दिन: अक्टूबर 27, 2008

धनवन्तरि जयन्ती २००८, धन्तेरस वाले दिन कानपुर शहर में होने वाले कार्यक्रमों में डा० देश बन्धु बाजपेयी द्वारा दिये गये भाषणों का सारान्श


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आयुश मेडिकल एसोसिएशन द्वारा धनवन्तरि पूजन कार्यक्रम  आर्य समाज धर्मशाला, पी० रॊड, लेनिन पार्क के सामने, कानपुर शहर में नगर के वैद्य बन्धुओं द्वारा आयॊजित की गयी । इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के आयुर्वेद विभाग के ड्रग कन्ट्रोलर श्री मन्गल देव त्रिपाठी, लखनऊ से पधारे डा० नगेन्द्र नाथ दीक्षित, उन्नाव से पधारे आयुष सन्गठ्न के महासचिव डा० ऒम वीर सिन्घ “ऒम”,  कानपुर के वयोब्रद्ध आयुर्वेद के चिकित्सक वैद्य श्री गॊर सुन्दर बाजपेयी, अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन, कानपुर यूनिट के पदाधिकारी गणों  के अलावा बड़ी सन्ख्या में बाहर से आये और स्थानीय आयुर्वेद के चिकित्सकॊं ने हिस्सा लिया।

 

इस कार्यक्र्म में डा० डी०बी० बाजपेयी ने अपनी अनुसन्धान की गयी तकनीक “इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी  – ई० टी० जी०”  के बारे मे उपस्तिथि लोगों को बताया, कि किस प्रकार यह तकनीक आयुर्वेद के लिये फायदे मन्द हो सकेगी, जिससे भविष्य में आयुर्वेद में अनुसन्धान के नये रास्ते खुलेंगे और एक प्रकार से विश्व में आयुर्वेद को वैज्ञानिक आधार प्राप्त होगा । 

सभा में उपस्तिथि सभी लोग आश्चर्य चकित थे , जब उन्हें यह पता लगा कि इस तरह का अनुसन्धान कई साल पहले हो चुका है और यह जान्कारी अब मिल रही है ।

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 भारत की प्रसिद्ध आयुर्वेदिक दवा बनाने वाली कंपनी “डाबर इंडिया, कानपुर ” द्वारा होटल मीरा, माल रोड, कानपुर में अखिल भारतीय आयुर्बेद महासम्मेलन के साथ आयोजित कार्यक्रम में डा० देश बन्धु बाजपेयी ने अपने भाषण में उपस्तिथि वैद्य बन्धुऒं को विस्तार से Electrotridoshagraphy ETG Technology के बारे में जान्कारी दी । कुछेक लोगों को छोड़कर , बहुत से लोगों को नाड़ी ज्ञान की  इस latest तकनीक के बारे में जान्कारी नहीं थी । डा० बाजपेयी ने वैद्य बन्धुओं को इस तकनीक से परिचित कराने के लिये प्र्त्येक वैद्य को २ फ्री कूपन देने का वादा किया, ताकि सभी वैद्य अपने मरीजों का ETG examination करा करके इस तकनीक को समझ सकें । साथ ही इस ETG विषय पर एक फ्री कार्यशाला workshop का आयोजन करने का प्रस्ताव रक्खा , जिसे वरिष्ठ चिकित्सक वैद्य राम मनोहर जी मिश्र ने अनुमोदित किया ।

 

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पन्जाब प्रान्त की आयुर्वेदिक  दवा बनाने वाली चावला आयुर्वेद के कार्य क्रम में Dr. D.B.Bajpai ने अपने भाषण में कहा कि वैद्य बन्धुओं को प्राचीन और आधुनिक ज्ञान दोनों को साथ साथ लेकर चलने से अधिक फायदा होगा । वैद्यॊं को एक हाथ में चरक, सुश्रुत, भाव प्रकाश, माधव निदान आदि आदि ग्रन्थों लेना चाहिये और दूसरे हाथ में आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के ग्रन्थों को लेना चाहिये । इन दोनों का सामन्जस्य बैठाकर जब साथ साथ चलेंगे तो आयुर्वेद और अधिक वैज्ञानिक स्वरुप लेगा । डा० बाजपेयी ने आगे कहा कि माधव निदान में रोगों के विषय में जितनी भी निदानात्मक बातें लिखी गयी है, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की पुस्तकों में यही सब पढ्ने को मिलता है । लेकिन समय के साथ आधुनिक मशीनों और तकनीक के आ जाने के कारण इतना विस्तार जरूर हुआ कि जितनी बातें रोग निदान के लिये बतायी गयी हैं, उन सबका varification , evidence form / evidence based आधार लेकर कर दिया गया है।

 

Dr. Bajpai नें Electrotridoshagraphy ETG  के बारे में विस्तार से बताया और इस तकनीक से प्राप्त data का रोगी की चिकित्सा में किस प्रकार उपयोग कर सकते है, जिससे सटीक prescription रोगी को दिया जा सके , ताकि शीघ्र आरोग्य देने की मंशा प्रत्यक्ष रूप ले सके,   इस विषय पर भी प्रकाश डाला ।

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