विशेष जन्म दिन पर ; होम्योपैथी के आविष्कारक डा० हैनीमेन, उनके सिद्धान्त और इलेक्ट्रो होम्यो ग्राफी ई० एच०जी० तकनीक : On the Birth day of the Inventor of Homoeopathy Dr. Samuel Hahnemann


Dr. Samuel Hahnemann

Dr. Samuel Hahnemann

10 April को होम्योपैथी चिकित्सा विज्ञान के आविष्कारक डा० सैमुअल हाहनेमान का जन्म दिन मनाते हैं । आज १० अप्रैल है, मै उस महान आत्मा को श्रद्द्दान्जलि अर्पित करता हू कि उन्होंने इतना महान काम किया और पीड़ित मानवता की सेवा के लिये बहुत कुछ सहते हुये जो कुछ भी इस दुनिया को दिया, उसे अनन्त काल तक याद किया जायेगा ।

मैने होम्योपैथी का अध्य्यन किया है और अधिक ग्यान प्राप्त करने के लिये सन १९७३ में मैं म्यूनिख, जरमनी मे क्रान्केन हाउज फ़यूर नाटुर्हाइल्वाइसेन, हरलाखिन्ग में होम्योपैथी के अद्य्यन के लिये गया था । डा० वाल्ठेर जीमर्मान मेरे सेफार्त्ज थे । भारत वापस आकर मैने कान्पुर में प्रैक्टिस शुरू की जो आज तक कायम है और अभी भी कर रहा हू । मैने हहनेमान की जीवनी पढी, उनके लिखे गये ग्रन्थ, जितने भी उपलब्ध हैं , कई कई बार पढे हैं, आज भी जब जरूरत होती है, पढता हूं ।

मुझे लगता है कि अभी होम्योपैथी चिकित्सा विज्ञान में बहुत कमियां हैं ।

पहला यह कि हाहनेमान नें Homoeopathic Philosophy को Medicine of Experiences से लेकर Organon of Medicine के छह एडीसन में हर बार कुछ न कूछ बदलाव करते चले गये, उससे यह आशन्का और अधिक बलवती होती है कि यदि हाहनेमान जिन्दा होते तो शायद वह और बदलाव करते जो वह समय मिलते नहीं कर सके । मेडिसिन आफ इक्स्पीरियन्स से लेकर आर्गेनान के सभी एडीसन को पढा जाये तो बहुत से बदलाव नज़र आयेन्गे ।

दूसरा यह कि हाहनेमान ने अपने पत्रों के उत्तर में बहुत कुछ लिखा है जैसे कि उदाहरण के लिये वे चाहते थे कि दो चुनी हुयी सिन्गल दवाओं को आल्टर्नेट करके जरूरत के अनुसार प्रयोग किया जाये, लेकिन वे अपने चेलों के विरोध के करण ऐसा नियम न लिख सके । Life and Letters of Hahnemann में ऐसे ही कई प्रसन्ग मौजूद हैं । एक दो जगहों पर हाहनेमान ने स्वयम दो दवाओं के उपयोग को स्वीकार किया, जब उनकी खुद की तबियत खराब हो गयी थी तो उन्होने दो दवाओं को alternate करके उपयोग किया था ।

तीसरा यह कि शुरू के दिनो में हाहनेमान दवाओं के मदर टिक्चर का उपयोग करते थे । धीरे धीरे उनको पोटेन्सी का ग्यान हुआ, मदर टिक्चर से डेसिमल, फिर शातमिक, फिर एल एम पोटेन्सी । आगे वह क्या बताना चाहते थे और क्या नियम बनाना चाहते थे , यह कोई नहीं जानता ? हम केवल कयास लगा सकते हैं ।

चौथा यह कि आर्गेनान का 6th Edition doubtful लगता है । एक तो यह की हाहनेमान के मरने के काफी वर्षॊ बाद इसका प्रकाशन हुआ । शक की बात यह कि क्या हमें वही पढने को मिल रहा है जो हाहनेमान ने लिखा था ? हमें याद रखना चाहिये कि हम जो भी पढ रहे हैं वह अनुवाद है यानी जरमन भाषा से अन्ग्रेजी भाषा में अनुवाद । मैने जरमन भाषा में Organon को पढा है । जिस सुन्दर भाषा selection of words, flow of
language, लिखने का मूड और लेखन शैली का हाहनेमान नें प्रयोग किया है, वह english language में कहीं से भी प्रभावित नहीं करता ।

कहने के लिये तो बहुत कुछ है । अपनी बात यहीं समाप्त करते हुये अन्त में यही कहून्गा कि हाह्नेमान द्वारा प्रस्तावित किये गये कुछ सिद्धान्तों का मैने Electro Homoeo Graphy E.H.G. Technology द्वारा Evidence Based स्वरूप में सिद्ध करने का प्रयास किया है । अभी यह शोध कार्य प्राम्भिक चरण में हैं, लेकिन इस तकनीक द्वारा प्राप्त किये गये Psora, Sycosis, Syphilis, Vital Force, Ideosyncracy इन पांच बातों का रोगी के शरीर मे व्याप्त status quantification का प्राप्त डाटा बहुत उत्साह्वर्धक है । यह जरूर है कि इस तकनीक द्वारा हाह्नेमान द्वारा प्रतिपादित सिद्धान्त आंशिक ही सही , सिद्द किये जा सकते हैं ।

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