महीना: अक्टूबर 2008

धनवन्तरि जयन्ती २००८, धन्तेरस वाले दिन कानपुर शहर में होने वाले कार्यक्रमों में डा० देश बन्धु बाजपेयी द्वारा दिये गये भाषणों का सारान्श


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आयुश मेडिकल एसोसिएशन द्वारा धनवन्तरि पूजन कार्यक्रम  आर्य समाज धर्मशाला, पी० रॊड, लेनिन पार्क के सामने, कानपुर शहर में नगर के वैद्य बन्धुओं द्वारा आयॊजित की गयी । इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के आयुर्वेद विभाग के ड्रग कन्ट्रोलर श्री मन्गल देव त्रिपाठी, लखनऊ से पधारे डा० नगेन्द्र नाथ दीक्षित, उन्नाव से पधारे आयुष सन्गठ्न के महासचिव डा० ऒम वीर सिन्घ “ऒम”,  कानपुर के वयोब्रद्ध आयुर्वेद के चिकित्सक वैद्य श्री गॊर सुन्दर बाजपेयी, अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन, कानपुर यूनिट के पदाधिकारी गणों  के अलावा बड़ी सन्ख्या में बाहर से आये और स्थानीय आयुर्वेद के चिकित्सकॊं ने हिस्सा लिया।

 

इस कार्यक्र्म में डा० डी०बी० बाजपेयी ने अपनी अनुसन्धान की गयी तकनीक “इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी  – ई० टी० जी०”  के बारे मे उपस्तिथि लोगों को बताया, कि किस प्रकार यह तकनीक आयुर्वेद के लिये फायदे मन्द हो सकेगी, जिससे भविष्य में आयुर्वेद में अनुसन्धान के नये रास्ते खुलेंगे और एक प्रकार से विश्व में आयुर्वेद को वैज्ञानिक आधार प्राप्त होगा । 

सभा में उपस्तिथि सभी लोग आश्चर्य चकित थे , जब उन्हें यह पता लगा कि इस तरह का अनुसन्धान कई साल पहले हो चुका है और यह जान्कारी अब मिल रही है ।

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 भारत की प्रसिद्ध आयुर्वेदिक दवा बनाने वाली कंपनी “डाबर इंडिया, कानपुर ” द्वारा होटल मीरा, माल रोड, कानपुर में अखिल भारतीय आयुर्बेद महासम्मेलन के साथ आयोजित कार्यक्रम में डा० देश बन्धु बाजपेयी ने अपने भाषण में उपस्तिथि वैद्य बन्धुऒं को विस्तार से Electrotridoshagraphy ETG Technology के बारे में जान्कारी दी । कुछेक लोगों को छोड़कर , बहुत से लोगों को नाड़ी ज्ञान की  इस latest तकनीक के बारे में जान्कारी नहीं थी । डा० बाजपेयी ने वैद्य बन्धुओं को इस तकनीक से परिचित कराने के लिये प्र्त्येक वैद्य को २ फ्री कूपन देने का वादा किया, ताकि सभी वैद्य अपने मरीजों का ETG examination करा करके इस तकनीक को समझ सकें । साथ ही इस ETG विषय पर एक फ्री कार्यशाला workshop का आयोजन करने का प्रस्ताव रक्खा , जिसे वरिष्ठ चिकित्सक वैद्य राम मनोहर जी मिश्र ने अनुमोदित किया ।

 

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पन्जाब प्रान्त की आयुर्वेदिक  दवा बनाने वाली चावला आयुर्वेद के कार्य क्रम में Dr. D.B.Bajpai ने अपने भाषण में कहा कि वैद्य बन्धुओं को प्राचीन और आधुनिक ज्ञान दोनों को साथ साथ लेकर चलने से अधिक फायदा होगा । वैद्यॊं को एक हाथ में चरक, सुश्रुत, भाव प्रकाश, माधव निदान आदि आदि ग्रन्थों लेना चाहिये और दूसरे हाथ में आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के ग्रन्थों को लेना चाहिये । इन दोनों का सामन्जस्य बैठाकर जब साथ साथ चलेंगे तो आयुर्वेद और अधिक वैज्ञानिक स्वरुप लेगा । डा० बाजपेयी ने आगे कहा कि माधव निदान में रोगों के विषय में जितनी भी निदानात्मक बातें लिखी गयी है, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की पुस्तकों में यही सब पढ्ने को मिलता है । लेकिन समय के साथ आधुनिक मशीनों और तकनीक के आ जाने के कारण इतना विस्तार जरूर हुआ कि जितनी बातें रोग निदान के लिये बतायी गयी हैं, उन सबका varification , evidence form / evidence based आधार लेकर कर दिया गया है।

 

Dr. Bajpai नें Electrotridoshagraphy ETG  के बारे में विस्तार से बताया और इस तकनीक से प्राप्त data का रोगी की चिकित्सा में किस प्रकार उपयोग कर सकते है, जिससे सटीक prescription रोगी को दिया जा सके , ताकि शीघ्र आरोग्य देने की मंशा प्रत्यक्ष रूप ले सके,   इस विषय पर भी प्रकाश डाला ।

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Cancer यानी कॆंसर यानी कर्कट रॊग में Combination Therapy समन्वित चिकित्सा के प्रयोग


कर्कट रोग रॊग यानी कॆसर रॊग Cancer disease, चिकित्सा विज्ञानियो के लिये हमेशा चुनौती के रुप में अपनी उपस्तिथी दर्ज कराता रहा है । यह है ही इतना कथिन रॊग, जो जल्दी काबू में नहीं आता, इसीलिये इस रॊग कॊ असाध्य रोगों यानी complicated disease condition य़ा Incurable diseases की श्रेणी में गिनते हैं ।

 

यह कुदरत के हर वस्तु के नष्ट करने के नियम या सिधान्त के बहुत नज्दीक है । जब कॆन्सर शरीर में पैदा होता है और जहां भी पैदा होता है, इसका पता प्रारम्भिक अवस्था में नहीं लग पाता । यह इतना silent होकर बढता है कि इसका प्रारम्भ शरीर के किस अन्ग में शुरू हुआ,कहां से शुरू हुआ, इसक पत लगाना एक मुश्किल और दुरूह कार्य है ।

 

ईसे इस तरह से समझ सकते हैं । हमारा शरीर छोटी छोटी कोशिकाओं यानी Cells से मिलकर बनीं हैं । कोशिका यानी cells से तन्तु यानी Tissues , और फिर इस तन्तु से शरीर के अन्गों का निर्माण होता है । ये Tissues  कई प्रकार के होते हैं । जब सेल्स अपनी सामान्य अवस्था, सामान्य कार्य, सामान्य आकार आदि को बदलकर असामान्य कार्य, असामान्य आकार, और असामान्य अवस्था जैसे बदलाव स्वयम पैद करते हैं , तब इन सेल्स से जुड़े हुये टिस्सू भी affected हो जाते है यानी प्रभावित होते हैं । इस प्रभाव के कारण यह cells असामान्य होकर असामान्य कार्य करने लगते हैं ।बाद में ये tissue जिस अन्ग से जुड़ॆ होते हैं , उन अन्गॊ के कार्यों में असामान्यता पैदा होने लगती है ।

 

यहां तक तो ठीक है कि एक अन्ग ही affected हुआ या शरीर का एक छॊटा सा हिस्सा affected हुआ, लेकिन समस्या तब पैदा होती है, जब इसके साथ साथ यह शरीर के दूसरे अन्गॊं में फॆलना शुरू करता है । इसे चिकित्सा विज्ञान की भाषा में Metastasis कहते है । कुछ चिकित्सा वैज्ञानिकों का मानना है कि Metastasis की प्रक्रिया शरीर के Lymphatic system द्वारा सम्पन्न होती है ।यानी  शरीर के उस स्थान की बीमार कोशिकायें शरीर के दूसरे स्थान पर transfer होती हैं । कुछ चिकित्सा वैज्ञानिको  का कहना है कि यह रक्त के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुचता है । कुछ चिकित्सा वैज्ञानिक मानते है कि शरीर के  अन्ग एक दूसरे से जुड़े हुये होते है और यदि एक अन्ग बीमार पड़ जाये तो स्वाभाविक है कि दूसरा स्वस्थ अन्ग भी बीमार पड़ जाये, यह उस अंग की sensitivity / susceptibility या प्रतिरोधक क्षमता पर निर्भर करत है । यदि अंग कमजोर होगा तो वह affected भी जल्दी होगा ।

 

बहरहाल यह सब तो कयास है कि कैसे बढता है और क्यों बढता है ? वास्तविकता यही है कि यह तभी जानकारी में आता है , जब इस बीमारी का प्राथमिक चरण first step पूरा हो जाता है और तकलीफ द्वितीय चरण second step में आ चुकी होती है  या त्रितीय चरण theird step मे आ गयी होती है । इतने चरण को पार करते करते यह बीमारी पूरे शरीर में फॆल चुकी होती है ।

 

 

इस बीमारी का इलाज भी confusion से भरा हुआ है । आधुनिक चिकित्सा विज्ञान Allopathy में – अभी तक कोई बहुत सटीक इलाज हो, यह नही कहा जा सकता है । दवाओं के मामले में भी Allopathy में कोई कारगर तरीका भी नही उपलब्ध है । हां, शल्य चिकित्सा Surgery की सहायता से कॆसर ग्रस्त हिस्से को काटकर ह्टा देने से रोगी को कुछ समय के लिये पीड़ा, तकलीफ से छुटकारा और जीवन दान मिल जाता है, लेकिन यह कितने समय तक होगा, कितने दिन तक होगा, इसके बारे में ठीक ठीक नही कहा जा सकता है । केमोथेरेपी chemotherapy और रेडिएशन radiation से भी ऐसे ही परिणामों की आशा की जाती है ।

 

ऎसा भी देखा गया है कि कभी कभी  कॆंसर ग्रस्त स्थान की Surgery के बाद रोग बहुत तेज़ी के साथ बढता है या शरीर के दूसरे स्थानों में अधिक तेजी से फॆलता है ।

 

मैने कैन्सर के रोगियों का इलाज किया है । इसमें सभी अवस्था  वाले रोगी देखने को मिले, ऐसे रोगी  भी मिले जो प्रारम्भिक अवस्था वाले थे, बहुत से advance level वाले रहे , कुछ diagnosed cases थे, कुछ undiagnosed या unconfirmed रोगी रहे, लेकिन उनकी तकलीफ से कैन्सर का आभास होता था । कुछ surgery या शल्य चिकित्सा नहीं कराना चाहते थे, कुछ शल्य चिकित्सा करा चुके थे, लेकिन उसके बाद भी उनको दुबारा फिर तकलीफ पहले वाली तकलीफ़ से अधिक बढी हुयी अवस्था में पायी गयी, स्तिथी में मिली,ऎसे लोगॊं की तकलीफ़ पहले से और ज्यादा बढ चुकी थी । कोई कोई रोगी ऎसे मिले, जो आठ आठ बार तक शल्य चिकित्सा करा चुके थे और अगली बार फिर कराने कि तैयारी कर रहे थे ।

 

ऎसे सभी रोगियों का इलाज मैने समन्वित चिकित्सा combined therapy के द्वारा किया, जिसमें निम्न बातों कि तरफ़ ध्यान दिया गया ।

 

  • रोग अधिक न बढे या रोग की तेज़ी अधिक न होये, इसके लिये आयुर्वेदिक दवाओं का उपयोग किया गया, ऎसा इसलिये, क्योंकि Ayurvedic medicines का असर physiologically शरीर के समस्त अंगों पर बहुत बेहतर समझा जाता है ।

 

  • Cells  और Tissues के structural changes की तेज़ी fastness कॊ शांत करने के लिये या धीमा करने के लिये या slow progressive बनाने के लिये Homoeopathic medicines का उपयोग सबसे बेहतर समझा जाता है, इसलिये कैन्सर की बढ़्त रोकने के लिये होम्योपथी की निम्न शक्ति की दवायें Triturations या Mother Tinctures का उपयॊग सबसे अच्छा होता है ।

 

  • दर्द दूर करने या अन्य तीव्र लक्षणों को दूर करने के लिये Allopathic medicines का उपयोग

 

इस प्रकार से औषधि व्यवस्था करने से रोगी का जीवनकुछ समय के लिये बढ जाता है ।

कॆसर रॊग में मॆने स्वयम द्वारा आविष्कार की गयी “शन्खद्राव आधारित औषधियों”  तथा आयुर्वेद की कुछ Penta scale औषधियों का उपयॊग किया है जिससे प्रारम्भिक अवस्था के रॊगी लाभान्वित हुये तथा ट्यूमर tumour या glands के कम होने अथवा समाप्त होने  के अपेक्षित परिणाम मिले है ।

 

एक बात और देखने में प्रायोगिक तौर पर आयी है कि अगर कॆसर के रोगी का इलाज ई०टी०जी० ETG यानी Eelectrotridoshagraphy  तकनीक का सहारा लेकर दोष निदान और रॊग निदान पर आधारित होकर किया जाये तो आरोग्य प्राप्ति के परिणाम अधिक अच्छे मिलते हैं ।

 

रोग के निदान के लिये MRI, CT Scan, Ultra sound, XRay के अलावा रक्त परीक्षण द्वारा यह निश्चित किया जा सकता है । लेकिन इसके लिये Biopsy सोच समझ कर कराना चाहिये । क्योंकि एक बार  बायोप्सी कराने का मतलब यही होता है कि तुरन्त operation करके या Surgery करके पीडित अन्ग को निकलवा देना ।

 

कुल मिलाकर मेरा यही कहना है कि जल्दी न मचा करके धैर्य पूर्वक रोगी का combined treatment करें, स्वास्थ्य के नियमों का पालन करायें और अपना कीमती धन और समय बचायें ।

 

Osteoporosis यानी अस्थि म्रदुता यानी अस्थि का लचीला होना यानी शरीर की हड्डियों का कॆल्शियम कम होना


जब शरीर की हड्डियों में , जो खस तौर पर हाथ और पांव और कूल्हे/कमर स्थान की होती है, इनके अन्दर में एकत्र केल्सियम calcium का छरण / कॆल्सियम के धीरे धीरे कम होते रहने , calcium deficiency  के कारण, जब हड्डियां  कमजोर होने लगती है, तब इस स्तिथी को Osteoporosis  य़ा अश्थि म्रदुता की बीमारी कह्ते है ।

जिस प्रकार मधुमक्खी के छ्त्ते बने हुये होते है, करीब करीब उसी प्रकार से शरीर की हड्डियों का calcium कम होते होते cavities बन जाती है। इन cavities के बन जाने सेयह आशन्का होती है कि तेज़ झटका लगने से कहीं हड्डियां न चटख जायें या हड्डीयां टूटने का डर मन में बना रहे ।

 

कमजॊर हड्डियों की इस बीमारी के पैदा होने के कई कारण है । कुछ चिकित्सा वॆग्यानिकों का कहना है कि Thyroid glands की गडबडी से और इस ग्रन्थि के अच्छी तरह से काम न करने की वजह से ऎसी बीमारी पैदा होती है । कुछ बताते है कि calcium का metabolism असामान्य होने से यह ह्ड्डीयों में नहीं जा पाता /कुछ कहते है कि मनुश्य जो भी खाता पीता है, उससे calcium के molecules थीक तरह से शरीर में assimilate नही हो पाते, इसलिये यह बीमारी assimilative disorders की श्रेणी में हो सकती है । कुछ कहते है कि calcium channel block हो जाने से जॊ calcium हड्डी तक पहुचना चाहिये, वह सही सही नही हो पाता । जान्कार लोग इस बीमारी के अन्य कारन भी बताते है, जिसमे  malnutrition, age factor, menopause, genetics इत्यादि है । कुछ तो कहते है कि यह इन्फ़ेक्सन से भी होता है । कुछ  कहते है कि Allopathy की कुछ दवायें calcium के छरण कॊ बडावा देती है ।

अब कारण कुछ भी हो, बीमारी तो बीमारी है । मैने Osteoporesis  के कई मरीजों को  ayurvedic, homoeopathic और allopathic दवायें देकर इस रॊग कॊ बडने से रोका है ।  यह रॊग अधिकतर महिलाओं में ज्यादा ही देखा गया है, पुरुसों की सन्ख्या महिलाओं की अपेछा कम रही ।

 

इस बीमारी के लछ्ण चिकित्सक को भ्रम में दाल देते हैं , जिससे रॊग निदान में कथिनाई होती है । फिल्हाल कुछ लक्छ्ण निम्न होते है ।

~ हल्का  या अधिक बुखार बना रहना

~ अच्छा खाते पीते हुये शारीरिक कमजॊरी का बडते जाना

~ हल्का काम करने से भी थकावट का आना

~ हाथ पाव में दर्द

~ मांस्पेशियो में दर्द

~ पैरों में फाटन जैसा दर्द

~ ऐसा लगे कि लम्बाई कुछ घट रही है

 

लेकिन रोग निदान confirm  करने के लिये x-ray या Bone density test कराना आवश्यक होता है । आयुर्वेद की वैग्यानिक परीक्छण तकनीक  Electrotridoshagraphy ETG से शरीर में व्याप्त calcium का प्रतिशत और विभिन्न अन्गों मे कितना calcium है, इसका पता लग जाता है ।

क्या इलाज करें ?

Combination therapy यानी समन्वित इलाज  के प्रयोग से बहुत अच्छे परिणाम मिले है

~ Calcium की पूर्ती के लिये आयुर्वेदिक दवायें

~ Calcium का assimilation बडाने के लिये Homoeopathic medicines

~ Vitamin A & D  की आवश्यकता की पूर्ती के लिये Allopathy  के पूरक आहार

इसके अलावा कोई अन्य बीमारी हो तो उसका इलाज भी साथ्साथ करें

 

क्या खान पान में बडायें ?

Calcium  युक्त खाद्य पदार्थ भोजन में सम्मिलित कर लेना चाहिये जैसे दुध, दही , पनीर , अन्डा, केला. सेव इत्यादि

 

कैसे रहन सहन रखें ?

 

झट्के से शरीर को बचायें । दिन चर्या, रात्रि चर्या, रितु चर्या का strictly पालन करे ।

 

यह सब उपाय करने से Osteoporosis कि तकलीफ से छुटकारा और बीमारी पर नियन्त्रण रक्खा जा सकता है तथा रोगी सारी उम्र,  सुरक्छा के साथ, प्राप्त कर सकता है ।

चिकित्सा विग्यान के देवता भगवान धनवन्तरि देव जी


चिकित्सा विग्यान के देवता भगवान धनवन्तरि देव जी का जनम दिन धन्तेरस वाले दिन होता है. सभी वैद्य समाज के लोग इस दिन धन्वनतरि देव की पूजा अर्चना बडे भक्ति भाव से करते है. इन्हे देवी लछ्मी का बडा भाई माना जाता है

ऐसी मान्यता है की धनवन्तरि देव कि लगातार और रोजाना पूजा करने सॆ मानसिक और शारिरिक रोगो से बचाव होता है, इसलिये वैद्य लोग इनसे प्रार्थना करते है कि उन्हे दवाये और चिकित्सा कार्य मे सफ़लता देने के लिये , वे इन पर क्रपा करे और आशीर्वाद दे .

इनके मन्त्र इस प्रकर है :

 

नमामि धन्वन्तरिमादिदेवम, सुरासुरैर वन्दित पाद पद्ममम

लोके जरा रुग्भय म्रत्यु नाशम, दातारिमीशम विविधौशधीनाम”

सभी आगन्तुकॊं से निवेदन है कि अधिक से अधिक सन्ख्या में “पॊल” में अवश्य हिस्सा लें /

MANASIK AVASAAD aur Mental Tension ki stithi mein kya karein ?


 

Desh mein is samay bahut uthal puthal machi huyi hai , visheshkar jab se sensex ki stithi bahut kharab huyi hai, kuchch log sidhe sidhe isase prabhavit ho rahe hain, kuchch sidhe sidhe na sahi, parokshsha rup se prabhavit ho rahe hai, kuchc halke se ghabara rahe hain, kuch soch vichar karake chintit hain,

 

Kahane ka matalab yah ki desh ke nivasi is samasya se kam ya adhik pareshan hain, aur mental tensin is preshani ki evaj mein hina lazimi hai

 

Homoeopathy mein is tarah ki stithiyon ki bahut achchi davayein hain, jinake sevan karane se MENTAL TENSION, DEPPRESSION, ANXIETY, GRIEF, CHAGRIN, GLOOMINESSA  jaise syndromes mein ya to samapt ho jate hain ya phir unaki ugrata bahut kam ho jati hai

 

Yah ek satya samajhana chahiye ki jab takkaran ka nivaran nahin ho jata , tab tak manasik shanty nahin mil sakati, isaliye is baat ko samajhana chahiye ki jab tak sensex ki stithti nahin sambhalati tab tak to mental tension aur doosari stithiyan to bani hi rahengi, chahe usake liye kuchch bhi kiya jay, kyonki yahi vah karan hai , jisaki vajah se aisi mansik stithi aayi hai, isaliye is satya ko samajhana hoga, aur man mein yah sankalpa lena hoga, man ko yah samajhana hoga ki jab stithiyan thik hongi tab tak kuchch na kuchch bardashta kiya jana chahiye

 

Koi bhi vyapar ho, ghata napha nukasaan to laga rahata hai, jara vichar kariye, jab sensex unchayiyon ki taraf jar aha tha, to sab balle balle kar rahe the, sabake chehare par raunak thi, sab rakam bana rahe the, us samay to kisi ko koi pareshani nahin huyi, aaj jab nukasaan ki taraf ja rehe hain to sab chintit hain, kyon ? Kisaliye chintit hain ? Yahi na ki, nukasaan hua hai , vichar kariye aaj nukasaan hua hai, to kal phayada bhi uthayeine, is baat ka hausala rakhana chahiye, ki kal ka din jyada achcha hoga, aaj se kal behatar hoga aur kal se aage anewala din.

 

Yah sab ke saath hai, mere saath bhi, lekin main hausala nahin chchodata, mere paas kabhi kabhi sarvajanik vahan se jane ke liye paise nahin hote hain, main rojana kaam par jata hun , mujhe teen jagah sarvajanik vahan badalane padatey hai, kabhi kisidin mere paas itane paise nahin hote ki main sarvajanik vahan se aa ja sakun, lekin mujhe jana hai to jana hai, main paidal chalata hun, kai kilometer tak, lekin is 63 varsha ki umra mein bhi mera vahi hausala hai, jo varshon pahale tha, yahan mera mataklab kahane ka yah hai ki, kabhi bhi nirash nahin hona chahiye, hausala banaye rakhana chahiye, aap kya behatar kar sakatey hain, us par sochiye,

 

Ishwar ek darvaja band kar deta hai, jahan se aap kisi baat ki ummid lagaye huye hote hain, jab yah darvaja band ho jata hai to dusara khul jata hai, jab dusara bhi band ho jata hai to tisara khulata hai, aur isi tarah se kisi na kisi darvaje par aapaki murad puri ho jati hai

 

Kya karein; Man ko shant rakkhein, kaya achcha kar sakatey hain , is par vichar karein, apane mitron se vichar vimarsha karein, kyonki ve bhi isi tarah ki samasya se jujha rahe hain, man ko vishram dein, kam se kam do ghante chup chap lete rahein,

 

Homoeopathic dava lein: Homoeopathic chikitsa vigyan mein is tarah ki avsthaon ke liye bahut achchi davayein hain, jinake lene se mental tension bahut kam ho jata hai, Behatar hai kisi homoeopathic doctor ke nirikshshan mein yah davayein lein,

 

Kuchch Homoeopathic davayein:

·        Ignatia 1000,10M, 50M,CM din mein do baar le sakatey hai

·        Natrum mur 1000,10M, 50 M

·        Aurum Met 1000, 10M,50M,CM

 

Khana kam khayein: Bharpet khana na khayein, kuchch bhukhe rahein, khali pet rahane se tanav mein kami ati hai, is baat ka dhyan rakkhen, chahein to kahana ek baar khayein, baki samay juice ya halke phulake khadya padarth le sakatey hain

 

Isake alawa aur bahut si davayein hain , jo vayktigat lakshahano ke adhar par select ki jati hain, isake liye kisi achche Homoeopathic doctor se sampark karein

 

 

BIOCHEMIC DAWAYEIN ; Inako bhi aajamaiye


Biochemic chikitsa vigyaan , yadyapi Homoeopathy ke saath saath hi jodakar dekha jata hai aur isaki davayein bhi Homoeopathic dava bechane walon ke yahan hi milati hain, lekin yah chikitsa vidhi Homoeopathy se bilkul alag hai, Kuchch samantayein Homoeopathic aur Biochemic mein kahi ja sakati hai, pahala yah ki Homoeopathy ka avishkar Germany mein hua tha, biochemic ka bhi janam Germani mein hua hai, doosara Homoeopathy ko ek German Doctor ne ijad kiya tha, Biochemic ko bhi ek German doctor ne ijad kiya tha, tisara Homoeopthic davayein banana ka tarika biochemic dawayein banana ke tarike se milata julata hai chautha jis tarah Homoeopathic dawaon ka chunav karatey hain , usi prakar se Biochemic dawaon ka chunav karatey hain Isiliye Homoeopathy ke doctor, Biochemic dwaon ka sabase jayada upayog karatey hai

 

Biochemic dawayein, kabhi kabhi kisi kisi bimari mein bahut tezi se asar karati hain, jo unexpected hota hai aur unake action dekhakar bahut aashcharya hota hai, lekin aisa kabhi kabhi hota hai, lekin yah sabhi ko phayada karati hai, chahe vah kisi bhi umra ka kyon na ho Iski davayein anya dawaon ke saath de sakatey hai, jaise ki isaka sabase achcha combination Homoeopathy ke saath banata hai,yadi Homoeopathy ki dwayein kha rahe hain to Biochemic ki dwayein bhi kha sakatey hain

 

Mera anubhav Biochemic dawaon ke bare mein thik hai, lekin iska prayog kaise kiya jaye yah chikitsak ke gyan, anubhav, paristithion, marij ki halat, marij ki bimari , usaki jivani shakti ityadi par nirbhar karata hai Udaharan ke liye, emergent condition mein, is dava ka repetition 5- 5 minute ke antar se karate hai, jo dusari davaon ke saath alternate karake marijon ko dete hain, Granthi ya ganthon ya glandular inflammation mein High potency yani 12 X ya isase adhik potency ki dava din mein ek ya do baar dete hain

 

Yah chikitsak par nirbhar karata hai ki vah isaka upayog kaise karata hai Kuchcha yog ,jo foolproof hain aur jink maine prayog kiya hai, vah main niche likha raha hun

 

1- Bukhar mein; Koi bhi bukhar ho Ferrum Phos 6X aur Kali mur 6X ki teen teen goli milakar 2-2 ghante se khilane se kaisa bhu bukhar ho aur kitana hi tez ho, dhire dhire kam ho jata hai, is combination ko emergency ya anya sabhi bimarion ki dasha mein bhi istemal kar sakatey hai

 

2- Koi bhi gaanth ho, Calcarea Flourica 12 x ka upayog din mein do baar karane se gaanth thik ho jati hai Is tarah ke bahut se combination hain, jinaka upayog Biochemic chikitsa vigyan mein karatey hain

LEUCORRHOEA Yani Yonimarg se safed ya rakta ya anya prakar ke shrav ka nikalana


Yah mahilaon ki bimary hai aur yah dekha gaya hai ki , is takalief se kam se  kam sabhi mahilayein grasit rahati hain, yah ho sakata hai ki kisi ko jyada ho, kisi ko kam ho, lekin yah bahut kharab bimari samajhi jati hai

Is bimari ke karan mahilaon ko bahut si takaliefein ho jati hai

  • Kamar mein dard rahana
  • Mukh ki aabha ka kam ho jana
  • Swasthay ka lagatar girate jana
  • Sharirik kamjori ka dhire dhire badhatey chala jana
  • Khun ki kami hoti hai
  • Bhojan ka pachan thik nahin hota
  • Bhukh kam lagati hai
  • Pet saaf nahin hota aur kabja bana rahata hai
  • Sirdard ki shikayat bani rahati hai
  • Aisa mahasus hota hai , mano halk halka bukhar sa ho gaya hai
  • Pet mein dard hota hai

Is bimari mein jaisa ki pahale hi kaha ja chukka hai, ki yoni marg se safed aur rakta ki tarah ka shrav nikalata hai, yah kai karano se hota hai, jinamein kuchch mukhya hai

 

  1. Pelvic Inflammatory disease ki stithi ho
  2. Kisi prakar ka yoni marg mein sankraman ho gaya ho
  3. Yoni marg ki thik se safai na rakhi jati ho
  4. Kisi infection yani UTI jaisi bimari se grasit hon
  5. Uterus ki kisi samasya se grasit hon
  6. Mansik tanav ho
  7. Masik dharma mein koi vyutkram paida ho gaya ho

Isake alava aur doosare bhi karan hote hain, jinako pahachankar aur achchi tarah se nidan karake, tab ilaj karana chahiye,

Is bimari mein sabase achcha ilaj Ayurvedic aur Homoeopathic ka milajula ilaj hi behatar hai, dono hi chikitsa vidhiyon se yah bimari thik ho jati hai, lekin kuchch samay lag jata hai, isaliye dhairya poorvak chikitsa karani chahiye, tabhi achche parinaam milatey hain

Yah bimari ke oopar nirdharit hota hai ki vah kitani purani hai, aur usamein kitani pathophysiology ya pathology shamil hai, yadi jyada din ki bimari hai to jyada samay thik hone mein lagega, yadi kam samay ki takalief hai to kam samay mein bimari thik ho jati hai

Amenorrhoea yani Masik dharma ka bich bich mein ruk jana


Yah mahilaon ki bimari hai, strion ko prati maah masik raktashrv  unaki yoni marg se hota hai, isaki visheshata yah hai ki yah har mahine ek nishchit samay par hota hai, jab yah thik samay par hota hai to ise niyamit masik dharma kahatey hain, lekin  kisi vajah se jab yah regular hote hote achanak band ho jata hai, tab ise Amenorrhoea ya band masik dharma kahatey hai, isake band hone kea hut se karan hain, lekin isamein se kuchch niche bataye ja rahe hain

  • Yah jyadatar un mahilaon ko hota hai, jo kam umra ki hoti hain, jaie kishore vay ki mahilayein, jinako kuchch mahine pahale masik shrab shuru hua tha lekin kisi vajah se band ho gaya
  • Jinako khun ki kami ho, aneamia ho
  • Koi malneutrition ki bimari ho, yani khana kha rahi hon, lekin usaka thik se assimilation na ho raha ho
  • Typhoid ho chuk ho , ya malaria ka bukhar aa raha ho
  • Koi Hormonal imbalance ho raha ho
  • Aniyamit din charya aur aahar vihaar ho
  • Bhojan mein  p[shtik tatvon ki kami ho
  • Achanak thand ka lag jana ya thande paani mein kaam karane ki aadat, barsat mein bhig jana
  • Apane sharirik bal se adhik kaam karana
  • Dieting karana, vajan ghataney ke liye khana pina thik se na ho aur is tarah sharir mein paustik tatvon ki kami ho jaye
  • Karan bahut se hain aur unaka pata karana chahiye, karan ka nivaran karana hi chikitsa hai

Chikitsak ko chahiye ki vah karan ka pata karey ki, kis vajah se mahila ko yah taklief ho rahi hai,

Kya upachar karein: Is takalief mein Homoeopathy ya Ayurveda ki chikitsa jyada achchi hoti hai, Allopathy mein secondary amenorrhoea ki davayein hain , lekin usase permanent solution nahin milata hai, sthayi labh ke liye Ayurveda ya Homoeopathy ki davayein kuchch di tak sewan karana chahiye, isa upachar se sabhi rogi thik ho jatey hain

Kya na karein : Allopathy mein kabhi kabhi chikitsak D & C yani Dilation and Curretting ki salah dete hain, yadi yah salah aapaka doctor de raha hai to ise mat karaiyega, isase uterus ki anduruni natural banavat mein fark padata hai, jisase sthayi bandhyatva ki samasya paida ho jati hai, bhavishya mein bachche paida hone mein mushkilein aa jayeingi, isaliye philahal D & C jaisi salahon se bachein, aapake paas bahut se option hain, unako aajamaiye, aur isamein safalata jarur milati hai, in options ko aise hi na discard karein, mera anubhav yah raha hai, ki jinhone D & C karayi hai, usase kisi ko bhi koi bahut utsaah vardhak parinaam nahin mile hain

Is takalief sepidit mahilaon ko AYURVEDIC AUR HOMOEOPATHIC DAWAYEIN LENA CHAHIYE , yahi sabse behatar ilaj ka tarika hai