दिन: जुलाई 10, 2009

इपीगैस्ट्रियम की बीमारी “इपीगैस्ट्राइटिस” में आयुर्वेद के सिध्धान्त “त्रिदोष” के “वात, पित्त, कफ” की शरीर में उपस्तिथि का मूल्यान्कन : ई०टी०जी० तकनीक से प्राप्त आन्कड़ों का विश्लेषण ; Evaluation of Ayurveda Principals “Vat, Pitaa, Kaphha” in disease condition of “Epigastritis” ; an overview study from ETG technology obtained Data


बड़ी सन्ख्या मे एकत्र ई०टी०जी० रिपोर्ट्स मे निदान किये गये और तदनुसार इन रिपोर्ट्स पर आधारित होकर रोगियों की चिकित्सा करके उनको शीघ्र आरोग्य करने के पश्चात, “इपीगैस्ट्राइटिस” के रोगियों के इस अध्ध्यन का उद्देश्य आयुर्वेद के चिकित्सकों के इस ओर ध्यान दिलाने का है कि वे किस प्रकार निदान कार्य में फेल हो रहे हैं और मरीजों के जी जान से खिलवाड़ कर रहे हैं ? आयुर्बेदग्यों के इस कार्य से न केवल आयुर्वेद चिकित्सकों की उतकृस्टता पर सवाल उठते हैं बल्कि उनके असफ़ल होने पर आयुर्वेद की बदनामी भी होती है ।

मैने और हकीम मोहम्मद शरीफ अन्सारी जी ने Abdomen के नौ हिस्से में से एक हिस्से Epigastrium का evaluation ETG technology द्वारा जान्च करके तदनुसार प्राप्त किये गये डाटा से यह जान लेने की कोशिश की कि [१] आयुर्वेद के मौलिक सिद्धान्त त्रिदोष यथा वात, पित्त, कफ की क्या अवस्था मरीजों में पायी गयी ? तथा दूसरा यह कि [२] त्रिदोष के एकल दोषों के अलग अलग Status Quantification के साथ त्रिदोषों के अन्य कितने combination बन सकते हैं जैसा कि चरक सम्हिता में महर्षि चरक ने स्वीकार किया है ?, तीसरा सवाल यह कि इस तरह से प्राप्त आन्कड़ों से चिकित्सा कार्य में क्या सहायता मिल सकती है ? चिकित्सक किस प्रकार से इस डाटा का उपयोग कर सकता है ?

हमने अपने केन्द्रों में आने वाले १०० मरीजों का रिकार्ड खन्गाला और उनमे से सभी आयु वर्ग तथा तरह तरह की बीमारियों से त्रस्त मरीजों का Random चुनाव करके Data का चुनाव किया ।

तालिका-१ में दर्शाया गया है कि कितने मरीज सामान्य और असामान्य मिले

tabulation-2
तालिका -२ में त्रिदोषों की क्या अवस्था रही, यह दर्शाया गया है।

tabulation-1

निष्कर्ष :

१- वात दोष की कमी ७६ प्रतिशत रोगियों में मिली
२- पित्त दोष की कमी ४५ प्रतिशत और दोष की अधिकता ३६ प्रतिशत रोगियॊ में मिली ।
३- कफ दोष की कमी ११ प्रतिशत और दोष की अधिकता ५७ प्रतिशत रोगियों में मिली ।
४- कम की ओर जाने वाले डाटा से पता चला कि ३५ प्रतिशत रोगियों में तकलीफ वातज-पित्तज होती है ।
५- अधिक की ओर जाने वाले डाटा से पता चला कि ५० प्रतिशत रोगियों में तकलीफ कफ़ज-पित्तज होती है ।
६- Epigastritis से पीड़ित ४० प्रतिशत रोगी कफ दोष से प्रभावित होते है।
७- शमन और बृन्घण चिकित्सा से रोगियों को शीघ्र लाभ मिला ।

हलांकि यह एक बहुत छोटा सा अध्ध्यन है, लेकिन हम और अधिक यह जान लेने की कोशिश में हैं कि ETG Technology का सहारा लेकर और अधिक क्या किया जा सकता है ?

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