बाबा रामदेव की पत्रिका “योग सन्देश “, अप्रैल २००९ के अन्क में ईलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राम तकनीक का वर्णन : E.T.G. Technology descriptions in YOGA SANDESH magazine ,April 2009 issue, published by Baba Ram Dev


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बाबा राम देव द्वारा योग विज्ञान पर प्रकाशित की जाने वाली पत्रिका योग सन्देश के अप्रैल २००९ के अन्क में इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राम तकनीक का उल्लेख किया गया है । हलांकि यह इस तकनीक पर स्वतन्त्र लेख नहीं है, फिर भी विद्वान लेखक नें अपने लेख में इसका उल्लेख करके आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान को अत्याधुनिक तकनीक से लैस होने की बात करके सम्पूर्ण विश्व में यह सन्देश देने की कोशिश की है कि आयुर्वेद भी अब निदान ज्ञान की तकनीक, उन्गलियों के साथ साथ, मशीनी युग में और लैप्टाप तक आ चुकी है और इसे अब किसी भी कीमत पर आधुनिक चिकित्सा विज्ञान से निदान ज्ञान के मामले में कम न आंका जाये ।

बेहतर होता , यदि ई०टी०जी० तकनीक पर , इस पत्रिका में और लेख प्रकशित किये जाते, ताकि विश्व समुदाय को विस्तार से पता चल सके कि यह तकनीक आयुर्वेद में क्या गुल खिला सकती है ?

      

11 टिप्पणियाँ

  1. गुरूदेव,रामदेव जी के मैनेजमेंट की नजर तो पड़ी कम से कम ई.टी.जी. पर वरना उन्हें तो ई.सी.जी. के आगे जाने में ही पता नहीं क्या पूर्वाग्रह था। मेरे लिये ये एक मिशन है कि हर उस व्यक्ति को झकझोरूंगा जो इस क्षेत्र से जरा सा भी संबद्ध है। आपका आशीर्वाद शक्ति देता रहता है।
    सादर चरण स्पर्श
    डा.रूपेश श्रीवास्तव

    ………..Reply by Dr.D.B.Bajpai………..देर आयद, दुरुस्त आयद यानी देर से सही लेकिन ठीक किया । एक बात का जिक्र करना तो भूल ही गया, वह यह कि बाबा जी की पत्रिका मे इसी पेज पर मेरे द्वारा किया गया दूसरा शोध कार्य भी छापा गया है, जो “शन्ख्द्राव पर आधारित औषधियां ” पर है ।

  2. प्रचार के समीकरणों के ये वणिक जन खूब समझते हैं इसलिये शंखद्राव पर आधारित औषधियों वाली बात पर लिखते हैं “एक चिकित्सक”…. चिकित्सक का नाम दे देने में उसकी प्रसिद्धि इनकी मेहनत से जमाई पुस्तक योगसंदेश के द्वारा हो जाएगी तो बिना किसी फ़ायदे के क्यों उसका नाम दें। इसे कहते हैं शुद्ध व्यवसायि नजरिया। यदि नाम लिख देते तो रामदेव और उनके जोड़ीदार की कीर्ति धूमिल हो जाती जो बिना किसी आयुर्वेद या चिकित्सा की डिग्री आदि के लोगों को फ़ोकट की सलाहें देकर वाहवाही लूट रहे हैं। प्रयास रहेगा कि ये बनिये आपका नाम लिखें और इस बात का स्पष्टीकरण दें कि क्या लेखक को इन शोधों को करने वालों के नाम नहीं पता है या जानबूझ कर प्रकाशित नहीं करे गए हैं। आपका आशीर्वाद बल प्रदान करता है।
    सादर चरण स्पर्श

    1. ………..Reply by Dr.D.B.Bajpai………..If you are really serious about your complaints mentioned, then it will be much better to consult your nearest Ayurveda Practitioner. You needs personal attention of Ayurvedic physician for treatment of your ailments.

  3. चरण स्पर्श मान्यवर |
    आपके आयुर्वेद के सन्दर्भ में किये जा रहे सफल व उन्नत प्रयासों हेतु आपको बधाई देने के लिए मेरे सब्द-कोष रिक्त हो गए है |
    आपंके इ.टी.जी. तकनीक के द्वारा वर्तमान में मै आयुर्वेद शास्त्र को आधुनिक चिकित्सा के सामानांतर महसूस करता हु|
    वर्त्तमान में अधिकांश आयुर्वेद चिकित्सक त्रिदोष के सिद्धांत से विचलित होकर पेटेंट ओषधि योग के द्वारा चिकित्सा कर्म सम्पादित करते है जिसके कारन सफल चिकित्सा संभव नहीं हो पाती हैं|
    आपने नयी तकनीक के प्रयोग में भी त्रिदोश को आधार बनाया है जिसके द्वारा सम्यक निदान के उपरांत सरलता पूर्वक चिकित्सा की जा सकती है.
    आप जैसे चिकित्सकों के कारन ही वर्तमान युग में वैदिक शास्त्र की गरिमा व मर्यादा स्थापित है|
    नहीं तो इस दूषित समाज में आयुर्वेद का चीर हरण का प्रयाश निरंतर किया गया है
    बाबा रामदेव जी ने आयुर्वेद व योग को अपना पर्याय बना लिए है |
    वैदिक शास्त्र पर किसी एक व्यक्ति का अधिकार नहीं होता है |
    वायु: पित्त: काफ्श्चोक्ता: शरीरो दोष संग्रह:|
    मानस: पुनारिदिश्तो रज्शतम एव च||
    आपकी इ,टी,जी.तकनीक आयुर्वेद को हीन व कमजोर पद्धति के रूप में आकलन करने वालो के लिए एक सबक है |
    मेरा प्रयास आम जनमानस तक आयुर्वेद के यथार्थ से awagat karana है|

    1. ………..डा० डी०बी० बाजपेयी का उत्तर………..आपको धन्यवाद / यह सही है कि ई०टी०जी० आधारित आयुर्वेद के सभी चिकित्सा कार्य सही, सटीक, बिना किसी deviation के मरीजों के लिये हितकारी साबित हुये है / मै और मेरे सहयोगी हकीम मोहम्मद शरीफ अन्सारी जी बराबर ई०टी०जी० आधारित रिपोर्ट पर आयुर्वेद की शास्त्रीय औषधियों का उपयोग करते हुये चिकित्सा कार्य कर रहे है और ऐसे ऐसे मरीजों का उपचार कर चुके है जिनको एलोपैथी के चिकित्सक ठीक नही कर पाये और मर्ज को लाइलाज बताकर मरीज को उसके रहमों करम पर छोड़ दिया था /

      यह सब भगवान धन्वन्तरि की कृपा है जिन्होने ई०टी०जी० तकनीक को जन्म देकर आयुर्वेद को आधुनिक चिकित्सा विग्यान से टक्कर लेने के लिये नये यग का सुत्रपात कर दिया है / ई०टी०जी० तकनीक का जन्म लेना मै ईश्वर का उपहार मानता हू /

      आप जैसे आयुर्वेद प्रेमी को मेर पुन: नमस्कार / धन्यवाद /

  4. Sir, Mai ek M.Ed. student hu jo ki Mental Retardation se Special Education kar rahi hu. Mera yog mai interest hone k karan Maine apna dissertation topic “Mansik Mandit Balko ki bodhik Chamta pe yog ke prbhav ka aadhyan” karna hai. mai is samandh mai Baba Ramdevji kis pustak (Hindi) se ya kaha se madad le sakti hu.

    ………..reply by Dr DBBajpai……….mujhe bahut khusi hai ki aapne apane shodh ka vishan mand budhdhi balko ke vikaron se sambandhit vishay par chuna hai, isake liye apako dhanyavad. CLINICAL PSYCHIATRY mera bahut priy vishay raha hai, isaliye pschosomatic aur somatopsychic disorders par main nirantar kary karata rahata hun.

    English Language me lagabhag sabhi Clinical Psychology ki kitabon me apako mental retardation se sambandhit chapter mil jayenge, isake alava Human Physiology ke related chapters bhi dekhe. Text Book of Clinical Psychiatry, Modern Clinical Psychology, Human Physiology, Diseases of Nervous system, Harrison’s Clinical Medicine ke releven chapters, Text Book of Medicine ke relevent chapters me sear4ch karein, aapako dher sari janakariyan aur reference books mil jayengi.

    Hindi Bhasa me MANSIK ROG ki pustak se bhi sahayata li ja sakati hai, baba ramdev ki kisi kitab ke bare me mujhe janakari nahi hai, isaliye main kuch kahane ki stithi me nahi hu. Dhanyavad

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