सम्पूर्ण शरीर का इलाज : आयुर्वेद की एक महान देन Concept of Comprehensive Treatment : An Ayurveda Approach


आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान में सम्पूर्ण शरीर का इलाज करने की प्रथा है । य़ह इसलिये कि आयुर्वेद सारे शरीर को एक इकाई मानता है और यह भी मानता है कि जब शरीर बीमार हो जाये तो पूरे शरीर का इलाज करना चाहिये । पूरे शरीर से मतलब मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक शरीर से है । आयुर्वेद के शास्त्रोक्त ग्रन्थों में इन्ही सब बातों का सार छिपा हुआ है । प्रकृति और पुरुष के समबन्धों को स्वीकार करते हुये, एक दूसरे के पूरक समझते हुये जिस दर्शन विग्यान का सृजन किया गया है, वह अपने आप में बहुत अनूठा है ।

भारत वासियों के बारे में कहा जाता है कि यहां सभी डाक्टर हैं, यहा सभी वैद्य हैं , किसी से भी अपने मर्ज़ के बारे में बतायें, वह आपको कोई ना कोई नुस्खा बता देगा । जो यह कहते है , यह सही है । इसके पीछे कारण हैं । हरेक को यह समझना चाहिये कि आयुर्वेद एक परम्परागत चिकित्सा विज्ञान है, इसीलिये प्रत्येक भारतीय अपने खान पान रहन सहन में परम्परागत प्राप्त स्वास्थय समबन्धी ज्ञान दूसरे के साथ बाट्ता है, यही कारण है कि यदि कोइ व्यक्ति अपनी तकलीफ़ किसी दूसरे से बताता है तो वह एक फ़ार्मूला बता देगा । यह फ़ार्मूला वह अपने व्यक्तिगत ज्ञान के आधार पर प्राप्त अनुभव के आधार पर बताता है ।

इधर मैने देखा है कि भारत की नवीन पीढी को भारतीय आयुर्वेदोक्त स्वास्थय सम्बन्धी ज्ञान बहुत कम है और न के बराबर है । यह जरूर चिन्ता का विषय है कि सधारण स्वास्थय समबन्धी नियम कायदे तक इस नवीन पीढी को पता तक नहीं हैं ।

आयुर्वेद बताता है कि जब शरीर बीमार हो तो उसका सम्पूर्ण उपचार करना चाहिये और इसीलिये इसके चार पाद बताये गये है, हर पाद का महत्व बताया गया है ।

3 टिप्पणियाँ

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s