दिन: फ़रवरी 1, 2009

इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी ई०टी०जी० की विकास यात्रा का चतुर्थ वृतांत: Fourth developmental stage of ETG Tek


सन २००५ में ई०टी०जी० तकनीक में उसी प्रकार से सभी प्रयास किये जा रहे थे, जितना सम्भव हो सकता था । जैसा कि पहले कहा जा चुका है कि इस तकनीक के बारे में वैद्य समाज को सूचना देने के लिये पत्र तथा अखबारों का सहारा लिया गया था ।

जुलाई सन २००५ में मुझे आयुर्वेद-आयुष विभाग, स्वास्थय एवं परिवार कल्याण मन्त्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली द्वारा पत्र से सूचित किया गया कि ETG technology से सम्बन्धित कार्य, निदेशक, केन्द्रीय आयुर्वेद एवं सिद्ध अनुसन्धान परिषद, अनुसन्धान भवन, जनक पुरी, नई दिल्ली द्वारा सम्पन्न कराये जायेंगे, यदि इसे ठीक समझा गया तो ।

सितम्बर सन २००५ में Director, Central Council for Research in Ayurveda and Siddha, CCRAS द्वारा भेजा गया पत्र मिला, जिसमें अक्टूबर २००५ में मुझे कौन्सिल में आकर तकनीक का विस्तृत “वैज्ञानिक Presentation और सम्पूर्ण details ” देने के लिये अनुरोध किया गया था । मुझे कानपुर से दिल्ली आने जाने का 2nd Sleepar class का रेलवे टिकट का पैसा भी दिया गया ।

अक्टूबर २००५ में, मैं अपने ETG tek से सभी सम्बन्धित Documents, CD Presentation लेकर CCRAS, New Delhi गया तथा वहां कमेटी रूम में प्रोजेक्टर की सहायता से प्रेजेन्टेशन प्रस्तुत किया । यह Presentation एक Technical experts की टीम के सामने प्रस्तुत किया गया था । यहां भी इस तकनीक से समबन्धित तरह तरह के सवाल पूछे गये, जिनका मैने उत्तर दिया ।

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Picture shows : Changes done by Dr. Desh Bandhu Bajpai, according to the need of Ayurveda Medical science

पहली बार जब आयुष विभाग में मैने प्रेजेन्टेशन दिया था, उससे यह प्रेजेन्टेशन ज्यादा बेहतर था । क्योंकि मैने बहुत मेहनत के साथ इस तकनीक के सारे पहलुओं को वैज्ञानिक दृस्टिकोण के साथ प्रस्तुत करने की चेष्टा की थी । यहां जिन विषयों पर चर्चा की गयी थी, वे विषय Cardiology, Human Physiology, Human Anatomy, Physics, Maganetism, Electronics आदि आदि से सम्बन्धित थे ।

मैने Technical experts को बताया कि ECG machine एक “गैल्वेनिक रिकार्डर” है । शरीर के अन्दर के अन्ग जिस तरह की और जिस intensity level की Electro maganetic emissions होती है, उसे इन्टेन्सिटी के लेवल के हिसाब से यह रेकार्ड कर लेता है, जिसे ट्रेस रिकार्ड कहते हैं । इस प्रक्रिया में Electro Physiology, Action potencial, Ion potencial, Membrane Potential, Electrolytes आदि आदि का समावेश होता है । प्राप्त किये गये Trace record को जांचा जाता है और विशेष प्रकार से develop किये गये software में फीड करके आयुर्वेद के मौलिक सिद्धान्तों का आन्कलन किया जाता है । बाद में शरीर में व्याप्त रोगों की “रोग निदान” की प्रक्रिया की जाती है, जिसमें सेक्टर के हिसाब से Trace examine करते हैं । इस तकनीक में केवल ECG machine का उपयोग बहुत से परिवर्तन के साथ किया गया है और केवल मात्र इसका Galvenic Recorder ही इस्तेमाल करते हैं ।