Aloe Vera यानी घृत कुमारी या घी कुवांर या ग्वार पाठा : इसे समझ लीजिये, ये है क्या ?


आजकल Aloe Vera का बड़ा प्रचार हो रहा है । जो भी मरीज आ रहा है, वही पूछ रहा है कि ” बताइये ये क्या बला है, मेरे पास फलाने फलाने एलो वेरा की बोतल लेकर आये और कहा कि इसके पीने से आपकी सारी तकलीफ दूर हो जायेगी , वह चाहे जो हो “, मेरे दवाखाने में एक महिला बड़ी उत्सुकता से यह सब वार्तालाप सुन रही थी, उसने भी बताया कि उनके पास भी कोई एलो वेरा को लेकर आया था , लेकिन उसकी कीमत देखकर वे उसे नहीं खरीद सकी । उस महिला ने भी बताया कि जो बेचने वाला उनके पास आया था, उसने भी उनको एलो वेरा के गुण ऐसे समझाया , मानो वह “सन्जीवनी बूटी ” हो ।

इस तरह के सवाल करने वाले जब मुझसे पूछते हैं तो मै उन सबको अपना observation और experience बताता हूं ।

Aloe vera एक Cactus जाति का पॊधा है । जैसे अन्य कैक्टस बिना पानी के केवल नमीं पर जिन्दा रहते हैं, वैसे ही यह भी जिन्दा रहता है । आयुर्वेद , होम्योपैथी, यूनानी चिकित्सा ग्रन्थों में इसके प्रयोग के बारे में बताया गया है । इससे यह अर्थ निकाला जा सकता है कि आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान के practitioners को इसके प्रयोग के बारे में ज्ञान था । यद्यपि आयुर्वेद में इससे दवा बनाने के बहुत से योग तो नहीं दिये गये है, इसका उपयोग कुछ दवाओं में ’भावना’ देने या इसका रस डालकर दवाओं को घोटने के लिये ही उपयोग करते है । इसका रस या गूदा प्रयोग करते है । गूदा में भस्म बनाने वाले द्रव्यों को दबाकर , कपड़् मिट्टी करके , गजपुट में फूंकते हैं । इसके रस में मूली, नींबू, अदरक आदि का रस डालकर तथा अन्य दवायें मिलाकर पाचक या digestive system की बीमारियों के उप्चार के लिये दवाओं का निर्माण करते है । इसके रस का उपयोग कुछ बाहरी बीमारियों के उपचार के लिये भी करते है ।
इस जड़ी का सबसे बढ़िया और सबसे अधिक प्रयोग आयुर्वेद की प्रसिद्ध औषधि “कुमारी आसव” को बनाने में करते हैं । इस औषधि को बनानें में निश्चय ही आयुर्वेद के विद्वानों ने अपनी उत्कृष्ट मेधा का परिचय दिया है । आज एलो वेरा के बारे में चाहे जो भी कहा जाये कि इसमें कितने जरूरी Nutraceuticals कुदरती स्वरूप में विद्यमान हैं , लेकिन इसकी रोग निवारिणी शक्ति का परिचय न जाने कितने वर्षों पहले ग्यात हो चुका होगा । इसीलिये आदिकाल में लिखे ग्रन्थॊं में से एक लेखक ने जिस कुमारी आसव का फार्मूला लिखा है, उसने अपनी अद्वितीय दक्षता का परिचय देते हुये, एक ऐसा फार्मूला दिया जो आज भी उतना ही कार्गर है जितना पहले रहा होगा ।

कुछ वर्ष पहले मैं प्रगति मैदान , नई दिल्ली गया था । वहां किसी स्टाल में मैने अलोवेरा के बारे में किये गये रिसर्च , जो शायद केन्द्र सरकार के किसी विभाग द्वारा की गयी थी, के बारे में जान्कारी प्राप्त की । इसमें बताया गया था कि इसे लगाने से यह LEPROSY यानी गलित कुष्ठ को ठीक करता है । इसके आन्तरिक प्रयोग के लिये मुझे सिवाय आयुर्वेद की कुमारी आसव और कुछ दूसरे योगों के अलावा अन्य का पता नही है ।

यह कैक्टस जाति का पौधा है, इसलिये मुझे लगता है कि इसमे शरीर को नुकसान पहुचाने वाले Toxines जरूर मौजूद होंगे । Aloe Vera का जूस बनाने वाले इसे किस तरह से प्रासेसिग करते हैं, यह तो वही जाने । मै इतना जानता हूं कि मुझे कई लोगों ने बताया कि इसका जूस पीने के बाद उनकी बीमारी में कोई विशेष फायदा नही हुआ ।

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2 टिप्पणियाँ

  1. गुरूदेव बस ईश्वर से प्रार्थना है कि जितनी जल्दी हो सके कि नोनी, मशरूम और एलोवेरा जैसी वनस्पतियों के प्रभावों कि जांचने के लिये कुछ स्वयंसेवक E.T.G. रिपोर्ट के लिये प्रस्तुत हो पाएंगे। सबसे पहले तो मैं और मेरी टीम आपके सामने होगी।

    ………..Reply by Dr.D.B.Bajpai………. मै पूरी तरह से ETG तकनीक से परीक्षण करने के लिये तैयार हुं ।

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