महीना: अगस्त 2009

एक्यूट मायेलायड ल्यूकीमिया: Acute Myeloid Leuceamia ; छह माह कप्रेग्नेन्ट महिला का ई०टी०जी० रिकार्ड और रिपोर्ट : E.T.G. Record of Six month’s Pregnent Lady with their complications


यह एक बीस साल की प्रेग्नेन्ट महिला का ई०टी०जी० ट्रेस रिकार्ड है । इसे देखिये और समझिये कि ई०टी०जी० किस प्रकार आयुर्वेद के शोध कार्यों में और समान्य चिकित्सा अभ्यास में फल दायी सिद्ध हो चुका है ।

इस  महिला के परिवार के जिम्मेदार व्यक्ति हमारे कैण्ट केन्द्र में पूर्व में किये गये इलाज और परीक्षण रिपोर्ट लेकर आये और हकीम शरीफ अन्सारी को कन्सल्ट किया । परीक्षण रिपोर्ट में खून की जान्च प्रमुख थी ।

खून की जान्च रिपोर्ट निम्न प्रकारहै :

Total Leucocyte counts : 43, 400  तेंतालिस हज़ार [Normal: 4000 -11000/cmm]

Heamoglobin 04.8 mg% [Normal 12- 16 mg/dl]

Sodium ,Pottassium  , Calcium Level  ये सब सामान्य से नीचे

अल्ट्रा साउन्ड परीक्षण से पता चला की रोगिनी के  छह माह की प्रेगनेन्सी है

pathology1

pathology;;2

pathology;;3

pathology;;4

रोगिणी ने कानपुर और लखनऊ शहर  के सभी बड़े चिकित्सा सन्सथानों मे जाकर दिखाया, सभी एलोपैथी के चिकित्सकों ने कहा किने कहा कि इस बीमारी की अवस्था का हमारे पास कोई इलाज नहीं है ।

 

रोगिणी की कोई रिश्तेदार हकीम शरीफ के पास इलाज करा चुकी थी , इसलिये रोगिणी कन्सल्टेशन के लिये हकीम सहब के पास आयी थी ।

 

pregnency-1

pregnancy-2

pregnency3

pregnancy4

pregnency-5pregnancy-6 

preganancy-11preganancy-7

preganancy-9

preganancy-10

हम इस रोगिणी की चिकित्सा कर रहे है  । इसे आयुर्वेदिक दवायें दे रहे हैं ।

समय समय पर इस रोगिणी की हालत के बारे में , इसी ब्लाग के माध्यम से , जानकारी देने का प्रयास किया जायेगा ।

Updated case report: [Dated 30 August 2009]

इस रोगिणी को सात दिन की आयुर्वेदिक दवा दी गयी थी । रोगिणी के पिता ने एक हफ्ता दवा खाने के बाद के परिणामों को बताते हुये कहा कि ” अब रोगिणी की हालत पहले से बेहतर है और उसके स्वास्थय में सुधार हुआ है” ।

रोगिणी के पिता एक हफ्ते की और दवा लेकर चले गये हैं ।

Updated report: 05.09.2009

Patient visited our center with cheerful smile. We examined her and asked several questions regarding her health condition.

She expressed her views about her health . We were satisfied about her health condition after examination. We asked her father to go for Blood examination DLC and TLC etc.

Patient belongs to Country side area and a remote district away from Kanpur.

Her General condition is much better , when we saw her earlier.Now she is running in her Eight month pregnency duration.

Update on 15 September 2009 ;;;

A pathological ivestigation done on the 09 September 2009.

 

The report copy is presented here. Anybody can see in the report that patient’s heamoglobin increased 2 percent and TLC becomes normal range.

pathology5

Advertisements

डायबेटीज, ब्लड प्रेसर, गठिया वात के बढ रहे मरीजों की सन्ख्या


इधर हमारे ई०टी०जी० के जान्च केन्द्रों में आने वाले मरीजों में में यह बात निदानात्मक स्वरूप में आयी है कि अधिकन्श मरीजों में डायबेटीज , ब्लद प्रेसर और जोड़ों की तकलीफों से पीड़ित मिले । । ई०टी०जी० तकनीक में यह एक विशेष निदानातमक सुविधा
है कि इससे पता चल जाता है कि मरीज की टेन्डेन्सी या बीमारी का झुकाव किस तरफ का है । यह तकनीक बता देती है कि ब्लड प्रेसर हाई की तरफ है या लो की तरफ । रक्त शर्करा यानी ब्लड सूगर का स्तर क्या हो सकता है ? हीमोग्लोबिन या सिरम कैल्सियम का क्या स्तर है ? यह सब बातें ईटीजी से पता चल जाती है ।

ई०टी०जी० से प्राप्त इन सब डाटा का कन्फर्मेसन ग्लूकोमीटर, ब्लड प्रेसर मानीटर तथा अन्य पैथोलाजिकल जान्चों द्वारा करते है, जो शत प्रतिशत सही निकलता है ।

पिछले एक साल से प्राप्त किये गये डाटा के अध्ध्यन करने से यह नतीजा निकला है कि इस तरह के रोगियों की सन्ख्या में बराबर बढोतरी हो रही है । १८ साल के लड़्कों में रीढ की हड्डी के रोग पाये गये हैं । इस उम्र में कईयों के ब्लड प्रेसर बढे हुये मिले है, यह सब क्यों हो रहा है, इसका कारण जीवन शैली में बदलाव, कम्पतीशन में आगे निकलने की होड़, प्रतिस्पर्धा, पढाई मे ज्यादा जोर देना,इन सबसे उपजे मानसिक तनाव और मानसिक दबाव के प्रतिक्रिया स्वरूप शारिरिक लक्षण उतपन्न होना और इन लक्षनॊं का एक्स्प्रेसन होना, जिसे परीक्षण में प्कड़ लिया जाता है ।

इन सब बीमारियों का इलाज बहुत आसान है । हम शुध्ध आयुर्वेद दवा, होम्योपैथी की औषधियों , मरीज के खान्पान को नियन्त्रित करके, जीवन शैली में बदलाव करने के सुझाव देकर आरोग्य प्रदान करते है ।

स्वाइन फ़्लु से बचाव के लिये ; for Prevention of Swine flu


स्वाइन फ्लू से बचने के लिये सभी इच्छुक लोगो को सलाह देता हूं कि ऐसे सभी लोग होम्योपैथी के एन्टीबायोटिक मदर टिन्क्चर का उपयोग प्रति दिन एक या दो बार अवश्य करें । इसकी १० से २० बूंद दवाएक खुराक होती है ।

छोटे बच्चों को इस मिष्रण की ५ से १० बूण्द दवा किसी मीठे शर्बत में मिलाकर या शहद में मिलाकर पिला दें ।

जो आयुर्वेदिक काढा पीना चाह्ते हैं वे लोग एक या दो बार  चाय की तरह पीकर स्वाइन फ़्लू या ऐसे ही किसी भी बीमारी के मिलते जुलते लक्षणों से बचाव कर सकते है।

पिछले ३५ सालों से मै इस होम्योपैथिक मिक्सचर और आयुर्वेदिक चाय का उपयोग हर तरह के “वाइरल इन्फेक्सन” के फ़ैलने की स्तिथि में, आज तक करता चला आ रहा हुं और वाइरस के प्रकोप का इलाज चाहे उसे कोई भी नाम दिया गया है, सबका ट्रीट्मेन्ट इसी और इन्ही दवओं से किया है और मै कभी भी वाइरस के इलाज में नहीं फेल हुआ ।

आज भी यही दवायें कानपुर में फ़ैले वाइरस इन्पेक्सन में उपयोग कर रहा हुं और इलाज में शत प्रतिशत सफलता मिली है ।

यह फार्मूला इसी वेब साइट में कहीं भी देख लें ।

ये दवायें  शत प्रतिशत सुरक्षित है और इनके कोई भी साइड प्रभाव कतई नहीं होते । दवायें चिकित्सक की देखरेख में लें तो ज्यादा ठीक है, लेकिन जहां चिकित्सक नहीं उपलब्ध है , वहां बिना चिकित्सक की देखरेख में भी दवायें ले सकते है ।

सवाल जो सबसे ज्यादा मुझसे पूछा जाता है ” What is the procedure of your treatment ?”


वैसे तो मैं इन्टर्नेट पर इस साइट पर आकर सवाल पूछने वालों को कोई जवाब नहीं देता. क्योंकि मुझे समझ में यह कतई नहीं आता कि सवाल पूछने वाला कितना गम्भीर है । मै सवाल पूछने वाले की मस्तिश्क की तरन्गों को पढता हूं । चिकित्सा मनोविग्यान Clinical Psychiatry मेरा प्रिय विषय रहा है, इसलिये मै मष्तिष्क की तरन्गें पढता हूं और लिखने वाले के लिखने के अन्दाज़ से समझ जाता हुं कि सवाल पूछने वाला वास्तव में गम्भीर है या यों ही दिल बहलाने के लिये लिख मारा है ।

इस साईट को देख करके बहुत से लोग , जो इलाज कराना चाहते है, वे शिधे हमारे दोनों केन्द्रों में कहीं भी आकर इलाज करा रहे है और वे ज्यादा सवाल जवाब भी नही करते । महीने दो महीने की दवा लेकर उप्योग करते है और फिर दुबारा आकर कन्सल्ट करते हैं ।

इन्टर्नेट पर जो सबसे बड़ा सवाल मुझसे किया जाता है कि “व्हाट इज द प्रोसीजर आफ योर ट्रीट्मेन्ट ?”

लीजिये मैं जवाब भी दे रहा हुं ।

१- सबसे पहले मै मरीज का ई०टी०जी० का परिक्षण करता हूं और यह पता लगाने का पिन प्वाइन्ट प्रयास करता हूं कि मरीज को तकलीफ क्या क्या है और शरीर में कहां कहा है ? यह सब ई०टी०जी० रिपोर्ट मे छपकर मिल जाता है ।
२- मरीज की बीमारी के अलावा आयुर्वेद के त्रिदोष, धातु , मल ओज आदि का ग्यान हो जाता है ।
३- सारा डाटा सामने होने से मरीज के शरीर की एक एक जरूरी चिकित्सा समबन्धी बातेण सामने होने से आयुर्वेदिक औषधियों के चयन में सरलता आ जाती है ।
४- कभी कभी कुछ ऐसी तकलीफें होती है जिनकी कोई दवा आयुर्वेद में बहुत सतीक नहीं समझ में आती है, तब होम्योपैथी के मदर टींक्चर का उपयोग करते हैं ।
५- तेज़ दर्द या ज्यादा बुखार या ज्यादा ब्लड प्रेसर की अवस्था में सहारे के लिये कुछ खुराकें एलोपैथी की खिलानी पड़ जाती है, वह भी यदि मरीज चाहे तो अन्यथा नही ।
६- वस्ति का उपयोग १५ दिन या एक माह में एक दिन कराता हू ताकि आन्ते साफ़ रहें ।
७- पथ्य परहेज आयुर्वेद के अनुसार कराता हुं ।

यही मेरा चिकित्सा कर्य करने का तरीका है ।

कानपुर मे फ़ैला हुआ है इस समय वाइरल बुखार : Viral infection Pyerexia in Kanpur


इस समय कानपुर में वाइरल इन्फेक्सन बुखार बहुत जोरों से फैला हुआ है । इस बुखार की पहचान बहुत आसान है । जी मिचलाना , उल्टी जैसा सेन्सेसन होना, बदन दर्द, जाड़ा लगना और फिर धीरे से या अचानाक तेज़ बुखार आ जाना , जो १०५ या अधिक तक चला जाता है । बच्चे इस बुखार से सबसे ज्यादा पीड़ित हो रहे हैं । बच्चे तेज़ बुखार को सहन नहीं कर पाते है । छोटे बच्चे तो बुखार झेल जाते हैं, लेकिन बड़े और किशोरे बच्चे तकलीफ महसूस कर रहे हैं ।
यही सब लक्षण लेकर मरीज आ रहे है । मै सबको समन्वित चिकित्सा दे रहा हु और सभी ठीक हुये हैं ।

मेरा चिकित्सा विधान:
१- Homoeopathic Antibiotic Mother Tincture Mixture दिन मे कई बार १० बूंद से लेकर २५ बूंद तक

२- आयुर्वेद कि दवा महाजवरान्कुश रस की दो गोली गुडूच्यादि काढा के साथ दिन में तीन तीन घन्टा के अन्तर से सेवन कराना

३- ज्यादा बुखार को कम करने में सहायता के लिये Paracetamol 100 mg, 250 mg , 500 mg
का आवास्यक्तानुसार उपयोग

अमूमन तीन चार दिन में इसी चिकित्सा वयवस्था से सभी मरीज ठीक होते है । मुझे ताज्जुब हुआ , जब कई लोगों ने बताया कि वे १५ -२० दिन से Allopathy की दवयें खा रहे है और उनकी तकलीफ जस की तस बनी हुयी