इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी की विकास यात्रा का सातवां चरण : Developmental stages of Electro Tridosha Graphy ETG Tek : Step Seven


जुलायी २००६ मे Central Research Institute of Ayurved, Panjaabi Bagh , New Delhi से वापस आने के बाद मैने Computer Programing को बेहतर बनाने के लिये प्रयास शुरू किये । जटिल विषय को समझाने के लिये सरल बनाने की प्रक्रिया और तदनुसार सबकी समझ में आ जाने वाली रिपोर्ट बनायी गयी । यह सब कार्य धीरे धीरे चलता रहा ।

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फरवरी २००७ के पहले हफ्ते में CRIA, New Delhi से पत्र मिला कि फरवरी २००७ के तीसरे हफ्ते में Electro Tridosha Graphy , ETG Tek की feasibility की Pilot Study किया जाना तय किया गया है, इसलिये मुझे अपनी मशीन और पूरे सिस्टम को लेकर सी०आर०आई०ए० निश्चित समय पर पहुच जाना है ।

मैं निश्चित दिन अपने पूरे सिस्टम के साथ CRIA पहुंच गया । मुझे वहां एक आफिस दिया गया और फिर तय की गयी सन्ख्या में मरीजों का मैने ETG किया और बाद में Computer की मदद से रिपोर्ट submit की । यह सारा काम CRIA के Director डा० टी० भिक्षापति जी और Assistant Director डा० भारती जी की देखरेख में सम्पन्न हुआ ।

यहां इस तकनीक की गुणवत्ता की जान्च के लिये Department of AYUSH, Ministry of Health & Family Welfare, Government of India द्वारा डा० एस० सी० महापात्रा जी, Professor, Department of Physiology, AIMS, All India Institute of Medical Sciences, New Delhi से बुलाये गये थे । डा० महापात्रा जी, देश के वरिष्ठ चिकित्सा वैज्ञानिक है और अपनें किये गये शोधों के लिये सारी दुनियां में प्रसिध्ध हैं । डा० महापात्रा जी कई घन्टे मेरे साथ रहे और इस तकनीक के बारे में बहुत गहन पूछ ताछ करते रहे ।

उन्होंने एक मरीज का अपने सामने ई०टी०जी० कराया, Trace recording के sector selection को देखा, Electro Cardio graph machine में क्या क्या और कहां कहां परिवर्तन किये गये, यह सब समझा और तमाम तकनीकी जान्कारी करते रहे । उन्होंने कम्प्यूटर की मदद से मरीज की तैयार की गयी रिपोर्ट को देखा, जिसे बाद में वे अपने साथ ले गये ।

डा० महापात्रा जी , बहुत आश्चर्य चकित थे कि Electrical Scan के बारे में सोचने वाला एक बहुत छोटा सा आयुर्वेद का चिकित्सक है , जिसने “रोग निदान” से लेकर “आयुर्वेद के सिद्धान्तों” का Status quantify कर डाला । उन्होने कहा कि इसे छोटी बात समझने की भूल कतई नहीं करनीं चाहिये । ई०सी०जी० मशीन का इतना बड़ा उपयोग भी हो सकता है , यह कभी सोचा ही नहीं गया ।

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{ Dr. D.B.Bajpai, right side, is explaining the concept of Electrotridoshagraphy Technology to a  group leader from Myanmaar , left side, [known formerly BURMA] , in middle,  Dr. T. Bhikshaapati, Director , Central Research Institute of Ayurveda, New Delhi on, 21  February  2007}

यहां रोजाना कोई न कोई celebrities आती रहती हैं । एक दिन म्यान्मार [ पूर्व बर्मा ] एक प्रतिनिधि मन्डल आ गया । यह सरकारी प्रतिनिधि मन्डल था जिसके साथ में बर्मा सरकार के अधिकारियों के साथ में आयुष विभाग, स्वास्थय और परिवार कल्याण मन्त्रालय, भारत सरकार के अधिकारी और CRIA के निदेशक डा० भिक्षापति के साथ अन्य बहुत से अधिकारी भी थे ।

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{ With the deligation from MYANMAR and AYUSH Secretary, Department of AYUSH, Ministry of Health & Family welfare, Government of India and officers and staff of the CRIA, New Delhi/  Dr. D.B.Bajpai is showing the trace record heat sensitive paper before the visitors on 21 February 2007 }

इस प्रतिनिधि मन्डल ने Electro Tridosha Graphy तकनीक को बहुत बहुत आश्चर्य के साथ देखा । प्रतिनिधि मन्डल को ETG technology का एक Live Presentation – from Trace record to Patient’s Report formation – भी दिखाया गया और पूरी प्रक्रिया समझायी गयी कि यह किस प्रकार काम करता है और इससे किस प्रकार आयुर्वेद के मौलिक सिद्धान्तों को और मनुष्य शरीर में होने वाले रोगों के निदान ज्ञान को साक्ष्य स्वरूप में कम्प्युटर की मदद से प्रस्तुत किया जाता है । जब उनको यह बताया गया कि इस तकनीक से सभी चिकित्सा विज्ञान लभान्वित होंगे, चाहे वह दुनियां के किसी हिस्से की प्रचिलित कोई भी चिकित्सा पध्यति हो, तो उनको बेहद आश्चर्य हुआ और उनहोंने मेरी भूरि भूरि प्रशन्सा की ।

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