दिन: सितम्बर 2, 2009

आयुर्वेदोक्त शुद्ध काजल का शिशुओं में प्रयोग करने से आन्ख, नाक, कान, गला, दान्त आदि की तकलीफों से बचाव : Prophylactic against ENT & Ophthalmic problems of Children by using Ayurvedic preparation “Kajal”


आयुर्वेद शाश्त्रों में बताये गये तरीके से तैयार किये गये “काजल” के प्रयोग करने से शिशुओं और बच्चों में उपयोग करने से यह अनुभव में आया है कि काजल के प्रयोग करने से बच्चों में गले से सम्बन्धित तकलीफें यथा टान्सिलाइटिस Tosillitis, फैरिन्जाइटिस Pharyngitis, कान बहना Discharges from Ear, कान दर्द Earache, नाक की तकलीफें, सर्दि जुखाम का जल्दी जल्दी होना Sinusitis,cold & coryza या तो जल्दी नहीं होते, अगर हो भी जाय तो जल्दी ठीक हो जाते हैं । बच्चों में सान्स की तकलीफ और दमा Asthama, Upper respiratory tract disorders/ Lower respiratory tract disorders की तकलीफें भी बहुत हद तक कम हो जाती है ।

काजल एक तरह का कार्बन प्रोड्क्ट है । जैसा कि सभी जानते है कि कार्बन के अन्दर किसी भी तरह का इन्फेक्सन डेवलोप नहीं हो सकता है । यह आप सभी रोजाना देखते हैं कि जले हुये कोयले सालों साल चाहें जहां पड़े रहें, उनके अन्दर कभी भी फफून्दी Fungus नही लगती है और न बैक्टीरिया Bacteria डेवलप होते है ।

आयुर्वेद विधी से बने काजल में कई तरह की औशधियां भी मिलाई जाती हैं जिससे यह अधिक प्रभाव कारी हो जाता है । जब काजल आन्खॊं की पलकों में लगाते हैं तो इसके एक्टिव तत्व आन्खों में धीरे धीरे प्रवेश करते है । ये एक्टीव तत्व बहुत सूक्छ्म मात्रा में होते हैं ।

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