आसव अरिष्ट का आयुर्वेद में महत्व : Importance of Asava and Arishta in Ayurveda


आसव और अरिष्ट आयुर्वेद विज्ञान की औषधि कल्पना की एक महत्व पूर्ण खोज है । इसे वर्षों से आयुर्वेद के मनीषी प्रयोग में ला रहे है । मैं आसव और अरिष्ट का अपने मरीजों में बहुत प्रयोग करता हूं । ९५ प्रतिशत मरीज ऐसे होंगे , जिनको मै आसव या अरिष्ट जरुर पिलाता हूं ।

मेरी कोशिश यही रहती है कि अपने हाथ से बनाये गये आसव या अरिष्ट ही रोगियों को दूं , लेकिन कभी कभी मुझे बाज़ार के  यानी फार्मेंसियों द्वारा बनाये गये आसव प्रयोग करने पड जाते है । कुछ आसव और अरिष्ट जो बाज़ार में नही मिलते या जिनको फार्मेसियां नहीं बनाती हैं और ये बहुत उपयोगी होते हैं , उनको मैं स्वयम बनाता हू , जैसे कि उदाहरण के लिये ” त्रिफलासव ” ।

मै क्यों आसव और अरिष्ट को इतना प्रयोग में लाता हूं ? इसके कुछ कारण हैं । पहला: आयुर्वेद शास्त्रों में बताया गया है कि सभी आसव भोजन के पचाने वाले, भूख की बृध्दि करने वाले सामन्यतया होते हैं । दूसरा : जब आसव/अरिष्ट बनाते है तो इसमें प्राकृतिक तौर पर Yeast पैदा होती है । यह Fermentation की वजह से होता है । यीस्ट मे Vitamin B complex कुदरती तौर पर exist होता है । तीसरा : खट्टे होने के कारण इसमें Vitamin C भी होता है । चौथा : Incubation period में इसमें Carbon Di Oxide gas exist होती रहती है । Carbon Di oxide के molecules जब पेट में जाते हैं तो यह पेट के अन्दर की पैदा होने वाले गैस के मालीक्यूल्स को absorb कर लेते हैं, जिससे पेट के अन्दर बनने वाली गैस का दबाव कम होकर, पेट फूलना कम होने लगता है । इस कारण से खट्टी डकारें आना, बदहज़मी की शिकायत अपने आप कम हो जाती है ।

पांचवां : चूंकि आसव / अरिष्ट दवाओं के सन्योग से बनाये जाते हैं , अत: दवाओं का सार भाग इसामे मिल जाता है, जो वास्तविक बीमारी को दूर करन में मदद करता है । छठवां : आसव बनाने में गुड का उपयोग करते है, गुड के अन्दर बहुत से Minerals तथा salts और  nutritional substances होते हैं , जो इसके जरिये शरीर को मिल जाते हैं । सातवां : आसव में प्राकृतिक तौर पर कुछ प्रतिशत Alcohol अपने आप self generated पैदा होती है । यह एल्कोहाल शरीर के लिये बहुत महत्व पूर्ण होती है, इससे न केवल शारीरिक क्षमता बढ्ती है बल्कि शरीर के अन्दर कुछ एल्कोहल रहने की मात्रा को maintain करने मे मदद भी करती है । जाडे के दिनों मे आसव सेवन करने से शरीर में उर्ज़ा बनी रहती है तथा ठन्ड से भी बचत होती है । आठवां : आसव चूंकि भोजन के तुरन्त बाद में पीते हैं, इसलिये इसका पाचन भोजन के साथ मिलकर होता है, जब रक्त में भोजन का सार भाग मिलता है तो साथ में आसव के अन्दर की मिली हुयी औषधियां भी मिल जाती है, जिससे रोगी को शीघ्र आराम मिलती है ।

” त्रिफलारिष्ट ” आयुर्वेद की एक महत्व पूर्ण औषधि है । इस अकेली औषधी के फार्मूले से मैने बहुत से उपयोगी आसव बनाये हैं, जिनका मै भरपूर उपयोग करता हू ।

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एक टिप्पणी

  1. सादर चरण सपर्श ,
    क्या आसव व अरिष्ट का प्रोयाग मधुमेह व्याधि से पीड़ित रोगियों में किया जा सकता है..यथा – दशमूलारिष्ट , अश्वगंधारिष्ट |
    गुरु जी कृपा कर अपने विचार दे ……
    आधुनिक चिकित्सक इसे मधुमेह रोग में प्रयोग निषेध करते है |
    कृपया शंका का समाधान करे . आपकी अत्यंत कृपा होगी |

    @………..डा० डी०बी०बाजपेयी का उत्तर………..आसव अरिष्ट का उपयोग जरूर किया जा सकता है और मै मधुमेह के रोगियों मे तो जरूर करता हू /

    आधुनिक चिकित्सक स्वयम अपने चिकित्सा विग्यान का कितना ग्यान रखते है, यह मुझे अच्छी तरह से पता है ? चिकित्सक समाज के अन्दर की बात है, इसलिये इसे अन्दर ही रहने देना चाहिये / विडम्बना यह है कि रोगी क्या अच्छा है और क्या खराब इसे जानता ही नहीं है / हमारे यहां बड़ी सन्खया में मधुमेह के रोगी इलाज के लिये आये है और ठीक होकर जा रहे है / यह सिल्सिला लगातार चल रहा है और हमारे यहां रोजाना वही मरीज इलाज करा रहे है जो एलोपैथी का इलाज करा कर बरबाद हो चुके है रोजाना ४० से लेकर १२० यूनिट इन्सुलीन लगाते थे, वेस ब ठीक हो रहे है / इसमे आश्चर्य की कोई बात नहीं है, सब आयुर्वेद और ई०टी०जी० आयुर्वेदस्कैन तकनीक और स्वयम भगवान धनवनतरी जी की कृपा है /

    I will try to load a recent case of Diebetic patient , who was taking Insulin regularly along with the details of the diagnosis features done by the ETG AyurvedaScan and Ayurvedic medicine used in the treatment, if time will permit me. .

    With this I will suggest you to go to ASAV ARISTA post in this blog by me, where I have given the scientific evaluation of the qualities of ASAV and ARISTA. Those who say that ASAVA should not be used, is totally foolish talk and is showing the ignorene of their wisdom. They donot know a single word of the qualities of ASAVA and ARISTA.

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