दिन: फ़रवरी 9, 2009

इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी की विकास यात्रा का छठा चरण : Developmental journey of E.T.G. Tek; Sixth step


फरवरी 2006 मे Scentific Advisory committee [Ayurved] के सामने पेश होने के बाद मै कानपुर वापस आ गया और अपने पूर्व वर्ती कामों में लग गया । यानी मेडिकल प्रैक्टिस और पारिवारिक और सामजिक कार्यों मे वापस अपने काम में व्यस्त हो गया । ई०टी०जी० पर हो रहा रिसर्च कार्य पहले जैसा ही चल रहा था । सन २००५ में नवम्बर के महीने से मैने ETG के लिये Computer programming बनाना शुरू किया था, उसे और अधिक एड्वान्स लेवेल पर बनाने के लिये प्रयास करना और अधिक सरल बनाने के लिये कई घन्टे काम करता रहता था । इससे फायदा यह हुआ कि मरीजों की जो रिपोर्ट मुझे बनाने में कई कई घन्टे लग जाते थे , वह बहुत जल्दी बनने लगी । इससे उत्साहित होकर मैने रिपोर्ट के फार्मेट को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के परिक्षणों जैसी बनाने का विचार किया । इस तरह की रिपोर्ट को मरीजों ने बहुत पसन्द किया ।

जुलायी २००६ के तीसरे सप्ताह में मुझे केन्द्रीय आयुर्वेद अनुसन्धान सन्स्थान, Central Research Institute of Ayurved, C.R.I.A., 66, Panjabi Bagh, New Delhi से पत्र मिला कि जुलाई के आखिरी हफ्ते में सन्स्थान में आकर मैं अपनी तकनीक के बारे में, सन्स्थान द्वारा गठित किये गये पैनेल के सामने वह सब कुछ पेश करुं, जो मैने अब तक किया है ।

CRIA का यह पत्र मुझे उस समय मिला, जब मेरे बड़े भाई श्री दीन बन्धु बाजपेयी , १९ जुलाय़ी २००६ को स्वर्गवासी हो गये थे और मेरा सारा परिवार शोक मना रहा था । CRIA में आने की तिथि उसी दिन पड़ रही थी जिस दिन बड़े भाई की तेरहवीं थी । पुरुष सदस्यों में चूंकि मै ही बड़ा था, इसलिये मेरा घर में रहना जरूरी था, लेकिन बड़ी विचित्र स्तिथि पैदा हो गयी । मैने घर वालों को समझाया कि मेरा दिल्ली जाना बहुत जरूरी है । बहरहाल मैं किसी तरह से निश्चित दिन केन्दीय आयुर्वेद अनुसन्धान सन्सथान, पन्जाबी बाग, दिल्ली पहुंच ही गया ।

यहां मेरा परिचय स्टाफ के सभी सदस्यों से सन्स्थान के निदेशक डा० टी० भिक्षापति जी ने कराया । CRIA विश्व की सर्वोत्तम आयुर्वेद के अनुसन्धान से जुड़ी हुयी सन्सथा है और इस तरह यह आयुर्वेद के अनुसन्धान के क्षेत्र में पहला स्थान प्राप्त करती है । विदेशों से जितने भी प्रतिनिधि मन्डल आयुर्वेद को जानने समझने के लिये भारत का दौरा करते हैं, उनमे यह सबसे पहले नम्बर पर है । यहां आये दिन visitors आते रहते है ।

लगभग २:०० बजे दिन में एक पैनेल बुलाया गया जिसमें डा० साहनी, जो आई०आई०टी०, दिल्ली के आई०डी०डी०सी० विभाग से थे, डा० स्नेह आनन्द, जो आई०आई०टी० दिल्ली की Biotechnology विभाग से थीं, डा० आशा गांधी, Head of department, Department of Physiology, लेडी हार्डिंग मेडिकल कालेज, दिल्ली से थीं, डा० पान्डा, लेक्चरर, क्रिया शारीर, आयुर्वेद और तिब्बिया कालेज, दिल्ली से थे , इन सबके अलावा CRIA के बहुत से अफसर उपस्तिथ थे ।

यहा मैने तकनीक का प्रदर्शन उपस्तिथि लोगों के सामने किया । तरह तरह के सवाल किये गये, जिनका उत्तर मैने दिया । यह करीब दो- ढाई घन्टे तक चलता रहा । काफी discussions भी हुये । अन्त में सभी लोगों ने एक राय से सहमति जताई की इस तकनीक का विकास किया जा सकता है ।

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