ग्रामीण क्षेत्रों में आयुर्वेद, होम्योपैथी और योग तथा प्राकृतिक चिकित्सा के प्रचार और प्रसार को देखकर आश्चर्य


ग्रामीण क्षेत्रों में आयुर्वेद, होम्योपैथी और योग तथा प्राकृतिक चिकित्सा के प्रचार और प्रसार को देखकर आश्चर्य हुआ

मै हरेक हफ़ते मन्गल वार, बुधवार, ब्रहस्पति वार और शनिवार को कानपुर शहर से लगभग ६०-७० किलोमीटर दूर विभिन्न दिशाओं में स्तिथि कई कस्बाई और ग्रामीण क्षेत्रों में मरीज देखने जाता हूं । मुझे जहां जाना होता है, वहां के स्थानीय चिकित्सक , जो सभी, एलोपैथी की चिकित्सा करते हैं, आयुर्वेदिक और होम्योपॆथिक चिकित्सा कार्य के लिये मेरी सेवायें लेते हैं । चूंकि मुझे आयुर्वेद, होम्योपथी के साथ साथ एलोपैथी तथा अन्य चिकित्सा चिधियों का ज्ञान है , साथ ही Electro Tridosha graphy ETG , के परिक्षण की व्यवस्था रहती ही है, इसलिये इन क्षेत्रों में मुझे कठिन , असाध्य, एलोपैथी चिकित्सा से न ठीक होने वाले मर्जों और लाइलाज रोगियों को देखना पड्ता है ।

जहां तक मैं समझता हूं, मुझे ऐसे ऐसे मरीज देखने को मिलते है, जो शायद किसी चिकित्सक को चिकित्सा कार्य के लिये उपलब्ध होते हों । जो भी मरीज मिलते हैं, उनमें से कई ऐसे होते हैं, जिनको देखकर लगता है कि शायद यह सबसे extreme level का मरीज है, अब इसके बाद इससे अधिक लेवल का मरीज नहीं देखने को मिलेगा । और होता भी यही है, उदाहरण के लिये कई साल पहले मैने एक मरीज Dropsy का देखा था । यह इतने extreme level का मरीज था कि उसके देखने के बाद जितने भी Dropsy के मरीज देखने को मिले , सब मुझे इस मरीज की तुलना में हल्के लगे ।

मुझे असली practice करने का मजा यहीं मिलता है । मुझे ETG तकनीक से काफी सटीक Diagnosis मिल जाती है, इसलिये मुझे मरीज की बीमारी का conclusion establish करने के बाद दिमागी तौर पर भटकना नहीं पड़ता । इन इलाकों के मरीज अपना इलाज कराने से पहले Electrotridoshagram ETG द्वारा परीक्षण कराकर , उसके बाद इलाज कराना पसन्द करते है । वे बहुत विश्वास के साथ कहते है कि भले ही उनके एक ई०टी०जी० परीक्षण में एक हजार रुपये खर्च हो जाये, लेकिन बीमारी क्या है, यह तो पता चल जाता है और तभी उपचार से फायदा पहुंचता है ।

इन इलाकों के मरीजों में एक बात बहुत अच्छी लगी कि ये सभी मरीज अपना इलाज आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक दवाओं से कराना चाह्ते है । ये सभी Allopathy की दवायें नहीं खाना चाहते हैं । मैने देखा है कि बहुत anterior और remote areas में Homeopathy और Ayurvedic चिकित्सा विज्ञान के qualified graduates अपना दवाखाना चला रहे है । हलांकि योग और प्राक्रतिक चिकित्सा का प्रभाव अभी ज्यादा नहीं है, क्योंकि ग्रामीण अन्चल का जीवन खुद ही “श्रम प्रधान” है, सभी इतना शारीरिक श्रम करते है कि उन्हें लगता है कि extra labour करने से क्या फायदा ?

एक बात जो मेरे देखने में आयी है वह इसलिये महत्व पूर्ण है, कि ग्रामीण क्षेत्रों में मुझे अधिक सन्ख्या में Low Blood pressure के मरीज मिले , जबकि शहरी क्षेत्रों में High Blood pressure के मरीज अधिक सन्ख्या के देखने को मिलते है । इस गुथ्थी को मैने समझने की कोशिश की है ।

कुल मिलाकर यह एक आश्चर्य जनक और सुखद बात है कि आयुर्वेद और होम्योपैथी की तरफ़ लोग फिर लौट रहे हैं, क्योंकि लोग यह समझ चुके है कि क्या नुकसान है और क्या फायदा ?

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2 टिप्पणियाँ

  1. low blood pressure ka kaaran unki garibi hai, jiske karan unhe puri nutirtion nahi mil sakti.

    ……….Reply by Dr. D.B.Bajpai………. Ji nahi, aap galat soch rahe hai, maine Kanpur Shahar ke aaspaas ke 150 Kilometer ke daayare me aane wale gaon me, graamin khsetron me jakar dekha hai, abhi nahi, pichchale 15 -20 varshon se barabar dekh raha hu, yaha nutrition ki koi kami nahi, ye gaon ke logo ko aap budhdhu samajhane ki himakat katai na kariyega, ye sab bahut chalak aur ghagh kism ke hai. Ye hamako sabako URIA aur KITNASHAK chchidakaawwala mila hua khane ko dete hai, lekin apane khud ke khane ke liye, bina uria aur bina kitnashak ka anaj , sabzi aur dusari chije ugate hai. Inaka khana pinaa bahut shudhdh aur nutrition se bhara hua hota hai. LOW BLOOD PRESSURE hone ke kai kaaran hai, jinhe maine adhyaan kiya hai, vah main phir kisi POST me likhunga.

  2. आदरणीय गुरुदेव E.T.G. के बारे में यदि मेडिकल ब्लागिंग करने वाले भी सहयोग करें तो बात बने पर सायबर संसार में भी छद्मजीवीजनों की कमी नहीं है लोग चुप्पी साध कर दुनिया भर की बकवास करते रहते हैं ये लोग ही जिम्मेदार हैं इस दुर्दशा के लिये कि दुनिया आपके अमूल्य अविष्कार से सहज प्रयोग से वंचित है अब तक…….

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