकलीफ हो सकती है और दर्द जैसी परेशानी पैदा हो जायेगी इसलिये बैलेन्स बराबर करने के लिये अग्र योग करते है तो एक आसन सामने झुकने वाला करे और दूसरा पीछे झुक कर करने वाला कर्ना चाहिये /

मैने उनको यह भी बताया कि स्वस्थ्य अवस्था मे सभी तरह के योग आसन किये जा सकते है लेकिन अग्र कोई बीमारी है तो किसी योग और प्राकृतिक चिकित्सक से सलाह लेकर योग करे अन्यथा प्राणायाम करे /

प्राणायाम सभी कर सकते है चाहे वह रोगी हो अथवा नीरोगी / यह सभी को फायदा करता है लेकिन जिन्हे फेफ्ड़ो की तकलीफे हो उन्हे अपने चिकित्सक से सलाह लेकर इलाज करना चाहिये /

योग के बारे मे क्या गूढ बाते है यह निम्न पुश्तक मे छपे लेख मे देखिये और समझिये /

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yoga yoga 001 yoga 002 yoga 003 yoga 004