ADENO CARCINOMA CAN BE TREATED AND MANAGED BY AYURVEDA AND AYUSH TREATMENT AND MANAGEMENT , IF IN STAGE ONE AND TWO


ADENO carcinoma can be managed and treated by Ayurveda and Ayush combination remedial treatment and management.

We have treated successfully some cases of Adeno carcinima on the line of the basis of ETG AyurvedaScan findings and other related examinations.

We are producing here case history of two cases which was diagnosed ADENO CARCINOMA by Allopathic doctors after MRI scan and other examinations.
One case was treated by Chemotherapy and radiation therapy but after one year the problem cropped up again. This time patient decided for Ayurveda Treatment and for that came to me for the treatment.

[ remains matter is to be loaded soon]

A CASE OF “ANKYLOSING SPONDYLITIS” MALE 18 YRS ; DIAGNOSTICAL EVALUATIONS IN VIEW OF AYURVEDA


AN 18 YRS OLD MALE youngster consulted me on 12 July 2016 for his sufferings diagnosed ANKYLOSING SPONDYLITIS with various physical problems, which he have .
Below is given the diagnostically views of Allopathy and Ayurvedic ETG AyurvedaScan bases conclusions of the patient problem. See the comparisons.
Since last few years he was suffering by SPINAL COLUMN anomalies, for which he was taking Allopathic treatment without any result.
Near about six weeks before he examined himself in AIIMS New Delhi and the report is given below.
See the report.

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Below is given the diagnostically views of Allopathy and Ayurvedic ETG AyurvedaScan bases conclusions of the patient problem. See the comparisons.

ANKYLOSING SPONDYLITIS1
Patient could not got any relief from Allopathic remedies and his problems were aggravated , therefore he decided to switch treatment AYURVEDA AYUSH.
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ANKYLOSING SPONDYLITIS1 003ANKYLOSING SPONDYLITIS1 004ANKYLOSING SPONDYLITIS1 005

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[matter to be loaded soon]

तेजी से बढने वाले रोग ; DISEASES SEEN IN FASTER WAY


पिछले कई सालो से मे मुझे बहुत से ऐसे रोग देखने मे मिले है जिन्हे पहले यानी आज से ३० या चालीस साल पहले बहुत रेयर श्रेणी मे माना जाता था / मेडिकल कालेज मे पढायी जाने वाली प्रैक्टिस आफ मेडिसिन की पुस्तको मे प्राइस अथवा डेविडसन अथवा हैरिसन की किताबे सभी छात्र पढते थे / अभी का पता नही कि किस तरह की पुस्तके पढायी जाती है लेकिन १९७१ और १९७२ मे जब मै फाइनल साल मे था तब यही किताबे पढने के लिये हमारे कोर्स मे थी /

क्लासिकल तौर पर देखा जाय तो इन्ही पुसतको मे उन सभी बीमारियो का जिक्र किया गया है जो उन दिनो मे देखने मे आती थी / लेकिन आज का हाल यह है कि जैसा इन किताबो मे लिखा गया है उस तरह की true picture वाले रोगी देखने मे नही आते है /

क्लासिकल टायफायड,
क्लासिकल मलेरिया,
टिटनेस,
टिटेनी,
कालेरा,
हाइड्रोसील,
लिम्फ एडीनाइटिस,
ल्य़ूकोरिया,
स्त्रियो के गुप्त रोग,
पाली आर्थराइटिस,
कोल्ड और कोराइजा,

सिफिलिस,

गोनोरिया,

टी०बी० ट्यूबर कुलर इनफेक्शन

एक बहुत लम्बी लिस्ट है बीमारियो की जो उस समय देखने मे आती थी लेकिन अब बहुत कम देखने को मिलती है /

अब कुछ बीमारिया बहुत बड़ी सन्ख्या मे देखने मे आती है जो पहले बहुत कम थी / ये बीमारिया नीचे लिखी हुयी है /

कैन्सर,
ब्लड प्रेशर,
डायबिटीज,
मानसिक रोग,

एच०आई०वी०

 

ऐसे ऐसे नाम वाले रोग अब सामने आने लगे है जिनका कभी नाम नही सुना गया होगा / ऐसा अब लोग और आम जन कहने लगे है /

यह सही है और इसका कारण यह है कि पिछले ३० सालो मे मेडिकल साइन्स का बहुत बड़ा हिस्सा हाई टेक्नोलाजी की मेडिकल इन्जीनियरिन्ग से जुड गया है / रोगो के निदान मे हुयी टेक्नोलाजी की क्रान्ति से जहा अल्ट्रा साउन्ड, सी०टी० स्कैन, एम०आर०आई० स्कैन, ई०सी०जी०, पेट स्कैन, ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आदि आदि के अलावा रक्त और अन्य जान्चो के आधार पर नये किस्म की बीमारियो का फाइन्ड आउट करना और उनका पता चलने से एनाटामिकल और फीजियोलाजिकल और पैथोलाजिकल आधारित बीमारियो का नाम करण करने से ऐसा हुआ है / इसी कारण यह धारणा बनना स्वाभाविक है कि जैसा लोग कहते है कि रोजाना नी नई बीमारिया पैदा हो रही है उसका कारण मूल रूप से इन्ही निदान करने वाले यन्त्रो की रिपोर्ट पर आधारित होने लगा है और अब यह एक तरह का ट्रेन्ड बन गया है /

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HIGH CREATININE LEVEL TOUCHING NORMAL LEVEL AFTER FIVE MONTHS OF AYURVEDA AND AYUSH TREATMENT


PATIENT FROM CHCHATTISGARH is being treated by AYURVEDA and AYUSH THEREPIES combination remedies at our research center before five months for manu complaints he have including high level of SERUM CREATININE and is still under our treatment.

His pathological findings and examination results are given below.

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Before treatment his creatinine level was reached upto 2.9 mg/dl, after above report. But combination treatment of his complaints, which he have and should not be disclosed by us as our patient secrets should not be given to others, which is our policy, we are unable to say more about this patient.

All physicians should keep secracy of patient complaints and should not be share by others, this is our commitment.

 

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After Five months of AYURVEDIC and HOMOEOPATHIC  and  UNANI and dietary management and life style according to Ayurveda is suggested to this patient.

The results are before you.

In fact ETG AyurvedaScan Data  bases examination results  provides four dimensional diagnosis  and disease picture of patient. This is an actually combination of Modern medicine Diagnosis based on the pathophysiological and pathology and AYURVEDA BASIC PRINCIPLES  and Homoeopathy basic principles and Unani Basic principles and Nature-cure principles. When these all is combined into one , the patient complaints and disease diagnosis precipitates and what is wrong with the patient and what should be treated in patient that is cropped up.

The ETG AyurvedaScan diagnosis provides FOUR Dimensional diagnosis and is ;

1- The Basic root problem which is generating the  number three problem

2- Route of the problem which is going to number three

3- Complaints for which patient came for treatment to Doctor / Physician.

4- Extension of the number three complaints to other organs of the body / symptomatically expressions

 

This we study for trying  to find  the all four problem’s conclusions and for that to purpose of treatment  we select the AYUSH remedies in combination for treatment purposes.

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WHAT SAY OTHERS ABOUT YOGA ? योग के बारे मे कुछ अन्य विचार


जब मै म्य़ूनिख शहर, जरमनी मे सन १९७३ मे होम्योपैथी पढने के लिये गया था, उन दिनो वहा पर एक स्थान मे कोई जर्मन नवयुवक था जो वहा के लोगो को योग की ट्रेनिन्ग दे रहा था / शायद ही कोई वहा योग के बारे मे उन दिनो जान्ता हो ऐसा मैने सुना नही था / यह अवश्य था कि कुछ जागरुक जरमन लोग भारत के बारे मे जाने को उत्सुक होते थे / मै अपने साथ आयुर्वेद की दवाये ले गया था क्योन्कि तकलीफ होने पर मै अधिकतर आयुर्वेदिक दवाये ही खाता हू / मेरे साथ पढने वाले जरमन डाक्टर जो सभी के सभी एम०डी० थे, वे जानना चाहते थे को आयुर्वेद है क्या ? मै उनको बताता था कि वास्तविक आयुर्वेद क्या है और उनको लेक्चर जरमन भाषा मे ही देता था / साथ मे पढने वाले डाक्टरो की उत्सुकता आयुर्वेद के प्रति कुछ अधिक तब हुयी जब मैने उनको बताया कि जिन बीमारियो के इलाज के लिये आप इतने परेशान है वे आयुर्वेदिक दवाओ द्वारा ठीक किये जा सकते है / इस पर वे सब मेरा मुह ताकने लगते थे / और आश्चर्य से पूछते थे कि “क्या सच बोल रहे है ?”

एक दिन मुझे योग के ट्रेनिन्ग देने वाले जरमन युवक ने अपने केन्द्र मे मुझे बुलाया / मै वहां गया, मैने उनको मयूरासन और धनुरासन करके दिखाया / मैने और भी दूसरे आसन उनको बताये / उपस्थित सभी लोग बहुत खुश हुये / उनमे से एक लड़्की ने मुझसे पूछा कि आप एक बार योग का आसन सामने की तरफ झुक कर करते है और दूसरी बार पीछे की तरफ झुक कर करते है / मैने कई बार ऐसा करते आप्को देखा है / इसका क्या मतलब हुआ /

मैने उसको उत्तर मे कहा कि इससे रीढ की हड्डी और मान्श्पेशियो का बैलेन्स बराबर बना रहेगा / और आप्के शरीर को कोई कष्ट नही होगा / अगर आप सामने झुकने वाले योग के आसन बार बार करेन्गे तो आप्को आन्तरिक अन्गो मे तकलीफ हो सकती है और दर्द जैसी परेशानी पैदा हो जायेगी इसलिये बैलेन्स बराबर करने के लिये अग्र योग करते है तो एक आसन सामने झुकने वाला करे और दूसरा पीछे झुक कर करने वाला कर्ना चाहिये /

मैने उनको यह भी बताया कि स्वस्थ्य अवस्था मे सभी तरह के योग आसन किये जा सकते है लेकिन अग्र कोई बीमारी है तो किसी योग और प्राकृतिक चिकित्सक से सलाह लेकर योग करे अन्यथा प्राणायाम करे /

प्राणायाम सभी कर सकते है चाहे वह रोगी हो अथवा नीरोगी / यह सभी को फायदा करता है लेकिन जिन्हे फेफ्ड़ो की तकलीफे हो उन्हे अपने चिकित्सक से सलाह लेकर इलाज करना चाहिये /

योग के बारे मे क्या गूढ बाते है यह निम्न पुश्तक मे छपे लेख मे देखिये और समझिये /

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EARLIER SIGN AND SYNDROMES OF KIDNEY FAILURE AND INCREAMENT OF CREATININE LEVEL ; किडनी अथवा गुर्दा के काम मे फेल होने के पूर्व सन्केत


P6100463.JPGगुर्दा अथवा किडनी के काम करने से फेल होने के सन्केत शरीर मे पहले से ही  पैदा होने लगते है / इन सान्केतिक लक्षणो को देखकर और पहचान कर गुर्दा के फेल होने के रोगो का पता चल जाता है /  गुर्दा के रोगो का सही समय पर पहचान होने पर और तत्काल उसका उपचार करने पर गुर्दा के रोगो से बचाव किया जा सकता है  और जीवन को लम्बे समय तक बचाया जा सकता है /

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गुर्दा / किडनी के रोगियो का रोग इतिहास ग्यात कर लेने के बाद कुछ आवश्यक बाते यानी साइन और सिन्ड्रोम्स का पता चला है जिनसे यह अन्दाजा लग जाता है कि व्यक्ति का गुर्दा खराब होने की तरफ जा रहा है /

नीचे लिखे गये कुछ आबर्जर्वेशन से गुर्दा फेल होने के रोग का अन्दाजा किया जा सकता है /

१- गुर्दा का रोग होने के कई माह पहले सुबह और शाम और रात देर तक व्यक्ति को लगता है कि उसे हल्का बुखार सा है /

२- इस बुखार के साथ साथ व्यक्ति को लगता है कि उसकी  खाने की इच्छा और भूख कम हो रही है /

३- व्यक्ति को भोजन न हजम होना, खट्टी डकारो का आना , पेट मे तेजाब का अधिक बनना आदि अपचन के लक्षण पैदा हो जाते है / इन लक्षणो को रोगी समझता है कि उसे खाना न हजम होने की तकलीफ पैदा हो रही है और वह अपचन का इलाज करने लगता है /

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४- देह मे दर्द , मान्श्पेशियो मे दर्द , चलने मे जल्दी थकावट आ जाना , सान्स फूलना , सुबह सोने के बाद मुख के स्वाद मे कड़वा पन और कसैला पन जैसे गोमूत्र का स्वाद हो अथवा यूरिया के स्वाद का आभास होना जैसे लक्षण पैदा हो जाते है /

[अभी मैटर लोड करना बाकी है ]

 

 

 

 

 

ANOTHER EVIDENCE BASE PROOF OF CURE OF LEUCODERMA DISORDERS


We produce here cure of LEUCODERMA disorders with evidence and proof , collected from patient’s treatment after examination by ETG AyurvedaScan and its allied tests and by AYURVEDA and AYUSH therapies treatment and management.

Below given photographs of a 14 years old  patient came for LEUCODERMA  treatment before 90 days. Although his parents told me that the boy was not very regular for in- taking  of Ayurveda and Ayush remedies prescribed for him. His first Photograph was taken before 90 days. See and observe the photograph.

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After 90 days of the AYURVDA and AYUSH treatment and management changes and almost total cure have been seen as is seen in below photo, taken after 91st day.

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Almost 100 percent  LEUCODERMA cases responses for CURE by AYURVEDA and AYUSH therapies combination treatment after examining whole body by ETG AyurvedaScan and its supplementary tests bases on the line of Ayurveda.

These evidences shows that if we  claim for total cure of LEUCODERMA, our claim is in right direction.

इस कमेन्ट्स से मुझे बहुत दुख पहुन्चा है !!!!! THIS COMMENT HURTS ME.


तेरी माँ का चोदु
suckyourdaddycock.cimx
amitkedi@gmail.cim
101.212.70.26
मादरचोद कभी अपनी माँ का बुर चाट के देख और अपने बाप का लंड चूस के देख और टेस्ट कर हो सके तो गार मरा के देख तू तो सकल से ग गे गांडू लगता है मादरचोद डिग्री फेल।

स्वीकृत | प्रतिक्रिया | त्वरित संपादित करें | संपादित करे | History | स्पैम | कचरा पेटी

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The comments which I received today is in the comment box, which someone send  it from ID no. 101.212.70.26.

 

I do not know the motive of writing in this kind of language, what shows it ? 

However I excuses this person for this comments and again I humbly  request this person very politely that I am not excepting his comments, what he is written in comment box ?

 

प्रिय विद्वान  महोदय, मेरा बहुत विनम्रता से आपसे निवेदन हे  कि मै आपके कमेन्ट्स को स्वीकार नही करता हू /

 

Dr. D.B. Bajpai

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DISORDERS OF EYES AND EAR AND INTERNAL THROAT AND NOSE AND ALLIED PARTS ; उर्ध्व जत्रु रोग यानी गले ऊपर के अन्गो के रोगो का आयुर्वेदिक और अयुष इलाज


उर्ध्व जत्रु  रोग यानी ई० एन० टी० यानी आन्ख, नाक , कान और इन्से सम्बन्धित रोगो का आयुर्वेदिक और आयुष इलाज सम्भव है और बहुत सटीक स्तर का होता है जो अन्य चिकित्सा विधियो मे नही है /

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आन्ख की तकलीफो का इलाज कुछ बीमारियो जैसे आन्खो का लाल रहना इसे कन्जन्क्टिवाइटिस भी कहते है /कन्जन्क्टीवाइटिस सैकड़ो और हजारो तरह की होती है / यह तरह तरह की डायग्नोसिस के ऊपर आधारित होती है / लेकिन मूल और रूट लेवेल  पर इसे कन्जन्क्टीवाइटिस ही कहते है / आन्ख की भी तरह तरह की बीमारिया होती है और अधिकान्श बीमारियो का इलाज आयुष चिकित्सा मे है /

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इसी तरह कान की बहुत सी बीमारियो का बहुत सटीक इलाज है जैसे कान बहना , कान से मवाद आना , कान से सुनाई न पड़ना, आवाज का गायब हो जाना, कान मे अवाज की सिन्सिटीविटी बढ जाना, तरह तरह की कान मे आवाजे आना यह सब आयुष चिकित्सा से ठीक हो जाता है /

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नाक की बीमारिया जिनमे सायनुसाइटिस से लोग सबसे ज्यादा परेशान होते है या पुराना न ठीक होने वाला जुखाम या बार बार सर्दी लग जाना , गला खराब रहना, गले की आवाज का बन्द हो जाना , गले की तरह तरह की बीमारियो का आयुश चिकित्सा मे बहुत अच्छा है और इसे लोगो को आजमाना चाहिये/

हर्ष की बात है कि आयुर्वेद की आधुनिक उच्च  तकनीक     ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और इसके अन्य वर्जन के परीक्षण कराने के बाद प्राप्त डाय्ग्नोसिस रिपोर्ट पर आधारित इलाज कराने से आन्ख, नाक, कान, गला और गले से ऊपर के सन्ही रोगो का इलाज करने मे सअलता मिलती है /

हस्त- मैथुन यानी मास्टर्बेशन यानी MASTURBATION / HAND PRACTICE ; यह किस तरह की तकलीफ या बीमारी है और इसका क्या और कैसे इलाज किया जा सकता है ?


हस्त- मैथुन  यानी मास्टर्बेशन यानी MASTURBATION यानी मुठ्ठ मारना यानी सड़का लगाना  क्या और किस तरह की लत है या यह किसी तरह की बीमारी है ? इसका विवेचना करने की आवश्यकता है /

यह समझना सबसे पहले बहुत आवश्यक है कि पुरुष यानीं MALE के REPRODUCTIVE ORGANS  की बनावट कैसी है और किस तरह की है तथा इसके तार शरीर के  किस किस अन्य सिस्टम्स से जुडे हुये है /

हस्त मैथुन किसी एक अन्ग की बीमारी नही है / यह  शरीर के  कई सिस्टम्स से मिलकर बन गयी एक तरह की विकृति है जिसे समझना जरूरी होता है / प्रत्येक हस्त मैथुन करने वाले व्यक्ति की  सम्स्याये और उनके शरीर के अन्य अन्गो की सन्लिप्तता अलग अलग और INDIVIDUAL   होती है /

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लम्बे समय तक और हजरो मरीजो के ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और इसके अन्य VERSIONS  के परीक्षण से प्राप्त डाटा के अध्ध्य्यन करने के बाद मेरा मानना है कि हस्त मैथुन करने की लत या बीमारी हर एक व्यक्ति मे अलग अलग INTENSITY LEVEL   की होती है और इसे एक पैमाने से नही आन्का जा सकता है /

 

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ऊपर के माडल मे पुरुष के जननान्गो का विस्तृत दर्शन मिलता है / आप सभी पाठक इसको देखिये और समझने का प्रयास करे /

 

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नीचे दिये गये चित्र मे ऊपर के दर्शाये गये माडल मे दिग्दर्शित अन्गो का नाम करण करके बताया गया है / इसे सम्झने का प्रयास उन लोगो को करना चाहिये जो हस्त मैथुन करने के लती है / ताकि उनको पता चल सके कि वह जो कर रहे है वह आदत कितनी खतरनाक है /

 

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आयुर्वेद के महर्शियो ने इस तरह के करण और कारण को बहुत पहले ही समझ लिया था और इसीलिये उन्होने “स्वस्थय वृत्त” के नियमो का उल्लेख किया जो सभी के जीवन के लिये जरूरी था / ताज्जुब की बात यह है कि हजारो साल पहले बनाये गये और बताये गये स्वास्थ्य सम्बन्धी नियम और कायदे आज भी उतने ही उप्योगी है जितने के उस समय थे /

इसीलिये जीवन मे सन्सकारो की बात की जाती है / सन्यम की बात की जाती है / स्व-अनुशासन की बात की जाती है / खान पान और पथ्य पालन की बात की जाती है /

जब तक इस तरह की स्किल और नियम कायदे  हस्त मैथुन के लती नही अपनायेन्गे यह ठीक नही हो सकता है /  जिन्होने इसे अपनाया है धीरे धीरे ही सही वे फायदे मे है

ज्यादा हस्त मैथुन करने से दिमाग के रोग / दिल की धड़्कन के रोग / फेफड़ो के रोग / नपुन्सकता / जननेन्द्रिय से समबन्धित तरह तरह के विकार / गुर्दे के रोग  और तमाम तरह के मानसिक रोग पैदा हो जाते है / इन सबके मूल मे हस्त मैथुन ही मुख्य कारण होता है /

आयुर्वेद की आधुनिक निदान ग्यान और रोग-निदान की तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन  और इसके अन्य versions   द्वारा किये गये परीक्षणॊ से पेआप्त डाटा के आधार पर इलाज करने से हस्त मैथुन की आदत और इससे पैदा हो चुकी सभी तरह की बीमारियो का इलाज हमारे केन्द्र द्वारा बहुत सफलता के साथ किया जा रहा है /

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अगर   इलाज कराने  के लिये APPOINTMENT और इलाज कराने की फीस के बारे मे जानकारी लेना चाहते है तो नीचे लिखे मोबाइल नम्बर पर सम्पर्क करें /

08604629190

 PATIENTS FROM   OTHER COUNTRIES / NEIBOURING COUNTRIES / OUT SIDE INDIA / CONTINENT’S CITIZENS / OVERSEAS  SICK  PERSONS , who want our treatment for any disorders,   should contact Dr. D.B. Bajpai by e-mail because telephonic contacts / telephonic talks / telephonic conversations  are not possible for us. 

E-mail;

drdbbajpai@gmail.com