दिन: फ़रवरी 16, 2009

Concept of Human Body in view of Allopathy & AYUSH Therapies : मानव शरीर का चिकित्सकीय द्रष्टिकोण से आन्कलन


आधुनिक चिकित्सा विज्ञान मानव शरीर को एक मशीन के रूप में समझता है । एक मशीन में जैसे काम करने के लिये बहुत से पुर्जे और सामान होते हैं , ठीक उसी प्रकार से आधुनिक चिकित्सा विज्ञान मानव शरीर को समझता है । य़ानी आन्ख, कान, नाक, दिल, गुर्दा, फेफ्ड़ा, लीवर, आन्त आदि आदि शरीर के सब अलग अलग अन्ग हैं, इनका अस्तित्व अलग अलग है, इसलिये इनका इलाज भी अलग अलग होना और करना चाहिये ।ये अन्ग एक दूसरे से जुडे हुये कतई नहीं हैं और ना यह किसी तरह से एक दूसरे को सपोर्ट करते हैं । शरीर के सभी अन्गों का अस्तितव अलग अलग है, इसलिये इनका इलाज भि अलग होना चहिये । यह आधिनिक चिकित्सा विज्ञान का दर्शन है । डायबिटीज है तो इसके इलाज करने वाले डाक्टर के पास जाइये, आन्त की तकलीफ है तो आन्त की बीमारी वाले डाक्टर के पास जाइये, आन्ख की तकलीफ है तो आन्ख वाले के पास जाइये , ब्लड प्रेसर है तो इसके डाक्टर के पास जाइये, यानी १० बीमारी हैं तो ग्यारह डाक्टर के पास जाइये । ग्यारह इसलिये क्योंकि यही डाक्टर बतायेगा कि आपको किसके पास जाना है और इलाज कराना है ।

इसके विपरीत आयुष AYUSH चिकित्सा विज्ञान पूरे शरीर को एक ईकाई मानता है और यह समझता है कि सम्पूर्ण शरीर एक है और इस शरीर का निर्माण विभिन्न अन्गों से मिलकर बना है जो एक दूसरे के ऊपर आश्रित है और एक दूसरे को सपोर्ट करते हैं । इसलिये जब कोई बीमारी हो तो पूरे शरीर का इलाज करना चाहिये । तभी AYUSH चिकित्सा विधियां इलाज के लिये Comprehensive treatment की बात करती हैं ।