दिन: फ़रवरी 13, 2009

इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी की विकास यात्रा का आठवां चरण : Developmental stages of Electro Tridosha Graphy ETG Tek : Step Eight


जैसा कि हमेशा मेरे साथ दिल्ली से वापस आने के बाद होता रहता है, जिन्दगी कुछ उसी रस्ते पर चल रही थी ।

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अक्टूबर २००७ के आखिरी हफ़्ते में मुझे केन्द्रीय आयुर्वेद एवं सिद्ध अनुसन्धान परिषद, जनक पुरी, नई दिल्ली से पत्र मिला कि 43rd Scientific Advisory Committee [Ayu] द्वारा ई०टी०जी० सिस्टम को approve कर दिया गया है । साथ ही यह निर्देश दिये गये कि इस सिस्टम के लिये अलग से एक मशीन बनायी जाय, जिसके लिये मुझे इजीनियरों से सलाह करने के लिये कहा गया था । reportetg27oct-20071reportetg27oct2007-part2nd

मैने बहुत कोशिश की कि कोई कायदे का इन्जीनियर मिल जाये जो यह काम पूरा कर सके । लेकिन महीनों ढून्ढने के बाद बहुत मुश्किल से  कानपुर के एक इन्जीनियर  मुझे मिल गये । उनसे मैने बात की और इस मशीन के फ़ैब्रीकेशन के लिये सलाह ली ।

उन्होने बताया कि इसे मै यूजर्स फ्रेन्डली बनाने का प्रयास करता हूं क्योंकि यह जितनी आपरेट करने में सरल होगी, उतना ही अच्छा होगा । उन्होंने इस तरह की मशीन बनाने के लिये कुछ लाख रुपये का खर्च बताया । मैने उन्हें अपनी आर्थिक स्तिथि के बारे में बताया कि मै पान्च हज़ार रुपये महीने की नौकरी एक दवा बनाने वाली कम्पनी में करता हूं [अब यह नौकरी मैने ११ नवम्बर २००८ से छोड दी है क्यों कि इम्प्लायर को मेरी सेवाओं की जरूरत नही थी] , यह सब कैसे होगा ?

वे मुझे आई०आई०टी० कैम्पस में स्तिथि SIDBI के कार्यालय ले गये  |  जहां  कोई बात नहीं बनीं ।  मै कुछ निराश हुआ , लेकिन इन्जीनियर साहब नें मेरा हौसला बढाते हुये कहा कि इसमें परेशान होने की कोई बात नहीं, मै कोई दूसरा रास्ता निकालता हूं ।

मुझे फिर घूम फिर कर CCRAS का दामन थामना पड़ा और इस प्रोजेक्ट को Extra Mural Research Project स्कीम के अन्तर्गत सारी औपचारिकतायें पूरी करके मई २००८ को हेड क्वार्टर भेजा । वहां से जुलायी २००८ में पत्र मिला जिसमें बताया गया कि इस प्रोजेक्ट को CCRAS की Internal Scrutiny Commettee ने ” Not recommended ” की श्रेणी में डाल दिया है ।

अब मै चौराहे पर खड़ा हू, यह सोचते हुये कि आगे क्या करूं ?

मेरी इतनी हैसियत भी नहीं कि मै लाखों रुपये खर्च करके ई०टी०जी० की मशीन का fabrication करा सकूं ।

फिर भी मन में विश्वास है, हौसला है, इरादे बुलन्द हैं, कुछ करने की तमन्ना है, सोचता हू, अभी न सही , कभी तो सही समय आयेगा, आज भले ही समय मेरा साथ न दे , कल जरूर कुछ न कुछ ईश्वर मदद करेगा । क्योंकि जो भी मैने किया है, वह सम्पूर्ण विश्व के लिये और मानव जाति की भलाई के लिये किया है, मुझे पूरा विश्वास है, इस नेक काम में ईश्वर मेरी मदद जरूर करेगा ।

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