महीना: मई 2009

अस्थमा के रोगी का ई०टी०जी० परीक्षण से प्राप्त डाटा और निदान पश्चात की गयी चिकित्सा ; A Case of ASTHAMA


अस्थमा के रोगी का ई०टी०जी० परीक्षण से प्राप्त डाटा और निदान पश्चात की गयी चिकित्सा से रोगी को आरोग्य प्राप्त हुआ है । यह रोगी उम्र 71  साल, दिनान्क 20 मार्च 2009 को परीक्षण कराने आया था । इसके ट्रेस रिकार्ड को देखिये ।

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तेजी से सान्स चलने से इसकी पल्स रेट १०५ प्रति मिनट है । इसके शरीर का सबसे हाई लाइटेड एरिया इसका “इपीगैस्ट्रियम” है । “डी” और “ई” वेव नार्मल पैरामीटर से बहुत अधिक हैं । ट्रेस रिकार्ड में सबसे लोवेस्ट एरिया आर० के० यानी “राइट [दाहिना] कफ” है । एफ०एच० यानी “फोर हेड” का ट्रेस बहुत कम है, यह इन्गित करता है कि रोगी को अक्सीजन की कमी है ।

चित्र में बताया गया है कि इस रोगी के “वात” और “वात भेद” कितना है? डाटा में दर्शाया गया है कि अन्य दोषों की क्या स्तिथि है ?

परीक्षनोपरान्त इस रोगी के प्राप्त डाटा को आधार मान्कर आयुर्वेद और होम्योपैथी का सम्मिलित इलाज दिया गया । अब रोगी को ९५ प्रतिशत आराम है और इनकी दवायें अभी चल रही है । रोगी पिछले ३५ साल से एलोपैथी, आयुर्वेदिक,होम्योपैथी , तन्त्र मन्त्र, झाड़ फूंक इत्यादि सभी टुटके आजमा चुका था, इसको कही से भी फायदा नहीं हुआ था ।

कफ दोष के रोगियों में कैल्सियम की अधिकता : High Calcium level in Kaphha Dosha Patients ; ई०टी०जी० तकनीक ने खोज निकाला : Latest discovery of the ETG Technology


मैने और मेरे साथी हकीम शरीफ अन्सारी जी ने ई०टी०जी० रिपोर्ट में एक बात खास अध्ध्यन करके निकाली है कि जिन रोगियों में “कफ” दोष अधिक प्रतिशत में निकलता है, उनके “कैल्सियम लेवल” अधिक होता है । ऐसे रोगियों मे प्राय: आम वात, जोड़ों के दर्द, गठिया वात, Osteoarthritis, Arthritis, Muscular Arthritis, Calcium deposits in joints & similar complaints इत्यादि तकलीफों वाले होते हैं ।

“कफ़” दोष के बढे हुये प्रतिशत के अलावा “कफ” के पांच त्रिदोष भेद में “श्लेषमन कफ भेद” भी बढा हुआ होता है । आयुर्वेद के ग्रन्थों में बताया गया है कि श्लेशमन कफ अस्थियों के जोड़ों में पाया जाता है ।

ईलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफ तकनीक से आयुर्वेद के चिकितसकों को यह सुविधा भी मिलती है कि शरीर में व्याप्त Calcium Level कितना है, यह पता चल जाता है । इस तकनीक से Heamoglobin का प्रतिशत भी ग्यात हो जाता है ।

कफ दोष के बढे हुये रोगियों में कैल्सियम लेवेल का बढना ज्ञात होने से “श्लेशमन कफ” का हड्डियों के जोड़ॊ में पड़ने वाले प्रभाव के इस अध्ध्यन से आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान के मौलिक सिद्धान्तों का ई०टी०जी० तकनीक की मदद से विश्व के सामने साक्ष्य स्वरूप में प्रस्तुत किया जा सकता है ।

हलांकि यह प्रारम्भिक अध्ध्यन है जिसमे 90 % प्रतिशत रोगियों में इस तरह की आन्तरिक समबन्धता मिली है । बाकी के 10 % प्रतिशत रोगियों में Calcium Level सामान्य से कम प्राप्त हुये हैं । ऐसा क्यों है ? मैं और हकीम शरीफ अन्सारी जी इसका उत्तर खोजने का प्रयास कर रहे हैं ।

रक्त शर्करा के रोगियों का ई०टी०जी० की फाइन्डिन्ग्स से सहायता लेकर आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक इलाज : High Level Blood sugar {Hyperglyceamia] patient’s treated after findings of ETG with Ayurvedic and Homoeopathic medicines


हमारे परीक्षण केन्द्र में बड़ी सन्ख्या में high blood sugar के मरीज आते हैं । हम ऐसे मरीजों को सलाह देते हैं कि वे पहले अपना ई०टी०जी० परीक्षण करा लें ताकि उनके शरीर में व्याप्त दोषों के अलावा , यह भी पता चल जाये कि उनको इस सुगर की तकलीफ के अलावा और कौन कौन सी तकलीफें हैं ।

उस समय हमे बहुत आश्चर्य होता है, जब मरीजों के किये गये परीक्षण में ऐसे स्वास्थ्य समबन्धी तथ्य मिलते हैं जिनके बारे में बहुत प्रयत्न करने के बाद भी नहीं सोच सकते कि इसे यह तकलीफ भी होगी ।

सुगर वाले रोगियों में यह आन्कड़ा मिला है कि सभी को Epigastritis जरूर होती है । इपीगैस्ट्रिउम से रिकार्ड की गयी ट्रेस के अध्ध्यन करने के बाद पता चलता है कि किसी रोगी को ळिवर बढा हुआ है, किसी का कम काम कर रहा है,किसी का पित्ताशय कम काम कर रहा है या उसमें कोई विकार है, पैन्क्रियाज ज्यादा या कम काम कर रहा है, पैन्क्रियाज में सुजन है या कैल्सियम जमा है या इन्फ़ेक्शन है, प्लीहा में कोई विकार है इत्यादि ।

कुछ मरीजों को उच्च रक्त चाप की प्रवृत्ति पाई जाती है । किसी को गुर्दे की शिकायत होती है, पथरी भी हो सकती है । छोटी आन्त और बड़ी आन्त की सूजन या इरीटेबल बावल सिन्ड्रोम या बावेल पैथोफीजीयोलाजी अक्सर देखने को मिलती है । थायरायड की कार्य विकृति Thyroid pathophysiology अधिकन्शत: मरीजों में देखने में आती है । किसी किसी को सारे शरीर में हल्की सूजन होती है, जिसे बड़ी सन्ख्या में मरीज समझ ही नही पाते । बहुतों को ज्यादा धड़्कन होने की तकलीफ़ होती है और किसी को कम । चिकित्सा करने वाले डाक्टर तक नहीं समझ पाते हैं कि मरीज के शरीर में दूसरी कौन कौन सी बीमारियां अन्दर ही अन्दर पनप रही हैं ।

पहले हम सभी इलाज कराने वाले मरीजों को सलाह देते थे कि वे अगर ठीक होना चाहते है और आयुर्वेद/ होम्योपैथी की दवाओं से लाभ उठाना चाहते है तो वे अपना ई०टी०जी० परिक्षण जरूर करायें । आज हालत यह है कि मरीज पहले कहता है कि आप परीक्षण करें , फिर इलाज करें ।

इस तरह से सुगर के मरीजों का जब सारे शरीर के परीक्षण का परिणाम मिल जाता है तब उनकी चिकित्सा करते है । हमे यह देखना होता है कि विकार की समस्या कहा कहां है । मरीज की बिमारी की समस्या के जड़ तक पहुचने के बाद हमारी कोशिश होती है कि कम से कम दवा खिलाकर आरोग्य देने में सहाय्ता करें । उचित दावाओं के काम्बीनेशन , पथ्य और परहेज, रहन सहन में परिवर्तन करा कर लगभग सभी मरीज आरोग्य की दिशा प्राप्त कर लेते हैं ।

शन्खद्राव आधारित औषधिया : Shankhadrav Based Medicines


पिछले एक दशक से अधिक हो चुके हैं, जब मरीजों के किये गये इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राम ई०टी०जी० की फाइंन्डिंग्स में त्रिदोषों, त्रिदोष भेदों, सप्त धातुऒं तथा अन्य मौलिक सिद्धन्तों को आधारित करके और इन सभी फाइन्डिन्ग्स को एक साथ लेकर मरीज के लिये औषधियां सेलेक्ट की बात आती , तो मुझे लगता की जिस काम्बिनेशन की मुझे आवश्यकता है, वह पूरी नहीं हो पा रही है । अभी आवश्यक्ता इस बात की है कि काम्बीनेशन के हिसाब से दवायें फैब्रीकेट की जायें । दवायें भी ऐसी हों, जो शीघ्र फायदा पहुचायें और त्वरित लाभ कारी हों, जैसा कि आधुनिक चिकित्सा विग्यान की दवायें हैं ।

मै इस विचार में लगा रहा और मुझे समझ में आया कि शन्खद्राव को आधार बना करके कुछ अन्शों में यह लक्ष्य प्राप्त किया जा स्कता है । इस पर मैने काम करना शुरू किया और मुझे सफ़लता भी मिली । NAtional Innovation Foundation , Ahamadabad को भेजे गये शोध पत्र की Original script से कुछ मैटर आपके लिये दे रहा हुं। shankhadraav NIF LetterShankhdrav Research 1pageShankhdrav research page 2shnakhadrav research page 3

SWINE FLU TREATMENT ; Ayurvedic & Homoeopathic Medical System’s Perfect Solution


Epidemic of Swine Flue virus is spreading world wide and every corner of the globe is being affected every day.

I will not discuss about the Virus here, I will only share my experiences of the treatment of Viruses spreading every year in India. I have treated Viruses infections since three decades successfully without any casuality & safe, solid way by the use of Homoeopathic and Ayurvedic medicines. When I need , I use Allopathic medicine for a while to support the Ayurvedic and Homoeopathic treatment, not in every case, but for precautions.

The Homoeopathic medicine which I use, is a combination of Homoeopathic Medicinal Mother Tinctures in equal ratio. The Formula is given below:

Homoeopathic Mother Tincture Mixture

• Ceasalpeania Bonducela Mother Tincture
• Azadirachta Indica Mother Ticture
• Gentiana Chirayata Mother Tincture
• Kalmegha Mother Tincture
• Tinospora Cardifolia Mother Tincture
• Echinesia Mother Tincture

Mix all mother tinctures in equal quantity. Take one or two spoonful mixture with half cup of fresh water two hourly or three hourly or four hourly

This Homoeopathic medicine mixture is sufficient to cure the Infection. To make the more foolproof treatment , the following Ayurvedic Herbal Tea is very effective . This tea can be taken with the Homoeopathic mixture with safety.

Ayurvedic Herbal Tea

Take the following Herbs in equal quantity,

• Gorakhmundi
• Manjistha
• Chirayata
• Nim
• Tulasi
• Ginger dried
• Nagarmotha
• katakranj
• Haritaki
• Anantmool

Grind all Herbs , not in fine powder but in crude powder. Take 10 Gms Crude powder, make decoction with one cup of water, boiling smoothly. Drink lukwarm.

This tea can be taken 3 or 4 times a day.

These Homoeopathic mixture & Ayurvedic Herbal Tea medicine can be taken in alternation, several times a day.

Follow the health maintenance rules strictly. Don’t be panic youself, I have treated every years Virus infections successfully with 100% recovery, by using Homoeopathic and Ayurvedic medicines simultaneously.

बाबा रामदेव की पत्रिका “योग सन्देश “, अप्रैल २००९ के अन्क में ईलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राम तकनीक का वर्णन : E.T.G. Technology descriptions in YOGA SANDESH magazine ,April 2009 issue, published by Baba Ram Dev


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बाबा राम देव द्वारा योग विज्ञान पर प्रकाशित की जाने वाली पत्रिका योग सन्देश के अप्रैल २००९ के अन्क में इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राम तकनीक का उल्लेख किया गया है । हलांकि यह इस तकनीक पर स्वतन्त्र लेख नहीं है, फिर भी विद्वान लेखक नें अपने लेख में इसका उल्लेख करके आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान को अत्याधुनिक तकनीक से लैस होने की बात करके सम्पूर्ण विश्व में यह सन्देश देने की कोशिश की है कि आयुर्वेद भी अब निदान ज्ञान की तकनीक, उन्गलियों के साथ साथ, मशीनी युग में और लैप्टाप तक आ चुकी है और इसे अब किसी भी कीमत पर आधुनिक चिकित्सा विज्ञान से निदान ज्ञान के मामले में कम न आंका जाये ।

बेहतर होता , यदि ई०टी०जी० तकनीक पर , इस पत्रिका में और लेख प्रकशित किये जाते, ताकि विश्व समुदाय को विस्तार से पता चल सके कि यह तकनीक आयुर्वेद में क्या गुल खिला सकती है ?