दिन: जनवरी 22, 2009

आयुर्वेदज्ञ / आयुर्वेद के चिकित्सक / आयुष चिकित्सक स्वयम नहीं चाह्ते कि आयुर्वेद में कुछ नया हो


“गुरूजी,चिकित्सा शास्त्र की इस महानतम उपलब्धि को लोग यदि बला समझ रहे हैं तो ये उनका दुर्भाग्य है। मैं सतत प्रयत्नशील हूं कि चिकित्सा संबंधी ब्लागिंग करने वाले सभी ब्लागर इस विषय पर लिखने का साहस जुटाएं और अपने नैतिक उत्तरदायित्व का निर्वाह करें। आज मेरे आदरणीय गुरुवर्यसम शास्त्री श्री जे.सी.फिलिप जी ने मुझे फोन करके कहा कि वे इस विषय पर sarthi.info पर लिखेंगे। काश ये लकीर के फकीर बने हिंदी के चिकित्सा शास्त्र पर ब्लागिंग करने वाले इस महान अविष्कार का सम्मान करें अपनी लेखनी से तो कितना आनंद हो…….”

                                                                  Dr. Rupesh Srivastawa comments in

इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी ई०टी०जी० तकनीक है क्या बला ? आइये इसे भी समझिये

 

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इसे पढ करके चौंकियेगा नहीं, सही बात और सत्य वचन यही हैं कि आयुर्वेद के नेता, आयुर्वेद के धुरन्धर विद्वान , आयुर्वेद के कर्ताधर्ता, आयुर्वेद के धाकड़ और जड़ीले भाई लोग,  बिल्कुल नहीं चाहते कि कोई नया आविष्कार आयुर्वेद जैसे विज्ञान के लिये किया जाय । Electro Tridosha Graphy,  ETG जैसी तकनीक को सामन्य जन और आप लोग भले ही महान आविष्कार बता रहे है , इन आयुर्वेद के नेताओं को यह सब “कूड़ा” नजर आ रहा है, जिसका मूल्य “दो कौड़ी” भी नही है और यह तकनीक “कूड़े कचरे के डिब्बे मे फेकने लायक” है । और तो और यह कोई वैज्ञानिक तकनीक भी नहीं है तथा इसका कोई वैज्ञानिक महत्व भी नहीं है और इससे विज्ञान जगत को कोई फायदा भी नहीं होने वाला ।