Cancer यानी कॆंसर यानी कर्कट रॊग में Combination Therapy समन्वित चिकित्सा के प्रयोग


कर्कट रोग रॊग यानी कॆसर रॊग Cancer disease, चिकित्सा विज्ञानियो के लिये हमेशा चुनौती के रुप में अपनी उपस्तिथी दर्ज कराता रहा है । यह है ही इतना कथिन रॊग, जो जल्दी काबू में नहीं आता, इसीलिये इस रॊग कॊ असाध्य रोगों यानी complicated disease condition य़ा Incurable diseases की श्रेणी में गिनते हैं ।

 

यह कुदरत के हर वस्तु के नष्ट करने के नियम या सिधान्त के बहुत नज्दीक है । जब कॆन्सर शरीर में पैदा होता है और जहां भी पैदा होता है, इसका पता प्रारम्भिक अवस्था में नहीं लग पाता । यह इतना silent होकर बढता है कि इसका प्रारम्भ शरीर के किस अन्ग में शुरू हुआ,कहां से शुरू हुआ, इसक पत लगाना एक मुश्किल और दुरूह कार्य है ।

 

ईसे इस तरह से समझ सकते हैं । हमारा शरीर छोटी छोटी कोशिकाओं यानी Cells से मिलकर बनीं हैं । कोशिका यानी cells से तन्तु यानी Tissues , और फिर इस तन्तु से शरीर के अन्गों का निर्माण होता है । ये Tissues  कई प्रकार के होते हैं । जब सेल्स अपनी सामान्य अवस्था, सामान्य कार्य, सामान्य आकार आदि को बदलकर असामान्य कार्य, असामान्य आकार, और असामान्य अवस्था जैसे बदलाव स्वयम पैद करते हैं , तब इन सेल्स से जुड़े हुये टिस्सू भी affected हो जाते है यानी प्रभावित होते हैं । इस प्रभाव के कारण यह cells असामान्य होकर असामान्य कार्य करने लगते हैं ।बाद में ये tissue जिस अन्ग से जुड़ॆ होते हैं , उन अन्गॊ के कार्यों में असामान्यता पैदा होने लगती है ।

 

यहां तक तो ठीक है कि एक अन्ग ही affected हुआ या शरीर का एक छॊटा सा हिस्सा affected हुआ, लेकिन समस्या तब पैदा होती है, जब इसके साथ साथ यह शरीर के दूसरे अन्गॊं में फॆलना शुरू करता है । इसे चिकित्सा विज्ञान की भाषा में Metastasis कहते है । कुछ चिकित्सा वैज्ञानिकों का मानना है कि Metastasis की प्रक्रिया शरीर के Lymphatic system द्वारा सम्पन्न होती है ।यानी  शरीर के उस स्थान की बीमार कोशिकायें शरीर के दूसरे स्थान पर transfer होती हैं । कुछ चिकित्सा वैज्ञानिको  का कहना है कि यह रक्त के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुचता है । कुछ चिकित्सा वैज्ञानिक मानते है कि शरीर के  अन्ग एक दूसरे से जुड़े हुये होते है और यदि एक अन्ग बीमार पड़ जाये तो स्वाभाविक है कि दूसरा स्वस्थ अन्ग भी बीमार पड़ जाये, यह उस अंग की sensitivity / susceptibility या प्रतिरोधक क्षमता पर निर्भर करत है । यदि अंग कमजोर होगा तो वह affected भी जल्दी होगा ।

 

बहरहाल यह सब तो कयास है कि कैसे बढता है और क्यों बढता है ? वास्तविकता यही है कि यह तभी जानकारी में आता है , जब इस बीमारी का प्राथमिक चरण first step पूरा हो जाता है और तकलीफ द्वितीय चरण second step में आ चुकी होती है  या त्रितीय चरण theird step मे आ गयी होती है । इतने चरण को पार करते करते यह बीमारी पूरे शरीर में फॆल चुकी होती है ।

 

 

इस बीमारी का इलाज भी confusion से भरा हुआ है । आधुनिक चिकित्सा विज्ञान Allopathy में – अभी तक कोई बहुत सटीक इलाज हो, यह नही कहा जा सकता है । दवाओं के मामले में भी Allopathy में कोई कारगर तरीका भी नही उपलब्ध है । हां, शल्य चिकित्सा Surgery की सहायता से कॆसर ग्रस्त हिस्से को काटकर ह्टा देने से रोगी को कुछ समय के लिये पीड़ा, तकलीफ से छुटकारा और जीवन दान मिल जाता है, लेकिन यह कितने समय तक होगा, कितने दिन तक होगा, इसके बारे में ठीक ठीक नही कहा जा सकता है । केमोथेरेपी chemotherapy और रेडिएशन radiation से भी ऐसे ही परिणामों की आशा की जाती है ।

 

ऎसा भी देखा गया है कि कभी कभी  कॆंसर ग्रस्त स्थान की Surgery के बाद रोग बहुत तेज़ी के साथ बढता है या शरीर के दूसरे स्थानों में अधिक तेजी से फॆलता है ।

 

मैने कैन्सर के रोगियों का इलाज किया है । इसमें सभी अवस्था  वाले रोगी देखने को मिले, ऐसे रोगी  भी मिले जो प्रारम्भिक अवस्था वाले थे, बहुत से advance level वाले रहे , कुछ diagnosed cases थे, कुछ undiagnosed या unconfirmed रोगी रहे, लेकिन उनकी तकलीफ से कैन्सर का आभास होता था । कुछ surgery या शल्य चिकित्सा नहीं कराना चाहते थे, कुछ शल्य चिकित्सा करा चुके थे, लेकिन उसके बाद भी उनको दुबारा फिर तकलीफ पहले वाली तकलीफ़ से अधिक बढी हुयी अवस्था में पायी गयी, स्तिथी में मिली,ऎसे लोगॊं की तकलीफ़ पहले से और ज्यादा बढ चुकी थी । कोई कोई रोगी ऎसे मिले, जो आठ आठ बार तक शल्य चिकित्सा करा चुके थे और अगली बार फिर कराने कि तैयारी कर रहे थे ।

 

ऎसे सभी रोगियों का इलाज मैने समन्वित चिकित्सा combined therapy के द्वारा किया, जिसमें निम्न बातों कि तरफ़ ध्यान दिया गया ।

 

  • रोग अधिक न बढे या रोग की तेज़ी अधिक न होये, इसके लिये आयुर्वेदिक दवाओं का उपयोग किया गया, ऎसा इसलिये, क्योंकि Ayurvedic medicines का असर physiologically शरीर के समस्त अंगों पर बहुत बेहतर समझा जाता है ।

 

  • Cells  और Tissues के structural changes की तेज़ी fastness कॊ शांत करने के लिये या धीमा करने के लिये या slow progressive बनाने के लिये Homoeopathic medicines का उपयोग सबसे बेहतर समझा जाता है, इसलिये कैन्सर की बढ़्त रोकने के लिये होम्योपथी की निम्न शक्ति की दवायें Triturations या Mother Tinctures का उपयॊग सबसे अच्छा होता है ।

 

  • दर्द दूर करने या अन्य तीव्र लक्षणों को दूर करने के लिये Allopathic medicines का उपयोग

 

इस प्रकार से औषधि व्यवस्था करने से रोगी का जीवनकुछ समय के लिये बढ जाता है ।

कॆसर रॊग में मॆने स्वयम द्वारा आविष्कार की गयी “शन्खद्राव आधारित औषधियों”  तथा आयुर्वेद की कुछ Penta scale औषधियों का उपयॊग किया है जिससे प्रारम्भिक अवस्था के रॊगी लाभान्वित हुये तथा ट्यूमर tumour या glands के कम होने अथवा समाप्त होने  के अपेक्षित परिणाम मिले है ।

 

एक बात और देखने में प्रायोगिक तौर पर आयी है कि अगर कॆसर के रोगी का इलाज ई०टी०जी० ETG यानी Eelectrotridoshagraphy  तकनीक का सहारा लेकर दोष निदान और रॊग निदान पर आधारित होकर किया जाये तो आरोग्य प्राप्ति के परिणाम अधिक अच्छे मिलते हैं ।

 

रोग के निदान के लिये MRI, CT Scan, Ultra sound, XRay के अलावा रक्त परीक्षण द्वारा यह निश्चित किया जा सकता है । लेकिन इसके लिये Biopsy सोच समझ कर कराना चाहिये । क्योंकि एक बार  बायोप्सी कराने का मतलब यही होता है कि तुरन्त operation करके या Surgery करके पीडित अन्ग को निकलवा देना ।

 

कुल मिलाकर मेरा यही कहना है कि जल्दी न मचा करके धैर्य पूर्वक रोगी का combined treatment करें, स्वास्थ्य के नियमों का पालन करायें और अपना कीमती धन और समय बचायें ।

 

6 टिप्पणियाँ

  1. आपके तथ्यों से पूर्णतया सहमत हूँ , होम्योपैथिक औषधियों का अगर उचित तरीके से आयुर्वेदिक दवाओं या होम्योपैथिक मदर टिन्चर से काम्बीनेशन किया जाये तो कई असाध्य रोगों मे सार्थक परिणाम दिखते हैं ।

    1. meri maa ko stool ke sath blood 1year se ata tha . pahle sanka thi ki piles hua hai . lekin adhik blooding honepar dikhaya gaya to
      toumer ho gaya hai. dr. saheb ne bataya hai ki cancer ho chuka hai.
      shri man se mera agrah hai ki iska koi nidan ho sakta hai ki nahi, mera marg darshan kare.

      1. ………..reply by Dr DBBajpai…………aapake paas kewal do vikalp hai, pahalaa yah ki agar surgery ki taraf jaate hai to surgeon apane hisab se aur cancer ke affected hisse ko kitanaa nikalega , yah sab surgeon ke upar nirbhar hai. Kityana hissa kat kar nikalana hoga yah sab use hi tay karanaa hoga / is sabake karane ke bad bhi is bimari se chutakara nahi milega balki kuchch dino baad yah dusare hisse ko rog grast kar dega aur yah silsila chalataa rahega. Ho sakataa hai ki mal nishkasan ke liye surgeon ko pet ya mahilao me mutra niskasan ki jagah se mal niskasan ka jariya bana dete hai /

        Dusaraa rasta Combinde Ayurvedic aur Homoeopathic davao ka hai, jinake jariye yah smabhavan bani rahati hai ki [1] takalif ko badhane se roka jaye aur usaki badhane ki raftar ko kam kiya jaye [2] jitana badha chuka hai usaka ilaj kiya jaye.

        Ab yah aap par nirbhar hai aur marij par nirbhar hai ki use kaun sa rasta chunana hai.

  2. आपके इस नये ब्लाग के बारे मे आज ही मालूम पडा , मै तो कई दिनों से सोच रहा था कि आप कहा गायब हैं :)

    @ reply by Dr.D.B. Bajpai……………………………………………….डा० ट्न्डन, मॆ गायब कही नहीं रहा । हां, व्यस्त जरुर हुं । सुबह केवल Internet पर बैठ पाता हुं । इसी समय blog पर जो भी posting होती है, करता हुं । लगभग १० बजे, G.M. Pharmacy, किदवई नगर चला जाता हुं । यहां मरीजों को देखकर, लगभग चार बजे घर वापसी हो पाती है । फिर शाम ६ बजे से लेकर रात ९ बजे तक, घर की clinic में मरीज देखता हुं ।

    मन्गल वार को छुट्टी रहती है, इस दिन कानपुर से ७० किलोमीटर दूर , जिला उन्नाव में बहुत anteriar में मरीज देखने जाता हु । यह ठेठ ग्रामीण इलाका है । यहां मरीजों की जान्च की सुविधायें बिलकुल न के बराबर है । मुझे Electrotridoshagraphy system तथा अन्य diagnosis के उपकरण लेकर जाना पड़्ता है । सारा सफ़र बस से करता हुं । रात तक वापस हो पाता हुं । ग्रामीण क्षेत्र में ऐसे ऐसे मरीज देखने को मिलते हैं , जिन्हें शायद किसी भी डाकटर को अमूमन देखने को न मिलते हों । वास्तव में practice करनें का असली मजा यही इसी क्षेत्र में आता है । कानपुर कब आ रहे हैं ?

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