आयुर्वेद की पैथोफीजियोलाजी “त्रिदोष भेद” : Tridosha Bhed” , the Pathophysiology of AYURVEDA


दुनिया का सबसे प्राचीन चिकित्सा विज्ञान “आयुर्वेद” भले ही अपने जन्म देश में उपेक्षा का शिकार हो, इसे कोई पूछने वाला न हो, भले ही राजकीय संरक्षण न मिल रहा हो, इसे नष्ट करने के लिये न जाने कितना जोर लगाया गया होगा, लेकिन यह अपनी जगह जीवित रहा और अब भी है, आगे भी जीवित रहेगा क्योंकि इसके सिद्धान्त शाश्वत हैं ।

Pathophysiology को कार्य विकृति कहते हैं । यानी इसे इस तरह से समझना चाहिये कि शरीर का कोई भी अंग अपनी पूरी कार्य क्षमता से काम न कर पाये और इसके परिणाम स्वरूप कोई परेशानी पैदा हो । उदाहरण के लिये यदि बड़ी आन्त की काम करने की क्षमता घटती है तो यह पचा हुआ भोजन, जो पाखाना की शक्ल में इक्ठ्ठा होगा, ठीक समय पर न निकल कर क्योंकि इसके सिद्धान्त शाश्वत हैं ।

Pathophysiology को कार्य विकृति कहते हैं । यानी इसे इस तरह से समझना चाहिये कि शरीर का कोई भी अंग अपनी पूरी कार्य क्षमता से काम न कर पाये और इसके परिणाम स्वरूप कोई परेशानी पैदा हो । उदाहरण के लिये यदि बड़ी आन्त की काम करने की क्षमता घटती है तो यह पचा हुआ भोजन, जो पाखाना की शक्ल में इक्ठ्ठा होगा, ठीक समय पर न निकल कर कब्ज पैदा करेगा । यदि इसी प्रकार बड़ी आन्त की क्षमता बिगड़्ती रही तो यह कार्य विकृति बढ्कर पाखाना को एक दिन , दो दिन या कई कई दिन तक रोके रखेगी । यदि बड़ी आन्त की कार्य क्षमता बढ़्ती है तो पाखाना बार बार जाने की जरूरत होगी । शरीर के अन्गों की इस तरह की कार्य विकृति को ही Pathophysiology कहते हैं ।

आयुर्वेद नें कार्य विकृति को हजारों साल पहले ही पहचान लिया था । ताज्जुब की बात यह कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान इसे अभी तक नहीं पहचान पाया है । आधुनिक चिकित्सा विज्ञान तो कार्य विकृति को दरकिनार करके सीधे सीधे “विकृति” यानी Pathology पर आ जाता है । इसीलिये पैथोफिजियोलाजी का Modern Western Medicine में कोई स्थान नहीं है ।

कार्य विकृति के Test या परीक्षण के लिये आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के पास अभी तक कोई कारगर परीक्षण विधियां डेवलप नहीं हुयीं हैं । लेकिन आयुर्वेद के नये डेवलप किये गये परीक्षण Electro Tridosha Graphy या ETG System द्वारा शरीर की कार्य विकृति का पता लगा सकते हैं ।।

एक टिप्पणी

  1. गुरूदेव दुनिया का दुर्भाग्य है कि हम जैसे साधारण चिकित्सक अब तक इस चमत्कारी यंत्र का प्रयोग नहीं कर पा रहे हैं लेकिन पूरा यकीन है कि शीघ्र ही ऐसा हो पाएगा कि सारी दुनिया आयुर्वेद का लोहा मानेगी इस यंत्र के द्वारा….
    सादर चरण स्पर्श

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