आयुर्वेदज्ञ / आयुर्वेद के चिकित्सक / आयुष चिकित्सक स्वयम नहीं चाह्ते कि आयुर्वेद में कुछ नया हो


“गुरूजी,चिकित्सा शास्त्र की इस महानतम उपलब्धि को लोग यदि बला समझ रहे हैं तो ये उनका दुर्भाग्य है। मैं सतत प्रयत्नशील हूं कि चिकित्सा संबंधी ब्लागिंग करने वाले सभी ब्लागर इस विषय पर लिखने का साहस जुटाएं और अपने नैतिक उत्तरदायित्व का निर्वाह करें। आज मेरे आदरणीय गुरुवर्यसम शास्त्री श्री जे.सी.फिलिप जी ने मुझे फोन करके कहा कि वे इस विषय पर sarthi.info पर लिखेंगे। काश ये लकीर के फकीर बने हिंदी के चिकित्सा शास्त्र पर ब्लागिंग करने वाले इस महान अविष्कार का सम्मान करें अपनी लेखनी से तो कितना आनंद हो…….”

                                                                  Dr. Rupesh Srivastawa comments in

इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी ई०टी०जी० तकनीक है क्या बला ? आइये इसे भी समझिये

 

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इसे पढ करके चौंकियेगा नहीं, सही बात और सत्य वचन यही हैं कि आयुर्वेद के नेता, आयुर्वेद के धुरन्धर विद्वान , आयुर्वेद के कर्ताधर्ता, आयुर्वेद के धाकड़ और जड़ीले भाई लोग,  बिल्कुल नहीं चाहते कि कोई नया आविष्कार आयुर्वेद जैसे विज्ञान के लिये किया जाय । Electro Tridosha Graphy,  ETG जैसी तकनीक को सामन्य जन और आप लोग भले ही महान आविष्कार बता रहे है , इन आयुर्वेद के नेताओं को यह सब “कूड़ा” नजर आ रहा है, जिसका मूल्य “दो कौड़ी” भी नही है और यह तकनीक “कूड़े कचरे के डिब्बे मे फेकने लायक” है । और तो और यह कोई वैज्ञानिक तकनीक भी नहीं है तथा इसका कोई वैज्ञानिक महत्व भी नहीं है और इससे विज्ञान जगत को कोई फायदा भी नहीं होने वाला ।

2 टिप्पणियाँ

  1. गुरुदेव ये वो लोग हैं जो भले आदमी का मुखौटा लगा कर समाज में कभी मच्छर, कभी जोंक और कभी चिकित्सक बन कर भोले भाले लोगों का खून चूसते रहते हैं। इन सफ़ेदपोशों ने ही तो ऐसी स्थिति पैदा कर रखी है कि भारत जैसे देशों से brain drain होता रहे। मैंने तो अपने जीवन का एक लक्ष्य निर्धारित कर लिया है कि ऐसे सफ़ेदपोशों का सही डरावना और वीभत्स चेहरा आमजन के सामने लाना है। इन गुरूघंटालों को लगता है कि यदि ये न चाहें तो ETG मूर्त रूप में आ ही नहीं सकता….. ये इनकी खुशफहमी है मैं जल्द ही दूर करने वाला हूं। लेकिन इनका क्या होगा जब इनके अनुसार कूड़ा मानी गयी तकनीक इनके चक्रव्यूह को ध्वस्त कर देगी?????
    जय गुरुदेव

  2. दादागुरूजी,सच तो ये है कि यदि गधे के ऊपर वेद-पुराण भी रखे हों तो उसे बोझ महसूस होता है इसलिये इन्हें तो ई.टी.जी कूड़ा और अनुपयोगी लगेगा ही, ये आयुर्वेद के क्षेत्र के छद्मनेता जनता को भरमा सकते हैं आपके एकमात्र शिष्य को नहीं; ये वो ही मूर्खों की जमात है जिसने गैलीलियो को सताया था, सुकरात को जहर दिया था। आप रंचमात्र चिंतित न हों भाई डा.रूपेश श्रीवास्तव जिस काम का बीड़ा उठा लेते हैं वह पूरा कर के ही दम लेते हैं,हम सब आपके साथ है।

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