महीना: फ़रवरी 2009

इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफ / ग्राम रिपोर्ट का पहला पन्ना : First page of the Electro Tridosha Gram / Graph Report


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इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राम / ग्राफ का नया लोगो : ETG Logo


ETG की सभी रिपोर्ट्स में प्रत्येक पन्ने में अब “लोगो” छाप दिया जाता है, ताकि इसकी अलग पहचान आयुर्वेद्ज्ञों के सामने रहे ।

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Homoeopathic Antibiotic Mother Tincture Mixture : होम्योपैथी का एन्टीबायोटिक मदर टिन्क्चर मिक्सचर


वर्षों से मै होम्योपैथी के कुछ मदर टिंक्चर का उपयोग करता चल आ रहा हुं । इस मिक्सचर को हज़ारों बार उपयोग किया है और कभी भी फेल नही हुआ ।

Gentiana Chirayata Q
Kalmegh Q
Ceasalpeania Bondusela Q
Tinospora Cardifolia Q
Azaadiracta Indica Q
Punarnava Q

इन सभी दवाओं को बराबर मात्रा में लें और एक शीशी में मिलाकर रख लें । यह Homoeopathy चिकित्सा विज्ञान की अचूक Antibiotic है । इसे सभी उन बीमारियों में उपयोग कर सकते है, जहां किसी एन्टीबायोटिक दवा को देने की जरूरत पड़े ।

इस मिक्स्चर को सभी तरह के बुखारों और किसी भी प्रकार का इन्फ़ेक्सन हो वहां दे सकते हैं ।

इसकी मात्रा १ से २ चम्मच आधे कप पानी में मिलाकर २ या ३ या ४ या ५ या ६ या ८ या १२ घन्ते के अन्तर से दे सकते हैं । यह दवा स्वाद में कड़्वी होती है इसलिये बहुत छोटे बच्चों को ५ या ७ बूंद शहद या किसी मीठे शर्बत में मिलाकर देना चाहिये । बड़े बच्चों को आधा चम्मच दवा शहद या किसी मीठे शर्बत में मिलाकर दें ।

आवश्यकतानुसार इसमें यदि जरूरी हो तो दूसरे मदर टिंक्चर मिला सकते है । मेरे अनुभव में यही फार्मूला ठीक है ।

Concept of Human Body in view of Allopathy & AYUSH Therapies : मानव शरीर का चिकित्सकीय द्रष्टिकोण से आन्कलन


आधुनिक चिकित्सा विज्ञान मानव शरीर को एक मशीन के रूप में समझता है । एक मशीन में जैसे काम करने के लिये बहुत से पुर्जे और सामान होते हैं , ठीक उसी प्रकार से आधुनिक चिकित्सा विज्ञान मानव शरीर को समझता है । य़ानी आन्ख, कान, नाक, दिल, गुर्दा, फेफ्ड़ा, लीवर, आन्त आदि आदि शरीर के सब अलग अलग अन्ग हैं, इनका अस्तित्व अलग अलग है, इसलिये इनका इलाज भी अलग अलग होना और करना चाहिये ।ये अन्ग एक दूसरे से जुडे हुये कतई नहीं हैं और ना यह किसी तरह से एक दूसरे को सपोर्ट करते हैं । शरीर के सभी अन्गों का अस्तितव अलग अलग है, इसलिये इनका इलाज भि अलग होना चहिये । यह आधिनिक चिकित्सा विज्ञान का दर्शन है । डायबिटीज है तो इसके इलाज करने वाले डाक्टर के पास जाइये, आन्त की तकलीफ है तो आन्त की बीमारी वाले डाक्टर के पास जाइये, आन्ख की तकलीफ है तो आन्ख वाले के पास जाइये , ब्लड प्रेसर है तो इसके डाक्टर के पास जाइये, यानी १० बीमारी हैं तो ग्यारह डाक्टर के पास जाइये । ग्यारह इसलिये क्योंकि यही डाक्टर बतायेगा कि आपको किसके पास जाना है और इलाज कराना है ।

इसके विपरीत आयुष AYUSH चिकित्सा विज्ञान पूरे शरीर को एक ईकाई मानता है और यह समझता है कि सम्पूर्ण शरीर एक है और इस शरीर का निर्माण विभिन्न अन्गों से मिलकर बना है जो एक दूसरे के ऊपर आश्रित है और एक दूसरे को सपोर्ट करते हैं । इसलिये जब कोई बीमारी हो तो पूरे शरीर का इलाज करना चाहिये । तभी AYUSH चिकित्सा विधियां इलाज के लिये Comprehensive treatment की बात करती हैं ।

इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी की विकास यात्रा का आठवां चरण : Developmental stages of Electro Tridosha Graphy ETG Tek : Step Eight


जैसा कि हमेशा मेरे साथ दिल्ली से वापस आने के बाद होता रहता है, जिन्दगी कुछ उसी रस्ते पर चल रही थी ।

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अक्टूबर २००७ के आखिरी हफ़्ते में मुझे केन्द्रीय आयुर्वेद एवं सिद्ध अनुसन्धान परिषद, जनक पुरी, नई दिल्ली से पत्र मिला कि 43rd Scientific Advisory Committee [Ayu] द्वारा ई०टी०जी० सिस्टम को approve कर दिया गया है । साथ ही यह निर्देश दिये गये कि इस सिस्टम के लिये अलग से एक मशीन बनायी जाय, जिसके लिये मुझे इजीनियरों से सलाह करने के लिये कहा गया था । reportetg27oct-20071reportetg27oct2007-part2nd

मैने बहुत कोशिश की कि कोई कायदे का इन्जीनियर मिल जाये जो यह काम पूरा कर सके । लेकिन महीनों ढून्ढने के बाद बहुत मुश्किल से  कानपुर के एक इन्जीनियर  मुझे मिल गये । उनसे मैने बात की और इस मशीन के फ़ैब्रीकेशन के लिये सलाह ली ।

उन्होने बताया कि इसे मै यूजर्स फ्रेन्डली बनाने का प्रयास करता हूं क्योंकि यह जितनी आपरेट करने में सरल होगी, उतना ही अच्छा होगा । उन्होंने इस तरह की मशीन बनाने के लिये कुछ लाख रुपये का खर्च बताया । मैने उन्हें अपनी आर्थिक स्तिथि के बारे में बताया कि मै पान्च हज़ार रुपये महीने की नौकरी एक दवा बनाने वाली कम्पनी में करता हूं [अब यह नौकरी मैने ११ नवम्बर २००८ से छोड दी है क्यों कि इम्प्लायर को मेरी सेवाओं की जरूरत नही थी] , यह सब कैसे होगा ?

वे मुझे आई०आई०टी० कैम्पस में स्तिथि SIDBI के कार्यालय ले गये  |  जहां  कोई बात नहीं बनीं ।  मै कुछ निराश हुआ , लेकिन इन्जीनियर साहब नें मेरा हौसला बढाते हुये कहा कि इसमें परेशान होने की कोई बात नहीं, मै कोई दूसरा रास्ता निकालता हूं ।

मुझे फिर घूम फिर कर CCRAS का दामन थामना पड़ा और इस प्रोजेक्ट को Extra Mural Research Project स्कीम के अन्तर्गत सारी औपचारिकतायें पूरी करके मई २००८ को हेड क्वार्टर भेजा । वहां से जुलायी २००८ में पत्र मिला जिसमें बताया गया कि इस प्रोजेक्ट को CCRAS की Internal Scrutiny Commettee ने ” Not recommended ” की श्रेणी में डाल दिया है ।

अब मै चौराहे पर खड़ा हू, यह सोचते हुये कि आगे क्या करूं ?

मेरी इतनी हैसियत भी नहीं कि मै लाखों रुपये खर्च करके ई०टी०जी० की मशीन का fabrication करा सकूं ।

फिर भी मन में विश्वास है, हौसला है, इरादे बुलन्द हैं, कुछ करने की तमन्ना है, सोचता हू, अभी न सही , कभी तो सही समय आयेगा, आज भले ही समय मेरा साथ न दे , कल जरूर कुछ न कुछ ईश्वर मदद करेगा । क्योंकि जो भी मैने किया है, वह सम्पूर्ण विश्व के लिये और मानव जाति की भलाई के लिये किया है, मुझे पूरा विश्वास है, इस नेक काम में ईश्वर मेरी मदद जरूर करेगा ।

इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी की विकास यात्रा का सातवां चरण : Developmental stages of Electro Tridosha Graphy ETG Tek : Step Seven


जुलायी २००६ मे Central Research Institute of Ayurved, Panjaabi Bagh , New Delhi से वापस आने के बाद मैने Computer Programing को बेहतर बनाने के लिये प्रयास शुरू किये । जटिल विषय को समझाने के लिये सरल बनाने की प्रक्रिया और तदनुसार सबकी समझ में आ जाने वाली रिपोर्ट बनायी गयी । यह सब कार्य धीरे धीरे चलता रहा ।

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फरवरी २००७ के पहले हफ्ते में CRIA, New Delhi से पत्र मिला कि फरवरी २००७ के तीसरे हफ्ते में Electro Tridosha Graphy , ETG Tek की feasibility की Pilot Study किया जाना तय किया गया है, इसलिये मुझे अपनी मशीन और पूरे सिस्टम को लेकर सी०आर०आई०ए० निश्चित समय पर पहुच जाना है ।

मैं निश्चित दिन अपने पूरे सिस्टम के साथ CRIA पहुंच गया । मुझे वहां एक आफिस दिया गया और फिर तय की गयी सन्ख्या में मरीजों का मैने ETG किया और बाद में Computer की मदद से रिपोर्ट submit की । यह सारा काम CRIA के Director डा० टी० भिक्षापति जी और Assistant Director डा० भारती जी की देखरेख में सम्पन्न हुआ ।

यहां इस तकनीक की गुणवत्ता की जान्च के लिये Department of AYUSH, Ministry of Health & Family Welfare, Government of India द्वारा डा० एस० सी० महापात्रा जी, Professor, Department of Physiology, AIMS, All India Institute of Medical Sciences, New Delhi से बुलाये गये थे । डा० महापात्रा जी, देश के वरिष्ठ चिकित्सा वैज्ञानिक है और अपनें किये गये शोधों के लिये सारी दुनियां में प्रसिध्ध हैं । डा० महापात्रा जी कई घन्टे मेरे साथ रहे और इस तकनीक के बारे में बहुत गहन पूछ ताछ करते रहे ।

उन्होंने एक मरीज का अपने सामने ई०टी०जी० कराया, Trace recording के sector selection को देखा, Electro Cardio graph machine में क्या क्या और कहां कहां परिवर्तन किये गये, यह सब समझा और तमाम तकनीकी जान्कारी करते रहे । उन्होंने कम्प्यूटर की मदद से मरीज की तैयार की गयी रिपोर्ट को देखा, जिसे बाद में वे अपने साथ ले गये ।

डा० महापात्रा जी , बहुत आश्चर्य चकित थे कि Electrical Scan के बारे में सोचने वाला एक बहुत छोटा सा आयुर्वेद का चिकित्सक है , जिसने “रोग निदान” से लेकर “आयुर्वेद के सिद्धान्तों” का Status quantify कर डाला । उन्होने कहा कि इसे छोटी बात समझने की भूल कतई नहीं करनीं चाहिये । ई०सी०जी० मशीन का इतना बड़ा उपयोग भी हो सकता है , यह कभी सोचा ही नहीं गया ।

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{ Dr. D.B.Bajpai, right side, is explaining the concept of Electrotridoshagraphy Technology to a  group leader from Myanmaar , left side, [known formerly BURMA] , in middle,  Dr. T. Bhikshaapati, Director , Central Research Institute of Ayurveda, New Delhi on, 21  February  2007}

यहां रोजाना कोई न कोई celebrities आती रहती हैं । एक दिन म्यान्मार [ पूर्व बर्मा ] एक प्रतिनिधि मन्डल आ गया । यह सरकारी प्रतिनिधि मन्डल था जिसके साथ में बर्मा सरकार के अधिकारियों के साथ में आयुष विभाग, स्वास्थय और परिवार कल्याण मन्त्रालय, भारत सरकार के अधिकारी और CRIA के निदेशक डा० भिक्षापति के साथ अन्य बहुत से अधिकारी भी थे ।

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{ With the deligation from MYANMAR and AYUSH Secretary, Department of AYUSH, Ministry of Health & Family welfare, Government of India and officers and staff of the CRIA, New Delhi/  Dr. D.B.Bajpai is showing the trace record heat sensitive paper before the visitors on 21 February 2007 }

इस प्रतिनिधि मन्डल ने Electro Tridosha Graphy तकनीक को बहुत बहुत आश्चर्य के साथ देखा । प्रतिनिधि मन्डल को ETG technology का एक Live Presentation – from Trace record to Patient’s Report formation – भी दिखाया गया और पूरी प्रक्रिया समझायी गयी कि यह किस प्रकार काम करता है और इससे किस प्रकार आयुर्वेद के मौलिक सिद्धान्तों को और मनुष्य शरीर में होने वाले रोगों के निदान ज्ञान को साक्ष्य स्वरूप में कम्प्युटर की मदद से प्रस्तुत किया जाता है । जब उनको यह बताया गया कि इस तकनीक से सभी चिकित्सा विज्ञान लभान्वित होंगे, चाहे वह दुनियां के किसी हिस्से की प्रचिलित कोई भी चिकित्सा पध्यति हो, तो उनको बेहद आश्चर्य हुआ और उनहोंने मेरी भूरि भूरि प्रशन्सा की ।

इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी की विकास यात्रा का छठा चरण : Developmental journey of E.T.G. Tek; Sixth step


फरवरी 2006 मे Scentific Advisory committee [Ayurved] के सामने पेश होने के बाद मै कानपुर वापस आ गया और अपने पूर्व वर्ती कामों में लग गया । यानी मेडिकल प्रैक्टिस और पारिवारिक और सामजिक कार्यों मे वापस अपने काम में व्यस्त हो गया । ई०टी०जी० पर हो रहा रिसर्च कार्य पहले जैसा ही चल रहा था । सन २००५ में नवम्बर के महीने से मैने ETG के लिये Computer programming बनाना शुरू किया था, उसे और अधिक एड्वान्स लेवेल पर बनाने के लिये प्रयास करना और अधिक सरल बनाने के लिये कई घन्टे काम करता रहता था । इससे फायदा यह हुआ कि मरीजों की जो रिपोर्ट मुझे बनाने में कई कई घन्टे लग जाते थे , वह बहुत जल्दी बनने लगी । इससे उत्साहित होकर मैने रिपोर्ट के फार्मेट को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के परिक्षणों जैसी बनाने का विचार किया । इस तरह की रिपोर्ट को मरीजों ने बहुत पसन्द किया ।

जुलायी २००६ के तीसरे सप्ताह में मुझे केन्द्रीय आयुर्वेद अनुसन्धान सन्स्थान, Central Research Institute of Ayurved, C.R.I.A., 66, Panjabi Bagh, New Delhi से पत्र मिला कि जुलाई के आखिरी हफ्ते में सन्स्थान में आकर मैं अपनी तकनीक के बारे में, सन्स्थान द्वारा गठित किये गये पैनेल के सामने वह सब कुछ पेश करुं, जो मैने अब तक किया है ।

CRIA का यह पत्र मुझे उस समय मिला, जब मेरे बड़े भाई श्री दीन बन्धु बाजपेयी , १९ जुलाय़ी २००६ को स्वर्गवासी हो गये थे और मेरा सारा परिवार शोक मना रहा था । CRIA में आने की तिथि उसी दिन पड़ रही थी जिस दिन बड़े भाई की तेरहवीं थी । पुरुष सदस्यों में चूंकि मै ही बड़ा था, इसलिये मेरा घर में रहना जरूरी था, लेकिन बड़ी विचित्र स्तिथि पैदा हो गयी । मैने घर वालों को समझाया कि मेरा दिल्ली जाना बहुत जरूरी है । बहरहाल मैं किसी तरह से निश्चित दिन केन्दीय आयुर्वेद अनुसन्धान सन्सथान, पन्जाबी बाग, दिल्ली पहुंच ही गया ।

यहां मेरा परिचय स्टाफ के सभी सदस्यों से सन्स्थान के निदेशक डा० टी० भिक्षापति जी ने कराया । CRIA विश्व की सर्वोत्तम आयुर्वेद के अनुसन्धान से जुड़ी हुयी सन्सथा है और इस तरह यह आयुर्वेद के अनुसन्धान के क्षेत्र में पहला स्थान प्राप्त करती है । विदेशों से जितने भी प्रतिनिधि मन्डल आयुर्वेद को जानने समझने के लिये भारत का दौरा करते हैं, उनमे यह सबसे पहले नम्बर पर है । यहां आये दिन visitors आते रहते है ।

लगभग २:०० बजे दिन में एक पैनेल बुलाया गया जिसमें डा० साहनी, जो आई०आई०टी०, दिल्ली के आई०डी०डी०सी० विभाग से थे, डा० स्नेह आनन्द, जो आई०आई०टी० दिल्ली की Biotechnology विभाग से थीं, डा० आशा गांधी, Head of department, Department of Physiology, लेडी हार्डिंग मेडिकल कालेज, दिल्ली से थीं, डा० पान्डा, लेक्चरर, क्रिया शारीर, आयुर्वेद और तिब्बिया कालेज, दिल्ली से थे , इन सबके अलावा CRIA के बहुत से अफसर उपस्तिथ थे ।

यहा मैने तकनीक का प्रदर्शन उपस्तिथि लोगों के सामने किया । तरह तरह के सवाल किये गये, जिनका उत्तर मैने दिया । यह करीब दो- ढाई घन्टे तक चलता रहा । काफी discussions भी हुये । अन्त में सभी लोगों ने एक राय से सहमति जताई की इस तकनीक का विकास किया जा सकता है ।

इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी ई०टी०जी० की विकास यात्रा का पांचवा चरण : Fifth steps’ Electrotridoshagraphy technology developmental stage


Central Council for Research in Ayurveda & Siddha , CCRAS Head Quarter, Janak Puri, New Delhi में अक्टूबर 2005  के पहले हफ़्ते में प्रेजेन्टेशन देने के बाद मैं कानपुर वापस आकर अपने पूर्ववर्ती कामों में फिर से लग गया । यानी अपनी मेडिकल की प्रैक्टिस में और दूसरे कामों में उसी प्रकार से इन्वाल्व हो गया जैसे मैं as usual पहले करता रहता था । कुछ दिनों बाद मुझे ध्यान भी नहीं रहा कि कुछ माह पहले क्या हुआ था ?

होते करते जनवरी २००६ आ गयी । जनवरी २००६ के अन्तिम सप्ताह में मुझे CCRAS, HQ, Janak Puri, New Delhi से पत्र मिला कि मुझे फरवरी २००६ के तीसरे सप्ताह में Scientific Advisory Committee {Ayurved} के सामने ई०टी०जी० तकनीक का Scientific Presentation देना है तथा साथ में अन्य जरूरी निर्देश दिये गये थे ।

मै अपने पुत्र डा० अनुराग बन्धु बाजपेयी के साथ निश्चित दिन , कौन्सिल के जनक पुरी, नई दिल्ली स्तिथि हेड क्वार्टर पर पहुंच गया ।मुझे SAC [Ayu] के बारे में बहुत अधिक पता नहीं था । यही सोचता था कि पता नहीं यहां क्या करना होगा ? देश के विभिन्न भागों से लोग बुलाये गये थे, जिनको अपना प्रेजेन्टेशन देना था । सभी लोगों को काउन्सिल में स्थापित SAC कमेटी के कमरे में बैठा दिया गया था ।

Scientific Advisory Committee [Ayurved] के चेयरमैन सौरष्ट्र विश्व्विद्यालय के कुलपति हैं, जो एक वैज्ञानिक हैं , वाइस चेयरमैन गुजरात आयुर्वेद युनीवर्सिटी के कुलपति हैं | इस कमेटी में आयुर्वेद- आयुष विभाग, स्वास्थय एवम परिवार कल्याण मन्त्रालय, भारत सरकार के आयुर्वेद के एड्वाइजर / आयुष विभाग के सेक्रेटरी तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी / विभिन्न मन्त्रालयों के आमन्त्रित representative / representative of Indian Council of Medical Research / representative of Institute of Medical Sciences Varanasi / representative of All India Institute of Medical Sciences / Director, CCRAS, New Delhi / Eminent Scientist & experts of Biotechnology, Physics, Engineering etc / Chairman & Members of Central Council of Indian Medicine / कई वैद्य सन्गठनों के प्रतिनिधि गण / देश के विभिन्न राज्यों से आये साइन्टिफिक एड्वाइजरी कमेटी {आयुर्वेद} के सदस्य गण / के अलावा तत्सम्बन्धित लोग बड़ी संख्या में उपस्तिथि थे ।

मैने जब प्रेजेन्टेशन देना शुरू किया था, उस समय कमेटी हाल खचाखच भरा हुआ था । Pin Drop silence छाया हुआ था । डेढ घन्टे मुझे CD के प्रेजेन्टेशन में लग गये । उसके बाद मैने वहीं पर सभी सदस्यों के सामने एक E.T.G. परीक्षण भी किया ।

वहां उपस्तिथि सभी लोग आश्चर्य चकित थे क्योंकि किसी ने भी पहले से नहीं सोचा था कि आयुर्वेद के मौलिक सिद्धान्तों को किसी तकनीक के जरिये साक्ष्य स्वरूप में प्रस्तुत भी किया जा सकता है ।

इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी ई०टी०जी० की विकास यात्रा का चतुर्थ वृतांत: Fourth developmental stage of ETG Tek


सन २००५ में ई०टी०जी० तकनीक में उसी प्रकार से सभी प्रयास किये जा रहे थे, जितना सम्भव हो सकता था । जैसा कि पहले कहा जा चुका है कि इस तकनीक के बारे में वैद्य समाज को सूचना देने के लिये पत्र तथा अखबारों का सहारा लिया गया था ।

जुलाई सन २००५ में मुझे आयुर्वेद-आयुष विभाग, स्वास्थय एवं परिवार कल्याण मन्त्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली द्वारा पत्र से सूचित किया गया कि ETG technology से सम्बन्धित कार्य, निदेशक, केन्द्रीय आयुर्वेद एवं सिद्ध अनुसन्धान परिषद, अनुसन्धान भवन, जनक पुरी, नई दिल्ली द्वारा सम्पन्न कराये जायेंगे, यदि इसे ठीक समझा गया तो ।

सितम्बर सन २००५ में Director, Central Council for Research in Ayurveda and Siddha, CCRAS द्वारा भेजा गया पत्र मिला, जिसमें अक्टूबर २००५ में मुझे कौन्सिल में आकर तकनीक का विस्तृत “वैज्ञानिक Presentation और सम्पूर्ण details ” देने के लिये अनुरोध किया गया था । मुझे कानपुर से दिल्ली आने जाने का 2nd Sleepar class का रेलवे टिकट का पैसा भी दिया गया ।

अक्टूबर २००५ में, मैं अपने ETG tek से सभी सम्बन्धित Documents, CD Presentation लेकर CCRAS, New Delhi गया तथा वहां कमेटी रूम में प्रोजेक्टर की सहायता से प्रेजेन्टेशन प्रस्तुत किया । यह Presentation एक Technical experts की टीम के सामने प्रस्तुत किया गया था । यहां भी इस तकनीक से समबन्धित तरह तरह के सवाल पूछे गये, जिनका मैने उत्तर दिया ।

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Picture shows : Changes done by Dr. Desh Bandhu Bajpai, according to the need of Ayurveda Medical science

पहली बार जब आयुष विभाग में मैने प्रेजेन्टेशन दिया था, उससे यह प्रेजेन्टेशन ज्यादा बेहतर था । क्योंकि मैने बहुत मेहनत के साथ इस तकनीक के सारे पहलुओं को वैज्ञानिक दृस्टिकोण के साथ प्रस्तुत करने की चेष्टा की थी । यहां जिन विषयों पर चर्चा की गयी थी, वे विषय Cardiology, Human Physiology, Human Anatomy, Physics, Maganetism, Electronics आदि आदि से सम्बन्धित थे ।

मैने Technical experts को बताया कि ECG machine एक “गैल्वेनिक रिकार्डर” है । शरीर के अन्दर के अन्ग जिस तरह की और जिस intensity level की Electro maganetic emissions होती है, उसे इन्टेन्सिटी के लेवल के हिसाब से यह रेकार्ड कर लेता है, जिसे ट्रेस रिकार्ड कहते हैं । इस प्रक्रिया में Electro Physiology, Action potencial, Ion potencial, Membrane Potential, Electrolytes आदि आदि का समावेश होता है । प्राप्त किये गये Trace record को जांचा जाता है और विशेष प्रकार से develop किये गये software में फीड करके आयुर्वेद के मौलिक सिद्धान्तों का आन्कलन किया जाता है । बाद में शरीर में व्याप्त रोगों की “रोग निदान” की प्रक्रिया की जाती है, जिसमें सेक्टर के हिसाब से Trace examine करते हैं । इस तकनीक में केवल ECG machine का उपयोग बहुत से परिवर्तन के साथ किया गया है और केवल मात्र इसका Galvenic Recorder ही इस्तेमाल करते हैं ।