महीना: दिसम्बर 2008

प्रमाण पत्र : Certificate of Participation in AYUSH Conference 2008 at Chitrakoot, U.P., where Dr. D.B.Bajpai has presented ETG Research paper


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चिकित्सा त्रिवेणी : Chikitsa TrivenI


चिकित्सा त्रिवेणी
लेखक : डा० देश बन्धु बाजपेयी,
आविष्कारक : इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी, ई०टी०जी० टेक्नोलाजी,

द्वारा लिखित पुस्तक में तीन पुस्तकों का एकल सन्ग्रह प्रस्तुत किया गया है । Chikitsa Triveni : composed by Dr. Desh Bandhu Bajpai, Inventer , Electro Tridosha Graphy , is one bind book of three researches, done by him in past years.

१- पहली पुस्तक का शीर्षक है “आयुर्वेदिक औषधियों का पेंटा स्केल पोटेन्सी में क्लीनिकल परीक्षण ” Clinical trials of Ayurvedic Medicines in Penta Scale Potencies ”

इस पुस्तक में डा० डी०बी०बाजपेयी द्वारा पेंटा स्केल में बनायी गयी आयुर्वेदिक दवाओं के क्लीनिकल ट्रायल के शोध के बारे में बताया गया है । पेन्टा स्केल की दवायें बनाने का तरीका , दवाओं के उपयोग का तरीका, दवाओं की मात्रा तथा दवाओं का रेपीटीशन आदि आदि बातो का वर्णन विस्तार से किया गया है और इससे समबन्धित सभी जान्कारियां दी गयी हैं ।

यह पुस्तक सभी आयुर्वेदिक चिकित्सकों के लिये पठनीय है, क्योंकि इसमें आयुर्वेदिक रस औषधियों, कूपीपक्व रसायन, लौह, मन्डूर, भस्म, पिस्टी आदि के बारे में एक नये दृष्टिकोण से विचार किया गया है । आरोग्य किये गये रोगियों के विवरण भी Case records दिये गये है । इस विधि से तैयार औषधियों को देने से रोगी को त्वरित लाभ तथा औषधि के मूल्य में बहुत कमी हो जाती है ।
इस विधि से बनी दवाओं को रोगी बहुत आराम से सेवन कर लेता है तथा अनुपान आदि का झंझट भी नहीं होता है ।

मूलत: यह पुस्तक National Innovation Foundation, Ahamedabaad, India द्वारा आयोजित वर्ष २००४ में आयोजित प्रतियोगिता में डा० देश बन्धु बाजपेयी ने अपना शोध पत्र भेजा था । प्रस्तुत पुस्तक उसी शोध कार्य की सन्शोधित और अब तक किये गये advance level के शोध कार्य की प्रति है |

 

२- दूसरी पुस्तक का शीर्षक है ” शन्खद्राव आधारित औषधियां : Shankhadrav Based Medicines”

शन्खद्राव आयुर्वेद की एक श्रेष्ठ औषधि है । इसका वर्णन आयुर्वेद के ग्रन्थों में किया गया है । इसी शन्खद्राव का आधार लेकर आयुर्वेद की बहुत सी औषधियों का निर्माण किया गया है ।

Allopathy चिकित्सा विज्ञान में जिस प्रकार से औषधियों के नाम Sodium, Pottassium, Nitrate, Chloride, Muriate, Sulphate आदि आदि का नामकरण करते है जैसे कि Diclofenac Sodium अथवा Diclofenac Pottassium, ठीक उसी तर्ज़ पर आयुर्वेद की औषधियों का निर्माण शन्खद्राव को लेकर किया गया है, इस निर्माण प्रक्रिया से आयुर्वेद की लगभग सभी औषधियों के Sodium, Pottassium, Nitrate आदि आदि तैयार किये जाते है जैसे कि सर्पगन्धा सोडियम, भ्रंगराज सल्फेट, आमलकी नाइट्रेट ।

यह सभी औषधियां कैसे तैयार की जाती है , इनके उपयोग, इनकी मात्रा तथा इस प्रकार से तैयार की गयी औषधियों से जिन रोगियों को आरोग्य प्राप्त हुआ है , उन रोगियों के विवरण दिये गये हैं । शन्खद्राव आधारित औषधियों के बनाने के तरीकों का विस्तार से वर्णन किया गया है ।

मूलत: यह पुस्तक National Innovation Foundation, Ahamedabaad, India द्वारा आयोजित वर्ष २००४ में आयोजित प्रतियोगिता में डा० देश बन्धु बाजपेयी ने अपना शोध पत्र भेजा था । प्रस्तुत पुस्तक उसी शोध कार्य की सन्शोधित और अब तक किये गये advance level के शोध कार्य की प्रति है |

३- तीसरी पुस्तक का शीर्षक है ” आयुर्वेद की नई शोध इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी :
New Invention in Ayurveda – Electro Tridosha Graphy, ETG Technology “

आयुर्वेद के ५००० पांच हज़ार साल के इतिहास में यह आधुनिक काल की हाई टेक्नोलाजी है, जो आयुर्वेद के मौलिक सिद्धान्तों को साक्ष्य स्वरूप में उपस्तिथि करती है ।

इस पुस्तक में इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी ई०टी०जी०, Electrotridoshagraphy E.T.G. तकनीक के बारे में विस्तार पूर्वक जान्कारी दी गयी है । इसमें प्रॆक्टिकल तकनीक बता करके [practically] बताया गया है कि कैसे आप स्वयम अपने आप Electro Cardio Graphy machine , E.C.G. Machine में थोडा फेर बदल करके , आयुर्वेद के सिद्धान्तों वात, पित्त और कफ की Intensity को मानव शरीर में उपलब्धता का मानक ज्ञात कर सकते हैं ।

इस पुस्तक में बहुत ही सरल हिन्दी भाषा में यह सब समझाया गया है । इसे ETG के आविष्कारक डा० देश बन्धु बाजपेयी नें National Innovation Foundation, Ahamdabad , India द्वारा वर्ष २००४ में आयोजित की गयी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिये अपना शोध पत्र भेजा था । यह पुस्तक इसी शोध पत्र की सन्शोधित प्रति है ।

यह सभी पुस्तकें एक सीमित सन्ख्या में उपलब्ध हैं । एक जिल्द में बन्धी हुयी यह तीनों पुस्तकें सभी चिकित्सकों, आयुर्वेद प्रेमियॊं, चिकित्सा विज्ञान के छात्रों, सभी चिकित्सा विधियों के चिकित्सकों के लिये बहुत उपयोगी है । इस पुस्तक के साथ एक सी०डी० भी दी जाती है । जिसमें Electro Tridosha Graphy, E.T.G. Technology के बारे में Video, Power Point Presentation और Lectures द्वारा विषय को विस्तार से समझाने का प्रयास किया गया है ।

पुस्तक की कीमत ; रुपया : ८००/= {आठ सॊ} प्रति कापी है । इसमें किताब की कीमत, C.D. , Packing तथा Courier / Post / Speed Post / By Hand भेजनें का खर्चा शामिल है |
यह तीनों पुस्तकें हिन्दी भाषा में हैं लेकिन मेडिकल टर्म अन्ग्रेजी भाषा में लिखे गये हैं। जो बन्धु यह पुस्तक चिकित्सा त्रिवेणी मंगाना चाहते हैं , वे आठ सौ रुपये का मनी आर्डर, ड्राफ्ट, चेक निम्न पते पर भेजें । इस बात का अवश्य ध्यान रक्खें कि मनी आर्डर, ड्राफ्ट और चेक Desh Bandhu Bajpai के नाम से भेंजे ।

पुस्तक का आर्डर देते समय Covering Letter भी अलग से सूचनार्थ भेजें, इस कवरिंग पत्र में अपना नाम , पूरा पता, टेलीफोन, मोबाइल नम्बर साफ साफ और स्पष्ट अक्षरों में लिखें । मनी आर्डर के सन्देश वाले कूपन में अपना पता अवश्य लिखें ।

चिकित्सा त्रिवेणी मंगाने का पता :

डा० देश बन्धु बाजपेयी, Dr. Desh Bandhu Bajpai,
डायरेक्टर एवं चीफ ई०टी०जी० इन्वेस्टीगेटर, Director & Chief ETG Investigator,
कुनमुन ई०टी० जी० रिसर्च इंस्टिट्यूट, Kunmun ETG Research Institute,
६७/७०, भूसाटोली रोड, बर्तन बाज़ार, 67-70, Bhusatoli Road, Bartan Bazar,
KANPUR कानपुर-208001, फोन: 0512 2367773 मोबाइल: 09336 238994

ग्रामीण क्षेत्रों में आयुर्वेद, होम्योपैथी और योग तथा प्राकृतिक चिकित्सा के प्रचार और प्रसार को देखकर आश्चर्य


ग्रामीण क्षेत्रों में आयुर्वेद, होम्योपैथी और योग तथा प्राकृतिक चिकित्सा के प्रचार और प्रसार को देखकर आश्चर्य हुआ

मै हरेक हफ़ते मन्गल वार, बुधवार, ब्रहस्पति वार और शनिवार को कानपुर शहर से लगभग ६०-७० किलोमीटर दूर विभिन्न दिशाओं में स्तिथि कई कस्बाई और ग्रामीण क्षेत्रों में मरीज देखने जाता हूं । मुझे जहां जाना होता है, वहां के स्थानीय चिकित्सक , जो सभी, एलोपैथी की चिकित्सा करते हैं, आयुर्वेदिक और होम्योपॆथिक चिकित्सा कार्य के लिये मेरी सेवायें लेते हैं । चूंकि मुझे आयुर्वेद, होम्योपथी के साथ साथ एलोपैथी तथा अन्य चिकित्सा चिधियों का ज्ञान है , साथ ही Electro Tridosha graphy ETG , के परिक्षण की व्यवस्था रहती ही है, इसलिये इन क्षेत्रों में मुझे कठिन , असाध्य, एलोपैथी चिकित्सा से न ठीक होने वाले मर्जों और लाइलाज रोगियों को देखना पड्ता है ।

जहां तक मैं समझता हूं, मुझे ऐसे ऐसे मरीज देखने को मिलते है, जो शायद किसी चिकित्सक को चिकित्सा कार्य के लिये उपलब्ध होते हों । जो भी मरीज मिलते हैं, उनमें से कई ऐसे होते हैं, जिनको देखकर लगता है कि शायद यह सबसे extreme level का मरीज है, अब इसके बाद इससे अधिक लेवल का मरीज नहीं देखने को मिलेगा । और होता भी यही है, उदाहरण के लिये कई साल पहले मैने एक मरीज Dropsy का देखा था । यह इतने extreme level का मरीज था कि उसके देखने के बाद जितने भी Dropsy के मरीज देखने को मिले , सब मुझे इस मरीज की तुलना में हल्के लगे ।

मुझे असली practice करने का मजा यहीं मिलता है । मुझे ETG तकनीक से काफी सटीक Diagnosis मिल जाती है, इसलिये मुझे मरीज की बीमारी का conclusion establish करने के बाद दिमागी तौर पर भटकना नहीं पड़ता । इन इलाकों के मरीज अपना इलाज कराने से पहले Electrotridoshagram ETG द्वारा परीक्षण कराकर , उसके बाद इलाज कराना पसन्द करते है । वे बहुत विश्वास के साथ कहते है कि भले ही उनके एक ई०टी०जी० परीक्षण में एक हजार रुपये खर्च हो जाये, लेकिन बीमारी क्या है, यह तो पता चल जाता है और तभी उपचार से फायदा पहुंचता है ।

इन इलाकों के मरीजों में एक बात बहुत अच्छी लगी कि ये सभी मरीज अपना इलाज आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक दवाओं से कराना चाह्ते है । ये सभी Allopathy की दवायें नहीं खाना चाहते हैं । मैने देखा है कि बहुत anterior और remote areas में Homeopathy और Ayurvedic चिकित्सा विज्ञान के qualified graduates अपना दवाखाना चला रहे है । हलांकि योग और प्राक्रतिक चिकित्सा का प्रभाव अभी ज्यादा नहीं है, क्योंकि ग्रामीण अन्चल का जीवन खुद ही “श्रम प्रधान” है, सभी इतना शारीरिक श्रम करते है कि उन्हें लगता है कि extra labour करने से क्या फायदा ?

एक बात जो मेरे देखने में आयी है वह इसलिये महत्व पूर्ण है, कि ग्रामीण क्षेत्रों में मुझे अधिक सन्ख्या में Low Blood pressure के मरीज मिले , जबकि शहरी क्षेत्रों में High Blood pressure के मरीज अधिक सन्ख्या के देखने को मिलते है । इस गुथ्थी को मैने समझने की कोशिश की है ।

कुल मिलाकर यह एक आश्चर्य जनक और सुखद बात है कि आयुर्वेद और होम्योपैथी की तरफ़ लोग फिर लौट रहे हैं, क्योंकि लोग यह समझ चुके है कि क्या नुकसान है और क्या फायदा ?

” AYUSH जगत में अभूतपूर्व वैज्ञानिक शोध : ई० टी० जी० ” – चिकित्सा पल्लव मासिक पत्रिका, अंक दिसम्बर २००८ में प्रकाशित लेख का शीर्षक


AYUSH चिकित्सा पध्धतियों के विषय में जान्कारी देने वाली बहुउद्देश्यीय चिकित्सा पत्रिका चिकित्सा पल्लव, जिसका प्रकाशन चिकित्सा पल्लव कार्यालय, पनगरा, जनपद बांदा- २१० १२९ उ०प्र० से किया जा रहा है, ने अपने दिसम्बर २००८ के अन्क में Electro Tridosha Graphy {E.T.G.} Technology : इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी, [ई०टी०जी०] तकनीक से समबन्धित एक लेख का प्रकाशन किया है ।

 

इस लेख की copy यहां प्रस्तुत है ।

Constipation यानी कब्ज यानी पेट का साफ न होना


सभी लोग जब सुबह सोकर उठ्ते हैं तो इस बात कि तमन्ना जरुर होती है कि कब उनको जल्दी से मल की हाजत लगे और कब वे Toilet में जाकर पाखाना करें और जितनी जल्दी हो सके , उतनी जल्दी धड़ाम से एक ही झट्के में सारा का सारा मल बाहर निकल आवे । पेट साफ करने के चक्कर में लोग कई कई बार toilet जाते है, इसके बाव्जूद भी उनको लगता है कि पेट अभी साफ़ नहीं हुआ है ।

लेकिन ऐसा सबके साथ होता हो, यह सच्चाई तब सामने आ जाती है, जब करीब करीब ९५ प्रतिशत शहरी लोग यह शिकायत करते है कि उनको सुबह पखाना साफ न होने की शिकायत है । ऐसा नहीं है कि यह शिकायत सिर्फ़ शहर के लोगों को है, ग्रामीण क्षेत्रॊं में भी लगभग १० प्रतिशत लोग शिकायत करते हैं कि उनका पेट सुबह साफ़ नहीं होता ।

दरअसल कब्ज होने की यह शिकायत सभी व्यक्तियों के खान पान, रहन सहन, आचार विचार, मानसिक स्तिथि, श्रम, मौसम, कार्य की परिस्तिथियां आदि आदि से जुड़ी हुयी है । हमारी बड़ी आंत क्रमश: Ascending colon, Transverse colon, Decending colon, Sigmoid colon और Rectum आदि के हिस्सों से मिलकर बनी है । शरीर का Autonomic Nervous System इसकी गतिविधियों को control करता है और काफी कुछ इसकी कार्य प्रणाली इसी सिस्ट्म पर अधारित है । पाखाना होने की तेज हाजत लगना या न लगना या कम लगना , सब कुछ कई एक समीकरणों पर आधारित है ।

कई बीमारियां होती हैं , जिनमें रोगी को बहुत तगड़ा कब्ज होता है, ये स्तिथि निम्न बीमारियॊं कि अवस्थाओं में अधिक होता है ।

1- Brain stroke
2- Brain Heamorrhage
3- Paralysis
4- Intestinal Tuberculosis
5- Intestinal cancer
6- Liver cancer
7- Cancer of digestive system
8- Loss of parestalitic movement of intestines
9- Any other complaints, which is related to Large intestine as often seen in Viral infection and its syndromes

इस प्रकार की तकलीफों में कब्ज मरीज को बहुत परेशान करता है ।

क्या करें ?

१- साधारण कब्ज में खान् पान के उपर ध्यान देना चाहिये । खान पान ठीक कर लेने से हल्के किस्म की कब्जियत की बीमारी जड़ से ठीक हो जाती है । इसमे दवा खाने की जरूरत भी नही पड़्ती है ।
२- सभी प्रकार के कब्ज अमरूद, पपीता और गाजर खाने से चले जाते हैं । लेकिन यह सबको माफ़िक आ जायें , यह नही कहा जा सकता है । हो सकता है अमरूद किसी को नुकसान करे और किसी दूसरे को फायदा, यही बात पपीता और गाजर के लिये कही जा सकती है । जिन लोगों को यह मुआफ़िक लगे, वे जरूर खायें, उनका कब्ज अवश्य ठीक होगा । इन तीनॊं फलों की सलाद बनाकर खाने के साथ खाने से अधिक फायदा होता है । कम से कम १०० से २५० ग्राम सलाद खाना चाहिये ।

३- एरन्ड तेल, एक चाय के चम्मच बराबर लेकर , आधा कप या एक कप गुन्गुने दूध में मिलाकर रात को सोते समय पीने से सुबह पाखाना साफ़ होता है ।

४- किसमिस और अन्जीर को रात में भिगो दें, सुबह अच्छी तरह चबाकर खायें , उपर से दो कप दूध पी लें ।

५- ईसबगोल का उपयोग सोच समझ कर करें । किसी किसी को यह बजाय पेट साफ करने के उल्टे कब्ज करता है । यही हाल बेल के चूर्ण का है, इसका भी असर ईसब्गोल की तरह होता है ।

६- कब्ज की बीमारी का इलाज आयुर्वेद या होम्योपॆथी या प्राक्रूतिक चिकित्सा से एकल या सम्मिलित चिकित्सा व्यवस्था से करें ।

क्या न करें ?

१- जिनको hard constipation की शिकायत है, वे बेहतर है किसी चिकित्सक की सलाह लेकर दवा का सेवन करें, अपने आप या विज्ञापन देखकर या सुनकर कोई दवा न ले । ऐसी सभी दवायें सुरक्षित नहीं होती हैं ।

२- बहुत से लोग enima का उपयोग बार बार करते है, कोइ कोइ तॊ रोजाना एनीमा लिया करते हैं , यह नुकसान्देह साबित होता है ।

३- कोई भी Laxative या purgative दवा न लें ।

जिला उन्नाव में दिनांक २८ नवम्बर २००८ को डा० देश बन्धु बाजपेयी नें आयुर्वेद के स्थानीय सन्गठ्नों द्वारा आयोजित शिविर में ई०टी०जी० तकनीक से रोगियों की जांच की


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ऊन्नाव जनपद के कई आयुर्वेद सेवी सन्गठनों द्वारा आयोजित किये गये चिकित्सा शिविर में डा० देश बन्धु बाजपेयी ने Electro Tridosha Graphy {ETG}  system से मरीजों का परिक्षण किया और हाथ के हाथ Report निकाल कर तथा आयुर्वेद के त्रिदोष , त्रिदोष भेद, सप्त धातु इत्यादि का आन्कलन करके तथा शरीर के रोगों का निदान करके उपस्थित डाक्टरों तथा वैद्यों के सामने यह साबित कर दिया कि अब आयुर्वेद की यह मशीन  इस चिकित्सा विज्ञान के लिये किसी वरदान से कम नहीं है । 

ज्ञात हो कि ETG system में ETG machine, Laptop computer और Printer की जरूरत होती है ।

बहुत से डाक्टरों तथा वैद्यों  ने इस सिस्टम को नहीं देखा था, उनको बहुत आश्चर्य हुआ ।