दिन: नवम्बर 20, 2008

AIDS , एड्स का इलाज आयुर्वेद में मॊजूद


भारतीय भाषा तमिल में १६ वीं शताब्दी में “वल्लभाचार्य” नाम के एक सिद्द सम्प्रदाय के चिकित्सक ने एक पुस्तक लिखी है, जिसका शीर्षक “वैद्य चिंन्तामणि” है । अभी तक यह पुस्तक तमिल भाषा में थी, लेकिन एक हिन्दी भाषी आयुर्वेद के अधिकारी , जो आन्ध्र प्रदेश में स्ररकार के आयुर्वेद विभाग में मुलाजिम थे, उन्होंने यह पुस्तक तमिल से सन्सकृत और हिन्दी भाषा में अनुवादित करके तथा अपने स्वयं के प्रयासों से इसे सन २००४ में प्रकाशित करके हिन्दी भाषी जन मानस के पास पहुचाने का बहुत सुन्दर कार्य किया है ।

 

इस पुस्तक के बारे में मैने बहुत कुछ सुन रक्क्खा था, लेकिन कभी देखने का अवसर नहीं मिला था । जनपद उन्नाव के आयुर्वेद के चिकित्सक डा० ओम वीर सिन्घ के पास यह पुस्तक मुझको देखने को मिल गयी ।

 

इस पुस्तक के ” क्षय ” प्रकरण में एक विवरण दिया गया है, जो “महाक्षय” शीर्षक से है, इसमें AIDS की बीमारी के जितनें भी लक्षण हैं , वे सब के सब दिये हये हैं, इतना ही नहीं मुझे यह देखकर बहुत ताज्जुब हुआ कि इस बीमारी का बहुत सटीक इलाज भी दिया गया है ।

 

यह एक उल्लेखनीय बात होगी, कि भारतीय चिकित्सकों ने एड्स जैसी बीमारियों को हज़ारों साल पहले पहचान लिया था और उसका इलाज भी ढूंढ निकाला था ।

Advertisements