जिला उन्नाव में दिनांक २८ नवम्बर २००८ को डा० देश बन्धु बाजपेयी नें आयुर्वेद के स्थानीय सन्गठ्नों द्वारा आयोजित शिविर में ई०टी०जी० तकनीक से रोगियों की जांच की


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ऊन्नाव जनपद के कई आयुर्वेद सेवी सन्गठनों द्वारा आयोजित किये गये चिकित्सा शिविर में डा० देश बन्धु बाजपेयी ने Electro Tridosha Graphy {ETG}  system से मरीजों का परिक्षण किया और हाथ के हाथ Report निकाल कर तथा आयुर्वेद के त्रिदोष , त्रिदोष भेद, सप्त धातु इत्यादि का आन्कलन करके तथा शरीर के रोगों का निदान करके उपस्थित डाक्टरों तथा वैद्यों के सामने यह साबित कर दिया कि अब आयुर्वेद की यह मशीन  इस चिकित्सा विज्ञान के लिये किसी वरदान से कम नहीं है । 

ज्ञात हो कि ETG system में ETG machine, Laptop computer और Printer की जरूरत होती है ।

बहुत से डाक्टरों तथा वैद्यों  ने इस सिस्टम को नहीं देखा था, उनको बहुत आश्चर्य हुआ ।

एक टिप्पणी

  1. आदरणीय गुरुवर्यसम पंडित जी, आज मैंने ETG के बारे में जरा कसकर अपने ब्लाग http://bharhaas.blogspot.com पर बाब रामदेव के ढकोसले के साथ लिखा है । उनके भक्त जनों की सुलग रही है और मुझे गरिया रहे हैं :)

    …………….Reply by Dr. Desh Bandhu Bajpai…………… डा० रूपेश श्रीवास्तव जी, बाबा राम देव जी का मैं बहुत सम्मान करता हुं, हलांकि मैं उनसे कभी भी नहीं मिला । पिछ्ले वर्ष सन २००७ में मैने उनको हरिद्वार स्तिथि आश्रम के पते पर पत्र लिखा था कि ” E.T.G. तकनीक का सहारा लेकर मानव शरीर पर योग के उपयोग का क्या असर पड़्ता है और योग की क्रियायों से रोगी शरीर कैसे रोग मुक्त होता है ? ” इस विषय पर मैं हरिद्वार जाकर उनके आश्रम में रहकर शोध कार्य करना चाहता था । मैं चाहता था कि इस तकनीक से योग की वैज्ञानिकता को evidence based के घेरे में लाकर अद्ध्यन यदि किया जाता है, तो दुनिया को यह बतानें में सुविधा होगी कि योग कितना वैज्ञानिक प्रमाण युक्त चिकित्सा स्वास्थय विज्ञान है ।

    भारत सरकार के आयुर्वेद-आयुष विभाग, इस पूर्णतया १००% प्रतिशत स्वदेशी अनुसन्धानित तकनीक के उत्थान के लिये बहुत कुछ कर रहा है । आयुर्वेद – आयुष विभाग, स्वास्थय एवं परिवार कल्याण मन्त्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली तथा केन्द्रीय आयुर्वेद एवं सिद्ध अनुसन्धान परिषद, जनक पुरी, नई दिल्ली नें इस तकनीक का बहुत कड़ाई के साथ तमाम experts की निगरानी में परीक्षण कार्य सम्पन्न करा कर इसे approve किया है ।

    डा० रूपेश, you are very intelligent person, devoted to the noble cause of society in different fields, in which nobody would like to indulge themselves and always keeps away, हमें सभी के प्रति सकारात्मक सोच रखनी चाहिये, but it should be in a limit, भले ही वह हमारा विरोधी ही क्यों न हो ? यह “शिष्य” के लिये “गुरु” की सलाह है ।

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