SWINE FLU ; AYURVEDA SUCCESSFUL TREATMENT ; स्वाइन फ्लू का सुरक्षित आयुर्वेदिक इलाज


स्वाइन प्लू के लक्षणो पर आधारित सभी रोगियो का आयुर्वेदिक इलाज करने के बाद यह अनुभव मे आया है कि  महामारी की तरह फैल रही बीमारी का बहुत सटीक और अचूक इलाज आयुर्वेद मे है /
वायरल / अथवा स्वाइन फ्लू के रोगियो के इलाज मे मैने निम्न दवाये दी है उन्हे मै  सार्वजनिक तौर पर  देश के सभी नागरिको के लिये यहा बता रहा हू /

स्वाइन फ्लू या इस जैसी बीमारी के इलाज के लिये मेरा नुस्खा इस तरह है /

  • महामृत्युन्जय रस  दो गोली

  • कफ कुठार रस   चार गोली

  • सुदर्शन घन वटी  दो गोली

  • सप्त पर्ण घन वटी दो गोली

वयस्क व्यक्ति के लिये यह एक खुराक है /

सभी ऊपर लिखी गयी  दवओ की गोलियो को गुन्गुने पानी से तीन तीन घन्टे के अन्तर से खिलाना चाहिये three hourly a with lukwarm water

कम उम्र के  किशोरो को  ऊपर लिखी दवाओ की एक एक गोली मिलाकर खिलाना चाहिये

बहुत छोटे बच्चो को ऊपर लिखी दवाओ की आधी आधी गोली शहद के साथ या खासी के किसी  मीठे आयुर्वेदिक सिरप मे मिलाकर या जैसे भी और जिस तरह से  दवा का सेवन कर सके वैसे ही उनको खिलाना चाहिये

सभी दवये तीन  तीन घन्टे के अन्तर से देना चाहिये / जब तकलीफ कम होने लगे तो दवा का रिफीटीशन के लिये घन्टे का अनतर बढा देना चाहिये /

पान्च या छह दिन के उपचार से स्वाइन फ्लू ठीक हो जाता है और व्यक्ति सामान्य स्वास्थय की अवस्था मे आ जाता है /

हमारे रिसर्च केन्द्र मे जितने भी स्वाइन प्लू के रोगी आये है उन्हे इसी द्वा के द्वारा अधिकान्श्त त्सेवन कराकर रिग मुक्त किया जा चुका है /

द्चावा के सेवन काल मे हल्हिका भोजन खना चाहिये तथा स्येवास्थय साबन्धि आचरण उपयोग मे लाना चाहिये /

स्वाइन प्लू के लिये उप्रोक्त बताया गया फार्मूला अचूक है और यह अवश्य लाभ करता है /

मुझे पूरे देश से मोबाइल और फोन पर बहुत बड़ी सन्ख्या मे लोगो ने अनुरोध किया था कि स्वाइन प्लू के उपचार के लिये आयुर्वेद की औषधियो का फार्मूला क्या है ?

आप सभी लोग इसका उपयोग करे और स्वाइन प्लु के रोग से मुक्ति पाय

SWINE FLU is a curable disease condition , if treated by AYURVEDIC Classical Remedies. Many successfully cases of SWINE FLU / Viral Infections have been cured by the remedies very safely within six days.

Majority of the patients have the following syndromes of this disorders ;

  1. Nervousness feelings
  2. fears feeling
  3. Some thing will be bad having with their liuves
  4. Shivering
  5. Chilliness
  6. Internal heat / temparature feelings
  7. Difficulty in Breathing
  8. Some patient have cough / COPD like symptoms
  9. Body ache
  10. Sneezing and cold
  11. Running nose
  12. Loss of appetite
  13. Tase of mouth is bad
  14. some feels vomitting/ nausea sensations
  15. some feels difficulty in breathing with chest mscles pain

AYURVEDA treatment is successfully eradicate these syndromes within six days , if treatment is taken immediately after one or two symptoms persists

The successful formula of Ayurvedic combination of remedies are given below, is used in majority of patients.

  • MAHAMARANTYUNJAY RAS  TWO PILLS

  • SUDARSHAN GHAN VATI   TWO PILLS

  • SAPTAPARN  GHAN VATI TWO PILLS

  • KAF KETU RAS   FOUR PILLS

tHIS COMBINATION OF PILLS IS ONE DOSE FOR AN adult PATIENT.

aDOLESCENCE AGED SHOULD HALF THE DOSE

CHILDREMS SHOULD BE GIVEN SMALL DOSES OF THE ABOVE REMEDIES

Remedies can be taken with lukwarm water in three hours interval.

Diets shuold be given easily diagestibles and incluse milk and fruit juices.

Virals / other infections raised the pH of Blood , say towards acidic reactions, and therefore an Alkaline diet is necessary to minimise the Ph of Blood for maintaining to normal level.

We have treated successfully almost majority of the infectious patients by using the combination of above mentioned remedies.

This is a curable condition , if treated Ayurvedically.

Homoeopathic preventives remedies are also very useful to prevent with the disorders and almost keep safe with the dreaded disease.

I* will draw kind attention of the  physicians freternity that during studies in medical college [1970], it was a matter of discussions among the seniors doctors , which seasons , faces which types of disorders ? This was necessary to understand the nature of patients complaints, in view of diagnosis.

When January passes, it is presumed that the season will become of Chicken pox and small pox and measles and Typhoid and Typhus fever mainly and some kind of Skin disorders and pulmonary complaints etc etc .

Now I am watching since many years that these disorders and classical disease conditions are almost vanished away and new formations od disoders are comming befoe.

In my opinion these viral conditions have changed their nature and manifestations and syndromes and comming in a new shape before us.

This couild be a matter of investigation, why this is happening ?

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AYURVEDA  DIAGNOSIS FOR ALL DISEASE CONDITIONS AND AYURVEDA TREATMENT AND MANAGEMENT SOLUTION FOR ALL AILMENTS AND CONDITIONS 

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KANAK POLYTHERAPY CLINIC AND RESEARCH CENTER ,KANPUR , UTTAR PRADESH, INDIA IS NOW ISO 9001 – 2008 ACCREDITED AND CERTIFIED AYURVEDA RESEARCH CENTER ; कनक पालीथेरापी क्लीनिक एवं रिसर्च सेन्टर , कानपुर उत्तर प्रदेश, भारत अब आई०एस०ओ० 9001 – 2008 सर्टीफिकेट प्राप्त प्रमाणिक आयुर्वेद और आयुष चिकित्सा विग्यान का रिसर्च सन्स्थान


KANAK POLYTHERAPY CLINIC AND RESEARCH CENTER is now accredited and certified AYURVEDA RESEARCH CENTER and AYURVEDA SUPER-SPECIALTY CENTER ALL OVER THE GLOBE .

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कनक पालीथेरपी क्लीनिक एवं रिसर्च सेन्टर , ६७/७०, भूसाटोली रोड, बरतन बाज़ार , कानपुर  २०८००१ उत्तर प्रदेश अब आई०एस०ओ० 9001 – 2008 सर्टीफिकेट प्राप्त  आयुर्वेद और आयुष चिकित्सा मे रिसर्च के लिये प्रमाणित सन्स्थान हो गया है /

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HYPER-HYDRIOSIS ; EXCESSIVE SWEATING FROM HAND PALMS AND LEG SOLES ; 100 % CURE ON BASE OF E.T.G. AYURVEDASCAN AYURVEDA TREATMENT हाथ की हथेली और पैर के तलवों से बहुत अधिक पसीना निकलना और पानी निकलना ; ई०टी०जी० आयुर्वेदा स्कैन आधारित इलाज से शत प्रतिशत १००% ठीक होते है


HYPER-HYDROSIS , excessive sweating from palm and sole is 100 % curable by Ayurveda  latest technology E.T.G. AyurvedaScan based  Ayurveda Ayush treatment .

हाथ की हथेली  और पैर के तलवो से बहुत अधिक मात्रा मे पसीना निकलना और पानी निकलना की बीमारी आयुर्वेद की आधुनिक तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित इलाज कराने से शत प्रतिशत १००% ठीक हो जाती है /

हमारे सन्स्थान “कनक पालीथेरापी क्ळीनिक और रिसर्च सन्स्थान , 67/70, भूसाटोली रोड, बरतन बाज़ार, कानपुर , उत्तर प्रदेश ” से समपर्क करे /

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KANAK  POLYTHERAPY CLINIC AND RESEARCH CENTER ,

67 / 70, BHUSATOLI ROAD, BARATAN BAZAR,

KANPUR-208001 , U.P.

INDIA  

is  an ISO 9001 – 2008 certified AYURVEDA RESEARCH CENTER

BOTH KNEE JOINT’S ARTHRITIS PATIENT MONITORED SEVERAL HOURS FOR COLLECTION OF BIO-PHYSIOLOGICAL DATA ON BASIS OF E.T.G. AYURVEDASCAN MONITORING LINES ; ई०टी०जी० आयुर्वेदस्कैन मानीतरिन्ग लाइन्स पर आधारित घुटने की आर्थराइटिस के रोगी का बायो-फीजियोलाजिकल डाटा निदान ग्यान को ध्यान मे रखते हुये कई घन्टे तक का सनकलन


घुटने की आर्थराइटिस जिसे आर्थराइटिस अथवा घूतने का वात या गठिया वात भी कहते है शरीर की एक बहुत ही कठिन किस्म की बीमारी है / इस बीमारी की सबसे बड़ी खराबी इस बात की है कि जिसे भी यह बीमारी हो जाती है उससे चलने फिरने और श्रीर को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने मे बहुत ही तकलीफ होती है / लोग खते पीते रहते जरूर है लेकिन चलने फिरने के लिये मोहताज हो जाते है यानी वे स्वयम अपना शरीर लेकर चल नही सकते है न सीढियां चढ सकते है , न ऊन्ची जगह से नीचे उतर स्कते है /

अच्छे अचॆ शूरमाऔर बहुत शकतिशाली लोग और ताकतवर शरीर वाले भी इस बीमारी के जोर से ढेर हो जाते है / भले ही उनका अना जाना किसी सहारे से भले ही चलता फिरता रहे लेकि घूतने मोड़ने और पैर के किसी भी तरह के movement  और motion  से होने वाले कष्ट से पुरखे तक याद आ जाते है /

आयुर्वेद की चिकित्सा द्वारा यह बीमारी दूर की जा सकती है / भले ही वह किसी भी स्तर की हो /

ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित इलाज से सभी तरह की arthritis  ठीक हो जाती है और वकति सामान्य जीवन व्यतीत कर सकता है /

नीचे दिये गये चित्र मे एक रोगी के पैर के घुटने का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन मानीतरिन्ग लाइन्स पर आधारित निदान ग्यान के लिये कई घन्टे तक्  रोगी के बायो-फीजियोलाजिकल डाटा को एकत्र करके जान्ने और समझने के लिये कोशिश की गयी कि लम्बे समय तक आराम करने के बाद क्या और किस तरह के परिवर्तन उन अन्गो पर होते है जहां पर आयुर्वेद के सिध्धन्त वात और पित्त और कफ के presence  के बारे मे etiological intensity level कैसा और किस तरह का है ??

जिस रोगी का परीक्षण किया जा रहा है उसका सारे शरीर मे स्कैनर एलेक्ट्रोड्स लगाये गये थे और विशेष तौर पर उन हिस्सो पर लगाये गये थे जहा पर उसे बहुत ज्यादा तकलीफ थी / नीचे रोगी के सूजन वाले घूटने दिखाई दे रह है /

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.इस रोगी के  पैरा मीटर्स को देखिये / इसकी नाड़ी की स्पीड ६६ पल्केस प्रति मिनट के करीब है / इसका बलड प्रेशर  हाई लेवल का है  और डायस्टोलिक प्रेशर अधिक की तरफ का है / इसका रक्त आक्सीजन सैचुरेशन  सामन्य स्तर का हओ / लेकिन इसका रिस्पाइरेशन रेट सामान्य से अधिक है यानी ५५ के करीब है /इस रोगी का टेम्पेरेचर सामान्य से कम है /

इस रोगी के घूतने मे लगाये गये एलेक्ट्रोड्स  द्वारा रिकार्ड किये गये ट्रेसेस का अध्ध्य्यन करने के बाद यह पता चला कि घूतने मे [1] Inflammation [2] swelling [3] hardness/rigidity [4] electrolytic imbalances  उपस्तिथि है /

[मैटर लोड करना बाकी है ]   ………………………………………………..

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स्वाइन फ्लू से डरने की कोई जरूरत नही है ? आयुर्वेद और आयुष चिकित्सा मे इसका बहुत सटीक और बेहतर इलाज मौजूद है / Do not afraid of SWINE FLU PROBLEM


स्वाइन फ्लू से डरने की जरूरत नही है / इस बीमारी का बहुत सटीक और असरदार इलाज आयुर्वेद और आयुष दिकित्सा विग्यान मे मौजूद है /

इस बीमारी के बारे मे बहुत भ्रम भी है / अक्सर डाय्ग्नोसिस सही न होने के कारण इस तरह का वाता वरण बना दिया जाता है कि वायरल बुखार और मीजल्स और टायफायड जैसे इन्फेक्शन के बुखार भी इसी स्वाइन फ्लू के डाकटरो द्च्वारा बता दिये जाते है / इस तरह से मरीजो को बड़ी बीमारी बता देने के कारण जन मानस मे और लोगो के बीच मे जब इस तरह की बड़ी बीमारी की चर्चा की जाती है और आपस मे लोग चर्चा करते है उससे लोगो के बीच मे दहशत का माहौल बनता है /

अच्छा यही होगा कि जो भी डाक्टर ऐसे मरीज का इलाज कर रहे हो उनको पहले बुखार किस तरह का है और बैक्टीरिया या इन्फेक्शन फैलाने वाले कीटाणु की जब तक परख न हो जाये तब तक यह establish नही करना चाहिये कि बीमारी स्वाइन फ्लू है /

I want to convey tha massage that no body should fear from SWINE FLUE PROBLEM . Ayurveda and ayush therapies have excellent remedies to treat effectively the condition and syndromes of SWINE FLU problems.

FOR PREVENTIVE PURPOSES  some HOMOEOPATHIC remedies are  useful when taken daily;

  • ARSENIC ALBUM 200   one dose daily
  • ECHINESIA  200 one dose daily
  • PULSATILLA 1000 one dose daily

Above mention remedies from HOMOEOPATHIC Medical system is used as preventive remedies when taken daily regularly

Ayurveda Remedies preventives are ;

  1. MAHASUDARSHAN CHURNA 3 GRAMMS DAILY WITH WATER ONCE A DAY
  2. MAHAJVARANKUSH RAS 2 TABLETS / PILLS DAILY MORNIGN AND EVENING
  3. TRIBHUVAN KIRTI RAS 2 TABS /PILLS WITH WATER THREE TIMES A DAY
  4. SARAVAJVAR HAR LAUH 2 TABS
  5. SANJIVANI TABS / PILLS 4 PILLS A DAY THREE TIMES PREVENTS

tHE BETTER ONE IS TO PREVENT THE DISEASE.

When affected with the disorders, treat with the combination of Ayush therapies , which will certainly have curative effects against the disorders.

SUNANDA PUSHKAR DEATH ; SEEMS HOMEOSTATIS DRUG REACTION REFELECTION IN BODY MULTI SYSTEM MECHANISM


SUNANDA PUSHKAR , wife of Shri SHASHI THARUR death seems due to [1] habitual and continuous sedative drug intake resistance [2] and sedative drug’s compulsory physical side effects reaction on human body Homeostatistically and [3] sudden functional paralysis of respiratory organs, which causes the death of Sunanda Pushkar,

I assume without any doubt that there may be more causes relted to the Physiology of human body, but in my opinion Sunanda Death is natural and due to reaction of drugs, as I have mentioned above.

Hypnotics and Anxiolytic Drugs acts on the Nervous System  mainly. but refelection of the alkeloids actions affects whole body and thus more systems of body physiology is changed.

Pharmacological books mentions that drugs action on Nervous system anomalies treatment , certain group of remedies like  [1] Hypnotis and Anxiolytics drugs and [2] Schizophrenia and behavioural emergencies drugs and [3] Mood disorders drugs can cause sudden death during sleep.

I am not in any way concerned to Mr. Shashi Tharura, nor I met him ever, I have seen him on TV and in News papers and read about the death of his life-partner Mrs Sunanda Pushkar. What I had  perceived and have concluded the circumstances of death scenario are totally based on according to my experience  after seeing the similar condition of patient’s death  who were taking like drugs for long periods, I presume that possibilities of the death condition may be similar due to inimical drug actions, as I have  said earlier.

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बसन्त पन्चमी दिनान्क 24 / 01 / 2015 को जनपद उन्नाव मे “स्वास्थय चिकित्सा निदान शिविर ” मे डा० देश बन्धु बाजपेयी द्वारा मरीजो का परीक्षण


बसन्त पन्चमी को उत्तर प्रदेश के जनपद उन्नाव , जह से साक्षी महाराज मेम्बर आफ पार्लियामेन्ट है और यह वह जनपद है जो आकार और प्रकार और विस्तार मे लोक सभा की सबसे बड़ी कान्स्टीटुयन्सी क्षेत्र है और इस देश की सबसे बड़ी कान्स्टीटुयन्सी के सीमा रेखा मे प्रदेश के कन्नौज जिले की सीमा और हरदोई जिले की सीमा रेखा और रायबरेली जिले की सीमारेखा और फतेह्पुर जिले की सीमा रेखा  और कानपुर की सीमा लेखा और राजधानी लखनऊ की सीमा रेखा से जुड़ा हुआ  क्षेत्र है /

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इस जनपद मे दिनान्क २४ जनवरी २०१५ दिन शनिवार को बसन्त पन्चमी के दिन निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया / इस आयोजन के मुख्य अतिथि  उत्तर  प्रदेश सरकार के रिटाय्रर्ड स्वाथ्य सचिव श्री मुख्तयार वर्मा जी थे /

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 ऊपर चित्र  मे दाये से बाये ; डा० पन्कज निगम , उनाव ,

मुख्य अतिथि श्री मुख्तयार वर्मा पूर्व रिटायर्ड स्वास्थय सचिव, उत्तर प्रदेश सरकार,

डा० हरि शन्कर मिश्रा , पुरवा , उन्नाव द्वारा डा० देश बन्धु बाजपेयी को प्रशस्ति पत्र देते हुये माननीय गण 

मुझे इस शिविर मे ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्षण के लिये बुलाया गया था जहां मैने रोगियो का परीक्षण किया और उनके रोगो का निदान किया / मुख्य अतिथि द्वारा और शिविर के आयोजको के द्वारा मुझको प्रशस्ति पत्र दिया गया / मैने मुख्य सचिव को ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के बारे मे विस्तार से वताया और चर्चा की / मैने बताया कि अब इस तकनीक मे शोध के प्श्चात पान्च तरीके के ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्षणो का विकास किया जा चुका है / स्वास्थय सचिव को इस बात की जानकारी नही थी कि आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान मे इतने उच्च कोटि की तकनीक आयुर्वेद के निदान ग्यान और  शारीरिक बीमारियो के निदान  के लिये   उपलब्ध है और इसकी practice  की जा रही है तथा सर्व सुलभ है /

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्स्वास्थ्य  शिविर मे आये लोगो को जानक्रर बहुत आश्चर्य हुआ कि आयुर्वेद मे भी अब शरीर की जान्च के लिये यन्त्र और मशीने उपलब्ध है और अब खून की जान्च तथा मूत्र की जाच के लिये आयुर्वेद के तौर तरीके से रोग निदान और इसके प्राप्त परिणामो का द्वाओ के द्वारा की जाने वाली चिकित्सा के लिये औषधियो का perfect  चुनाव अब सम्भव हो गया है /

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कई नामी गिरामी आयुर्वेद औषधि निर्माताओ ने इस स्वास्थय शिविर मे औषधियो का मुफ्त वितरण किया / डाबर इन्डिया और हिमालया तथा झन्डू और अन्य आयुर्वेद् के दवा निर्माताओ ने इस अवसर पर  मुफ्त दवाये दी गयी / डाबर द्वारा फलो के रसो के पैकेट-डिब्बे उपस्तिथि लोगो को फ्री बान्टे गये /

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