आयुर्वेद के “झोलाछाप” डाक्टर ; Quacks of “Ayurveda”


jholachchapayurveda-rastrapati

बहुत अजीब सा लगता है जब कोई यह कहे कि आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान में झोला छाप डाक्टर पैदा हो रहे हैं । ऐसा गलत भी नहीं है । मैने कई बार इस ब्लाग में ऐसी ही बहुत सी बातें कहीं है ।

महामहिम परम आदरणीय राष्ट्रपति श्री मती पाटिल जी का कहना बिल्कुल शत प्रतिशत सही है कि आयुर्वेद के नाम पर जिस तरह से झोला छाप वैद्य पैदा हो रहे हैं, उन पर अन्कुश लगाना जरूरी और बहुत जरूरी है । इस बारे में उनकी चिन्ता जायज है क्योंकि एक ऐसा चिकित्सा विग्यान जिसे समय और अनुभव की कसौटी पर प्रकृति के अति निकट होने और तदनुसार भारतीय दर्शन का एक अन्ग होने पर जिस तरह का गौरव महसूस किया जाना चहिये था, उसकी कमी की आन्च महसूस किया जाने लगा है । यह सब गिरावट इसलिये हो रही है क्योंकि आयुर्वेद को लोगों ने व्यवसायिकता से जोड़ दिया है ।

जब तक आयुर्वेद एक प्रकार का दर्शन शाश्त्र बना रहा , तब तक तो ठीक ठाक रहा, इसमें ज्योंही व्यवसायिकता का पुट मिला कि इसमें भ्रस्टता का समवेश होना शुरू हुआ । आज जिस प्रकार से आयुर्वेद को ब्यापार बनाया जा रहा है , यह एक शुभ लक्षण नही है ।

यद्यपि अभी समय है और बहुत कुछ किया जा सकता है, लेकिन यह सब सरकार के भरोसे किया जाय, यह उचित नहीं लगता । बेहतर है वैद्य समाज इस समस्या को समझे और इस क्षेत्र में आ गयी खराबियों को पूरी ईमान्दारी के साथ दूर करने का प्रयास करे ।

महामहिम जी ने जिन अन्य बातों की ओर वैद्य समाज का ध्यान खींचा है , उन बातों पर भी गौर करना अतिआवशयक है ।

उम्मीद है वैद्य समाज के सन्गठन व्याप्त बुराइयों को दूर करने का प्रयास करेंगे ।

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5 टिप्पणियाँ

  1. शायद आपने डा.रूपेश श्रीवास्तव को भी झोलाछाप समझ लिया इसलिये उनसे जुड़ी लिंक को अपने ब्लाग से हटा दिया जबकि वो तो अपने ब्लाग पर अभी भी आप और शास्त्री फिलिप जी को अपना मार्गदर्शक बताते हुए चिपकाए हुए हैं। मुझे भली प्रकार याद है कि एक समय डा.रूपेश श्रीवास्तव आपके ब्लाग पर लिंक करे हुए थे लेकिन ये व्यवहार आपका स्वभाव है और वो व्यवहार उनका स्वभाव है लिंक करने से दिल तो नहीं जुड़ जाता। ये काम तो डा.रूपेश को ही शोभता है कि सबके लिये जान दिये रहें।

  2. आत्मन मुनेन्द्र, मैं चिट्ठों पर लिंक के रूप में नहीं दिलों में रहता हूं ये तो आप बखूबी जानते हैं फिर गुरुदेव को संबोधित करके ऐसा लिखने की वजह क्या है? शायद हो सकता है कि आपको लगा हो कि प्रेम और आदर वणिकों के लेनदेन जैसा व्यवहार है। अरे मेरे भाई! इसी चिट्ठे पर गुरुदेव ने दुनिया के सामने लिखा है कि मैं उनका एकलव्य शिष्य हूं । दूसरी बात कि मैं सचमुच झोलाछाप ही हूं ये तो आप देख चुके हैं कि मैं बैग लादे कहां कहां भटकता रहता हूं :)
    आदरणीय गुरुदेव से मुनेन्द्र की हिमाकत के लिये मैं निजी तौर पर क्षमाप्रार्थी हूं। मेरा नाम यहां लिंक करा हुआ था ये मुझे सचमुच नहीं पता है और फिर निवेदन करता हूं कि इसकी आवश्यकता ही नहीं है हमारे संबंध औपचारिकताओं से बहुत आगे हैं।
    सादर नमन

    1. ……….डा० देश बन्धु बाज्पेयी का उत्तर ………..प्रिय शिष्य डा० रूपेश जी, इन सब छिछोरी बातों की ओर ध्यान न दें । दुनियां में ऐसी पोल्यूटेड सोच वाले लोग हैं , जो कभ्भी भी नहीं सुधर सकते हैं । ये खुद तो कुछ कर नहीं सकते, दूसरे जो कर रहे हैं, उसमें भी बिगाड़ पैदा करने में ही उनको विकृत आनन्द आता है । आप अपने मिशन में लगे रहें और इन सब बातों की पर्वाह न करें । आप मेरे एक मात्र शिष्य है । दुनिया को हिलाने के लिये एक ही काफी होता है ।

  3. DR. SAHAB G,
    PESAB KHUL KAR KYO NAHI hota hai,
    ?
    kya kidney me koi samasya ho sakti hai ya kuchh ho sakta hai.

    jab mai pesab karta hu to mere pesab puri tarah se nahi hota hai

    please
    mujhe bataye ki kya karan ho sakta hai

    ——- REPLY ——-

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    ETG AYURVEDASCAN PARIKSHAN KARAKAR AYURVEDIC / AYUSH YANI AYURVEDA AUR HOMOEOPATHY AUR UNANI AUR YOGA PRAKRATIK CHIKITSA KA MILAJULA ILAJ KARANE SE SABHI TARAH KE ROG JINAKO LAILAJ BATA DIYA GAYA HO YAH SABHi AVASHY THIK HOTE HAI.

    For Appointment and Fees and charges;
    ask Directly to Dr. A.B. Bajpai , Assistant to Dr. DBBajpai and ETG AyurvedaScan Specialist Mobile no: 08604629190 Morning – 9 to 10 AM and Evening 7 to 8 PM

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